Bhabhi ki Chudai देवर भाभी का रोमांस
06-02-2019, 01:25 PM,
RE: Bhabhi ki Chudai देवर भाभी का रोमांस
योगराज आंड असोसीयेट्स को बहुत बड़ा नुकसान हुआ, एक तरह से उनके कारोबार की नीव ही हिल गयी थी…, जिसका सीधा-सीधा फ़ायदा गुप्ता & असोसीयेट को होने वाला था.

सांत्वना स्वरूप मे भी श्वेता के यहाँ गया, उसे हौसला बनाए रखने के लिए कहा…,

ऐसे मौके पर कोई ज़्यादा बातें तो नही हो सकती थी, लेकिन कुछ देर बैठने के बाद उसने अपने असोसीयेट की हेल्प करने के लिए मुझे अवश्य कहा, जिसे मेने आगे के लिए टाल दिया…………………..!

आज मे काफ़ी दिनो के बाद अपने घर लौटा था, सबके लिए कुछ ना कुछ लेकर आया था, सो सबको गिफ्ट दिए निशा को छोड़ कर…

रूचि के लिए ड्रेस के साथ साथ एक बड़ा सा टेडी बेअर लाया था, जिसे देख कर वो बड़ी खुश हुई…

भाभी ने कहा – लल्ला जी ! ये क्या, सबके लिए कुछ ना कुछ लाए हो, बेचारी निशा सबके मूह की तरफ देख रही है, उसके लिए कुछ नही लाए…

मे – निशा का गिफ्ट तो जीता जागता उसके सामने है, भला इससे अच्छा गिफ्ट क्या हो सकता है…

निशा इधर-उधर देखने लगी, शायद वो मेरी बात समझ नही पाई… मे खड़े – 2 उसके मज़े ले रहा था,

भाभी मेरी बात समझ गयी थी लेकिन सिवाय मुस्कराने के, उन्होने भी कुछ नही कहा….

संकोच वश वो बेचारी कुछ बोल नही पाई, मे अपना लॅपटॉप का बॅग लिए अपने कमरे की तरफ बढ़ गया… मेरे पीछे-2 निशा भी आगयि…

मे बाथरूम में घुस गया.. और फ्रेश होकर कपड़े चेंज किए.. जब बाहर आया तो उससे रहा नही गया, और आख़िर पुच्छ ही लिया…

आप जो बोल रहे थे, तो कहाँ है मेरा गिफ्ट…?

मेने उसके मासूम चेहरे को अपने हाथों में लिया, और उसके रस भरे होठों को किस करके बोला… ये है तुम्हारा गिफ्ट, मे जीता जागता तुम्हारे सामने नही हूँ..

वो मेरे गले से लिपट गयी, और गद गद होकर बोली – मे सच में कितनी बड़ी बेवकूफ़ हूँ, जो आपकी बात समझ ही नही पाई,

सच में इससे बड़ा और क्या गिफ्ट हो सकता है मेरे लिए…

फिर मेने अपने बॅग से एक डिब्बा निकाल कर उसको पकड़ा दिया, और बोला – लो अपना गिफ्ट..

वो – क्या है इसमें..?

मे – खोलकर देख लो.. तुम्हारा गिफ्ट है, मे क्या बता सकता हूँ..

जब उसने बॉक्स खोलकर देखा…डिब्बे में एक हीरों का हार देख कर उसकी आखें खुशी से जुग्नुओ की भाँति चमकेने लगी… !

मे – कैसा लगा अपना गिफ्ट…?

वो आँखें चमकाती हुई बोली – मेरे लिए है…?

मेने चुटकी लेते हुए कहा – नही हमारे गाओं की चंपा नाइं के लिए है…!

वो खुशी के मारे मेरे सीने से आ लगी, और बोली – बहुत सुंदर है. थॅंक यू वेरी मच जानू…

मे – अब पहन कर नही दिखाओगी..?

तो उसने डिब्बा मेरे सामने कर दिया, और बोली – लीजिए, आप खुद ही पहना दीजिए..

मेने वो हार उसकी गोरी – 2 सुराइदार गर्दन में पहना कर उसे ड्रेसिंग टेबल के सामने लाया और उसके पीछे खड़े होकर उसके गले को चूमकर बोला….

बहुत सुन्दर लग रही हो… इस हार की किस्मेत खुल गयी, तुम्हारे गले में आकर..

उसने पलट कर मेरे होठ चूम लिए… उसकी आँखों से खुशी के मारे दो बूँद आँसू निकल पड़े … आइ लव यू जानू…

मे – आइ लव यू टू जान ! कहकर मेने उसे अपने सीने में कस लिया…

फिर वो अपना हार दिखाने भाभी के पास चली गयी, और में लॅपटॉप लेकर पलंग पर आ गया…!

भाभी की प्रेग्नेन्सी को 5 महीने हो चुके थे, सो उनको ज़्यादा काम ना करने की हिदायत दी गयी थी…

मेने उन्हें सुझाव दिया कि क्यों ना मदद के लिए रामा दीदी को बुला लिया जाए.. उन्हें मेरा प्रस्ताव पसंद आया, और उन्होने दीदी को फोन लगा दिया..

मेरी शादी के बाद एक बार वो आ चुकी थी, तो उन तीनो की फोन पर लंबी चौड़ी बातें चली, फिर जब भाभी ने उन्हें आने के लिए पुछा तो उन्होने अपनी मजबूरी बता दी…

रामा – भाभी मन तो मेरा भी बहुत है, लेकिन यहाँ की ज़िम्मेदारी इतनी हैं कि इन्हें छोड़ कर नही आ सकती, गुड्डू (उनका बेटा) भी स्कूल जाता है…

मे एन वक़्त पर ही आ पाउन्गी… सॉरी भाभी…मे जानती हूँ आप मेरी मजबूरी समझती होंगी…

तो भाभी ने कहा – मे सब समझती हूँ, तुम चिंता मत करो यहाँ सब ठीक हो जाएगा, वैसे ये सुझाव तुम्हारे प्यारे भैया छोटू का था…

फिर उन्होने मेरे साथ बात की और बोली – सॉरी भाई, मन तो मेरा भी तुझे मिलने का बहुत था, पर क्या करूँ ..तू खुद समझदार है…

मे – कोई नही दीदी, आप अपना घर सम्भालो, हम यहाँ मॅनेज कर लेंगे.. इस तरह कुछ और इधर-उधर की बातें की आज बहुत दिनो बाद अपनी बेहन से बात हुई थी, कुछ पुरानी यादें ताज़ा हुई, तो हम दोनो की आँखें भर आईं…

फिर दीदी ने भाभी की डेलिवरी के समय आने का वादा करके फोन कट कर दिया…
रूचि भी अब काफ़ी बड़ी हो गयी थी, और 5थ स्ट्ड. में पढ़ रही थी..

रात देर तक हम चारों जाने बातें करते रहे… फिर जब रूचि को नींद आने लगी तो वो दोनो माँ बेटी उठाकर सोने चली गयी.. और मे अपनी जान को लेकर पलंग पर कुस्ति खेलने आ गया…!

आज लगभग 15 दिन बाद में घर आया था, सो निशा मुझपर भूखी शेरनी की तरह टूट पड़ी.. और रात भर में वो पिच्छले सारे दिनो की कसर निकालने लगी…

पलंग पर आने से पहले ही वो अपने सारे कपड़े निकाल चुकी थी, फिर उपर आकर मेरे सारे कपड़े निकलवा दिए… उसको इतनी जल्दी थी, मानो उसकी ट्रेन छूटने वाली हो…

झपट कर मेरा लंड थाम लिया, और उसकी भरपूर सेवा की, फिर मेरे सीने पर धक्का देकर पलंग पर लिटा दिया,
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06-02-2019, 01:25 PM,
RE: Bhabhi ki Chudai देवर भाभी का रोमांस
पलंग पर घुटने जमाकर अपनी रामदुलारी को मेरे पप्पू पर सेट किया, और फिर आँखें बंद करके धीरे-धीरे उसने उसको अंदर कर लिया…!


मेने उसके चेहरे को पकड़ कर झुकाया, और उसके होठ चूस लिए, फिर उसकी चुचियों को चूस्ते और मसल्ते हुए बोला---

क्या बात है मेरी जान, आज तो बहुत उतावली हो रही हो…

वो शरारत से मुस्कराते हुए बोली – आपका क्या भरोसा कहाँ रहते हो, 15-15 दिन घर नही आते, तो ये मौका क्यों जाने दूँ हाथ से…

मेने उसकी गान्ड मसल्ते हुए नीचे से अपनी कमर को धक्का दिया, और जड़ तक लंड पेलकर बोला –

अब दिन कितने ही हो जाएँ, लेकिन ये राइफल रिजिस्टर्ड तो तुम्हारे नाम ही है ना…

उसने मेरी बात पर अग्री होते हुए अपनी कमर चलाना शुरू कर दिया…!

उस रात मेने दो बार निशा को अच्छी तरह से चोदा, जब वो पूरी तरह से संतुष्ट हो गयी, उसके बाद हम दोनो गहरी नींद में सो गये…!

दूसरे दिन उठने में थोड़ा लेट हो गया था, वैसे भी चुदाई के बाद नींद बहुत जबरदस्त आती है, सुबह जल्दी उठने का मन ही नही होता…

रूचि स्कूल जा चुकी थी, भैया भी कॉलेज को निकल चुके थे…

फ्रेश होकर एक्सर्साइज़ करने और फिर नहाने धोने में 10 बज गये , तब तक बाबूजी भी चाय नाश्ता करके जा चुके थे…

मेने भी नाश्ता किया, फिर निशा घर के कामों में लग गयी, और मे भाभी के रूम में जाकर उनके पास बैठ कर बातें करने लगा,

आज मुझे कोर्ट का कोई काम नही था, सो आज घर पर ही मौज करने का मन बना लिया था… वैसे भी 15 दिन से आया ही नही था…

बातों – बातों में भाभी ने राजेश भाई वाली घटना का जीकर छेड़ दिया और बोली

– लल्ला जी आख़िर आपने ऐसा क्या चक्कर चलाया था, जो भानु अपना केस वापस लेने को तैयार हो गया, और तो और मुआवज़ा भी देना पड़ा उसे…

मेने टालने के पर्पस से कहा – जाने दीजिए ना भाभी..! गढ़े मुर्दे उखाड़ने से क्या फ़ायदा… अपना काम हो गया.. भाड़ में जाए भानु से हमें क्या लेना देना अब उससे….!

भाभी समझ गयी, कि कोई तो ऐसी बात है, जो मे बताना नही चाहता, और जान बूझकर टालने की कोशिश कर रहा हूँ…

सो वो मेरी आँखों में देखते हुए बोली – कोई बात नही लल्ला जी ! अगर ऐसी कोई बात है, जो तुम मुझे भी नही बताना चाहते तो मत बताओ…!

वैसे मे तो सोच बैठी थी, कि कोई सच बोले या ना बोले… मेरा देवर मुझसे कभी कोई बात नही छुपाएगा…!

भाभी की बात सुनकर मुझे झटका सा लगा… मेने महसूस किया कि भाभी इस बात से दुखी हो गयी कि मे कोई बात उन्हें शेयर नही करना चाहता…

सो उनका हाथ अपने हाथों में लेकर बोला – भाभी प्लीज़ ! आप ऐसा क्यों सोचती हैं… मे तो बस ऐसे ही बोल रहा था, कि जिस बात से आपका कोई लेना देना नही है, उसे बताने का क्या फ़ायदा…

पर आपको ऐसा लगता है, कि मे जान बूझकर ये बात च्छुपाना चाहता हूँ.. तो सुनिए वो क्या बात थी, जिसकी वजह से भानु को मजबूरन मेरी हर बात माननी पड़ी…

याद कीजिए राजेश भाई की शादी का समय… निशा की सहेली मालती मुझे अपने घर सोने के ले गयी थी…

भाभी – हूंम्म…मुझे याद है…! फिर.

मे – उस रात मालती मेरे पीछे पड़ गयी, और मुझसे चुदके ही दम लिया उसने…लेकिन मेने उसे इस शर्त पर छोड़ा, कि आइन्दा वो ऐसी कोई ख्वाइश मेरे से नही रखेगी…

फिर जब निशा की स्टोरी सुनी, और मुझे पता लगा कि मालती और भानु की शादी हो गयी है, और मालती ने निशा को पर्पसफूली बुला के फँसाया था…

तभी मेने सोच लिया था, कि अब मालती ही हमें इसमें से बाहर निकालेगी… सो अपनी सोर्स से पता किया कि भानु और मालती हैं कहाँ…

ये तो हमें पता ही था, कि वो अभी भी हॉस्पिटल में पड़ा है, सो पहुँच गया वहाँ,

और भाग्यवश, उस हॉस्पिटल की ओनर डॉक्टर वीना, पहली ही मुलाकात में मेरे लौडे के जाल में फँस गयी…!

भाभी हँसते हुए बोली – तुमने अपना हथियार उसे दिखाया कैसे था…?

मेने उन्हें पूरी बात डीटेल में बता दी… तो वो बोली – सच में तुम्हारा व्यक्तित्व और ख़ासकर हथियार है ही ऐसा,

कोई कितनी ही सती सावित्री क्यों ना हो, अगर एक बार देखले तो उसे लेने को मचल ही उठती है…!

मे – इसका सारा श्रेय आपको जाता है भाभी…ये सब आपके लाड प्यार और मेहनत का ही तो नतीजा है… जो आपने मेरे उपर की थी…!

वो हँसते हुए बोली – म.मेरा..इसमें कुछ नही है, जो भी है तुम्हारा है…तुम हो ही ऐसे, मेने तो बस ढंग से उसकी देखभाल करदी थी…खैर फिर क्या हुआ…

मे – तो बस मेरे लंड के दर्शन पाते ही डॉक्टर वीना उसे लेने के लिए मचलने लगी…लेकिन उस वक़्त उसने सिर्फ़ अपने मूह में ही लिया था…

बातों- 2 में मेने भानु का जीकर छेड़ दिया, तो उसने सारी बातें सच-2 बता दी, और मेने उससे उसकी ओरिजिनल रिपोर्ट हासिल कर ली… जिस बिना पर हमें बैल मिल गयी..

उसी दिन जब मे डॉक्टर वीना से रिपोर्ट लेकर उसके रूम से निकला ही था, कि मालती मुझसे टकरा गयी…
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06-02-2019, 01:25 PM,
RE: Bhabhi ki Chudai देवर भाभी का रोमांस
मेने उसके सामने ऐसा शो किया जैसे मुझे अपने घर से, निशा से और राजेश भाई से कोई लेने देना नही है, मेने तो अपना अलग ही देल्ही में बिज़्नेस शुरू कर दिया है…!

वो मेरी बातों में आगयि, लंड की तो वो भूखी थी ही, जब मेने थोड़ी सी हिंट दी कि वो अगर चाहे तो उस मज़े को फिर से ले सकती है, आज ही मौका है उसके पास, फिर मे देल्ही वापस चला जाउन्गा…

फिर क्या था, लंड की प्यासी कुतिया, मेरे एक बार कहने पर ही होटेल के कमरे में आ गयी, जहाँ मेने कमरों को इस तरह से फिट कर दिया, कि उसमें वो तो साफ-2 दिखे, लेकिन मेरी शक्ल एक बार भी ना आई…

फिर मेने उसको होटेल के कमरे में ढंग से रगड़ा… उसके बाद हॉस्पिटल में ही मालती की आब्सेन्स में भानु से मिलने पहुँच गया…!

शुरू-2 में उसको भी मेने ऐसा जताया कि मुझे अपने घर से कोई लेना देना नही है…!

और उसकी बातों से पता लगाया कि वो अपने घर की इज़्ज़त के प्रति कितना सजग है… जो कि जाहिर सी बात थी, कि सूर्या प्रताप जैसा आदमी, अपनी इज़्ज़त का कितना भूखा होगा…

बस फिर क्या था…, धीरे से मेने मालती की चुदाई की कुछ पिक्स उसे खोल कर दिखा दी.. और धमका दिया कि अगर उसने मेरी बातें नही मानी, तो पूरा वीडियो नेट पर डाल दिया जाएगा,

जिसे वो अकेला ही नही, पूरी दुनिया चटकारे ले ले कर देखेगी, और हर मर्द उसकी मस्त जवान बीवी को अपने ख्वाबों में चोदा करेगा…!

उसकी गान्ड फट गयी, और अपनी इज़्ज़त बचाने के लिए वो सारी बातें मान गया, जो मे मनवाना चाहता था…

भाभी – क्या अभी भी वो वीडियो है तुम्हारे पास…?

मेने हँसते हुए कहा – क्यों ! आप क्या करेंगी उसका..?

वो मुस्कराते हुए बोली – मे भी तो देखूं, मेरा चोदु देवर दूसरी औरतों को कैसे चोदता है……?

मेने भाभी की गान्ड सहलाते हुए कहा – क्यों अपनी चुदाई से पता नही चला आपको, कि मे कैसा चोदता हूँ..?

वो मुझे डपट कर बोली – तुम दिखाते हो या नही…!

मे – हाहहाहा……..दिखा दूँगा भाभी ! धीरज रखो, पहले पूरी बात तो सुन लो.

वो हँसते हुए बोली – ठीक है ! आगे सूनाओ, लेकिन दिखा ज़रूर देना हां !

मे – बहुत एक्शिटेड हो भाभी दूसरों की चुदाई देखने के लिए…

वो हँसते हुए बोली – दूसरों की नही, अपने माल को दूसरों के साथ देखने की..

मे – अच्छा ! तो अब मे आपके लिए माल हो गया…?

भाभी ने लपक कर मेरा गाल कच-कचा कर काट लिया और बोली – मस्त वाला माल हो लल्ला…तभी तो हर कोई साली तुमसे चुदने के लिए तैयार हो जाती है…!
चलो अब आगे बताओ.. फिर क्या हुआ…?

उनका आगे सुनने का इंटेरेस्ट देख कर मे आगे की कहानी बताने लगा…..
आपको याद होगा, जब सबने कृष्णा भैया को मदद करने के लिए कहा था, तो आपने बताया था, कि शुरू- 2 में लगा कि वो मदद करेंगे, लेकिन फिर उनको फोन आगया, उसके बाद उन्होने मदद करने से मना कर दिया था…

भाभी – हां ! मुझे अभी भी अच्छी तरह से याद है वो बात, … किसने दबाब डाला था उनपर…?

मालती ने चुदते समय मुझे एक बात बताई थी, कि निशा के साथ वो सब भानु ने किसी के कहने पर किया था, जिसके एवज में उसे बहुत बड़ा फ़ायदा होने वाला था…

जब भानु मेरी सारी शर्तें मानने को तैयार हो गया…तब मेने उससे पुछा कि उसने वो सब किसके कहने पर किया और उसके लिए उसको क्या फ़ायदा हुआ…?

तो उसने मुझे जो बात बताई…!!!!!

मे बोलते-बोलते रुक गया… भाभी मेरी तरफ देखने लगी…

मेने भाभी का हाथ पकड़ कर कहा – प्रॉमिस करो भाभी, अभी जो में आपको बताने जा रहा हूँ, उसे आप अपने तक ही रखना… जब तक मे ना कहूँ…

उन्होने किसी को भी ना बताने का प्रॉमिस किया, तो मेने आगे बताना शुरू किया…

भानु और उसका बाप बहुत बड़े लालची किस्म के इंसान हैं, वो एक ड्रग माफ़िया के लिए काम करता था, उसी वजह से उसका शहर आना-जाना लगा रहता था…

जिस गिरोह के लिए वो काम कर रहा था, वो प्रत्यक्ष रूप से तो उस्मान नाम के माफ़िया का गिरोह माना जाता है, लेकिन उसका मुख्य संचालन एक महिला के हाथ में है…,

जो हर समय एक काले स्याह बुरखे में ही लोगों के सामने आती है, और उस समय सिर्फ़ उसकी आँखें ही दिखाई देती हैं…

जब वो गॅंग के काम से उससे मिलता था, तभी एक दिन उस औरत ने उसे ये काम सौंपा…और उसे 10 लाख रुपये इस काम के लिए ऑफर किए…!

वाकायदा ये रास्ता भी उसी औरत ने सुझाया था, कि निशा तक पहुँचने का रास्ता क्या है…!

मालती से शादी करने से भानु के दो फ़ायदे थे, एक तो उस औरत से उसे 10 लाख रुपये मिलने थे, दूसरे मालती के दादा की सारी मिल्कियत उसको मिलने वाली थी… सो उसके बाप ने डरा धमका कर उसके दादा को शादी के लिए राज़ी कर लिया…

अब निशा की इज़्ज़त लुटवाने का किसी अंजान औरत को क्या लाभ, ये सवाल किसी कीड़े की तरह मेरे मन में कचोट रहा था, कि तभी आपने भैया वाली बात बताई…

मे उस कड़ी को भानु वाली बात से जोड़ने की कोशिश करता रहा लेकिन किसी नतीजे पर नही पहुँच पाया…!

लेकिन पोलीस पर मानहानि का केस ठोकने के बाद जब भैया यहाँ आए थे, और जो बातें उनसे हुई, वो ये थी.. कि उन्हें मदद ना करने का दबाब कामिनी भाभी ने डाला था,

ये कह कर कि उनके डेडी नही चाहते कि वो अपनी भाभी भैया की कोई मदद करें…!
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06-02-2019, 01:25 PM,
RE: Bhabhi ki Chudai देवर भाभी का रोमांस
जब मेने भैया को बोला – कि अब आप मुझसे मदद ले रहे हो तो उसका क्या जबाब दोगे अपनी पत्नी और ससुर को,

तो उन्होने कहा, कि मे उससे तंग आ चुका हूँ, वो पता नही क्या-2 करती है, मेरी बात मानती नही… इसलिए अब मे उससे अलग होना चाहता हूँ…

मे किसी भी तरह से उस बुरखे वाली औरत से मिलना चाहता था, और अपने शक़ को दूर करना चाहता था, कि तभी मुझे वो रास्ता मिला जो उस औरत तक आसानी से ले जा
सकता था…

फिर मेने रेखा के गॅंग रेप, उसकी मौत, और उसके बाद का रिवेंज जो अब तक ले चुके थे, इस दौरान हुई मीटिंग, जिसमें उस बुरखे वाली औरत का सच सामने आया था.. वो सब मेने बताया…

जैसे -2 मेरी बात आगे बढ़ती जा रही थी, भाभी की आँखें चौड़ी होती जा रही थी, उन्हें मेरे खुलासे से झटके पे झटके लगते जा रहे थे…वो अपने पलक झपकाना ही भूल गयी, और मूह बाए मेरी बातों में खो गयी..

मेने आगे कहा – अब मे उस औरत को पहचान चुका हूँ भाभी…

भाभी मानो ये सुनने के लिए तैयार ही बैठी थी.. झट से बोली – कॉन है वो डायन…! बताओ लल्ला मुझे, मे उसका खून पी जाउन्गि…

मे – क्या करेंगी उसका गंदा खून पीकर, उसको तो उसके अंजाम तक मे पहुन्चाउन्गा…

वो अकेली मेरी, निशा या आपकी गुनहगार नही है… कृष्णा भैया की उससे कहीं ज़्यादा है…

भाभी चोन्क्ते हुए बोली – क्या..? बड़े देवर जी की भी… लेकिन है कॉन वो चुड़ैल…?

मे – कामिनी…..!

भाभी ये सुन कर एक दम उच्छल ही पड़ी…क्या..?????????????????

मे – हां भाभी ! उसने और उसके बाप ने हमारे साथ बहुत बड़ा धोखा किया है, वो कमीनी, शादी से पहले से ही ड्रग अडिक्ट थी, हवस की अंधी कुतिया है वो…

भाभी बहुत देर तक मूह बाए सन्नाटे की स्थिति में मुझे देखती रही, फिर आगे बोली – लेकिन उसने निशा के साथ ऐसा क्यों किया…?

मे – मेरी वजह से…! उसको पता था, कि मे निशा से बेइंतहाँ प्रेम करता हूँ… गाड़ी सीखने के बहाने उसने मुझे सिड्यूस करके इतना उत्तेजित कर दिया था, कि मे उसे चोदने को तैयार हो गया…

आपके मायके जाने के बाद उसने दो दिन मेरे साथ जम कर सेक्स किया… काम के बहाने वो भैया के साथ इसलिए ही नही गयी थी…

लेकिन जब रामा दीदी ने बताया कि वो यहाँ कोई काम में हेल्प नही करती, उल्टा और मेरे लिए काम बढ़ा देती है, महारानी की तरह हुकुम चलाती है, तो मेने उसे एक रात, इतनी बुरी तरह से रौंदा कि उसकी गान्ड फाड़के रख दी…

जब वो दर्द का उलाहना देने लगी तो लगे हाथ मेने उससे वादा कर दिया, कि अब मे उसे कभी हाथ नही लगाउन्गा…
दो दिन बाद ही उसने भैया को फोन करके बुला लिया और उनके साथ चली गयी…

बस इसी बात की खुन्नस निकालने के लिए उसने मुझे सबक सिखाने के लिए निशा को टारगेट किया…

उसके कहे अनुसार मेरे से ज़्यादा मज़ा उसे किसी से नही मिला था… सो वो भिन्ना गयी.. और ये सब किया…

मेरी बातें भाभी को झटके पे झटके दे रही थी… कुछ देर तक वो सन्नाटे जैसी स्थिति मे रही … फिर कुछ देर बाद नॉर्मल होते ही बोली…

ये बातें बड़े देवर जी को पता हैं…?

मे – नही.. इसलिए मेने आपसे वादा लिया है, किसी को ना बताने का… अब मे ऐसा कुछ करूँगा, कि वो उनकी जिंदगी से हमेशा हमेशा के लिए निकल जाए…

और किसी को इस बात की भनक भी ना लगे…जिससे भैया अपनी जिंदगी नये सिरे से शुरू कर सकें…!

भाभी सर्प्राइज़ होते हुए बोली – लल्ला ! इतनी छोटी उमर में तुम इतना कैसे सोच और कर लेते हो…? मुझे तो अभी भी विश्वास नही होता कि तुमने ये सब कर दिया है…?

मेरी नज़र में तो अभी भी वो मेरा छोटा सा मासूम सा देवर मेरे पास बैठा है, जो हर समय अपनी भाभी की बात ही सुनता और मानता था…

मे – तो क्या अब नही मानता आपकी बात..?


भाभी ने मुझे अपने कलेजे से लिपटा लिया, और मे भी किसी छोटे बच्चे की तरह उनके अंकपाश में अपना मूह देकर लिपट गया…
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06-02-2019, 01:26 PM,
RE: Bhabhi ki Chudai देवर भाभी का रोमांस
मेरे हाथ अनायास ही उनकी चुचियों पर चले गये, जो अब प्रेगॅनेन्सी की वजह से और ज़्यादा गदरा गयी थी… सो मेने धीरे से उनको सहला दिया….

सीईईईईईईईईई………..लल्ला…अभी नही… अब देखो खाने का समय हो गया है, रूचि स्कूल से आने वाली होगी… बाद में मुझे तुम वो वीडियो दिखाना, दोनो मिलकर देखेंगे..

मे उनको किस करके कमरे से बाहर चला आया, और किचेन की तरफ बढ़ गया, जहाँ निशा खाना बनाने में जुटी हुई थी….

मेने पीछे से उसे अपनी बाहों में जकड लिया और अपना लंड उसकी बाहर को निकली हुई गान्ड से सटा दिया, उसके पसीने की गंध मेरे नथुनो में घुलने लगी.

उसने अपनी गर्दन मोड़ कर मुझे देखा और बोली – राजा जी, मुझे खाना बनाने दो, रूचि और बाबूजी नाम के दो बॉम्ब कभी भी फट सकते हैं, जो हम दोनो की हवा खराब करने के लिए बहुत हैं…रात भर में जी नही भरा क्या… ?

मे – जानेमन तुमसे इतनी जल्दी जी कैसे भर सकता है, दिनो दिन हॉट होती जा रही हो…फिर उसकी गान्ड मसल्ते हुए कहा – ये देखो कितनी मस्त हो गयी है ये…

वो आँखें नचाते हुए बोली – ये सब आपकी ही देन है.. पीछे से धपा-धप इतने तगड़े धक्के पड़ते हैं, तो बेचारी बाहर को तो निकलेगी ही ना… इस बात पर हम दोनो ही हँसने लगे…

तभी रूचि के साथ भाभी भी किचन में आगयि….बाबूजी के आते ही हम सब लंच करने लगे……….

लंच के कुछ देर बाद मन्झली और छोटी चाची आगयि, भाभी की तबीयत जानने, कुछ देर वो आपस में गप्प सड़ाके लगाती रही…

मेने मन्झलि चाची से उनके हाल चाल पुछे… उन्होने कहा – तुम्हारी कृपा से सब ठीक ही चल रहा है लल्ला …

छोटी चाची का बेटा अंश भी अब बड़ा हो रहा था, वो भी रूचि के स्कूल में ही पढ़ने जाता था… मेने उसका टेस्ट लिया, तो पता लगा कि पढ़ने में दिमाग़ है उसका..

मेने चाची की तरफ इशारा किया.. अंगूठा उपर करके की अच्छा है.. तो उन्होने भी इशारे से कहा – कि है तो तुम्हारा ही खून ना…

फिर उस दिन भाभी को वीडियो दिखाने का मौका नही लगा, भैया आ गये.. और इसी में वो दिन निकल गया…

दूसरे दिन रूचि और भैया के जाने के बाद मे भाभी के पास जाकर बैठ गया…और उन्हें वो वीडियो ओपन करके चला दिया…जिसमें मालती को होटेल ले जाकर बीयर पीला कर चोदा था…

जैसे – जैसे वीडियो फॉर्वर्ड होता जा रहा था, भाभी की आँखें भी नसीली होती जा रही थी, हम दोनो ही पलंग के सिरहाने से टेक लगा कर अढ़लेटी अवस्था में एक दूसरे के बगल में पड़े वो देख रहे थे…

मेरा लंड खड़ा होकर भाभी की गान्ड से सटा पड़ा था… मेरा एक हाथ उनके रस से लबालब आमों पर पहुँच गया, और हरकत करते हुए हौले-2 सहलाने लगा…

मोबाइल मेने भाभी के हाथ में दे रखा था.. और मे खुलकर उनके अंगों से खेलने लगा…

मालती की चुदाई देखते देखते भाभी की मनोदशा बदल चुकी थी, और उनका खुद का हाथ अपनी चूत पर जा पहुँचा…

मेने उनका हाथ पकड़ते हुए कहा – मेरे होते हुए आपको ये सब करने की ज़रूरत नही है…ये कहकर मेने उनकी चूत को अपनी मुट्ठी में कस लिया…

ससिईईईईईईईई………..आआअहह………लल्लाआाआ….ज़ोर्से नही…..

पेट का साइज़ बढ़ने के कारण भाभी ने ब्रा पहनना बंद कर दिया था, मेने उनके ब्लाउस के बटन खोल कर रसीले कलमी आमों को बाहर निकल कर मसलने लगा…

गान्ड पर लंड का दबाब लगातार बढ़ता देख भाभी बोली – लल्ला थोड़ा अपने घोड़े को काबू में करो, वरना कपड़ों समेत मेरी गान्ड में घुस जाएगा…

मे – तो कपड़े निकल दो ना…

वो – मुझे वीडियो देखने दो, तुम्हें जो करना है वो करो….

भाभी की पर्मिशन मिलते ही मेने 2 मिनिट में भाभी को नंगा कर दिया, और अपने लौडे को उनकी गान्ड की दरार में रगड़ते हुए चुचियों को दबाने लगा….

आहह….भाभी ! आपकी गान्ड और चुचियाँ कितनी गदरा गयी हैं…मन करता है.. खा जाउ…

मेरी बात का जबाब देते हुए भाभी सिसक कर बोली….ससिईइ….ये सब प्रेगॅनेन्सी का असर है… अब जल्दी से कुछ करो मेरे रजाअ…. आअहह…

मेरा एक हाथ उनके फूले हुए पेट को सहलाता हुआ, जब उनकी चूत पर गया… तो वो एक दम भीग चुकी थी….

भाभी बहुत गरम हो चुकी थी… उनकी चूत से रस बूँद-2 करके टपकने लगा था…

एक तो वीडियो में चुदाई देखने से उपर से मेरी हरकतों ने उन्हें बेहद गरम कर दिया था…

अपने आप ही भाभी ने अपनी एक टाँग हवा में उठा दी, जिससे उनकी चूत का रास्ता मेरे लंड के लिए साफ हो गया…

वो भी उनकी गान्ड की दरार से रगड़ते हुए… गीली चूत के बिल में सरक गया…
जैसे ही मेरा सुपाडा उनकी चूत में फिट हुआ… भाभी की सिसकी और तेज हो गयी…

मोबाइल उनके हाथ से नीचे गिर गया… और अपना एक हाथ पीछे करके मेरे सर को अपनी ओर खींचते हुए बोली……

आअहह……..पूरा डलूऊओ…….लल्लाआाआअ….हाए..ससिईईईईईईईई…और अंदारर्र…..चोदूओ…अब…ज़ॉर्सीई…..

मेने पीछे से तेज तेज धक्के लगाना शुरू कर दिया… चूत लगातार तर और तर होती जा रही थी….

कुछ ही झटकों में भाभी ने अपना कामरस छोड़ दिया…और वो शांत पड़ गयी…

मेने अपना लंड बाहर खींच लिया और हाथ से भाभी की गीली चूत से रस लेकर उनकी गान्ड के छेद पर चुपड कर अपनी एक उंगली उनके सूरमाई सुराख में घुसेड दी…

मेरी तरफ मूह घूमकर भाभी बोली – क्या इरादे हैं…मेरे चोदु राजा…?

मे – भाभी कुछ माँगूँ तो मिलेगा..?

वो – अरे ! ये भी कोई पुच्छने की बात है, जो कुछ मेरे पास है, उस पर तुम्हारा पूरा हक़ है… बोलो क्या चाहिए…?

उनकी गान्ड दबाते हुए मेने कहा – आपकी गान्ड बहुत अच्छी लग रही है मुझे, मारने का मन कर रहा है…इतनी गुद गुदि हो गयी है ये कि बस कुछ पुछो मत…

वो – क्यों आगे से काम नही चलेगा..? थोड़ा डर लगता है, कि कहीं फट ना जाए तुम्हरे सोट जैसे लंड से…

मे – अरे कुछ नही होता भाभी… चाची को तो गान्ड मरवाने में ही ज़्यादा मज़ा आता है…

वो – क्या ! तुमने चाची की गान्ड मारली…?

मे – कब की, जब वो आपकी तरह प्रेग्नेंट थी तभी से अब तक कई बार, और तो और उनकी भाभी की भी…

वो – तुम तो बड़े छुपे रुस्तम निकले… ठीक है, कुछ तेल या क्रीम लगा लेना..

मे – अरे आप बेफिक्र रहिए…आपको पता भी नही चलेगा….अब देखना कितना मज़ा आता है आपको…

मेने एक कोल्ड क्रीम लेकिर अच्छे से भाभी की गान्ड के संकरे सुराख में उंगली डाल-डाल कर भर दी, और थोड़ी सी अपने लंड के सुपाडे पर लगा कर भाभी की बगल में लेट गया…
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06-02-2019, 01:26 PM,
RE: Bhabhi ki Chudai देवर भाभी का रोमांस
उनकी एक टाँग को थोड़ा आगे को मोड़ कर घुटने को पेट से सटा दिया…अब गान्ड का सुराख एक दम क्लियर दिखने लगा था…

लंड को होल के मूह पर रख कर हल्के से दबाया… भाभी ने अपनी गान्ड को भींच लिया…जिससे वो जितना अंदर गया था, बाहर हो गया…

लल्ला.. दुख़्ता है.. रहने दो…नही जाएगा… वो बोली..

मेने रूठते हुए कहा – ठीक है, जब आपकी मर्ज़ी ही नही है तो रहने दो, मुझे नही करना कुछ… रखो अपनी धरामशाला अपने पास….

वो – अरे ! तुम तो नाराज़ हो गये… ! मुझे दर्द हुआ इसलिए कहा मेने तो…वो अंदर नही जा रहा…

मे – आप अपनी गान्ड भींच क्यों रही हो.. उसको ऐसे खोल दो जैसे हगने बैठते हैं…

वो – ठीक है, फिरसे करो… और उन्होने अपनी गान्ड को थोड़ा ज़ोर लगा कर खोला..

मेने सॅट से लंड को अंदर कर दिया.. अब वो आसानी से चौथाई तक घुस गया…

भाभी के मूह से कराह निकल गयी….धीरे से लल्ला….जी…दर्द होता है…

मेने उनकी चुचियों को सहला कर एक बार और पुश किया…वो फिर से करही.. लेकिन अब आधा लंड गान्ड के अंदर जा चुका था…

उनकी चूत को अपने हाथ से सहलाते हुए मेने एक दो बार उसे अंदर बाहर किया…

चूत सहलाने से उनको थोड़ा राहत हुई… जिसका फ़ायदा उठा कर मेने एक अच्छा सा धक्का मार कर पूरा लंड अंदर डाल दिया….

आआईयईईईईईई…..मर गाइिईईईईईईई…माआआअ….लल्ला…बहुत जालिम हो…आहह…

मे थोड़ी देर रुक गया, और उनकी गर्दन को चूमते हुए चूत को बराबर सहला कर बोला – बस अब पूरा चला गया… अब कोई दर्द नही होगा…

उफफफ्फ़…कभी अपनी गान्ड में ऐसा सोटा लेकर देखना..तब पता चलेगा तुम्हें… चलो अब धीरे-2 चोदो….

उनकी बात सुन कर मुझे हँसी आ गयी…और फिर मेने धक्का लगा शुरू किया…कुछ देर उनको दर्द हुआ लेकिन फिर उनको भी मज़ा आने लगा.. और अपनी गान्ड को पीछे धकेल-धकेल कर चुदाई का मज़ा लेने लगी…

इस पोज़िशन में लंड पूरा जड़ तक उनकी गान्ड में समा जाता, और किसी साँप की तरह बाहर निकलता…

15-20 मिनिट की गान्ड मराई के बाद मेरा वीर्य निकल गया और मेने उसे भाभी की गान्ड में उडेल दिया,

गान्ड खुल बंद हो रही थी जिससे काफ़ी देर तक सफेद मलाई उनकी गान्ड से टपकती रही.….!

अभी मेने भाभी की गान्ड से अपना लंड निकाला ही था, कि तभी भड़ाक से कमरे का गाते खुला…सामने निशा खड़ी थी…

अंदर का नज़ारा देख कर उसके चेहरे पर मुस्कराहट आ गयी… अंदर आते ही वो अपना हाथ नचाते हुए बोली – दीदी ये क्या हो रहा है…?

भाभी ने बनावटी गुस्सा दिखाते हुए कहा – आँख की अंधी नैन सुख.., दिखाई नही दे रहा…?

निशा – दिखाई तो दे रहा है… लेकिन इतनी चीख पुकार, पता है आपकी चीखें रसोई तक पहुँच रही थी…, इतना तो मे अपनी सुहागरात को भी नही चीखी थी..

भाभी मेरे आधे खड़े लंड को हाथ में पकड़ हिलाते हुए बोली – एक बार ये खूँटा अपनी गान्ड में ठुकवा कर देख, आटे-दाल का भाव पता चल जाएगा …, बात करती है सुहागरात को नही चीखी थी…!

निशा हैरत के साथ बोली – क्या..? आपने गान्ड भी मरवा ली, वाउ दीदी.. यू आर ग्रेट.., फिर हँसते हुए बोली - देखाओ तो फटने के बाद कैसी लग रही है ?

और वो भाभी की गान्ड के उपर झुक कर देखने लगी… मे थोड़ा पीछे हट गया…

निशा – ओह्ह्ह्ह…दीदी ये तो सच में किसी गोल छल्ले की तरह खुल गयी है… वैसे इसे मरवाने में भी मज़ा आता है क्या..?

भाभी – मज़ा तो बहुत आता है, पर दर्द भी उतना ही होता है… एक काम कर थोड़ा बोरो प्लस लगा दे… अभी भी साली दर्द कर रही है…

वो भाभी की गान्ड से मेरा वीर्य साफ करके उसमें बोरो प्लस लगाने लगी,

मेने निशा की गान्ड में उंगली करके कहा – एक काम करो, तुम भी ट्राइ करके देख ही लो, भाभी से क्यों पूछती हो… !

वो बिदक कर दूर हटते हुए बोली – ना बाबा ना ! मुझे ऐसा कोई शौक नही है अभी, अपनी प्यारी भाभी की ही मारो…

मे – देखा भाभी ! ये है बीवी.. जिसके लिए अपने पति की इच्छा का कोई महत्व नही है…! बस इतना ही प्यार करती हो…?

निशा मूह बनाते हुए बोली – ऐसा क्यों कह रहे हैं… अगर आप की नज़र में प्यार का मतलब गान्ड मरवाना ही है तो जो जी में आए कर्लो…, मना नही करूँगी…

मेने उसके गाल पर किस करके कहा – मे तो मज़ाक कर रहा था यार ! तुम तो सीरीयस हो गयी..!

वो – वैसे ये इच्छा भी आपकी कभी ना कभी पूरी करूँगी… अभी तो आगे की ही अच्छी तरह से खुली नही है….

मेने मज़ा लेते हुए उसकी साड़ी पकड़ कर उपर करदी, और कहा – देखें कितनी खुली है….
वो झटके से पीछे को हटी, तो भाभी ने उसकी गान्ड में उंगली पेल दी…

उईईईई….माआअ…… दीदी आप भी…? आज तो ये देवेर भाभी मिलकर मेरा सत्यानाश करके ही छोड़ेंगे…

ये कह कर निशा वहाँ से भागना चाहती थी, कि मेने पीछे से उसकी कमर को लपेट लिया और उठाकर भाभी के सामने लाकर बोला ---

भाभी जल्दी से इसके कपड़े तो निकालो… अपने आपको झाँसी की रानी समझती है भेन की लॉडी…

निशा को अब पता चल चुका था, कि मेरा लॉडा अब उसकी रामप्यारी को बिना घिसे नही मानेगा…

सो वो खिल-खिलाकर हँसते हुए, झूठा विरोध जताते हुए मेरी बाहों से छूटने का नाटक करती रही…

मे उसे गोद में ही उठाए खड़ा था, थोड़ी देर में ही भाभी ने उसकी साड़ी और पेटिकोट खोल दिए, जो अब उसके पैरों से निकल कर फर्श पर पड़े धूल चाट रहे थे..
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06-02-2019, 01:26 PM,
RE: Bhabhi ki Chudai देवर भाभी का रोमांस
फिर उन्होने उसका ब्लाउस भी निकाल कर उसके पट अलग-2 कर दिए…

आगे से भाभी और पीछे से मेने उसको चूमना चाटना शुरू किया, 5 मिनिट में ही उसका शरीर भट्टी की तरह गरम हो गया… और वो आँखें बंद करके सीसीयाने लगी…

अब वो बस खड़ी-2 मज़े ले रही थी…मेने उसकी ब्रा खोल कर अलग कर दी, भाभी ने उसके निपल मरोड़ कर उसके होठ चूसने लगी..

उसकी गर्दन को चूमकर मेने उसकी पेंटी भी निकाल दी.. निशा का एक पैर पलग पर रख कर मेने पीछे से खड़े –खड़े उसकी रस से सराबोर हो चुकी मुनिया में अपना खूँटा पेल दिया…

आआईयईईईईईईईईई……….ध्ीएरीई…सीईईई…मेरे रजाअ…जीिीइ….कितना ज़ोर से डालते हो….

भाभी उसकी चुचियों को चाटने लगी…

इस तरह से दो तरफ़ा के मज़े से निशा 5 मिनिट में ही अपना रस छोड़ने लगी…

लेकिन मेने उसे छोड़ा नही और उसके दोनो हाथ पलंग पर रखवा कर उसे घोड़ी बना दिया…

भाभी ने बगल में बैठ कर मेरा लॉडा अपने हाथ में लेकर अपनी प्यारी बेहन की चूत पर रख कर मेरी गान्ड पर थप्पड़ लगाते हुए कहा …

चल मेरे घोड़े… चढ़ जा इस घोड़ी पर…

फिर क्या था…मेरे सुलेमानी धक्के फिरसे निशा की चूत पर पड़ने लगे…!



वो भाभी की चुचियों को चूस्ते हुए मस्ती से चुदने का मज़ा लेते हुए अपनी गान्ड को मेरे लंड पर पटकने लगी…!

निशा की जम कर चुदाई करके हम तीनों कुछ देर वहीं बिस्तर पर पड़े रहे…

उसके बाद तीनों बारी-बारी से फ्रेश हुए, और फिर वो दोनो लंच की तैयारी में लग गयी….
शाम को खाने की टेबल पर, हम सभी परिवारी बैठे थे.., तभी भैया ने चर्चा छेड़ दी…

भैया – बाबूजी, सुना है सरपंच के चुनाव होने वाले हैं…!

बाबूजी – सुना तो है, पर हमें क्या लेना देना… वोही पुराना वाला सरपंच ही बनेगा.. और किसी में कहाँ है इतना दम..

भैया – हां बाबूजी आप सही कह रहे है, और कोई है भी तो नही अपने गाओं में जो उसके मुकाबले खड़ा हो सके..

तभी भाभी बोली – बाबूजी ! आप ट्राइ क्यों नही करते..?

भैया – कैसी बच्चों जैसी बातें करती हो, पता है कितनी भागदौड़ और पैसा खर्चा करना पड़ता है…!

मे – वैसे गाओं और मोहल्ले की क्या राई है..? बाबूजी के पास तो सब तरह के लोग बैठने आते हैं… कभी चर्चा तो होती होगी, कि लोग क्या चाहते हैं..?

बाबूजी – लोग तो उस सरपंच से ज़्यादा खुश नही हैं…चर्चा है कि इस बार तो कोई और ही होना चाहिए…पिच्छले 15 सालों में उसने गाओं के लिए कुछ नही किया सिवाय अपना घर भरने के…

मे – फिर तो अच्छा मौका है बाबूजी… मेरी राई में एक बार चुपके से लोगों की राई पुख़्ता करके अपना विचार रख ही देना चाहिए…

बाबूजी – तुम क्या कहते हो राम बेटे…?

भैया – देख लो आप…! पहले कम से कम अपने परिवार में ही चर्चा करके देखो, चाचा लोग क्या कहते हैं.., उनका सहयोग भी तो होना चाहिए…

बाबूजी – वैसे तो वो लोग कहीं बाहर नही जाने वाले, फिर भी एक बार पुछ लेते हैं…

मे – शुभ काम में देरी क्यों.., खाना ख़तम करके बैठक में बुला लेते हैं तीनो को,… कह कर मेने बारी-2 से तीनों चाचाओं को फोन करके आधे घंटे में बैठक में आने को बोल दिया…

आधे घंटे के बाद सभी चाचा और उनके बेटे, हम सब एक साथ बैठक में जमा हुए…

जब चर्चा की तो वो सब अति-उत्साहित होकर कहने लगे…, ये तो बहुत ही अच्छा रहेगा.., अपने परिवार का मान और बढ़ेगा… हम सबकी राई है, भैया आप ज़रूर एलेक्षन लडो…

फिर डिसाइड हुआ कि एक बार चुपके से ज़्यादा से ज़्यादा लोगों की राई और ले ली जाए, और ये काम हम सभी को मिलकर करना है.., ज़्यादा से ज़्यादा लोगों से मिलने का…
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06-02-2019, 01:26 PM,
RE: Bhabhi ki Chudai देवर भाभी का रोमांस
दूसरे दिन मे थोड़ा कोर्ट के काम की वजह से शहर चला गया, प्राची से मिलकर उसे सन्नी और विक्की पर नज़र रखने को बोला.. और जो भी हो वो अपडेट मुझे दे…

पूरे दिन की व्यस्तता के बाद शाम को फिर घर लौट आया, खाने के बाद फिर हम सब एक साथ बैठे… और गाओं की जानकारी हासिल की, ज़्यादातर लोग उस सरपंच से नाखुश लगे…

तो फिर फ़ैसला लिया गया कि हमें सरपंच के चुनाव के लिए आगे आना होगा…

दूसरे दिन अपने काम के साथ-2 ग्राम पंचायत के ऑफीस जाकर मेने सारी जानकारी हासिल की, पता लगा कि हमारी पंचायत के लिए इस बार सीट महिला के लिए रिज़र्व है…

घर आकर मेने ये जानकारी दी, तो सब सोच में पड़ गये…

मेने कहा, इसमें इतना सोचने की क्या बात है, नाम ही तो महिला का है, काम तो आदमियों को ही करना होगा ना… !

भैया – तो फिर किसके नाम से एलेक्षन लड़ा जाए… चाचाओं ने एक-एक करके हाथ खड़े कर दिए.. खर्चों के डर से, तो मेने भाभी का नाम सुझाया…!

भैया – लेकिन वो ऐसी हालत में कैसे खड़ी हो पाएगी..?

मे – अरे भैया.. आप चिंता ना करो, भाभी को तकलीफ़ करने की ज़रूरत नही पड़ेगी, हम सब लोग मिलकर प्रचार का काम संभाल लेंगे…!

उसके बाद सबने भाभी के नाम पर मुहर लगा दी…..!

ये मे क्या सुन रही हूँ लल्ला जी…? दूसरी सुवह भाभी ने उठते ही ये सवाल किसी तोप के गोले की तरह मेरे सामने दाग दिया..

मे – क्या हुआ..भाभी ? सुवह ही सुवह.. कोई प्राब्लम हो गयी..?

वो – रूचि के पापा कह रहे थे, कि मुझे सरपंच के लिए तुम्हारे कहने पर खड़ा कर रहे हैं…!

मे – तो इसमें प्राब्लम क्या है..? आपके खड़े होने का मतलब, खड़े ही रहना थोड़ी ना होता है भाभी…?

वो – फिर भी इस हालत में.. कैसे होगा ये सब..? और अगर कहीं हार गयी तो..?

मे – तो क्या होगा…? आप बेकार की चिंता छोड़ो, सब ठीक होगा… अब मेरी भाभी सरपंच बन कर रहेगी… !

भाभी – ये कैसे कह सकते हो तुम… ?

मे – अपने देवर पर भरोसा रखो… आप बस देखती जाओ और अपनी सेहत का ख़याल रखो बस,

ये जो आपके पेट में बच्चा पल रहा है ना, वो पूरे घर के लिए अपने साथ ढेरों खुशियाँ लाने वाला है…, अपने आने से पहले वो अपनी माँ का मान सम्मान लेकर आएगा..

मेरी बातें सुनकर भाभी की आँखों में आँसू आगये… मेने उनके आँसू पोन्छ्ते हुए कहा – क्या भाभी, ये भी कोई आँसू बहाने का समय है…?

वो – और कितनी खुशी दोगे मुझे लल्ला..जी…? मे कैसे इतनी सारी खुशियाँ झेल पाउन्गि..?

मे – आपने भी तो मुझे मेरे जीवन की सारी खुशियाँ दे डाली, अब मेरा भी तो कुछ फ़र्ज़ बनता है, अपनी भाभी को खुश करने का…

भाभी मेरे गले से लिपट कर खुशी के आँसू बहाती रही, मे उनकी पीठ सहला कर चुप करता रहा… फिर मेने एक प्यारी सी शरारत करते हुए भाभी की गान्ड मसल दी..

वो फ़ौरन अपना रोना छोड़ कर मेरे से अलग हो गयी, और गहरी नज़रों से घूरते हुए बोली – तुम्हें हर समय शरारत ही सुझति है…!

मेने हँसते हुए कहा – आपको चुप करने का इससे अच्छा तरीक़ा मुझे नही आता…

फिर वो भी मेरे सीने पर धौल जमाती हुई हँसने लगी…पास खड़ी निशा भी मुस्काराए बगैर नही रह पाई…

फिर मे फटाफट तैयार हुआ…आज मुझे शहर जाकर ढेर सारे काम करने थे..

भाभी का नॉमिनेशन फाइल करने में अभी वक़्त था… एलेक्षन दो महीने बाद था, और उससे करीब 1 महीने पहले ही नॉमिनेशन होना था…

एलेक्षन से पहले मुझे अपने कुछ इंपॉर्टेंट काम निपटाने थे…

तैयार होकर मे शहर निकल गया… ऑफीस पहुँच कर पेंडिंग काम के अपडेट्स लिए, उसके बाद प्राची को कॉल किया…..!

शाम को में भैया के बंगले की तरफ निकल गया, उनसे भाभी को सरपंच के एलेक्षन लड़ने के बारे में राई ली,

उनकी भी यही राई थी कि हमारे घर से ही कोई अब आगे गाओं के विकास की बागडोर संभाले तो अच्छा रहेगा…पुराने सरपंच ने बहुत घर भर लिया, अब और नही.
...........................

रंग बिरंगी रोशनी में जगमगाता हुआ रेड रोज़ क्लब शहर की शान कहें या युवा पीडी में बुराइयाँ पनपाने का अड्डा…

बड़े बड़े घरों के लोग, औरतें , नौजवान, नवयुवतियाँ… सब अपने अपने ऐसे शौक जो वो अपने सार्वजनिक जीवन में पूरे नही कर पाते, उन्हें पूरा करने इस क्लब में आते हैं…

रात शुरू होते ही यहाँ की रौनक देखने लायक होती है, आम इंसान की तो यहाँ आने की औकात ही नही है…

इसकी मेंबर शिप लेना ही सबसे बड़ी बात है, फिर इसके अंदर के खर्चों का तो कहना ही क्या..?

क्लब के ग्राउंड फ्लोर में एक विशालकाय हॉल, जहाँ हर तरह के ड्रग्स का खुल कर इस्तेमाल होता था, इस समय भी लोग कश पे कश लगाए जा रहे थे,

युवक-युवतियाँ नशे के आलम में झूम रहे थे, हॉल में चारों तरफ चरस, गांजे का धुआँ फैला हुआ था, सामान्य आदमी तो यहाँ आते ही बेहोश हो जाए…

हॉल से होते हुए ही सीडीयाँ गोलाई लेते हुए फर्स्ट फ्लोर को जाती हैं, जहाँ जुए और शराब की महफिलें सजी हुई थी,

अर्धनगन लड़कियाँ, ग्राहकों को शराब सर्व करने के साथ-2 उनका मनोरंजन भी कर रही थी…

जैसे -2 रात गेहन होती जा रही थी, रंगीनियँ और नशे में झूमते लोगों की तादात हॉल में बढ़ती ही जा रही थी…

एक टेबल पर बैठे, सन्नी और उसका दोस्त विक्की ड्रग के नशे में चूर होकर झूम रहे थे.. कि तभी वहाँ एक कमसिन सी लड़की पहुँचती है…

एक्सक्यूस मी ! जैसे कहीं कोयल कूकी हो… दोनो की नज़र एक साथ उस लड़की पर पड़ती है… पिंक कलर की ढीली ढाली टीशर्ट जो उसकी नाभि तक ही थी और एक शोल्डर से नीचे,

नाभि से दो इंच नीचे से शुरू होती एक बेहद टाइनी सी स्कर्ट, जो शायद उसके झुकने पर उसकी पेंटी भी नुमाया हो जाए…

कंधों तक के खुले, थोड़े सुनहरी से उसके बाल, कजरारी बड़ी-2 आँखें जिनमें शरारत भरी हुई… हल्का गुलाबी रगत लिए उसका गोल-मटोल चेहरा, पतले -2 गुलाब की पंखुड़ियों से उसके होठ, सुतबा नाक…!

दोनो की नज़र जो एक बार उसको देखने उठी, तो फिर नीचे ही नही हुई, वो अपलक उसे देखते ही रह गये….

उस लड़की ने अपनी आँखों में जमाने भर की शरारत लिए एक बार फिरसे कहा – एक्सक्यूस मी..मिस्टर..

वो दोनो जैसे नींद से जागे हों… हड़बड़ा कर एक साथ बोले – यस प्लीज़…
लड़की – मे आइ कंपनी वित यू..!

सन्नी – व्हाई नोट… माइ प्लेषर..!..

वो उन दोनो के साथ बैठ गयी, उसके बैठते ही वो दोनो उसकी तरफ खिसक आए, और उसके मादक अंगों का जायज़ा लेते हुए उसके बदन की खुसबु से मदमस्त होने लगे…

वो लड़की भी जैसे कुछ नशे में ही थी, अपनी बोझिल आँखों को ज़बरदस्ती से खोलते हुए बोली…वुड यू प्लीज़ शेयर युवर सिग्रेट…

विक्की जो सट्टी लगा ही रहा था, उसने चरस से भरी सिग्रेट तुरंत उसकी तरफ बढ़ा दी, जो उसने अपनी पतली – 2 उंगलियों के बीच क़ैद कर ली…
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06-02-2019, 01:27 PM,
RE: Bhabhi ki Chudai देवर भाभी का रोमांस
तभी हॉल की तेज लाइट एक साथ मद्धिम हो गयी, अब वहाँ रंग बिरंगी नाचती सी रोशनी हॉल में फैलने लगी, साथ ही ऑर्केस्ट्रा पर एक मधुर ध्वनि बजने लगी…

युवक और युवतियाँ अपनी – 2 जगह से खड़े होकर उस ध्वनि पर थिरकने लगे…

तभी सन्नी ने अपना हाथ उस लड़की की तरफ बढ़ाते हुए कहा – मे आइ हॅव डॅन्स वित यू…

उस लड़की ने बड़ी अदा से अपनी बोझिल सी आँखें उसकी तरफ उठाईं, और बोली – शुवर…

वो दोनो डॅन्स फ्लोर पर जाकर डॅन्स करने लगे, कुछ देर के बाद विक्की भी उनके साथ डॅन्स करने लगा…

अब वो दोनो उस लड़की को अपने बीच में लेकर उसके आगे और पीछे उसके बदन से सट कर डॅन्स कर रहे थे,

सन्नी का एक हाथ उसके बगल में और दूसरा हाथ उसके हाथ में था, विक्की ने पीछे से अपने दोनो हाथ उसकी कमर पर रख रखे थे..!

धीरे-2 उन तीनों के बीच की दूरी कम से कम होती जा रही थी, अब वो दोनो उसके बदन से चिपक चुके थे…

उत्तेजना के कारण दोनो के लंड खड़े हो चुके थे, जो उस लड़की के आगे और पीछे के दोनो दरवाज़ों पर दस्तक दे रहे थे…

कुछ देर में ही उन दोनो के सब्र का बाँध टूटने वाला था, कि तभी सन्नी उसके कान में फुसफुसा कर बोला –

बेबी ! यहाँ बहुत घुटन सी हो रही है… कहीं खुले में चलें…

उस लड़की ने एक कातिल सी मुस्कान अपने चेहरे पर लाकर कहा- ऐज यू विश डियर…

उसने विक्की को भी इशारा कर दिया…, वो तीनों हॉल से बाहर आकर पार्किंग में खड़ी सन्नी की कार में आकर बैठ गये…!

विक्की कार ड्राइव कर रहा था, और सन्नी उस कन्या के साथ, मस्ती में व्यस्त हो गया…, वो उसकी अधनंगी जांघों को सहला कर उत्तेजित हो रहा था…,

रेंगते हुए जब उसका हाथ उसकी पैंटी पर पहुँच जाता तो वो लड़की एक कामुक स्माइल करते हुए उसके हाथ पर थप्पड़ लगा देती…

कार कुछ ही देर में शहर से निकल कर एक सिंगल रोड पर दौड़ने लगी…

शहर से निकल कर कुछ दूरी पर ही एक पार्क नुमा गार्डन में जो कि किसी पब्लिक प्रॉपर्टी के लिए नही था, ये उनके ही ग्रूप के किसी पार्ट्नर का था…

पार्क में आकर वो तीनो पेड़ों की आड़ में चले गये, जहाँ लाइट भी कम थी, वैसे तो प्राइवेट प्रॉपर्टी होने की वजह से किसी का आना तो संभव नही था,

लेकिन कोई प्रॉपर सेक्यूरिटी ना होने की वजह से कोई और भी ऐसा ही चूत का पुजारी इधर आ सकता था…

सन्नी और विक्की वहाँ लॉन की घास पर बैठ गये, फिर उसने उस लड़की का हाथ पकड़ कर अपने पास बैठने का इशारा किया…

लड़की ने अपना हाथ झटक दिया… तो वो दोनो उसका चेहरा देखने लगे… फिर विक्की बोला – क्या हुआ बेबी ? आओ बैठो, डॉन’ट वरी ! यहाँ हमारे अलावा और कोई भी नही आएगा…

लड़की ने फिर भी ना में गर्दन हिला दी… ये देख कर सन्नी का पारा एकदम से चढ़ गया… और वो भी खड़ा होकर उसका हाथ पकड़ते हुए बोला…

क्या साली रंडी की औलाद बड़ा नखरे कर रही है यहाँ आकर… वहाँ क्लब में तो कैसी चिपक रही थी…

चल चुप-चाप बैठ और मेरा लॉडा चूस… कहते ही उसने अपना पेंट और अंडरवेर एक साथ नीचे कर दिए और अपना लॉडा बाहर निकाल लिया..

उस लड़की ने ज़ोर्से उसका हाथ झटक दिया, और चटाअक्ककककककक….एक झन्नाटेदार छाँटा उसके गाल पर रसीद कर दिया…

सन्नी का गाल ही नही उसके कान में भी सर्र्र्ररर…सर्र्र्ररर… साईं..सायँ.. जैसी आवाज़ होने लगी…

गुस्से और नशे से उसकी आँखें जलने लगी, इधर अभी भी नीचे बैठा विक्की ये देख कर सकते में आगया, और सोचने लगा… कि इस साली कुतिया को क्या हो गया यहाँ आते ही…

और वो भी झपट कर खड़ा हो गया, और उस लड़की का हाथ पकड़ने के लिए झपटा…

वो दो कदम पीछे हट गयी और एक करारा सा थप्पड़ उसके गाल पर भी रसीद करते हुए किसी शेरनी की तरह गुर्राई…

रंडी होगी, तुम्हारी माँ, और बहनें… अब अगर एक कदम भी आगे बढ़ाया तो जान से हाथ धो बैठोगे… इसी के साथ ना जाने कब और कैसे उसके हाथ में रेवोल्वेर लहराता दिखाई देने लगा…!

लड़की के हाथ में रेवोल्वेर देख कर उन दोनो की गान्ड फटके हाथ में आ गयी, ऐसी हवा टाइट हुई दोनो के, … कि सन्नी तो थर-थर काँपने लगा.. नशा ना जाने कब का गायब हो चुका था….!

दोनो की गान्ड फटती देख वो लड़की ठहाका सा लगाती हुई बोली – क्यों लड़की छोड़नी है… अब क्यों नही चोदते मदर्चोदो…

तुम्हें तो बहुत शौक है ना गॅंग रेप करने का, अब करो…मेरा रेप…

उसको थोड़ा लापरवाह सा देख, विक्ककी ने डेरिंग करते हुए उसपर झपट्टा मारा…

लड़की के हाथ में दबा रेवोल्वेर उसके हाथ से छिटक कर कहीं अंधेरे में गुम हो गया… ये देख कर सन्नी का डर भी निकल गया, और वो भी उसके उपर झपट पड़ा…

लेकिन लड़की कोई इतनी लापरवाह भी नही थी, उसका रेवोल्वेर ज़रूर गिर गया था, लेकिन उसने किसी मज़े हुए फाइटर की तरह हवा में ही सन्नी को एक फ्लाइयिंग किक मारी जो उसकी पसलियों में लगी….

दर्द से कराहता हुआ वो 10 फुट दूर जाकर गिरा… लेकिन तब तक विक्की अपना काम कर चुका था, उसने लड़की को पीछे से उसकी गर्दन में लपेटा मार दिया…

अब बाज़ी विक्की के हाथ लग चुकी थी…वो निरंतर अपनी बाजू का कसाब उसकी गर्दन पर कसता जा रहा था…

लड़की अपनी पूरी ताक़त जुटा कर उससे छूटने की कोशिश करने लगी, लेकिन विकी की पकड़ उसकी गर्दन पर और कस गयी…

तब तक सन्नी भी अपने होश संभाल चुका था, और वो अब उसके आगे आकर खड़ा हो गया और अपने दाँत पीसते हुए लड़की के मुँह पर एक जोरदार घूँसा जड़ दिया…

घूँसे की चोट से उसके होठ से खून रिसने लगा… सन्नी उसके गालों को अपने हाथ में कसते हुए गुर्राया – साली, हराम्जादि… झाँसी की रानी समझती है अपने आप को…

अब देख हम तेरा क्या हाल करते है.. आज रात भर में तेरा चोद-चोद कर चूत का भोसड़ा ना बना दिया तो कहना…!

ये कह कर उसने उसकी मिनी स्कर्ट खोलकर एक तरफ उछाल दी…और उसके आगे से उसकी कमर को जकड कर विक्की से बोला – विक्की ! इसका टॉप निकाल, साली का वो हाल करेंगे कि किसी को अपनी फटी चूत दिखा भी ना सके…

विक्की ने फटाफट उसका टॉप भी निकाल कर उसी दिशा में फेंक दिया…और वो दोनो उसके नाज़ुक अंगों के साथ खेलने लगे…

वो उन दोनो की पकड़ से छूटने के लिए कसमसाती रही… लेकिन अपने को आज़ाद करने में असमर्थ रही…

इतना सब कुछ होने के बाद भी उस लड़की के मुँह से एक चीख तक नही निकली जैसे आम तौर लड़कियाँ अपनी इज़्ज़त बचाने के लिए मदद माँगने के लिए चीखती हैं….!

सन्नी के हाथ अब उसकी ब्रा में क़ैद टेनिस की बॉल के साइज़ की गोल-गोल चुचियों पर पहुँच चुके थे, जिन्हें वो बड़ी बेदर्दी से मसल्ने लगा…

सन्नी ने अपना हाथ उसकी पैंटी में सरका दिया, और उसकी छोटी सी चूत को अपनी मुट्ठी में ज़ोर्से भींच दिया…

लड़की की दर्द भरी कराह निकल गयी.., अभी वो उसके साथ कुछ और ज़्याददती करते… कि जिधर उन्होने उस लड़की के कपड़े फेंके थे… उधर से एक आवाज़ आई…!

दोस्तो ! मे कुछ मदद करूँ…आप लोगों की…?

एक साथ वो दोनो ऐसे उछल पड़े, मानो गरम तवे पर पैर पड़ गया हो…और उनकी नज़र आवाज़ की दिशा में घूम गयी…

कुछ दूरी पर खड़े शख्स पर नज़र पड़ते ही वो चोंक पड़े और दोनो के मुँह से एक साथ निकल पड़ा – जोसेफ तुम…और यहाँ, इस वक़्त…

वो वहीं खड़ा खड़ा मुस्कराता हुआ बोला – हां ! मे ! यहाँ ! क्यों मुझे देख कर इतनी हैरत क्यों हुई..?

या ये सोच कर घबरा रहे हो कि अब ये तीन में शेयर करनी पड़ेगी…

वैसे तुम तो एक लड़की को चार-चार के साथ भी शेयर कर चुके हो तो फिर मेरे आने से तो कोई प्राब्लम नही होनी चाहिए तुम लोगों को…इतना कहते – 2 वो उनके बेहद करीब पहुँच गया…

वो उसकी बात सुनकर एक बार फिर चोंक गये, फिर सन्नी बोला – क्या मतलब…हमने कब चार के साथ किसी लड़की को शेयर किया है..?

वो – भूल गये..! मेरा नाम जोसेफ है, और ये मेरी दोस्त रूबी… हम एक तरह से बंटी और बबली हैं… जिस शहर में जाते हैं, वहाँ की सारी अच्छी-बुरी खबरों का पता लगा ही लेते हैं..

इतना सुनते ही वो दोनो फिर उच्छल पड़े… फिर सन्नी बोला – क्या, ये तुम्हारी दोस्त रूबी है..?

वो – हां ! जब मे कह रहा हूँ तो फिर क्या गुंजाइश बचती है…

विक्की – लेकिन इसने क्लब में आगे से हमारे साथ फ्लर्ट किया और हम इसे यहाँ ले आए इसी की मर्ज़ी से, अब यहाँ आकर इसने अपने तेवर बदल लिए… ऐसा क्यों किया इसने..?

वो – क्योंकि हम तुम्हें यहाँ क्लब से निकाल कर एकांत में लाना चाहते थे !

सन्नी – क्यों ? तुम ऐसा क्यों चाहते थे…?

वो – तुम्हें तुम्हारे दो दोस्तों के पास पहुँचाने के लिए…! वो बेचारे तुम दोनो के बिना वहाँ जहन्नुम में बहुत दुखी हैं …

वो दोनो उसकी बात सुन कर सकते में आ गये… कभी वो उस शख्स का मुँह देखते तो कभी उस लड़की का.. जिसके चेहरे पर अब एक अजीब सी मुस्कराहट थी…

फिर कुछ हिम्मत करके सन्नी बोला – इसका मतलब तुमने ही उन दोनो को मारा था ?

वो – बेशक ! और अब तुम दोनो की बारी है… तो बताओ पहले कॉन जाना चाहेगा उन दोनो के पास…?

विक्की – लेकिन तुम हमें मारना क्यों चाहते हो..?

तब तक विक्की की पकड़ उसके गले पर ढीली पड़ चुकी थी, सो उसने अपनी एल्बो का भरपूर बार उसके पेट पर किया…

नतीजा ! विक्की के हाथ से उसका गला छूट गया और दर्द के मारे वो पीछे की तरफ दोहरा हो गया…
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06-02-2019, 01:27 PM,
RE: Bhabhi ki Chudai देवर भाभी का रोमांस
अपने आपको आज़ाद कराकर वो बोली – क्योंकि तुम चारों मेरी बेहन की मौत के ज़िम्मेदार हो… उसके गुनहगार हो तुम लोग…

वो दोनो एक बार फिर चोंक पड़े…. और बोले – तुम्हारी बेहन..?

लड़की – हाँ हराम्जादो..! मेरी बेहन रेखा ! जिसका तुम लोगों ने मिलकर बलात्कार किया था…उसे जानवरों की तरह नोचा…, खसोटा…

सन्नी – ओह ! तो तुम रेखा की बेहन हो… फिर उस शख्स से बोला – लेकिन तुम इसकी मदद क्यों कर रहे.. हो…?

तुम्हारा रेखा के मामले से क्या लेना देना…? तुम तो असलम के दोस्त थे, उसको पोलीस से बचाया था तुमने…!

सन्नी के मुँह से ये बातें सुन कर उस शख्स के चेहरे पर एक अर्थपूर्ण मुस्कान आ गयी…,

उसने अपनी नीली-नीली आँखों से कॉंटॅक्ट लेन्स निकाले और फिर जैसे ही अपनी फ्रेंच्कट दाढ़ी चेहरे से अलग की…,

अब उनके सामने जो शख्स खड़ा था उसे देख कर तो वो दोनो इतनी बुरी तरह से उछले मानो उनके पैरों पर हज़ारों बिच्छुओं ने एक साथ डॅंक मार दिए हों, दोनो के मुँह से लगभग एक ही साथ निकला…..तूमम्म्ममम……….!

हां हराम्जादो मे..! भृष्ट तन्त्र की वजह से रेखा को कोर्ट से तो इंसाफ़ दिला नही पाया, लेकिन कोर्ट के बाहर से ही सही… और ये रेखा की छोटी बेहन प्राची है…

ये मेरी ही चाल थी, जिसमें गुंजन को फँसाकर पोलीस का मुखबिर बनाया…और फिर असलम को उसकी असलियत बताकर उन दोनो को एक दूसरे के खिलाफ कर दिया…

असलम ने उसे बहाने से अकेले में बुलाकर गुंजन को गोली मार्दि, और मेने असलम को… अब तुम दोनो की बारी है…उसके बाद रेखा का इंसाफ़ पूरा होगा, और उसकी आत्मा को शांति मिल जाएगी..

तभी विक्की आगे बढ़ते हुए बोला- ये तेरा मंसूबा कभी पूरा नही होगा हराम्जादे….

अपने हाथ में दबी रेवोल्वेर की नाल उनके खुले हुए थोबडे में डालते हुए मेने कहा – हिलना भी मत मदर्चोद, वरना समय से पहले परमात्मा को प्यारे हो जाओगे प्यारे विक्की डोनर…

मेने प्राची को उसके कपड़े थमा दिए और उसको अपनी गन उठाने को कहा, जो पास में ही पड़ी थी…

उसने पलक झपकते ही अपनी गन उठा ली, और अपने कपड़े पहन लिए…,

मेने प्राची से कहा – तुम इन दोनो को कवर करो, मे एक मिनट में आया..

वो उन दोनो को कवर करते हुए बोली – आप इनकी फिकर मत करो, मे इन्हें संभाल लूँगी…

मे लपक कर झाड़ियों की तरफ गया जहाँ रूबिया को बाँध कर डाला हुआ था, उसे पकड़ कर उनके सामने ले आया, उसके मुँह से टेप हटते ही वो रोने गिड गिडाने लगी…!

प्राची ने उसे देखते ही एक जोरदार तमाचा उसके थोबडे पर जड़ दिया, फिर उसके मुँह पर थूक कर भभक्ते हुए स्वर में बोली – साली कुतिया, रंडी तू भी मेरी बेहन की उतनी ही बड़ी गुनहगार है, जीतने कि ये दोनो सुअर…

मेने उन दोनो को कहा – तुम चिंता मत करो, मरने के बाद भी तुम दोनो अपनी माशुका के साथ खूब ऐश करना…ये भी तुम्हारे साथ ही रहेगी…

फिर दोनो के सिरों पर गन रखते हुए एक-2 ब्राउन शुगर की थैली उन तीनों को पकड़ा दी और कहा…

अगर जिंदा रहना चाहते हो, तो इसे खाओ…जो पहले ख़तम कर देगा, वो यहाँ से बचके जा सकता है…

वो तीनों गिडगिडाने लगे … लेकिन मे उन हराम्जदो पर कतई रहम करने के मूड में नही था, अपनी गन भी प्राची को थमायी, और उन दोनो पर निशाना लगाए रखने को कहा…

फिर उन दोनो के भी पीछे को हाथ बाँध दिए उनके ही उतरे हुए कपड़ों से, और जबर्जस्त उनके मुँह में ब्राउन शुगर ठूँसने लगा…

वो लाख कोशिश करते रहे… लेकिन मेने एक-एक थैली तीनों के पेट में पहुँचा ही दी… वो पड़े-2 गिडगिडाते रहे, पानी माँगते रहे, रहम की भीख माँगते रहे…

लेकिन अब ना तो उन्हें रहम मिलने वाला था, और ना ही मिला…. वो ड्रग की अधिक मात्रा पेट में पहुँच जाने की वजह से एडीया रगड़-2 कर दम तोड़ने लगे…

हमें कोई जल्दी नही थी, वहीं पास में पड़ी एक ब्रेंच पर बैठकर उनका दर्दनाक अंत होते देखते रहे…


जब तक उनकी साँसें बंद नही हो गयी, हम वहीं जमे रहे…, जब उन तीनों की जीवन लीला समाप्त हो गयी, तीनों के हाथ खोले और फिर आराम से एक दूसरे का हाथ थामे वहाँ से लौट लिए….
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