Desi Sex Kahani मुहब्बत और जंग में सब जायज़ है
12-10-2018, 01:47 PM,
#11
RE: Desi Sex Kahani मुहब्बत और जंग में सब जाय�...
भाई की तरफ से पूर सकून होने के बाद अब में सोचने लगी कि कब सुबह की अज़ान हो.ताकि में और नुसरत बाथ रूम जाने के बहाने अपने अपने कमरे में वापिस जा सके.

अभी सुबह होने में काफ़ी देर थी और मुझे पानी की प्यास बहुत लग रही थी.

काफ़ी देर प्यास को बर्दास्त करनी के बाद मुझ से रहा नही गया और में पानी पीने के लिए कमरे से बाहर निकल कर रसोई की तरफ चल पड़ी.

रसोई की तरफ जाते वक़्त रात की खामोशी में मेरे कानों में एक हल्की सी आवाज़ पड़ी “"आआअहह”.

में ये आवाज़ सुन कर रुक गई और इधर उधर नज़र दौड़ा के देखू तो सही कि ये आवाज़ किधर से आ रही है.

सहन में नज़रें घुमाते हुए मेरी नज़र घर के दूसरे कोने में बने हुए बाथ रूम पर गई.

बाथरूम के अंदर जलती हुई लालटेन की रोशनी को देख कर मुझ अंदाज़ा हुआ कि कोई बाथरूम में मौजूद है और ये आवाज़ उधर से ही आ रही है.

में दबे पावं चलती हुई बाथरूम के दरवाज़े के करीब पहुँची. तो बाथरूम का दरवाज़ा जो पहले ही थोड़ा टूटा हुआ था उस को बिल्कुल खुला पाया.

में बाथरूम की दीवार की साथ लग कर खड़ी हो गई. इस तरह खड़ी हो कर में किसी की नज़रों में आए बेगैर ब आसानी बाहर से बाथरूम में देख सकती थी.

बाहर सहन में बिल्कुल अंधेरा था जब कि बाथरूम में लालटेन जल रही थी. जिस की वजह से सहन में खड़ी हो कर बाथरूम के अंदर का नज़ारा काफ़ी हद तक सॉफ नज़र आ रहा था.

मेरे बाथरूम के करीब पहुँचने तक बाथरूम से आती हुई आवाज़ों का शोर अब थोड़ा मजीद बढ़ गया था. में इन आवाज़ों को सुन कर बहुत हेरान हो रही थी कि ये अंदर हो क्या रहा है .

फिर जब डरते डरते मैने अपना सर आगे बढ़ा कर बाथरूम के अंदर झाँका. तो बाथरूम के अंदर का मंज़र देख कर मेरे तो जैसे “होश” ही उड़ गये.

मैने देखा कि मेरी नंद नुसरत बाथरूम के सिंक के पास झुके हुए अंदाज़ में बिल्कुल नंगी खड़ी थी.

नुसरत के जिस्म से टपकते हुए पानी की बूँदो से अंदाज़ा हो रहा था कि वो अभी अभी नहा करफ़ारिग हुई है.

नुसरत ने अपने सर पर एक बड़ा सा तोलिया (टवल) ओढ़ा हुआ था. जिस की वजह से उस का चेहरा तोलिया के अंदर छुप गया था. इस हालत में नुसरत का मुँह सिंक की तरफ था और उस की कमर बाथरूम के दरवाजे की तरफ थी.

नुसरत के पीछे मेरा शोहर और नुसरत का सागा भाई गुल नवाज़ भी बिल्कुल नंगा हो कर अपनी बेहन के जिस्म से चिपका हुआ था.

गुल नवाज़ पीछे से नुसरत की नंगी कमर और गरदन पर अपनी ज़ुबान फेरते हुए अपनी बेहन के नंगे बदन के मोटे गोश्त को अपनी ज़ुबान और दाँतों से चाट और काट भी रहा था

गुल नवाज़ के एक हाथ की दो उंगलियाँ उस की बेहन के बड़े बड़े मम्मो के निपल्स को मसल रही थीं. जब कि दूसरा हाथ बेहन की चूत के दाने (क्लिट) के साथ बहुत तेज़ी से खेल रहा था.

और ये भाई के हाथों का सरूर ही था. जिस के असर की वजह से नुसरत बहुत बे चैन और गरम हो कर सिसकियाँ भरने पर मजबूर हो गई थी.

साथ ही साथ मैने ये देख कर हेरान रह गई कि ना सिर्फ़ गुल नवाज़ के हाथ उस की बेहन के बदन से खेलने में मसगूल थे.

बल्कि नुसरत ने भी अपने राइट हॅंड से अपने भाई के तने हुए सख़्त लंड को अपनी मुट्ठी में जकड़ा हुआ था. और वो भी अपने हाथ से अपने भाई के लौडे की मूठ लगा कर भाई को मज़ा देने में मसरूफ़ थी.

नुसरत का अपने भाई के साथ प्यार का ये वलहिना अंदाज़ देख कर मुझे अपनी आँखों पे यकीन नही हो रहा था. क्योंकि में जो कुछ देर पहले तक अपने भाई के साथ चुदाई करना चाहती थी.

मगर ऐन मोके पर मेरी हिम्मत जवाब दे गई. और इधर वो ही नुसरत जिस ने मेरे प्लान पर नफ़रत का इज़हार किया था. अब वो खुद अपनेही भाई के साथ बाथ रूम में मस्तियों में मसरूफ़ थी.

इसे कहते हैं कि,

“बदलता है रंग आसमान कैसे कैसे”

मुझ गुनाह का सबक देने वाली का ये रूप देख कर समझ आ गई कि इंसान खुद जो मर्ज़ी चाहे वो कर डाले मगर,

“ में करूँ तो साला कॅरक्टर ढीला है”

की तरह को दूसरा करे तो उस पर फॉरन इल्ज़ाम तराशि शुरू कर देते हैं.

थोड़ी देर बाद गुल नवाज़ ने नुसरत को सिंक की तरफ मजीद झुका दिया. जिस से नुसरत की गान्ड मजीद चौड़ी और फैल कर उपर की तरफ उठ गई और पीछे से नुसरत की चूत बाहर को निकल आई.

गुल नवाज़ ने अपनी बेहन की गान्ड के ब्राउन सुराख पर अपनी उंगली फेरते हुए कहा, "क्या चिकनी गान्ड है तेरी.... ".

गुल नवाज़ अब अपनी बेहन के बिल्कुल पीछे आया और अपने जवान सख़्त लंड को अपनी बेहन की चौड़ी गान्ड में फँसा कर हल्के हल्के धक्के मारने लगा.

ये मंज़र देख कर मेरे जिस्म में चीटियाँ दौड़ने लगी. मेरा हाथ खुद ब खूद मेरी एलास्टिक वाली सलवार के अंदर चला गया और मेरी उंगली मेरी पानी पानी होती हुई चूत में आगे पीछे होने लगी. मेरा दूसरा हाथ मेरे बड़े बड़े मम्मो तक जा पहुँचा और में अपने मम्मो को हाथ में ले कर खुद ही अपने मम्मो को अपने हाथ से दबाने लगी.
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12-10-2018, 01:48 PM,
#12
RE: Desi Sex Kahani मुहब्बत और जंग में सब जाय�...
ये मंज़र देख कर मेरे जिस्म में चीटियाँ दौड़ने लगी. मेरा हाथ खुद ब खूद मेरी एलास्टिक वाली सलवार के अंदर चला गया और मेरी उंगली मेरी पानी पानी होती हुई चूत में आगे पीछे होने लगी. मेरा दूसरा हाथ मेरे बड़े बड़े मम्मो तक जा पहुँचा और में अपने मम्मो को हाथ में ले कर खुद ही अपने मम्मो को अपने हाथ से दबाने लगी.

इधर में अपनी चूत और मम्मो से खेल कर मज़ा ले रही थी . तो दूसरी तरफ अपनी बेहन के गोश्त से भरपूर चुतड़ों में धक्के मारने से गुल नवाज़ का लंड पत्थर की तरह सख़्त हो चुका था.और उस को नुसरत की टाँगो की गर्मी में घुस कर बहुत मज़ा और स्वाद मिल रहा था.

थोड़ी देर बाद गुल नवाज़ ने नुसरत की टाँगे फैलाई और उस की दोनो टाँगो के दरमियाँ से अपना लौडा गुज़ारते हुए बेहन की चूत के मूह पर रख दिया

भाई के लंड को पहली बार अपनी चूत के साथ टच होता हुआ महसूस कर के नुसरत के मूह से आअहह ओह्ह्ह्ह की मीठी आवाज़ निकल गई.

फिर मेरे देखते ही देखते मेरे शोहर ने अपने मुँह से ढेर सारा थूक निकाल कर उस को अपने लंड पर मसल दिया.

साथ ही गुल नवाज़ ने अपने घुटनों को थोड़ा बेंड किया. जिस की वजह से उस का लंड नुसरत की उपर उठी हुई गान्ड के बिल्कुल नीचे आ गया.

फिर गुल नवाज़ ने अपनी बेहन की चौड़ी गान्ड को अपने दोनो हाथों से मज़बूती से थामा और फिर अपने जिस्म को सीधा उपर उठाते हुए एक झटका मारा.

थूक लगे लंड और पानी छोड़ती बेहन की फुद्दी के लबों से गुल नवाज़ का लंड बगैर किस दिक्कत के फिसलता हुआ नुसरत की चूत के अंदर तक धँस ता चला गया.

भाई के लंड को अपने अंदर जज़्ब करते ही नुसरत एक इंच उपर की तरफ उछली और उस के के मुँह से “आआहह “की आवाज़ निकली...

लेकिन सॉफ लग रहा था कि ये दर्द की आवाज़ नही है. बल्कि ये तो जोश और मस्ती से भरी चुदाई का मज़ा लेने वाली आवाज़ थी...

क्यों मेरी रानी रुखसाना मज़ा आया... गुल नवाज़ ने नुसरत को अपनी बीवी समझते हुए पूछा. मगर नुसरत जवाब में सिर्फ़ “अहह “कर के रह गई.

ज़ाहिर है कि वो जवाब में अगर बोलती तो गुल नवाज़ को पता चल सकता था.कि वो जिसे अपनी बीवी समझ कर मज़े से चोद रहा है वो उस इस की बीवी नही बल्कि सग़ी छोटी बेहन है.

गुल नवाज़ ने आहिस्ता से अपने लंड को बाहर निकाला और फिर एक और धक्का मारा और उस का पूरा लंड दुबारा उस की बेहन की चूत में दाखिल हो गया.

अब गुल नवाज ने पीछे से नुसरत के दोनो मम्मों का अपने दोनो हाथो में पकड़ कर ज़ोर से दबाया और साथ ही अपनी बेहन की चूत में धक्कों की बरसात चालू कर दी.

गुल नवाज़ बाथरूम में पूरे जोश और पूरी स्पीड से अपनी बेहन की फुद्दी को चोद रहा था ...

गुल नवाज़ के टटटे ज़ोर ज़ोर से नुसरत की गान्ड से टकराने की वजह से बाथरूम में ना सिर्फ़ “पिच पिच की आवाज़ गूँजती .

बल्कि ज़ोर दार झटकों की वजह से नुसरत की गान्ड का गोश्त भी थल थल करते हुए उपर नीचे होता. और आगे से नुसरत के जवान भरे भरे मम्मे भी गुल नवाज़ के हाथों से निकल निकल जाते थे.

उधर बाथरूम में चुदाई का ये मज़ा पा कर नुसरत की “सिसकियाँ” अब रुकने का नाम नही ले रही थीं.

इधर बाहर मेरी चूत में भी अब बुरी तरह से खारिश हो रही थी. बेहन भाई के संगम और मिलाप का ये हसीन मंज़र देख कर मेरी चूत भी अब जैसे लंड माँगने लगी थी.

मेरी उंगलियाँ भी मेरी चूत में उसी तेज़ी से चल रही थीं.. जिस तेज़ी से गुल नवाज़ अपनी बेहन की फुद्दी में लंड को अंदर बाहर कर रहा था.

मेरी साँसे तेज़ तेज़ चलने लगी.... मेरे मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी..अयाया ...आअहह...

में ऐसे महसूस कर रही थी.जैसे मेरी चूत में एक मोटा लंड है और वो मुझ ज़ोर ज़ोर से चोद रहा हो...मेरी चूत पानी पानी हो रही थी.

उधर गुल नवाज़ ने अपनी बेहन की चूत में धक्के मार-मार कर के उस की टाँगों को ना सिर्फ़ थका दिया था. बल्कि आज इतनी तेज चुदाई करने पर वो खोद भी थक गया और फिर उस ने अपने लंड का पानी अपनी बेहन की चूत में छोड़ दिया.

फारिग होने के कुछ देर बाद गुल नवाज़ ने अपना लंड नुसरत की चूत से निकाला तो मैने उस के लंड पर उस की बेहन की चूत का पानी चमकते देखा.

“ बेहन चोद इतनी रात को नहाने का क्या मकसद है” कहते हुए गुल नवाज़ ने बाथरूम के फर्श पर पड़ी अपनी शलवार को उठा कर उस के साथ अपनी लंड को सॉफ किया और फिर शलवार को पहन का नाडा बाँधने लगा.

नुसरत अभी तक सिंक पर झुकी पूर सकून और बेसूध खड़ी थी. लगता था कि अपने भाई के साथ साथ वो भी फारिग हो गई थी.

मुझ पता चल गया कि बाथरूम में चुदाई का खेल ख़तम हो चुका है और अब किसी भी लम्हे गुल नवाज़ और नुसरत बाहर आ सकते हैं.

इस लिए मैने अपनी चप्पलो को हाथों में थामा और दबे पावं तेज़ी से चलते हुए वापिस कमरे में चली आई…

में जब नुसरत के कमरे में वापिस आई तो अपने भाई सुल्तान के खर्राटे सुन कर मुझ पता चल गया कि मेरा भाई अभी तक सकून से सो रहा है.

में कमरे का दरवाज़ा बंद कर के खामोशी के साथ पलंग पर आ कर लेट गई.

मेरी आँखों के सामने अभी तक नुसरत और उस के भाई की चुदाई का मंज़र एक फिल्म की तरह चल रहा था.

उन्ही दोनो के बारे में सोचते सोचते मेरा हाथ खुद ब खुद मेरी शलवार के अंदर मेरी पानी छोड़ती फुद्दी तक दुबारा जा पहुँचा.और में अपनी उंगलियों से अपनी चूत को मसल्ने लगी.

में अपनी उंगली अपनी चूत मे ज़ोर ज़ोर से अंदर बाहर करने लगी. कुछ देर चूत मसल्ने के बाद मेरी स्पीड बढ़ गयी.

मेरे मुँह से सिसकारियाँ हल्की हल्की आवाज़ मे निकलने लगी . मैने अपने आप को थोड़ा संभाला ताकि मेरी सिसकयों की गूँज मेरे भाई के कानों में ना पड़ सके.

अपनी नंद और उस के भाई की चुदाई को याद कर के रात के अंधेरे में अपने ही सगे भाई के साथ एक ही बिस्तर पर लेट कर अपनी चूत के साथ खेलने का ये तजुर्बा मेरे लिए बिल्कुल अनोखा और दिल कश था. 

मेरी चूत में एक आग लगी हुई थी और ये आग आहिस्ता आहिस्ता बे काबू होती जा रही थी.
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12-10-2018, 01:48 PM,
#13
RE: Desi Sex Kahani मुहब्बत और जंग में सब जाय�...
कुछ ही देर बाद मुझ एक झटका लगा और मेरी चूत ने अपना पानी छोड़ दिया.

में फारिग तो ज़रूर हो गई मगर मेरी चूत में लगी आग शायद अभी बुझी नही थी.फिर रात के किस पहर मेरी आँख लगी मुझे खुद पता ही ना चला.

उस वक़्त रात का शायद आख़िरी पहर था.जब नींद के आलम में मुझे मेरी कमीज़ के अंदर से अपने मम्मो पर किसी के बे चैन हाथ और किसी की गरम ज़ुबान अपनी “धुनि” ( नेवेल ) पर “रेंगते” हुई महसूस हुई.

पहले तो में समझी कि शायद में कोई ख्वाब देख रही हूँ. मगर दूसरे ही लम्हे में महसूस किया. कि मैने अपनी कमीज़ और ब्रेजियर पहनी तो ज़रूर है.

मगर मेरी कमीज़ मेरे मम्मो तक उपर उठी हुई थी और मेरे मम्मे भी ब्रेजियर से आज़ाद हो कर अंधेरे में “नंगे” हो रहे हैं. 

जब कि मेरी शलवार मेरे जिस्म से अलग हो चुकी है और अब में बिस्तर पर बगैर शलवार के आधी नगी पड़ी हुई हूँ. 

ये सब कुछ महसूस करते ही मुझे समझ आ गई. कि ये कोई ख्वाब नही बल्कि हक़ीकत में मेरा भाई रात के पिछले पहर मुझे अपनी बीवी समझ कर नंगा करने पर तुला हुआ है.और ये बात समझ आते ही में एक दम से हड बड़ा कर उठ गई.

इस से पहले कि में सम्भल पाती. सुल्तान भाई जो कि अब मेरी टाँगों के बीच में बैठा हुआ था. उस ने एक हाथ से मेरी गान्ड को हल्का सा उपर उठाया और अंधेरे में अपना मुँह आगे बढ़ाते हुए अपनी गरम ज़ुबान को मेरी गोश्त से भर पूर रानों के उपर फेरने लगा. 

यूँ पहली बार अपनी रानो पर अपने भाई की ज़ुबान को “रेंगता” हुआ महसूस कर के मेरे बदन में एक आग सी जल उठी.

अभी में अपनी रानो पर सरकती हुई अपने भाई की ज़ुबान से ही लुफ्त ओ अंदोज़ हो रही थी. कि इतने में मेरी रानो पर “रेंगती” सुल्तान भाई की ज़ुबान मेरी चूत तक आन पहुँची..

ज्यूँ ही सुल्तान भाई ने मेरी चूत को अपने मुँह में लिया. तो हम दोनो बेहन भाई को जैसे एक शॉक सा लगा. 

मुझे तो इस लिए ये शॉक पहुँचा. क्यों कि मेरे शोहर गुल नवाज़ ने हमारी तीन साला शादी शुदा ज़िंदगी में आज तक कभी इस तरह मेरी फुद्दी को अपने मुँह में नही लिया था.

जब कि भाई ने मेरी चूत पर थोड़े भरे हुए बालों में अपना मुँह फेरते ही एक हेरत भरी आवाज़ में बोलना चाहा. “ नुसरत कल तो तुम्हारी फुद्दी की शवीईई” ये कहते हुए भाई ने अपना मुँह मेरी चूत से अलग करने की कोशिश की.

“उफफफफफफफ्फ़”भाई के मुँह से ये इलफ़ाज़ सुन कर मेरे तो “होश” की खता हो गये. 

में तो जल्दी में नुसरत से पूछना ही भूल गई थी. कि उस ने अपनी फुद्दी की शेव की हुई है या नही.

मगर अब क्या हो सकता था. अब मुझ ही इस काम को बिगड़ने से बचाना था. 

वैसे भी नुसरत और उस के भाई की चुदाई के सीन ने मेरी चूत में जो आग लगाई थी.उस की वजह से मेरी पानी छोड़ती चूत को इस वक़्त सिर्फ़ एक लंड की ज़रूरत थी. 

और अब सब रिश्तों नातो को भुला कर सुल्तान भाई मुझे एक भाई के रूप में नही बल्कि एक मर्द के रूप में मेरे सामने नज़र आ रहा था. 

इस से पहले कि सुल्तान भाई अपना मुँह मेरी फुद्दी से अलग कर पाता. मैने फॉरन अपने हाथ आगे बढ़ा कर उस के सर को ज़ोर से पकड़ कर दुबारा अपनी फुद्दी पा टिका दिया.

में अंधेरे में दिखाई तो कुछ भी नही दे रहा था. मगर भाई के जिस्म की हरकत से में ये महसूस कर रही थी. कि मेरा भाई शायद किसी”शाषो पुंज” में मुब्तला हो कर “हिचकिचाहट” का मुजाइरा कर रहा है. 

मगर में तो आज पहली बार किसी मर्द के होंठों को अपनी फुद्दी पर महसूस कर के पूरी पागल हो गई थी. और इस मज़े के कारण में अपनी गान्ड उठा उठा कर अपनी फुद्दी को ऊपर नीचे कर के अपने भाई के मुँह पर रगड़ने लगी.. जिस से मेरी फुद्दी में लगी आग और तेज होने लगी..

मैने अपने दोनों हाथों से सुल्तान भाई के सर को पकड़ा हुआ था. और भाई के होंठों पर अपनी गरमा गरम फुद्दी को ज़ोर ज़ोर से रगड़ रही थी.

मेरे इस वलिहान पन और खुद सुपुर्दगी के दिलकश अंदाज़ ने शायद मेरे भाई को भी पिघला दिया. 

भाई ने अपने सर के उपर जकडे हुए मेरे हाथों को आहिस्ता से अलग किया और फिर बहुत ही प्यार से मेरी पानी छोड़ती फुद्दि के होंठों पर अपनी उंगली फेरी और उंगली को अपने मुँह में डाल कर चूसने लगा.

इस के साथ ही भाई ने आहिस्ता आहिस्ता अपने हाथों से मेरी फुद्दी के होंठ खोल कर अपनी ज़ुबान मेरी गुलाबी चूत के अंदर डाल दी. उउफफफफफफफफफफ्फ़ अहह मेरे मुँह से सिसकरीईईईईईईई निकल गई.

मैने अपनी आँखें बंद कर ली ऑर अपनी फुद्दी को बार बार ऊपर की तरफ़ ले जाती ताकि ज़यादा से ज़यादा अपने भाई की ज़ुबान और होंठो का दबाव अपनी फुद्दी के अंदर महसूस कर पाऊ.

सुल्तान भाई मेरी बेचैनी ऑर मज़े से बढ़ी कैफियत को समझ रहा था.इस लिए कभी सुल्तान भाई मेरी चूत के सुराख वाली जगह में ज़ुबान डालता और कभी वो मेरी चूत के दाने को ज़ुबान से रगड़ता और अपने दाँतों से मेरी चूत और जांघों पर काट रहा था.

में तो ज़ोर ज़ोर से “आआआआअहैीन” भर रही थी ओर अपने हाथ उस के बालों में फेर रही थी.

मेरी चूत इतनी गीली हो चुकी थी कि मेरी चूत का रस मेरी टाँगों से होता हुआ मुझे मेरे हिप्पस पर महसूस हो रहा था..

फिर अचानक मुझे लगा कि मेरे जिस्म में एक तूफान सा आ रहा है.वो तूफान एक दम से आया और मेरा सारा जिस्म अकड सा गया और इस के साथ ही मेरी फुद्दी ने अपना पानी भरपूर तरीके से छोड़ दिया. में आआहह आआहह कर रही थी..

थोड़ी देर बाद मेरी फुद्दी से फूटने वाली गरम फुहार बंद हो गई ऑर में बिस्तर पर बेसूध गिर गई..

मेरा झटके ख़ाता जिस्म जब तक ना संभला उस वक़्त तक सुल्तान भाई मेरी टाँगों के दरमियाँ ही मेरी चूत पर अपना मुँह रख कर लेटे रहे. 
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12-10-2018, 01:48 PM,
#14
RE: Desi Sex Kahani मुहब्बत और जंग में सब जाय�...
रात की खामोशी और अंधेरे में हम दोनो बेहन भाई की तेज तेज चलती साँसों की आवाज़ कमरे में गूँज कर कमरे में जिंदगी और दो जवान जिस्मों की मजूदगी का अहसास दिला रही थी.

“दो दिल मिल रहे हैं मगर चुपके चुपके”

कुछ देर के बाद सुल्तान भाई आहिस्ता से मेरी टाँगों के दरमियाँ से उठा और बिस्तर से उतर गया. 

में अंधेरे में ठीक से देख नही पा रही थी. इस लिए मैने ये अंदाज़ा लगाया कि शायद वो बाहर बाथरूम में जाने लगा है.

मगर फिर कुछ की लम्हों बाद जब वो दुबारा आकर बिस्तर पर मेरे नज़दीक लेट गया. 

भाई ने अंधेरे में मुझे अपनी तरफ खींचा तो में किसी “कटी पतंग” की तरह अपने भाई की बाहों में सिमटती चली गई.

भाई की छाती से लगते ही मुझ अंदाज़ा हो गया कि मेरा भाई अपने पूरे कपड़े उतार कर बिल्कुल नगा हो चुका है.

और भाई के नंगे जिस्म से छूते ही मेरे जिस्म में एक करेंट सा दौड़ गया.

सुल्तान भाई ने मुझ अपने नज़दीक करते हुए अंधेरे में ही मेरे चेहरे को अपने हाथों में थाम कर उपेर उठाया. और अपने खुरदरे होंठों को मेरे गर्म गर्म और नाज़ुक होंठों पर रख दिया. फिर अपनी ज़ुबान निकाल कर मेरे होंठों को चूमना शुरू कर दिया.

उफफफ्फ़, क्या मज़ा था, आज पहली बार मेरा भाई मुझ अपनी बीवी समझ कर मेरे रस भरे होंठों का मज़ा ले रहा था.

साथ ही साथ सुल्तान भाई ने मेरे हाथों को मेरे सर से उपर कर के मुझे मेरी कमीज़ और ब्रा के बोझ से भी आज़ाद कर दिया.

भाई ने अब मुझ अपनी बाँहों में ज़ोर से दबा कर मुझे अपने उपर लिटा लिया ऑर अपने हाथों से मेरे 38डी साइज़ के मोटे मम्मो को मसल्ने लगा तो में मज़े से मदहोश होने लगी.

उस ने अपना एक हाथ मेरी ऑलरेडी गीली ऑर चिकनी फुद्दी पर रख दिया ओर उसे मसलने लगा. उस की इस हेरकत से मेरी सिसकारी निकल गई.

साथ ही भाई ने अपने हाथ से मेरी कमर को पकड़ कर मेरे जिस्म को अपनी तरफ झुकाया. 

इस स्टाइल में मेरे मम्मे मेरे भाई के मुँह के बिकलूल सामने चले आए. 

भाई अपना मुँह खोल कर मेरे लाइट ब्राउन कलर के निपल्स को मूँह में ले कर किसी छोटे बच्चे की तरह चूसने लगा. 

कभी वो निपल्स पर ज़बान फेरता कभी निपल्स को अपने लिप्स से चूस्ता और कभी अपने दाँतों से आहिस्ता से उन पर “धंडी वेदता” (बाइट्स) करता. 

भाई का इस तरफ मेरा मम्मो को सक करने से मेरा तो बुरा हाल हो गया था.साथ ही साथ उस के हाथ भी मेरी क़मर पर घूमते हुए हल्का हल्की मसाज कर रहे थे.

नीचे से भाई का गर्म और पत्थर की तरह सख़्त अकडा हुआ लंड मेरी टाँगों के बीच आ कर मेरी पानी से शराबोर चूत के दरवाज़े पर ज़ोर ज़ोर से दस्तक दे कर मेरी फुद्दी के अंदर आने की इजाज़त तलब कर रहा था. 

लगता था कि बेहन की चूत की गर्मी की पुकार को भाई के लंड ने भी सुन लिया था. 

और एक अचाहे भाई की तरह भाई का लंड भी अपनी बेहन की चूत की गर्मी को ठंडा कर एक अच्छे फर्ज़ शनस बेहन चोद लंड होने का सबूत देने के लिए मचल रहा था. 

जैसे “लंड ना हुआ,वॉटर कूलर हो गया”

जब कि उपर हम दोनो एक दूसरे के मुँह में मुँह डाल कर एक दूसरे की ज़बान को चूस रहे थे.

कुछ देर इसी तरह लेटे लेटे सुल्तान भाई ने मेरी गान्ड पर अपने हाथ रख दिये और मेरी गान्ड को अपने हाथों में दबाते हुए मेरी टाँगे खोलने लुगा.

में समझ गई कि वो अब मेरी फुद्दी के अंदर अपना लंड डालना चाहता है. में थोड़ी सी उपर हुई और भाई का गर्म सख़्त और तना हुआ लंड पकड़ कर अपनी फुद्दि के होंठों पर रगड़ा. 

और फिर अपने आप को आहिस्ता आहिस्ता नीचे ले जाते हुए भाई के लंड को अपनी पानी छोड़ती गरम फुद्दी में दाखिल होने की इजाज़त दे दी.

मेरे भाई और मेरे शोहर गुल नवाज़ के लंड लंबाई और मोटाई मे तो तकरीबन एक ही जैसे थे. लेकिन मेरे भाई के लंड की टोपी गुल नवाज़ से थोड़ी मोटी थी.

इस लिए ज्यूँ ही सुल्तान भाई का लंड मेरी चूत के लबों से स्लिप हो कर मेरी टाँग फुद्दी के अंदर आया तो मुझ शादी शुदा होने का बावजूद थोड़े “मीठे दरद” का अहसास हुआ और बे इकतियार मेरे लबों से एक हल्की सी चीख निकल पड़ी.

“उफफफ्फ़ लगता है आज तो तुम ने अपनी चूत पर “फिटकरी” लगा कर इसे “तंग” किया हुआ है नुसरत”सुल्तान भाई ने नीचे से अपने लंड को एक ज़ोरदार झटके से मेरी चूत में डालते हुए कहा. 

भाई के ज़ोरदार झटके से मेरे मम्मे उछाल कर भाई की छाती से टकराए और साथ ही हम दोनों के मुँह से सिसकारी निकल गई. 

उफफफफफ्फ़ क्या मज़ा था. में अपने भाई के लंड के उपर बैठ कर तेज़ी से उपेर नीचे हो रही थी.जब कि भाई ने मेरे मम्मो को अपने मुँह में ले कर सक करना शुरू कर दिया था.

मेरे मम्मे भाई के मुँह में थे और मेरी गर्दन पर उस के हाथ फिर रहे थे. और वो मेरी भारी गान्ड को अपने हाथों में थाम कर धक्के लगा रहा था.

नीचे से सुल्तान भाई अपना पूरा लंड मेरी चूत के अंदर डालते और फिर उसी तेज़ी से उसे बाहर निकाल रहे थे.

अब मैं अपने मम्मे को भाई के मुँह से निकाल कर थोड़ी पीछे की तरफ हो कर अपने भाई की ज़ोरदार चुदाई का पूरा मज़ा लेने लगी.

भाई के लंड की मेरी चूत मे हर धक्के के साथ मेरे बड़े बड़े पोस्टन (मम्मे) मेरी छाती पर उच्छल रहे थे. 

अचानक ही भाई की चुदाई की रफ़्तार तूफ़ानी हो गई और में अपने भाई के लंड के उपर किसी खिलोने की तरह हवा मे उछल रही थी. 

ऐसी जबर्जस्त चुदाई का मज़ा मैने आज तक नही लिया था.

में तो अभी इस मज़े से ही बे हाल हो रही थी कि भाई ने यका युक मुझे खींच कर अपने लंड से उतरा और मेरा मुँह अपनी टाँगो की तरफ कर दिया.

इस स्टाइल में अपने भाई के उपर लेटने से अब मेरी चूत मेरे भाई के मुँह के उपर चली आई जब कि मेरा मुँह मेरे भाई की टाँगो की तरफ चला गया.

भाई ने मेरे नीचे लेट कर मेरी चूत को अपने मुँह में लिया और मेरी फुद्दी के अंदर अपनी गर्म और नर्म ज़बान डाल दी. 

अहह ईईईईई ऊऊऊवाआआ करते हुए में अपने भाई की टाँगों की तरफ झुकती चली गई.जिस की वजह से उस का लंड मेरे मुँह के बिल्कुल करीब आ गया. 

ज्यूँ ही मेरा मुँह भाई के लंड के करीब हुआ मुझे एक अजीब और तीखी सी गंदी किसम की बू भाई के लंड से आती हुई महसूस हुई. जो कि मुझ बहुत नागवार गुज़री और मैने अपना मुँह भाई के लंड से अलग करने की कॉसिश की.

“मेरे लौडे को अपने मुँह में डाल इसी तरह चूसो जिस तरह में तुम्हारी फुद्दी को चूस रहा हूँ नुसरत” भाई ने अपने हाथों से मेरे सर को पकड़ कर उसे नीचे अपने लंड की तरफ झुकाते हुए कहा..

मैने तो आज तक अपने शोहर गुल नवाज़ का लंड कभी नही चूसा था. और आज मेरा अपना भाई मुझे अपनी बीवी समझ कर मुझे चुदाई के इस नये मज़े से “रोशनास” करवाने पर तुला हुआ था.
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12-10-2018, 01:49 PM,
#15
RE: Desi Sex Kahani मुहब्बत और जंग में सब जाय�...
मुझ लगता था कि नुसरत मेरे भाई के साथ ये सब कुछ करती है. इस लिए अगर आज में नही करूँगी तो भाई शायद गुस्से में आ कर मुझे कुछ कहे. 

या आज लंड ना चूसने की वजह पूछे तो फिर मुझे ना चाहते हुए भी “बोलने” पर मजबूर होना पड़ेगा. जिस की वजह से मेरा सारा राज़ खुल सकता था.. 

में सोचने लगी कि अब जब इतना कुछ हो चुका था तो “लंड चुसाइ “का “तजुर्बा” करने में भी कोई हर्ज नही है. 

इस लिए मैने सुल्तान भाई की टाँगों के दरमियाँ अपना सर झुका कर अपना मुँह खोला और अपनी चूत के जूस से भरपूर अपने भाई के लंड का टोपा को मुँह में डाल लिया.

लंड को अपने मुँह में डालते ही पहले तो मुझे अजीब सी घिन होने लगी.जिस की वजह से मैने जल्दी से भाई के लौडे को अपने मुँह से बाहर निकाला ऑर थूकने लगी.

लेकिन दूसरी तरफ सुल्तान भाई ने मेरी गान्ड को अपने हाथों से खोला और अपने मुँह को थोड़ा उपर कर मेरी गान्ड के सुराख पर ज़ोर से “थूका” और साथ ही अपनी ज़ुबान की नुकीली टिप को मेरी गान्ड के सुराख में डालकर मेरी “थूक” से भरपूर गान्ड को चाटने और चोदने लगा.

उफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ भाई की इस हरकत ने तो मेरे तन बदन में एक नई आग लगा दी. वो क्या मज़ा ऑर लज़्जत थी कि में ब्यानकर सकती थी..

में खुद को कंट्रोल करने की नाकाम कोशिश कर रही थी...लेकिन इतना मज़ा ऑर मज़े की शिद्दत इतनी ज़यादा थी कि मेरी बर्दास्त से बाहर हो गया.

फिर हर बात और बू से बे परवाह हो कर एक मैने जोश में फॉरन अपने भाई के लंड को अपने मुँह में ले लिया.

अब में जोश में इतनी गरम और मस्त हो गई कि भाई के लंड पर लगे अपनी चूत के पानी को भी अपनी ज़ुबान से चाट चाट कर पागलों की तरह सॉफ करने लगी.

सुल्तान भाई नीचे से एक दम उपर हुआ और भाई का लंड एक ही झटके में मेरे हलक के अंदर तक जा पहुँचा.

में तो आज अपने भाई के हाथों चुदाई की ये नई मंज़िलें पा कर हर रिश्ता भुला बैठी थी.

अब मेरे उपर बस एक जिन्सी जनून सवार हो गया. और इसी जुनून के हाथों मजबूर हो कर मैने भाई के लंड पर अपनी ज़ुबान फेरते फेरते भाई के टट्टों को मुँह में लिया और उन को एक एक कर के चूसने लगी.

भाई भी मेरी इस हरकत से जैसे पागल हो गया. वो मज़े से आआअहह की आवाज़ें निकाल रहा था...


में भी इसी तरह अपने भाई के लिए आज की ये रात एक यादगार बनाना चाहती थी. जिस तरह भाई मुझे सेक्स के नये तरीके सिखा कर मेरे लिए इस रात को यादगार बना रहा था.

ये ही सोचते हुए मैने भाई के टट्टो को छोड़ कर अपना मुँह थोड़ा मज़ीद नीचे की तरफ किया और भाई की गान्ड की “मोरी” पर अपनी ज़ुबान रख दी.

ज्यूँ ही मेरी ज़ुबान सुल्तान भाई की गान्ड के सुराख को टच हुई तो पहले तो भाई ने एक दम अपनी गान्ड को ज़ोर से जकड़ा जैसी उसे “गुदगुदी” हुई हो. 

मगर दूसरे ही लम्हे जब मैने ज़ुबान भाई की गान्ड पर दुबारा फेरी तो मज़े के मारे भाई की ज़ुबान से सिसकयों का एक सेलाब उमड़ आया.

“लगता है तू तो मुझे आज मार ही डालेगी नुस्तू” भाई ने मज़े से सिसकियाँ बढ़ाते हुए कहा.

भाई अब तेज़ी से मेरी गान्ड के साथ साथ मेरी फुद्दी भी चाट रहा था और में उस का लंड,टट्टो और गान्ड को चूस रही थी. और हम दोनो की सिसकियाँ पूरे कमरे में गूँज रही थीं. 

इतनी देर में मेरी चूत से 2 बार पानी बह निकला तो भाई ने वो सारा पानी चाट चाट कर साफ कर दिया. 

मुझे डर था कि अगर में कुछ देर और भाई के लंड को चुसुन्गि तो भाई भी ज़रूर मेरे मुँह में ही फारिग हो जाएगा.

जब कि में अपने भाई का वीर्य अपने मुँह में नही बल्कि अपनी चूत के अंदर डलवाना चाहती थी.इस लिए थोड़ी देर बाद में भाई के उपर से उठ कर भाई के पास बिस्तर पर लेट गई.

भाई ने मुझे अपनी बाहों में लेकर गले से लगाया. हम दोनो ने लंड और फुद्दी के जूस और पानी से भरे अपने होंठ एक दूसरे के मुँह में डाले और में भाई के मुँह में उस के अपने लंड का जूस और वो मेरी चूत का पानी अपने होंठो से मेरे मुँह में मुन्तिकल करने लगा. साथ ही साथ भाई मेरे तने हुए मम्मो से भी खेलने लगा.

कुछ देर बाद भाई ने बिस्तर से नीचे झुक कर अंधेरे में ही फर्श पर करीब ही पड़ी अपनी कमीज़ को टटोल टटोल कर तलाश किया और फिर अपनी कमीज़ की पॉकेट से कुछ निकाल कर बोला “ नुसरत देख में तेरे लिए शहर से “झांझर” (पायल) लाया हूँ” 

इस के साथ ही अपनी लाई हुई झांझर को मेरी पाँव की पिंड्लीयो पर बाँधने लगा.

भाई का इस तरह मुझे झांझर का तोहफा देना ऐसे ही था जैसे सुहाग रात को कोई शोहर अपनी बीवी को मुँह दिखाई में तोहफा देता है.

लेकिन मेरे लिए ये मुँह दिखाई की नही बल्कि चूत चुदाई और गोद भराई की रसम और रात थी.

मुझे पायल पहनाने के बाद सुल्तान भाई ने मेरी गान्ड के नीचे एक तकिया रखा और मुझे बिस्तर पर दुबारा लिटा दिया. तकिये की वजह से अब मेरी चूत थोड़ा और उपर हो गई थी. 

भाई ने मेरी टाँगों को खोला और उसने मेरी टाँगें उठा कर अपने कंधों पर रख लीं.

साथ ही भाई ने अपने लंड का टोपा मेरी चूत के बीच रखा और एक ज़ोर दार धक्का मारा और अपना लंड मेरी चूत में जड तक डाल दिया. 

भाई मेरे उपर झुक गया और मेरे होठों को अपने मुँह में ले कर मुझ तेज तेज चोदने लगा.

भाई का गर्म लंड मेरी फुद्दी के अंदर तक पहुँच रहा था. और भाई की तेज चुदाई की वजह से मेरी पानी छोड़ती चूत बे हाल हो कर शर्प शरप और थरप थरप की आवाज़ निकल रही थी. जब कि झटकों की वजह से मेरे मोटे मम्मे भी हिलने शुरू हो जाता

मैने मज़े से मदहोश हो कर अपने होंठ भाई की गर्दन पर रख दिये और इस के शोल्डर्स को चाटने ओर काटने लगी और अपनी फुददी को उस के झटको के साथ साथ टाइट और लूस करने लगी.

मेरे पैरो की पायल मेरे भाई के हर धक्के के साथ “छुन छुन” करती हुए बज रही थी.

पायल की आवाज़ से भाई को मज़ीद जोश आने लगा और वो मुझे तेज़ी के साथ चोदने लगा

सुल्तान भाई ने मेरे पैरों को पकड़ कर बहुत ही तेज़ी के साथ मेरी चुदाई करनी शुरू कर दी. 

वो मेरी चूत में लंड को अंदर डालते वक़्त मेरे पैरों को दबा देते थे तो मेरी चूत और ऊपर उठ जाती थी और उस का लंड मेरी चूत की गहराई तक घुस जाता था. 

“दूरी ना रहे क्यों आज इतने करीब आऊ
में तुम में समा जाऊ तुम मुझ में समा जाओ”

इस गाने के अल्फ़ाज़ की तरह हमारे जिस्म भी पूरी तरह एक दूसरे में समा रहे थे.
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12-10-2018, 01:49 PM,
#16
RE: Desi Sex Kahani मुहब्बत और जंग में सब जाय�...
आअहह म्म्म्म मह क्या फीलिंग हो रही थी... में ब्यान नही कर सकती कि मुझे कितना मज़ा आ रहा था... 

में भाई के लंड को अपनी बच्चेदानी के मुँह पर महसूस कर रही थी.

फिर वक़्त आ ही गया जिस का मुझे और मेरी फुद्दी को बहुत शिदत से इंतिज़ार था.और जिस की खातिर मुझ मजबूरन आज ये गुनाह भरा कदम उठाना पड़ रहा था. 

उधर भाई के लंड से उस के वीर्य का बाँध टूटा. इधर मेरी चूत ने अपनी पानी छोड़ते हुए मेरी बच्चे दानी का मुँह खोल दिया. 

और फिर मेरी “ट्यूब्स” में से गुज़र कर हम दोनो बहन भाई के बच्चा पैदा करने वाले “जर्रास्मुन” (स्पर्म्ज़) का मिलाप मेरी बच्चे दानी की गहराइयों में हो ही गया.

सुल्तान भाई ने अपने लंड के थिक जूस के “सेलाब” से मेरी चूत को भर दिया.

मेरा शोहर एक हफ्ते में कभी इतना वीर्य मेरी चूत में नही डालता था.जितना भाई ने एक ही रात में मेरी चूत में उंड़ेल दिया.

भाई थक कर मेरे जिस्म के उपर की गिर गया. लेकिन भाई का लंड अभी तक मेरी चूत में पूरा अंदर तक धुंस कर झटके पर झटके मार रहा था.

हम दोनो बहन भाई बिस्तर पर एक दूसरे के उपर नीचे बेसूध पड़े थे और हमारे जिस्म पसीने की वजह से चिप चिपा रहे थे.

कुछ लम्हे बाद सुल्तान भाई का लंड सुकड कर मेरी चूत से बाहर निकला.तो साथ ही भाई के लंड का पानी भी मेरी चूत से बह बह कर चूत से बाहर निकलने लगा.

भाई मेरे जिस्म से अलहदा हो कर मेरे बराबर ही बिस्तर पर गिर गया.

मेरे साथ लेटने के थोड़ी देर बाद ही भाई ने खर्राटे लेना शुरू कर दिए. जिन को सुनते ही में समझ गई कि भाई फारिग हो कर अब पूर सकून नींद के मज़े लेने लगा है.

मैने इस मोके को गनीमत जाना और अपनी सांसो को संभालती जल्दी से बिस्तर से उठी और अंधेरे में अपने कपड़े तलाश कर के पहन लिए.

कपड़े पहन कर कमरे की खिड़की से परदा हटा कर बाहर झाँका तो अंदाज़ा हुआ कि सुबह होने के करीब है.

में और नुसरत ने एक दूसरे के कमरों से निकल कर वापिस अपने अपने कमरे में जाने के लिए सुबह की अज़ान के टाइम का सेट किया हुआ था.

इस लिए में बे सबरी से अज़ान होने का इंतिज़ार करने लगी. कुछ देर बाद ज्यूँ ही अज़ान की आवाज़ मेरे कानों में पड़ी तो मेरी जान में जान आई.

में दबे पावं चलती हुई कमरे से बाहर निकली तो नुसरत को कमरे के बाहर ही खड़ा पाया.

हमारी आँखे एक दूसरे से मिलीं तो हम दोनो के चेहरों पर एक मुस्करहट सी दौड़ गई. मगर बिना कुछ बात किए हम दोनो ने जल्दी से अपने अपने कमरे में कदम रखे और फिर दरवाज़ा बंद कर दिया.

अपने कमरे में आते ही मैने फॉरन अपने पावं से भाई की दी हुई झांझर (पायल) को उतार कर हाथ में थाम लिया. मेरा इरादा था कि में दिन को किसी टाइम इस झांझर को नुसरत के हवाले कर दूँगी.

अपने कमरे में छाई खामोशी देख कर मैने अंदाज़ा लगा लिया कि मेरा शोहर गुल नवाज़ भी मेरे भाई सुल्तान की तरह चुदाई के बाद सकून से सो रहा है.

मेरे कमरे में भी अंधेरा ही था.इस लिए में अहतियात से चलती हुई अपने बिस्तर पर आ कर अपने शोहर के बराबर लेट गई. और झांझर को अपने तकिये के नीचे रख दिया.

अपने बिस्तर पर लेटते ही मैने एक सकून भरा सांस लिया. आख़िर कार मैने रात के अंधेरे में वो काम सर अंजाम दे ही दिया था. जिस को पहली दफ़ा सोचते हुए भी में शरम से कांप गई थी.

में भाई के साथ अपनी जबर्जस्त चुदाई से बहुत थक चुकी थी. इस लिए जल्द ही मुझे नींद ने घैर लिया और में सो गई.

दूसरे दिन जब में सो कर उठी तो अपने बिस्तर को खाली पाया..मैने अपना तोलिया उठाया और बाहर बाथरूम में नहाने के लिए घुस गई.

बाथरूम में कपड़े उतार कर जब मैने शीशे में अपना जिस्म देखा तो में हेरान रह गई.

मेरे बदन पर मेरे भाई की मस्त चुदाई के असरत और नामो निशान अभी तक बाकी थे.

मेरे मम्मो पर भाई के दाँतों के काटने के निशान बाकी थे. मेरे निपल्स भी मेरे भाई की भरपूर सकिंग से सूज गये थे.

जब के नीचे मेरी रानो पर जगह जगह दाँतों से काटनेके निशान अलग होने के अलावा भाई की जबर्जस्त चुदाई ने मेरी फुद्दी को भी थोड़ा सूजा दिया था.

और भाई के लंड का जूस जोकि मेरी चूत से बाहर निकल आया था. वो भी मेरी चूत और रानो पर जमा हुआ नज़र आ रहा था.

हाईईईईईईईईईईईई भाई की मेरे साथ उलफत का ये सबूत देख कर मेरी चूत फिर मचल ने लगी.
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12-10-2018, 01:49 PM,
#17
RE: Desi Sex Kahani मुहब्बत और जंग में सब जाय�...
में ये बात खूब जानती थी. कि जो कुछ मेरे और भाई के बीच रात को हो चुका है वो अब कभी दुबारा नही होगा.

इस लिए अब में सिर्फ़ उस रात को याद कर के अपनी फुद्दी से खेलने के अलावा कुछ और करने से मजबूर थी. और इस लिए में अपनी फुद्दी में उगली डाल कर अपनी फुद्दी से खेलने लगी.

थोड़ी देर इस तरह अपने जिस्म से खुद लज़्जती करने के बाद मैने शवर लिया और फिर अपने कपड़े पहन कर बाथरूम से बाहर आ कर रसोई की तरफ चली आई.

रसोई की तरफ जाते हुए मेरा दिल धक धक कर रहा था. इस बात के बावजूद के रात को जो कुछ मेरे और भाई सुल्तान के दरमियाँ हुआ. वो रात की तन्हाई में हुआ था.

लेकिन इस के बावजूद नज़ाने क्यों मुझे अब अपने भाई का सामना करने में एक शर्म सी महसूस हो रही थी.

रोसोई में नुसरत अकेली बैठी नाश्ता बना रही थी. मुझ अंदाज़ा हो गया कि मेरा शोहर और भाई दोनो नाश्ता कर के अपने काम काज के सिलसिले में डेरे पर जा चुके हैं. ये बात जान कर मैने सकून का सांस लिया.

मुझ रसोई के अंदर आते देख कर नुसरत की तो खुशी से जैसे “आँखे” ही खिल गईं.

वो जल्दी से मेरी तरफ बढ़ी और बेताबी से पूछने लगी” क्यों बानो रानी फिर रात को अपने भाई से “ठुकवा” (चुदवा)लिया है ना”

मुझे नुसरत की बात सुन कर शरम तो बहुत आई मगर में सोच रही थी. कि अगर मैने अपनी भाई से रात को चुदवाया है तो क्या हुआ. मेरी तरह नुसरत भी तो अपने भाई से अपनी फुद्दी मरवा चुकी है.

इस लिए मैने सोचा कि पहले में इस को अपना और अपने भाई के दरमियाँ होने वाला सारा वाकीया सच सच बता दूँगी.

फिर उस से उस की और उस के भाई गुल नवाज़ की चुदाई का सारा किसा तफ़सील में नुसरत की ज़ुबान से सुन कर चस्के लूँगी.

ये ही सोचते हुए मैने नुसरत को अपनी तमाम दास्तान बयान कर दी.और साथ ही उस से अपने रात के सख़्त रवैये की माफी माँगते हुए उस के साथ देने का शुक्रिया भी अदा कर दिया.नुसरत मेरी सारी बात बहुत शौक और दिल चस्पी से सुनती रही.

“नुसरत अब तुम सूनाओ मेरे शोहर ने तुम्हे रात को तंग तो नही किया” मैने शरारती मुस्कुराहट में पूछा. में अभी उस को ये नही ज़ाहिर करना चाहती थी कि में उस के भाई गुल नवाज़ के साथ उस की चुदाई का सारा हाल खुद अपनी आँखो से देख चुकी थी.

“ सच पूछो तो रुखसाणा भाई गुल नवाज़ के साथ एक ही पलंग पर सोने के ख़याल ही से में बहुत डरी हुई थी.मगर भाई गुल नवाज़ तो कमरे में आते ही सो गया और शूकर है में अपने ही भाई के हाथों बे आबरू होने से बच गई” नुसरत मेरे मुँह पर ही झूट बोलते हुए रसोई से निकली और ये जा वो जा.

में उस के झूट को सुन कर उधर ही बुत बनी हेरान परेशान उसे जाता देखती रही.

अगर मैने खुद अपनी आँखों से उन की चुदाई का सारा मंज़र नामा ना देखा होता तो शायद में उस के झूठ पर यकीन कर लेती.

मगर मुझे ये बात समझ नही आई कि नुसरत क्यों अपनी और अपने भाई की चुदाई की बात मुझ से छुपा रही थी.

शायद वो इस बात से डर रही थी. कि कहीं में उस को ये ताना ना दूं कि जिस काम से वो मुझे मना कर रही थी. उस को वो खुद ही अपने भाई के साथ कर चुकी थी.

या फिर वो इस बात को राज़ में रख कर मुझे एक रंडी और अपने आप को सती सावित्री (इनोसेंट) साबित करना चाहती थी. 

नुसरत के रसोई से जाने के बाद मैने नाश्ता किया और घर के काम काज में लग गई.

शाम को जब मेरा शोहर और भाई सुल्तान वापिस लोटे. तो उन की हालत से लग रहा था कि आज वो दोनो शराब पी कर नही आए थे.

ये बात मेरे लिए थोड़ी हेरान कन थी. क्यों कि शादी के बाद से अब तक वो दोनो तकरीबन हर शाम ही चुस्की लगा कर घर लोटे थे.

मैने रसोई में अपने शोहर गुल नवाज़ और भाई सुल्तान को खाना दिया. 

खाना देते वक़्त में चुपके चुपके अपने भाई के चेहरे और जिस्म को देख रही थी.

भाई को देख कर मेरी नज़रों में रात वाला मंज़र दौड़ रहा था और नीचे मेरी चूत पानी पानी हो रही थी.

मैने इस से पहले लाखों दफ़ा अपने भाई को देखा था. मगर इस से पहले कभी मेरी हालत नही हुई थी.

खाने के बाद हम सब अपने अपने कमरों में चले गये. मेरी चूत बहुत गरम हो रही थी और उस को लंड की शिदत से तलब थी.

कमरे में जाते ही में अपने शोहर के लंड के उपर चढ़ गई. और उसी तरह अपने शोहर गुल नवाज़ से अपनी फुद्दी मरवाने लगी जिस तरह मेरे भाई ने काल रात मुझे अपने लौडे के उपर बैठा कर चोदा था.

आज मैने महसूस किया कि मेरी तरफ मेरा शोहर गुल नवाज़ भी एक नये जोश और वलवले से मुझे चोद रहा था.

दूसरी तरफ भाई सुल्तान कुछ काम के सिलसिले में अकेला ही शहर गया जब कि मेरा शोहर गुल नवाज़ घर में ही था. 

सारा दिन में और नुसरत घर के काम काज में मसरूफ़ थीं. जब कि मेरा शोहर गुल नवाज़ बरामदे में कुर्सी पर बैठा हाथ की फन्खि से हवा ले रहा था.

काम काज के दौरान मैने नोट किया कि मेरा शोहर गुल नवाज़ मुझ से चोरी चोरी अपनी बहन नुसरत के जिस्म का बगौर जायज़ा लेने में मगन है.

पहले तो मैने इसे अपना वेहम समझा. मगर फिर जब नुसरत कपड़े धोने के लिए घर के सहन में आई तो में जान भूज कर अपने कमरे में चली आई.

ताकि ये देख सकूँ कि मेरा ख़याल सच है या फिर सिर्फ़ मेरा वेहम है.

में कमरे में जाते ही खिड़की के पर्दे के पीछे खड़ी हो गई और छुप कर बाहर देखने लगी.

बाहर सहन में नुसरत अपनी बड़ी गान्ड मटकाती इधर उधर घूम रही थी. और पीछे से मेरा शोहर बहुत गौर के साथ अपनी बहन की थिरकती गान्ड के नज़ारे लेने में मसरूफ़ था.

मेरा शक सच निकला कि गुल नवाज़ वाकई ही अपनी बहन के बदन से अपनी आँखों को सैंक रहा था.

में सोचने लगी कि शायद उस रात गुल नवाज़ को शक हो गया हो. कि बाथरूम में उस ने जिसे चोदा है वो उस की बीवी नही बल्कि बहन थी.

इसी लिए वो अब अपनी बहन के बदन को देख कर अपना शक दूर करना चाहता हो.या फिर वो वैसे ही आज गरम हो रहा था.

थोड़ी देर कमरे में गुज़ारने के बाद में बाहर निकली तो मेरा शोहर गुल नवाज़ मुझ बाहर आता देख कर उठ कर घर से बाहर चला गया.

में भी सब कुछ भूल कर फिर से घर के कामों मे जुट गई और इसी तरह ये दिन भी गुजर गया.

अगले दिन शाम को भाई सुल्तान और मेरा शोहर गुल नवाज़ रात का खाना खाने के बाद घर से बाहर दोस्तो से मिलने चले गये.

में उस वक़्त सहन में चारपाई पर बैठी उन को बाहर जाता देखती रही.

मुझे यकीन था कि आज फिर वो पी कर ही रात को देर से घर वापिस आएँगे. इस लिए में सोचने लगी कि अपने कमरे में जा कर सो जाऊं.

अभी में चारपाई से उठने का इरादा कर ही रही थी कि इतने में नुसरत मेरे पास आन बैठी.
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12-10-2018, 01:49 PM,
#18
RE: Desi Sex Kahani मुहब्बत और जंग में सब जाय�...
नुसरत को मेरे पास बैठे हुए थोड़ी देर हो गई मगर उस ने मुझ से कोई बात नही की. लेकिन उस के अंदाज़ से पता चल रहा था कि वो मुझ से कोई बात करना चाहती है मगर कर नही पा रही.

“नुसरत लगता है तुम किसी गहरी सोच में हो,मुझे बताओ क्या बात है” मुझ से जब रहा ना गया तो मैने आख़िर कार उस से पूछ ही लिया.

नुसरत: रुखसाना में तुम से ये पता करना चाहती हूँ कि एक रात अपने भाई सुल्तान के साथ गुज़ारने के बाद क्या तुम प्रेग्नेंट हुई हो या नही?”

में:नहीं अभी तक चेक नही करवाया और ना ही मेरे अभी पीरियड्स आए हैं, वैसे तुम ऐसा क्यों पूछ रही हो नुसरत”

“वो असल मेन्ंणणन्” नुसरत कुछ कहते कहते खामोश हो गई.

में: वो क्या नुसरत?

नुसरत: वैसे तो मुझे पता है कि मेरे शोहर सुल्तान का “वीर्य” बहुत ताकतवर है और अक्सर एक दफ़ा में अपना काम दिखा देता है मगर्र्रर”

में: मगर क्या, नुसरत मुझे पहेलियाँ मत बुझाओ और खुल कर बात करो”

“वो में कहना ये चाह रही थी कि अगले दो तीन दिन बाद हमारे अम्मी अब्बू घर वापिस आ जाएँगे. और जैसा कि तुम जानती हो कि आज भी हमारे शोहर पी कर ही घर आएँगे तो अगर तुम चाहो तो एक रात दुबारा अपने भाई के साथ गुज़ार लो ताकि बच्चा होने में किसी किसम की कसर ना रहे” नुसरत ने झिझकते हुए धीमी आवाज़ में मुझे कहा.

“क्याआआआआआ” आज हेरान होने की शायद बारी मेरी थी.

नुसरत खामोश रही और उस ने मेरे “क्या” का कोई जवाब नही दिया. मुझे नुसरत की कुछ वक़्त पहले की कही हुई बात याद आ गई.

जब उस ने मुझ बताया था. कि उसे अपने शोहर सुल्तान के साथ कॉंडम लगे लंड की चुदाई का मज़ा नही आता. वो कॉंडम के बगैर चुदाई का मज़ा लेना चाहती है मगर मज़ीद बच्चे पैदा करने का ख़ौफ़ से ऐसा करने से महरूम है.

में समझ गई कि नुसरत को अपने भाई से एक दफ़ा चुदवा कर उस के लंड का चस्का लग गया है.

चस्का चस्का लगा है चस्का
बुरा है चस्का............................

क्यों कि गुल नवाज़ के साथ चुदाई में बच्चा होने का कोई डर ख़तरा नही था. इस लिए वो कॉंडम बगैर अपने भाई से दिल भर कर अपनी फुद्दी मरवा सकती थी.

“पिछली दफ़ा तो जल्दी सो जाने की वजह से गुल नवाज़ ने तुम्हे “तंग” नही किया मगर इस दफ़ा वो कुछ कर बैठा तो” मैने नुसरत को टटोलने के अंदाज़ में पूछा.

“तुम इस बात की फिकर मत करो में ऐसा कुछ नही होने दूँगी” नुसरत ने फॉरन जवाब दिया.

उस की अपने भाई से दुबारा चुदवाने की बेताबी को देख कर मेरे होंठों पर एक शैतानी मुस्कुराहट दौड़ गई.

मेरा दिल तो चाहा कि में नुसरत को बता ही दूं. कि में उस की और उस के भाई गुल नवाज़ की बाथरूम में होने वाली चुदाई को अपनी आँखों से देख चुकी हूँ. मगर फिर कुछ सोच कर खामोश हो गई.

“अगर तुम चाहती हो तो में एक रात और अपने भाई सुल्तान के साथ हम बिस्तरी कर लेती हूँ, लेकिन याद रखना कि अगर कुछ गड़बड हो गई तो सुल्तान और गुल नवाज़ हमें क़तल कर देंगे” मैने नुसरत को कहा.

ये हक़ीकत थी कि पकड़े जाने के ख़ौफ़ से इस दफ़ा नुसरत घबराई हुई थी.

“कुछ नही हो गा तुम फिकर मत करो” नुसरत ने मेरी रज़ा मंदी देख कर खुशी से मुझे तसल्ली देते हुए जवाब दिया.

फिर पहली रात की तरह हम दोनो एक दूसरे के कमरे में जा कर अंधेरे में बिस्तर पर लेट गईं.

मैने बिस्तर पर लेटने से पहले ही अपने कपड़े उतार दिए ताकि सुल्तान भाई बिस्तर पर आते साथ ही मुझ पर चढ़ दौड़े.

कुछ टाइम बाद सुल्तान भाई कमरे में दाखिल हुआ और आ कर मेरे साथ पलंग पर लेट गया.

में इस इंतिज़ार में थी कि कब मेरा भाई मुझे अपनी बाहों में ले कर अपना लंड मेरी फुद्दी में डाल दे.

मगर सुल्तान भाई के अंदाज़ से महसूस हो रहा था.कि वो आज फुद्दी मारने के मूड में नही था.

इस लिए वो मेरे साथ लिपटने की बजाय बिस्तर की दूसरी तरफ करवट बदल कर सोने की कॉसिश करने लगा.

भाई का ये रवईया देख कर मेरे अरमानो पर तो जैसे ओस पड़ने लगी.

मुझे लगने लगा कि आज मेरी पानी छोड़ती चूत को अपने भाई का लंड शायद नसीब ना हो.

अब सबर करने के अलावा क्या हो सकता था. इस लिए में भी अपनी फुद्दी को तसल्ली देती हुई अपनी आँखे बंद कर के सोने की तैयारी करने लगी.

अभी मेरी आँख पूरी तरह लगी भी नही थी. कि साथ वाले कमरे में से आती हुई हल्की सी सिसकियों और पलंग की थॅप थॅप के साथ दीवार से टकराने की आवाज़ ने एक दम मेरी आँख खोल दी.

ये आवाज़े सुन कर में फॉरन समझ गई कि दूसरे कमरे में मेरा शोहर गुल नवाज़ अपनी बहन नुसरत की फुद्दी पूरे ज़ोरो शॉरो से मारने में मशगूल है.

अभी में इन आवाज़ो को सुन कर मज़ीद गरम होना शुरू हुई थी. कि मेरे पीछे से मेरे भाई ने करवट बदल कर मेरे नंगे बदन को अपनी बाहों में भर लिया और बोला” अगर तुम्हारा भाई मेरी बहन को सोने नही दे रहा तो में क्यों उस की बहन को सकून से सोने दूं”

ज्यूँ ही सुल्तान भाई के हाथ मेरे नंगे बदन से टकराए वो अंधेरे ही में हैरान होते हुए बोला” ओह हो बहन तो बहन आज तो मेरी बेगम चुदवाने के लिए पहले से ही तैयारी कर के बैठी हुई है”

साथ ही भाई के अपने कपड़े उतारने की आवाज़ मेरे कान में पड़ी और कुछ देर बाद सुल्तान भाई मेरी टाँगें उठा कर साथ वाले कमरे से आती आवाज़ के साथ तान से तान मिला कर मुझे चोदने में मसरूफ़ हो गया.

उस रात भी मेरे भाई ने मुझ मुक्तिलफ स्टाइल में भरपूर तरीके से चोद चोद कर मेरी प्यासी चूत को अपने लंड के पानी से सराब किया और मेरी बच्चे दानी में अपना बीज बो दिया.

दूसरी सुबह फिर उसी तरह में और नुसरत अज़ान के वक़्त वापिस अपने अपने कमरों में चली आईं.

सुबह में देर तक सोती रही और जब सो कर उठी तो दोपहर का वक़्त हो रहा था.

मैने बिस्तर से उठते वक़्त अपने बालों की क्लिप को तलाश करने के लिए तकिये के नीचे हाथ मारा तो क्लिप के साथ साथ सुतलान भाई की दी हुई पायल भी मेरे हाथ लग गई. जो कि में नुसरत को देना भूल गई थी.

मैने सोचा कि में पायल को दुबारा तकिये के नीचे रखने की बजाय क्यों ना इस को पहन लूँ. और जब नुसरत मुझे मिले गी तो उस को उतार कर दे दूँगी.

ये ही सोच कर मैने वो पायल अपने पावं में बाँध ली और फिर अपने बलों में क्लिप लगाती कमरे से बाहर चली आई.

मैने कमरे से बाहर निकल कर देखा तो घर में कोई भी नही था.

गुल नवाज़ और सुल्तान भाई के बारे में तो मुझे यकीन था कि वो डेरे पर चले गये होंगे. 

जब कि नुसरत के बारे में मुझे शक था कि वो भी शायद गुल नवाज़ और सुल्तान को लस्सी पानी देने के लिए डेरे पर गई हो गी.

मुझे भूक बहुत लगी हुई थी. इस लिए मैने नहाने से पहले चाय के साथ रस ली और फिर नहाने के लिए बाथरूम में जा घुसी.

नहाने के बाद मैने अपने जिस्म को पूरा खुसक भी ना किया और थोड़े गीले बदन पर ही अपने कपड़े पहन कर बाथरूम से बाहर निकल आई.

जब में बाथरूम से बाहर निकली तो उस वक़्त मेरी कमीज़ मेरे गीले बदन से चिपके होने की वजह से मेरे गुदाज मम्मे मेरी कमीज़ में से बहुत ज़्यादा नज़र आ रहे थे.

जब कि बाथरूम के फर्श पर पानी पर खड़ा होने की वजह से मैने अपनी शलवार को थोड़ा उँचा कर के बाँधा हुआ था. जिस वजह से मेरी टाँगों की पिंदलियां और टखने नंगे हो रहे थे.

में अपने पावं में पड़ी पायल को” छन छन” की आवाज़ में छनकाती ज्यूँ ही बाहर निकली तो मेरी नज़र बाहर खड़े अपने भाई सुल्तान पर पड़ी.

सुल्तान एक बुत की तरह मेरे सामने जमा खड़ा था और एक हेरतजदा चेहरे के साथ उस की नज़रे मेरे पावं में पहनी हुई पायल पर जमी थीं.

सुल्तान भाई की नज़र अपने पावं में पड़ी पायल की तरफ़ जमी देख कर मेरे चेहरे का रंग ही उड़ गया.

अब हालत ये थी कि हम दोनो बहन भाई एक दूसरे के सामने दम ब खुद खड़े थे.

और सुल्तान भाई की नज़रे तेज़ी के साथ मेरे पावं से ले कर चेहरे तक जा कर मेरे पूरे जिस्म का मुयाइना कर रही थीं.

“ये”झांझर” (पायल) तुम्हारे पास कैसे आई” सुल्तान भाई ने सख़्त लहजे में मुझ से सवाल किया.

“ वो भाईईइ वूऊ” मैने हकलाते हुए जवाब दिया.

सही बात ये थी कि भाई के सवाल का मुझ से कोई जवाब नही बन पा रहा था.

मुझे यूँ हकलाते देख कर सुल्तान भाई जैसे सारा मामला बिना बताए ही समझ गये थे.

कि रात के अंधेरे में जिसे उस ने अपनी बीवी समझ कर तोहफे में पायल पहनाई थी. और फिर दिल भर कर उस की फुद्दी से लुफ्त अंदोज़ हुआ था .वो उस की बीवी नही बल्कि उस की अपनी सग़ी बहन निकली.

और शायद ये ही बात सोच सोच कर सुल्तान भाई का चेहरा गुस्से से लाल पीला हो रहा था.

इधर मेरी ये हालत थी. कि अपनी चोरी इस तरह पकड़े जाने पर में एक ज़िंदा लाश की तरह अपने भाई के सामने खड़ी थी.

और में ये सोच रही थी. कि काश मेरे पावं के नीचे से ज़मीन फट जाय और में उस में ज़िंदा दफ़न हो जाऊ.

इस से पहले कि सुल्तान भाई मज़ीद कुछ कहता या पूछता. मैने हिम्मत कर के अपने आप को संभाला और अपनी आधी नंगी होती हुई छातियों को अपने दुपट्टे से छुपाती अपने कमारे की तरफ भाग निकली.

कमरे में दाखिल हो कर मैने अपना दरवाज़ा बंद करने की कोशिस की मगर सुल्तान भाई ने बाहर से एक ज़ोरदार धक्का मार कर कमरे के दरवाज़े को खोल दिया.

में भाई के गुस्से से डर कर अपने बिस्तर पर जा बैठी और भाई से नज़रें चुरा का थर थर काँपने लगी.
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12-10-2018, 01:50 PM,
#19
RE: Desi Sex Kahani मुहब्बत और जंग में सब जाय�...
सुल्तान भाई तेज़ी से मेरे करीब आया और आते साथ ही मुझे दो चार ज़ोरदार किसम के थप्पड़ रसीद करते हुआ गुस्से में फूँकारा” मुझे तो तुम्हे बहन कहते हुए भी घिन आती है, आ जाने दो गुल नवाज़ को,आज हम दोनो ने तुम्हारे टोटे टोटे ना किए तो कहना”.

भाई के थप्पड़ और जान से मार देने की धमकी सुन कर मेरे हाथ पावं फूल गये.

मुझे जिस बात का डर था वो ही बात अब होने जा रही थी.

मेरा सारा राज़ भाई के सामने खुल गया था. और अब मुझे पता था कि मेरी इस हरकत का अंजाम सिवाय मौत के कुछ और नही हो गा.

मौत तो अब मुझे अपने सामने आती दिखाई दे रही थी. मगर फिर भी में आख़िरी कॉसिश के तौर पर रोते हुए भाई के कदमों में गिर गई और उस के पावं पकड़ लिए” भाई खुदा के लिए मुझे माफ़ कर दो मैने जो कुछ भी किया निहायत मजबूर हो कर किया है”

“अपने नापाक जिस्म को मुझ से दूर करो ज़लील औरत” भाई गुस्से में मुझे दुतकारते हुआ चीखा.

“ भाई एक दफ़ा मेरी सारी बात तो सुन लो फिर चाहे मुझे क़तल कर देना”मैने भाई के पावं और मज़बूती से पकड़ते हुए कहा.

मेरी आँखों से ज़रो कतर आँसू जारी थे और रोते रोते मेरी आँखे सुराख होने लगीं.

“अच्छा उठ कर बिस्तर पर बैठो और बको कि तुम ने ये जॅलील हरकत क्यों की” मेरा इस तरह रोने और मिन्नत समझाहत से शायद सुल्तान भाई का दिल पसीज गया. और उन्हो ने मुझ फर्श से उठा कर बिस्तर पर बैठाते हुए कहा और खुद भी मेरे साथ ही बिस्तर पर बैठ गया.

बिस्तर पर बैठे हुए मैने अपना सर झुका कर आहिस्ता आहिस्ता शुरू से ले कर आख़िर तक सारी बात सुल्तान भाई को सुना दी.

मैने अपनी बात सुनाते वक़्त पूरी कॉसिश की कि तफ़सील बयान करने के दौरान कोई गंदा लफ़्ज मेरे मुँह से ना निकल पाए.

सुल्तान भाई मेरा भाई होने से पहले एक मर्द था.

और एक मर्द होने के नाते मेरी बातों को सुन कर उस का मर्दाना पन का उभर आना एक बिल्कुल फितरती अमल था.

शायद ये मेरी बातों की गर्मी का ही असर था. कि में अब अपने भाई के लहजे में थोड़ी नर्मी और उस के जिस्म के अंदाज़ को थोड़ा बदला हुआ महसूस करने लगी थी.

“वैसे उस रात तुम्हारी शेव ना होने की वजह से मुझे थोड़ा शक तो हुआ था कि शायद ये मेरी बीवी नुसरत नही है. मगर इस के बाद तुम ने मुझ सोचने समझने का मोका ही नही दिया. लेकिन क्या गुल नवाज़ को भी इस बात का शाक नही हुआ कि उस के साथ बिस्तर पर उस की बीवी नही बल्कि उस की बहन सो रही है” सुल्तान भाई मुझ से सवाल किया.

और साथ ही गैर इरादी तौर पर आहिस्ता से अपना दायां (राइट) हाथ आगाए बढ़ा कर मेरी रेशमी शलवार के उपर से मेरी गोश्त से भरपूर रान पर रख दिया.

सुल्तान भाई का इस तरह अपनी रान पर हाथ रोकने और साथ ही उन के मुँह से पहली बार अपनी चूत की शेव के मुतलक बात सुन मुझ थोड़ी शरम महसूस हुई.

“भाई मुझे इस बात का तो पता नही मगर में उन दोनो को उस रात बाथरूम में प्यार करता हुआ देख चुकी हूँ” मुझे ना चाहते हुए भी सुल्तान भाई को नुसरत और गुल नवाज़ की बाथरूम वाली बात बताना पड़ी.

क्यों कि में सोच रही थी. कि शायद ये बात जान कर सुल्तान भाई का मुझ पे आने वाला गुस्सा थोड़ा ठंडा हो जाए.

कि अकेले मुझ से ही ये गुनाह सर्ज़ाद नही हुआ. बल्कि जाने अंजाने में गुल नवाज़ और नुसरत भी एक दूसरे के साथ ये हसरत कर चुके हैं.

“क्य्ाआआआआआआआआ यानी मेरे साथ साथ गुल नवाज़ भी बहन चोद बन चुका है ” मेरी बात सुन कर सुल्तान भाई का मुँह खुला का खुला रह गया.

हालाकी में अंधेरे कमरे में दो दफ़ा अपने भाई से अपनी फुद्दी मरवा चुकी थी.

मगर फिर भी आज यूँ दिन की रोशनी में अपने साथ जुड़ कर बैठे भाई के मुँह से खुलम खुल्ला इस किसम के इलफ़ाज़ सुन कर मुझे शरम आ रही थी.

“हां भाई वो दोनो भी ये सब कुछ कर चुके हैं” मैने अपने खुसक होते हुए होंठों पर अपनी ज़ुबान फेरते हुए भाई को जवाब दिया.

“रुखसाना में सारी बात समझ चुका हूँ.मगर फिर भी जो कदम तुम ने मजबूरी की हालत में उठाया वो एक बहुत बड़ा गुनाह है”सुल्तान भाई बोला.

“ठीक है भाई अगर अपना घर बचाना एक गुनाह है तो मैने ये गुनाह किया है. अब तुम चाहो तो मुझ सज़ा के तौर पर फाँसी चढ़ा दो” इतना जवाब दे कर में फिर रोने लगी.

“ अच्छा जो हो गया सो सो गया अब तुम ये रोना धोना बंद करो”. मुझ दुबारा रोता देख कर सुल्तान भाई के दिल में शायद “रहम” आ गया.

और भाई ने मेरी रान से हाथ हटा कर अपने बाज़ू को मेरे जिस्म के गिर्द लपेटा और मेरे सर को अपने चौड़े कंधे पर रख लिया.और मेरे आँसू पोछने के लिए प्यार से अपना हाथ मेरे गालों पर फेरने लगा. 

अपने साथ अपने भाई का बदलता हुआ सलूक देख कर में ये सोचने लगी कि रात के अंधेरे में दो दफ़ा तो में पहले ही अपने भाई से चुदवा चुकी हूँ.

और अब जब कि मेरा सारा राज़ भी सुल्तान भाई के सामने खुल ही चुका है. तो फिर क्यों ना में हिम्मत कर के इस मोके से फ़ायदा उठा लूँ. और अपने भाई को पूरी तरह अपने काबू में कर के अपनी जान बचा लूँ.

इस लिए मैने इस मोके को “गनीमत” जानते हुए अपना रोना बंद कर दिया. और सुल्तान भाई के मज़ीद नज़दीक होते हुए सख्ती के साथ उस के जिस्म से लिपट गई.

मेरे इस तरह लीपटने से मेरे बड़े बड़े मम्मे सुल्तान भाई के जिस्म के साथ टच होने लगे.

जब कि इसी दौरान अब मैने अपना हाथ सुल्तान भाई की शलवार के उपर से उन की टाँग पर रख दिया था.

मुझे यूँ अपने साथ चिपटा देख कर भाई ने प्यार से मेरे सर के बलों में एक प्यारा सा बोसा (किस) दिया.

में भाई के इस प्यार को पा कर अब ये बात ब खूबी जान चुकी थी. कि सुल्तान भाई का गुस्सा अब रफू चक्कर हो गया है.

“रुखसाना मुझे एक बात अभी तक समझ नही आई कि तुम ने इस काम के लिए मेरा चुनाव ही क्यों किया. क्या तुम और के साथ ये गुनाह नही कर सकती थी” सुल्तान भाई ने मुझ से फिर एक सवाल पूछा.

“भाई आप जानते हो कि गाँव में कोई भी बात राज़ नही रह सकती और जब भी ये बात खुलती.तो ना सिर्फ़ मेरा बल्कि हमारे पूरे खानदान का इस गाँव में जीना मुश्किल हो जाता” मैने अपने हाथ को आहिस्ता आहिस्ता भाई की मज़बूत टाँग के उपर घुमाते हुए जवाब दिया.
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12-10-2018, 01:50 PM,
#20
RE: Desi Sex Kahani मुहब्बत और जंग में सब जाय�...
सुल्तान भाई की शलवार के उपर से मेरा हाथ अब आहिस्ता आहिस्ता सरकता हुआ भाई के लंड की तरफ जा रहा था.

मेरे हाथ की इस हरकत को शायद भाई ने भी महसूस कर लिया था. जिस की वजह से शायद भाई का सोया हुआ लंड उस की शलवार में अपनी नींद से जागने लग गया.

साथ ही साथ ना चाहने के बावजूद अपने लंड को यूँ अपनी शलवार में खड़ा होता हुआ महसूस कर के सुल्तान भाई का जिस्म अब बेचैनी के आलम में थोड़ा थोड़ा टेन्स हो कर अकड़ने सा लगा था.

दूसरी तरफ मेरी इस हरकत से महज़ोज़ होते हुए मेरी अपनी फुद्दी भी अपना पानी छोड़ने लगी.

“रुखसाना ठीक है कि तुम ने ये कदम बहुत मजबूरी की हालत में उठाया है, मगर ये तो सोचो कि हम दोनो बहन भाई हैं और ये बहुत बड़ा गुनाह है जो तुम ने किया है”भाई अपनी फूलती हुआ सांस को संभालते हुए बोला.

अब मेरा हाथ सुल्तान भाई की शलवार के उपर से भाई के खड़े होते हुए लंड के बिल्कुल नज़दीक पहुँच चुका था.

“वो तो ठीक है मगर आप ये तो सोचो कि हम भाई बहन होने से पहले एक औरत और मर्द हैं.अगर मेरा शोहर मुझे एक बच्चा देने के क़ाबिल नही तो आप तो मुझे दे सकते हो ना”इस के साथ ही मैने हिम्मत की और भाई के लंड के नज़दीक पहुँचे हुए हाथ को आगे बढ़ा कर भाई के लंड पर रख दिया.

ज्यूँ ही मेरे हाथ ने शलवार के उपर से सुल्तान भाई के तने हुए लंड को अपनी गिरफ़्त में लिया भाई के मुँह से एक सिसकी भरी आवाज़ निकल गई’ हाईईईईईईईईईईईईईईईई” " उफफफफ्फ़ ये मत भूलो कि हम बहन भाई हैं और ये सब कुछ जो तुम कर रही हो ये ग़लत है. पागल मत बनो रुक जाऊओ रुखसानाआआआआआआआ”.सुल्तान भाई मुझे आगे बढ़ने से रोकने की नाकाम कॉसिश कर रहा था.

“अच्छा भाई में ये सब नही करती मगर ये बता दो कि किया आप को अच्छा लगे गा कि में बाहर के किसी मर्द के साथ ये सब करू “?

मैने सुल्तान भाई के लंड को अपनी गिरफ़्त से आज़ाद करते हुए पीछे हटने की कोशिस की.

मेरा इस तरह करने की दो वजह थीं. एक तो मैने ये बात कह कर भाई की गैरत को ललकारा था.

दूसरा ये कि में देखना चाहती थी. कि मैने अपनी बातों और हरकत से जो शोला अपने भाई के तन बदन में सुलगाया है. उस ने भड़क कर आग की शकल इकतियार की है कि नही.

वैसे सयाने सही कहते हैं. कि मर्द आख़िर मर्द ही होता है.

उस को चोदने के लिए एक मोरी (चूत) की ज़रूरत होती है. और जब उस का लंड अकड कर खड़ा हो जाता है तो फिर वो कोई परवाह नही करता कि ये मोरी बीवी की है या बहन की.

सुल्तान भाई ने एक लम्हे के लिए मेरी आँखों में आँखें डाल कर कुछ सोचा.

शायद वो ये सोच रहा था. कि जब वो अंधेरे में दो दफ़ा अपनी बहन की चूत को हर अंदाज़ में चोद चोद कर अपना बीज अपनी बहन की कोख में पहले ही डाल चुका है. तो अब क्यों फरिश्ता बनने का नाटक और तकल्लूफ किया जाय. 

और पाकिस्तानी मूवी के टाइटल“एक गुनाह और सही” की तरह एक और गुनाह करने में क्या हर्ज है
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