Incest Kahani दीदी और बीबी की टक्कर
10-15-2019, 12:12 PM,
#1
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दीदी और बीबी की टक्कर

दोस्तो एक और नई कहानी शुरू कर रहा हूँ जो आप को पसंद आएगी तो चलिए दोस्तो कहानी की तरफ चलते हैं कहानी क्च यूँ है ....................

मैं राज अपनी बेहन अनिता ऑर अपनी माँ के साथ कोलकाता मे रहता हूँ
हम ग़रीब फॅमिली से बिलॉंग करता है मेरा मकान भी कोई बड़ा या फ्लेट वाला नही है-केवल 2 बेडरूम एक किचन एक टाय्लेट बाथरूम है जो कि कामन नही है
बीच मे एक हॉल है जिसमे कि एक सोफा रखा हुआ है

मेरे पापा इस दुनिया मे नही है वो हमे छोड़ कर बहूत पहले ही चले गये है माँ एक गवर्नमेंट स्कूल मे टीचर थी लेकिन अब माँ से ज़्यादा चला नही जाता तो मैने ऑर दीदी ने उनका जॉब छुड़ा दिया है पहले तो माँ नही मानी लेकिन बाद मे मान गयी वैसे मैं अकाउंट मॅनेजर हूँ दीदी सेल्फ़ डिपार्टमेंट मे है दीदी के चलते ही हमारे घर का खर्चा बढ़िया से चलता है
दीदी की शादी हुई थी लेकिन दीदी के पति को दीदी बिल्कुल पसंद नही थी उस पर दीदी की सास भी दीदी को बांझ कहकर ताने देती थी तो 3 साल बाद ही दीदी को जीजा जी ने तलाक़ दे दिया तलाक़ के बाद दीदी बहूत ही टूट गयी लेकिन बाद मे उन्होने सेल्फ़ डिपार्टमेंट मे जॉब कर ली तब से हम बहूत ही मस्ती मे रहते है वैसे दीदी माँ के साथ सोती है ऑर मैं अकेला सोता हूँ .............
............................................
मैं जैसे ही सुबह उठा बाथरूम मे से फ्रेश होकेर बाहर आया ऑर सोफे पर बैठ गया तभी दीदी चाय ले आई मैं चाय पीने के बाद जैसे ही सोफे पर से उठा तो मेरे लिंग मे दर्द सुरू हो गया ऑर मेरे मूह से चीख निकल गयी दीदी....

दीदी-क्या हुआ राज क्यो चिल्ला रहा है

राज- दीदी बहूत ही दर्द हो रहा है

दीदी- कहाँ दर्द हो रहा है कुच्छ बताएगा या इसी तरह चिल्लाएगा

राज-नही दीदी मुझे बहूत ही शरम आ रही है मैं तुम्हे नही बता सकता

तभी माँ भी आ गई माँ आते ही-क्या बेटा कहाँ दर्द हो रहा है

राज-नही माँ मुझे शर्म आ रही है

दीदी-जल्दी से बता नही तो मारूँगी खींच कर एक हाथ

राज-दीदी दरअसल वो दीदी वो ...मेरे सूसू वाली जगह पर बहूत ही दर्द हो रहा है

दीदी-इस तरह बता ना कि तेरे लंड मे दर्द हो रहा है तो बोल रहा है कि सस्यू वाली जगह पे दर्द हो रहा है

राज-दीदी जल्दी से कुच्छ करो बहूत दर्द हो रहा है

दीदी-अच्छा तू रुक मैं अभी आती हूँ

उसके बाद दीदी माँ के साथ उनके रूम मे चली गयी थोड़ी देरी वापस आ गई

दीदी साड़ी ब्लाउज पहनी हुई थी मैं ऑर दीदी रूम से बाहर निकले टॅक्सी पकड़ कर हॉस्पिटल की तरफ चल दिए अभी सुबह के 8:00 रहे थे दीदी ने टॅक्सी को एक बैद्य जी की दुकान के सामने रुकवाया दीदी ने टॅक्सी वाले को किराया दिया ऑर हम बैद्य जी के पास आ गये बैद्य जी कही जा रहे थे

बैद्य जी क्या बीमारी है

दीदी-जी इनको लिंग मे दर्द है

बैद्य जी ने मुझे एक टेबल के उपर लिटाया दीदी रूम से बाहर चली गयी मैं अपना पॅंट ऑर अंडरवेर को घुटनो तक सरका के लेटा हुआ था फिर बैद्य जी ने लंड को अपने हाथ मे पकड़ा चमड़ी को नीचे खींच कर सुपाडे के उपर एक दवा लगा दी और थोड़ी देर सहलाने लगे थोड़ी देर मे ही मेरे लंड से पिचकारिया निकलकर गिर पड़ी ओर मेरा सारा दर्द गायब हो गया मेरे वीर्य से बैद्य जी का सारा हाथ भर गया मैं उठा अंडरवेर ऑर पॅंट पहन लिया बैद्य जी ने अपना हाथ सॉफ कर लिया

बैद्य जी-एक बताऊ बेटा तुम्हारा लिंग बिल्कुल छोटा है

तुम्हारी पत्नी तुमसे माँ नही बन पाएगी

राज-ये आप क्या कह रहे है क्या इसका कोई उपाय नही है

बैदी जी-उपाय है बेटा लेकिन थोड़ा कठिन है तुम कर पाओगे

राज- आप बताइए तो सही मैं ज़रूर कर लूँगा

बैधजी-तो ठीक है मैं पूरे एक महीने का दवा देता हूँ तुम इसको सुबह ऑर शाम को हल्के हाथो से मालिश करना लेकिन एक बात और मालिश करते समय तुम्हारा पानी छूटना चाहिए जब तुमको लगे कि तुम्हारा पानी छूटने वाला है तो तुम रुक जाना
ऑर दूसरी दवा को रोज सुबह दूध के साथ खा लेना

राज-ठीक है बैद्य जी लेकिन आप कही जा रहे है क्या

बैद्य जी-हाँ बेटा मैं इस सहर को छोड़ कर हमेशा-हमेशा के लिए जा रहा हूँ तुम चिंता मत करना और देखना एक माह के बाद तुम किसी भी औरत की चीख निकलवा दोगे एक ऑर बात तुम्हारा लंड एक बार अगर खड़ा हो जाएगा तो बिना पानी निकले शांत नही होगा

राज-ठीक है तो मैं चलता हूँ फिर मैने बैद्य जी को उनका बिल दिया ओर दीदी बाहर खड़ी थी तो उनके साथ घर आ गया दीदी ने पुछा तो मैने बता दिया कि दर्द नही है लेकिन ये नही बताया कि लिंग बढ़ाने वाली दवा लिया हूँ
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10-15-2019, 12:12 PM,
#2
RE: Incest Kahani दीदी और बीबी की टक्कर
खैर हम जल्दी से घर पर आ गये 10:00 रहे थे माँ हमारा वेट कर रही थी मैं जाकर माँ के पास बैठ गया दीदी किचन मे खाना बनाने चली गयी मैने माँ से बता दिया कि दर्द मे अब आराम है

माँ-बेटे तुझसे एक बात पुछनि है

राज-क्या पूछनी है

माँ-देख बेटा अब मैं बूढ़ी हो गयी हूँ हरदम मेरा तबीयत खराब रहती है तो मैं चाहती हूँ कि तू शादी कर ले कब तक अकेला रहेगा खाना बनाने भी दिक्कत होती है तेरी दीदी भी ड्यूटी पे चली जाती है तू भी चला जाता है तो क्या मेरी एक अंतिम इच्छा पूरी नही करेगा

राज-ठीक है माँ जब तुम्हारा यही इच्छा है तो मुझे कोई इतराज नही है
माँ ख़ुसी के मारे उछल पड़ी मेरे माथे पर धीरे से किस कर दी

उसके बाद दीदी ने खाना बना दी हम ने मिलकर खाना खाया ऑर मैं अपने रूम मे चल आया फोन करके बता दिया कि आज मैं ऑफीस नही आऊंगा उसके बाद मैने अपने लिंग पर दवा लगाई ऑर सो गया उस्दिन कुच्छ नही हुआ दूसरे दिन भी मैं माँ दीदी के साथ लड़की देखने के लिए चले गया खैर लड़की वाले भी कोई धनी नही थे वो हम से भी ज़्यादा ग़रीब थे लड़की जब आई तो मेरे दिल की धड़कन ही रुक गयी माँ ने नाम पुछा तो पता चला कि लड़की का नाम स्वेता है उसकी एज लगभग 23 बर्ष थी बहूत ही सुंदर चेहरा था बहूत ही भोली-भाली थी नैन नकश बहूत ही तीखे थे

खैर शादी का दिन तय हो गया कि एक माह बाद शादी होगी

उसके बाद हम घर पर आ गये फिर डेली का काम शुरू हो गया रोज ड्यूटी पर ड्यूटी से घर . मेरे लंड पर रोज बैद्य जी की दवाई लगाना ऑर दवाई खाने का नतीज़ा एक माह निकला मेरा लंड बहूत ही मोटा ऑर बहूत ही लंबा हो गया
एक माह बीतते ही पूरे रस्मो रिवाजो के साथ मेरा शादी हो गयी स्वेता मेरी दुल्हन बन कर मेरी घेर पर आ गई सुबह से मेरा लंड परेशान कर रहा था

ज़यादा मेहमान नही आए थे जो आए थे वो शाम तक चले गये रात हुई मैं थोड़ा सा खाना खाया ऑर सोने के समय रूम मे गया स्वेता सुहाग सेज़ पर इंतज़ार कर रही थी मैने दरवाजे को बंद कर दिया

स्वेता घूँघट डाले बैठी हुई थी मैं जल्दी से पूरे कपड़े निकल कर केवल अंडरवेर में हो गया जैसे ही मैने स्वेता का घूँघट उठाया तो वो नीचे उतरी मेरे पैर छुए मैने उसको कंधो से पकड़ कर उपर उठाया स्वेता ने टेबल पर से दूध उठाया मेरे मूह मे लगा दी वैसे दूध मेरा मनपसंद चीज़ है तो मैं एक ही साँस मे पी गया स्वेता फिर से बेड पेर बैठ गयी

राज-मुझे इस रात का काई सालों से इंतेज़ार था. तुम मेरे सपनो की रानी जैसी हो.

स्वेता- मुझे और ज़्यादा शाइ मत कीजिए ना प्लीज़. वैसे ही मैं शर्म से सिकुड़ी जा रही हूँ.

राज-तुम सिकुड़ी जा रही हो और मेरा कुछ खड़ा हुआ जा रहा है.

स्वेता- हाए राम ऐसा मत बोलिए मुझे बहुत शर्म आती है.

राज-अब तुम्हें शरमाने की ज़रूरत नही है. मेरे साथ तुम बिल्कुल टेन्षन फ्री हो जाओ और खुद भी मज़े करो और मुझे भी मज़े दो.

स्वेता- तो क्या खड़े खड़े ही मज़े ले लेंगे यहाँ बेड पे आइए ना.

मैं बेड पे गया और मैं सिर्फ़ अंडरवेर में था उसने आखें नीचे कर ली उसने शादी वाली साड़ी तो पहले ही उतार ली थी. खाना बनाते टाइम वो सलवार सूट में थी मैने उसका कुर्ता उठाया और उसकी सलवार के नाडे को हाथ से पकड़ के खीचा वो खुल गया मैने धीरे से उसकी सलवार को उतारा उसने अपनी कमर उठा के हेल्प की और सलवार खिसकता हुआ उतर गया.
वो सिर्फ़ कुर्ते में थी और पैर सिकोड के बैठी थी.जिससे उसकी जांघे दिख रही थी बहुत ही सेक्सी. मैं सोच रहा था कि धीरे धीरे मज़े ले ले के सुहागरात मनाउन्गा. लेकिन मेरा कंट्रोल ख़तम सा हो रहा था. मैने जब उसका कुर्ता उतारा तो उसके ब्रा के अंदर से चुचियों ने मेर स्वागत किया और यह मेरे सबर की इंतेहा हो गयी. मैने उसे चूमा भी नही.
चाटा भी नही, सीधे अपनी अंडरवेर उतारी मेरा लंड तो पहले ही खड़ा था और बहुत ही भयानक लग रहा था उसने देखा तो उसकी साँस रुक गयी. उसने कहा भी कि जल्दी मत कीजिए प्लीज़ मैं वर्जिन हूँ बहुत दर्द होगा लेकिन अब मैं कुछ भी नही सुन पा रहा था. मेरे दिमाग़ ने काम करना बंद कर दिया था. मेरा लंड और मेरी मेरी हवस मुझ पे हावी हो चुकी थी मैने उसकी टांगे फैला दी.

वो अपने हाथ से अपनी चूत छुपा रही थी और मुझे धीरे धीरे करने को कह रही थी.मैने जिंदगी में कभी किसी लड़की को नंगी नही देखा था. और आज तो मेरा दिमाग़ बिल्कुल ही बंद हो चुका था. मैने उसकी एक ना सुनी और उसकी पैंटी उतार दी. और सीधे उसकी टाँगों के बीच आ गया वो मना करती रही कि धीरे करो धीरे करो. लेकिन मैं नही माना. मैने एक धक्का मारा और मेरा आधा लंड घुस गया उसकी चूत में.


वो इतनी ज़ोर से चिल्लाई कि मुझे लगा मेरे कान फट जाएँगे.मेरे अंदर का हैवान इतना हावी था कि मैने उसके दर्द की ज़रा भी परवाह नही की और लगातार धक्के मारता रहा. उसकी चूत बहुत ही टाइट थी और मेरा लंड बहुत ही मोटा था.मैं धक्के मारे जा रहा था और वो चीखे जा रही थी. करीब 10 मिनिट की धुँआधार चुदाई के बाद मैने पानी निकाल दिया उसकी चूत में. अब जाकर मेरा लंड कुछ ढीला पड़ा.

मैने चूत से लंड निकाला तो खून की धार बह निकली उसे बहुत ही ज़्यादा दर्द हो रहा था. एक बार झड़ने के बाद मेरा दिमाग़ कुछ ठिकाने पे आया तो मुझे एहसास हुआ कि मैने उसे बहुत दर्द दिया है. मैने माफी माँगी लेकिन वो कुछ न बोली. वैसे ही बेजान पड़ी रही और रोती रही. मुझे उसकी हालत देख के बहुत दुख हुआ. मैं तुरंत पानी गरम कर के लाया और कपड़ा गीला कर के उसकी चूत को सेंकने लगा.

वो चुपचाप रोती रही, मैं बार बार उससे बात करने की कोशिश करता रहा लेकिन उसने मुँह नही खोला. उसके आँसू देख के मुझे बहुत ही ज़्यादा दुख हुआ.

मैने उसकी चूत को सेंका जिससे उसकी चूत को आराम मिलना चाहिए था लेकिन ऐसा कुछ नही हुआ. उसकी चूत बुरी तरह सूज गयी थी और रह रह के खून निकल रहा था. मैने उसकी तरफ़ देखा तो पाया कि वो सो चुकी है.

मुझे थोड़ी शांति मिली. मुझे लगा कि शायद कल तक उसका दर्द कुछ कम हो जाए. वो बिना कपड़ों के ही सो रही थी. और उसकी टाँगें फैली हुई थी. उसे इस कंडीशन में देख के मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा. मुझे अभी भी बहुत गिल्ट था कि मैने उसे इस बुरी तरह से पेला.लेकिन लंड कुछ और ही सोच रहा था. मैने उसकी चूत को देखा तो उसमे से अब खून नही निकल रहा था.

मेरे लंड का पानी धीरे धीरे उसकी चूत से बाहर रिस रहा था. मेरा लंड पूरा तन गया. मैने बहुत कंट्रोल किया कि अब मैं इसे और नही चोद सकता. मैं बाथरूम में आया और मूठ मार ली. मेरा दिमाग़ फिर से शांत हुआ. लेकिन दिल ही दिल में इस बात की खुशी थी कि जिंदगी में पहली बार चुदाई की है और अब तो मैं जब चाहे अपनी बीवी को चोद सकता हूँ. मैं चुपके से उसकी साइड में लेट गया और सो गया.

बड़ी गहरी नींद में थे हम दोनो तभी डोरबेल बजी.मेरी नींद खुली तो मैने देखा कि उसकी आँखें भी खुली हुई है और वो फिर से रो रही है. मैने कहा क्या हुआ? तो वो बोली कि बहुत ज़्यादा दुख रहा है.आप तो पूरे जानवर हैं. मैने फिर से माफी माँगी और कहा कि अगली बार मैं ध्यान रखूँगा कि उसे दर्द ना हो. उसने कहा कि वो खड़ी नही हो पाएगी तो मैं उठा और गेट खोलने गया. मैने घड़ी देखी तो सुबह के 11 बज चुके थे डोर खोला तो माँ और दीदी बाहर खड़े थे.
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10-15-2019, 12:12 PM,
#3
RE: Incest Kahani दीदी और बीबी की टक्कर
दीदी ने मुझे छेड़ा और कहा कि इजाज़त हो तो अंदर आ जाए या फिर से होटल मे जाए? मैने मुस्करा दिया.वो दोनो अंदर आ गये. तभी अंदर से स्वेता की आवाज़ आई. मैं अंदर गया तो उसके कहा कि मुझे कपड़े तो पहना दीजिए.मैं अभी भी नंगी ही हूँ. मैने कमरे का गेट बंद किया और उसे कपड़े पहनाने लगा. मैं उससे बार बार कह रहा था कि आगे से ऐसा नही होगा.
और वो किसी से कुछ ना कहे वो बोली आप मेरे पति हैं मैं आपके खिलाफ किसी से कुछ कहने का सोच भी नही सकती. मैं यह सुन के बहुत खुश हुआ मैने उसे धीरे से चूमा तो उसने भी मुझे चूमा. मैं फिर उठ के बाहर आया तो माँ और दीदी दोनो सोफे पे बैठी हुई थी. उन्होने ने कहा कि बहू की बुलाओ. ज़रा चाइ पानी तो दे कुछ.

मैने कहा मैं बना देता हूँ वो अभी सो रही है.दीदी ने मुझे फिर से छेड़ते हुआ कहा कि बड़ी फ़िक्र है अपनी बीवी की तुम्हें. वैसे तो कभी चाइ नही बनाते थे. आज क्या हुआ? मैं बोला नही दीदी.ऐसा नही है. बस वो थोड़ा थक गयी है इसलिए सो रही है? दीदी ने फिर से चुटकी ली और कहा ऐसा क्या किया है उसने जो थक गयी है? रूको मैं देख के आती हूँ.

मैने कहा नही दीदी सोने दो ना उसे थोड़ी देर. थोड़ा आराम कर लेगी तो खुद बाहर आ जाएगी. मैं जानता था कि दीदी मुझे सिर्फ़ चिडाने के लिए ही यह सब कह रही थी. वो मेरे पास आई और बोली तो फिर तू भी तो थक गया होगा. रात भर जो उसने किया वो तूने भी तो किया होगा. वो तो बस लेटे लेटे थक गयी तो तू तो और भी ज़्यादा थका होगा. चल बैठ जा चाइ मैं बना लेती हूँ.

मेरे होश उड़ गये मारे शर्म के मैं गढ़ा जा रहा था और दीदी मेरे मज़े लिए जा रही थी मैं आके माँ के पास बैठ गया. माँ ने पूछा बेटा तू खुश तो है ना. मैने कहा हां माँ मैं बहुत खुश हूँ. हमने चाइ पी और उसके बाद वो लोग अपने रूम में चले गये. हमारा घर सिर्फ़ दो ही रूम का था. मैं हमेशा ड्रॉयिंग रूम में सोता था और एकएक बेडरूम दीदी और माँ का था.
लेकिन शादी के बाद दीदी और माँ एक बेडरूम मे शिफ्ट हो गये थे और एक बेडरूम मुझे दे दिया था. दीदी और माँ अपने बेडरूम मे थे मैं नहा के बाहर आया तो दीदी मेरे बेडरूम के डोर पे खड़ी थी. डोर अंदर से बंद था. दीदी बोल रही थी बन्नो डोर तो खोलो.हमसे मिल तो लो. इतना क्या शरमा रही हो. उसने अंदर से कहा पहले आप इन्हें भेजिए अंदर प्लीज़.

मैने सुना तो कहा रूको मैं जाता हूँ अंदर. मैं डोर पे आया और मैने कहा कि हन मैं हूँ डोर खोल दो. उसने अंदर से डोर खोला और मैं भीतर चला गया. दीदी अभी भी डोर पर ही थी. स्वेता ने मेरे अंदर आने पर कहा कि उसे बहुत ज़्यादा दर्द हो रहा था और वो ठीक से खड़ी नही हो पा रही है.इस हालत में उनके सामने बाहर कैसे जाएगी. मैने कहा कि देखो दिन भर तो अंदर नही रह सकती ना.

मैं कुछ पेनकिलर ले आता हूँ. तुम धीरे धीरे चलना दर्द अपने आप ठीक हो जाएगा. वो बहुत ज़्यादा शरमा रही थी.लेकिन मेरी बात सुनके मान गयी. मैं मार्केट गया और उसके लिए कुछ पेनकिलर्स ले आया. बाकी दिन नॉर्मल ही बीता घर में अभी भी खुशियों का माहौल था.रात में माँ ने खीर बनाई. हम सब खाना खाने के बाद अपने अपने रूम में चले गये. मैं और स्वेता दोनो बेड पे थे.

राज- अब दर्द कैसा है?

स्वेता-ठीक है लेकिन अभी ख़तम नही हुआ है. आपने कल ठीक नही किया.

राज- ग़लती हो गयी. आगे से ध्यान रखूँगा. लेकिन कल मज़ा बहुत आया.

स्वेता-हटिए जी. आपको तो अपनी पड़ी है मेरी तो फट गयी थी.

राज-अर्रे बाबा आगे से आयिल लगा लेंगे ना.

स्वेता-दीदी मुझसे कितने सवाल पूछ रही थी

राज-क्या पूछी थी

स्वेता- पूछ रही थी कैसी रही कल की रात और मैं ठीक से चल क्यूँ नही रही हूँ मैने कहा दर्द हो रहा है तो मुझसे पूछा कि इतना बड़ा है क्या हाए राम मैं तो शर्म से गढ़ ही गयी वो आपकी दीदी हैं और आपके इसकी साइज़ पूछ रही थी.

राज-अर्रे नही सीरीयस मत हो वो तो बस तुम्हें छेड़ रही होंगी

स्वेता-नही जी, उन्होने तो मुझसे पूछा कि कितने राउंड लगाए कल मैने कहा कि सिर्फ़ एक तो बोली कि एक राउंड में ही यह हालत है तेरी फिर तो बहुत बड़ा होगा मेरी तो मारे शर्म के जान निकली जा रही थी मैने कभी अपनी सहेलियों से भी ऐसी बात नही की.

राज-अर्रे उन्हें लगा होगा कि तू यहाँ अकेली है तो तेरी सहेली बनने की कॉसिश कर रही हैं. उन्हें भी तो फ़िक्र है ना तेरी. तू नाराज़ मत हो वो तेरे भले के लिए ही पूछ रही थी.

स्वेता-मैं नाराज़ नही हूँ बस ऐसी बातें कभी किसी से की नही तो थोड़ा अजीब सा लग रहा था.
राज-अब ज़्यादा मत सोच इस बारे में चल शुरू करते हैं

स्वेता-लेकिन आज धीरे धीरे प्ल्ज़. मुझे अभी भी दुख रहा है

राज-हां आज बिल्कुल धीरे धीरे चोदुन्गा.

स्वेता-छी ऐसे गंदे वर्ड्स मत बोलिए

राज-आरे इसमे गंदा क्या है अभी हम वही तो करेंगे देखना तेरी चूत फैला के इसमे अपना लंड घुसा दूँगा तो तू चुदेगि ही ना इसे चुदाई ना कहूँ तो और क्या कहूँ

स्वेता- आप भी बड़े वो हैं चलो अब करो और ज़्यादा गंदा गंदा मत बोलो. मैने उसे नगी किया और खुद भी नंगा हो गया मेरा लंड भी खड़ा था पूरा मैने उसकी चूत में थोड़ा सा आयिल लगाया और फिर घुसेड़ना शुरू किया उसने बड़ा साहस किया लेकिन उससे सहन नही हो रहा था जल्दी ही उसकी आँख से आँसू निकलने लगे मेरा मूड थोड़ा ऑफ हो गया
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10-15-2019, 12:13 PM,
#4
RE: Incest Kahani दीदी और बीबी की टक्कर
राज-अब रो क्यूँ रही है धीरे धीरे तो चोद रहा हूँ. वो बोली लेकिन फिर भी बहुत टाइट लग रहा है.बहुत दुख रहा है.मैने थोड़ा और आयिल लगाया और फिर से एक धक्का मारा इस बार तो उसकी हिम्मत टूट गयी और उसके मूह से एक जोरदार चीख निकली

मुझे गुस्सा आ गया मैने कहा क्या है चिल्ला मत घर मैं सब लोग हैं क्या सोचेंगे

मुझे गुस्से मे देख के वो थोड़ा सहम सी गयी लेकिन रोना नही बंद हुआ मैने फिर से अपना लंड उसकी चूत मे ठेला और इस बार तो पूरा घुसेड दिया वो लाख कोशिश कर के भी अपनी चीख नही रोक पाई और फिर से चिल्ला दी इस बार मुझे भी ज़्यादा गुस्सा आ गया और मैने बिना कुछ सोचे ही धक्के लगाने शुरू कर दिए हम लोगो ने जो भी प्लॅनिंग की थी सब हवा हो गयी

कल की रात जैसा ही हाल उसका फिर से होने लगा वो दर्द से बिलख रही थी और मैं हवस मे सब कुछ भूल के उसे पेले जा रहा था वो बहुत चिल्लाने लगी मैने सोचा कि जल्दी जल्दी चोद के झड जाता हूँ नही तो कोई जाग जाएगा घर मे
मैने धक्कों का फोर्स और बढ़ा दिया और उसने अपनी चीखें और तेज कर दी.मैने उसके मुँह पर हाथ रखा लेकिन उसने मुझे छुड़ा लिया. तभी मेरे रूम के डोर पे नॉक हुआ. बाहर दीदी थी.

दीदी-क्या हो रहा है क्या बात है?

राज-कुछ नही दीदी आप सो जाओ.

दीदी- स्वेता क्या हुआ री कोई प्राब्लम है क्या?

राज-कोई प्राब्लम नही है दीदी आप सो जाओ.

दीदी- पहले स्वेता से बोल बोलने को. स्वेता डर मत सच सच बता कोई प्राब्लम है क्या?

स्वेता- दीदी मुझे बचा लो प्ल्ज़.

राज-यह क्या बोल रही है चुप रह

दीदी-तू दरवाजा खोल भाई

राज-दीदी कोई प्राब्लम नही है.आप जाओ प्ल्ज़.यहाँ सब ठीक है.

स्वेता- नही दीदी.प्ल्ज़ बचा लो.यह तो मारे डाल रहे हैं

दीदी ने डोर पे ज़ोर से धक्का दिया. दरवाजा शायद ठीक से बंद नही था और डोर खुल गया अंदर का सीन देख के उसके होश उड़ गये. स्वेता बेड पे थी. पूरी नंगी. मैं उसके उपेर चढ़ा हुआ था मैं भी नंगा था और मेरा लंड उसकी चूत मे फसा हुआ था

मैने पीछे मूड के देखा तो पाया कि दीदी स्वेता की चूत को देख रही थी. उसे ऐसा सीन देख के बाहर चले जाना चाहिए था लेकिन वो बेड के पास आ गयी

दीदी-छोड़ इसे यह मेरे साथ जा रही है अब

राज-दीदी प्लीज़ जाओ यहाँ से हम दोनो नंगे हैं. तुम्हें शर्म नही आती है क्या

दीदी- शर्म तो तुझे नही है जो अपनी दीदी के सामने भी इस्पे चढ़ा हुआ है उतर इसके उपर से और जाने दे इसे. देख नही रहा उसे कितना दर्द हो रहा है

स्वेता-हां दीदी प्लीज़ बचा लो कल रात भी इन्होने ऐसे ही किया था.मुझे बहुत दुख रहा है

मेरा दिमाग़ खराब हो गया मैं स्वेता के उपेर से उठा और उसकी चूत से लंड निकाल लिया मेरा लंड जब बाहर आया तो दीदी ने देखा और हैरान रह गयी

दीदी-हे भगवान तूने यह डाला हुआ था इसके अंदर तू तो जानवर है पूरा ज़रा रहम है कि नही तेरा सीना है की पत्थर

राज- दीदी तुम हद से बाहर जा रही हो यह मेरी बीवी है यह मेरे और इसके बीच की बात है तुम जाओ यहाँ से

दीदी- चुप रह तू सुहागरात का मतलब यह नही होता कि बीवी की परवाह किए बिना तू उसे पेल दे अपने सुख के लिए अपना मूसल उसकी चूत मे डालने के पहले एक बार उसके बारे मे भी तो सोचा होता. देख कैसे रो रही है कितना दर्द है उसे अब यह सब नही चलेगा स्वेता तू उठ और चल मेरे साथ

मैं शॉक्ड था कि दीदी गुस्से मे कैसे वर्ड्स बोल रही है. स्वेता ने अभी भी कपड़े नही पहने थे.और मैं भी नंगा खड़ा था. दीदी बिना किसी झिझक के मेरे लंड को बार बार घूर रही थी और उसपे कमेंट कर रही थी

दीदी- अब यहाँ खड़ा क्या है. जा बाहर जा के सोफे पे सो जा. मैं यहाँ रहूंगी स्वेता के साथ. देख बेचारी की फूल जैसी चूत कैसी सूज गयी है. इसे तूने इतनी बेरहमी से पेला है कि ठीक से चल भी नही पा रही थी. अर्रे कभी किसी ने तुझे सिखाया नही क्या कि कैसे चुदाई करते हैं? लंड खड़ा कर के पेल देने भर से औरत खुश नही होती.

राज- दीदी बकवास बंद करो. तुम अपने भाई से बात कर रही हो. यह क्या अनाप शनाप बक रही हो.

दीदी- अब तुझे बुरा लग रहा है. एक औरत का दर्द एक औरत ही समझती है.तुझे तो बस इसकी चूत से मतलब है. लेकिन मैं ऐसा नही होने दूँगी. अब तू खुद चला जा यहाँ से नही तो मैं माँ को उठा दूँगी. और माँ को कहूँगी तो माँ तुझे कभी इसे नही चोदने देगी. समझा ना. अब मेरा दिमाग़ मत खराब कर. बाहर जा यहाँ से. और कपड़े पहेन ले अपने. अपनी दीदी के सामने लंड खड़ा कर के खड़ा है हरामखोर. भाग जा यहाँ से. मैं भी जिद्दी था मैने भी मना कर दिया कि मैं नही जाउन्गा बाहर .
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10-15-2019, 12:13 PM,
#5
RE: Incest Kahani दीदी और बीबी की टक्कर
राज- तुम बाहर जाओ यहाँ से. मियाँ बीवी के बीच में आने की ज़रूरत नही है. और अगेर तुम्हें थोड़ी शर्म है तो आइन्दा कभी इस मामले में दखल मत देना.

दीदी- यह तो नही होगा इस घर में. तू मेरे होते हुए इसका बलात्कार नही कर सकता.

राज- मैं इसका बलात्कार नही कर रहा हूँ.यह मेरी बीवी है. मियाँ बीवी एक दूसरे से प्यार नही करेंगे तो क्या करेंगे?

दीदी- जो तू कर रहा था उसे प्यार नही कहते. उसे बलात्कार कहते हैं. देख स्वेता की क्या हालत है

राज-तुम्हे उससे क्या लेना देना. तुम अपने काम से काम रखो और जाओ यहाँ से.यह मेरे और उसके बीच की बात है. मैं अपना काट के छोटा तो नही कर सकता ना.

दीदी- हां लेकिन तू इसकी फाड़ के चौड़ी कर देना चाहता है. और तुझे तो इतनी भी शर्म नही है कि अपनी दीदी के सामने कैसे बात करनी है.

राज- मुझे मत सिख़ाओ दीदी.मैं नही गया था तुम्हें बुलाने को.तुम खुद ही आई थी यहाँ. और यह सब गंदी बातें तुम्ही ने शुरू की हैं.अब तुम जाओ यहाँ से नही तो कुछ बुरा हो जाएगा

दीदी- क्या बुरा हो जाएगा रे? तू बहुत बड़ा समझने लगा है अपने आप को? क्या बुरा करेगा तू ? तू पाल पोश के बड़ा किया और तू किसी औरत के साथ ऐसा बिहेव करता है अपनी बीवी को रंडी की तरह चोद रहा है और मुझे कह रहा है मैं अपने काम से काम रखूं . याद रख यह मेरा घर है यहाँ वही होगा जो मैं कहूँगी और तू क्या बुरा करेगा रे मेरे साथ? मुझे भी पकड़ के चोदेगा? मेरी चूत फाड़ेगा? यही बुरा करेगा मेरे साथ?

राज- दीदी तुम होश मे नही हो.बकवास बोले जा रही हो जब से. चली जाओ यहाँ से हम दोनो फुल लाउड वाय्स मे एक दूसरे पे चिल्ला रहे थे. इतने में डोर पे हरकत हुई हमने देखा माँ डोर पे खड़ी थी. मैने तुरंत अपने कपड़े उठाए और स्वेता ने भी खुद को ढक लिया.

माँ- क्या लगा रखा है? सोने नही देते. तू यहाँ इनके रूम मे क्या कर रही है अनिता

दीदी- माँ देखो ना इसने स्वेता को बहुत दर्द दिया है. स्वेता चिल्ला रही थी इसी ने मुझे कहा कि बचा लो मुझे.तो मैं आ गयी माँ भाई को स्वेता के साथ मत रहने दो वो इसे बहुत दर्द देता है.

माँ-क्यूँ री स्वेता ? क्या बात है?

स्वेता-जी मुझे बहुत तकलीफ़ हो रही है. कुछ कीजिए.

माँ- बेटी यह तकलीफ़ तो होगी ही. इसे ज़्यादा सिर पे मत चढ़ने दे. थोड़ी दिन की बात है फिर सब की आदत पड़ जाएगी.और याद रख बीवी का धर्म होता है कि मियाँ की खुशी का ख्याल रखे.और यह तो प्यार का दर्द है सहन कर ले. और तू अनिता चल अपने कमरे में. इन मियाँ बीवी को इनके हिसाब से रहने दे. तुझ बीच में दखल देने की कोई ज़रूरत नही है.

माँ दीदी को अपने साथ ले गयी. मैने रूम का डोर बंद किया. स्वेता को तो जैसा साँप सूंघ गया था उसकी कुछ समझ में नही आया कि इस बीच यहाँ क्या क्या हो गया. मैं अब वापिस बेड पे आ गया.

राज- अब क्या करेगी बोल? अब किसे बुलाएगी बचाने को? मैं खुद भी तुझे दर्द नही देना चाहता था लेकिन तूने और कोई रास्ता नही रखा अब मेरे लिए.

स्वेता- मैं खुद भी नही जानती थी कि यह सब हो जाएगा मैने तो बस यूँही कह दिया था दीदी से कि मुझे बचा लो वो तो खुद ही डोर खोल के अंदर आ गयी मेरी बात का बुरा मत मानो लेकिन मुझे लगता है कि दीदी आपसे जलन करती हैं

राज-अब तू मत बकवास करना शुरू कर दे मेरा दिमाग़ पहले ही खराब है.अब सो जा चुपचाप

स्वेता- सॉरी जी, मुझसे नाराज़ मत होना.मैने यह सब जानबूझ कर नही किया सब अंजाने में हो गया
मुझे माफ़ कर दो. एक बार पेल तो दो ठीक से अब नही चिल्लाउन्गी चाहे जितना भी दर्द हो.कसम से उठो ना पेलो ना.

राज-अब नही मैं अभी सो रहा हूँ तू भी सो जा. तेरी चूत खुलने में टाइम लगेगा. मैं आज नही चोदुन्गा तुझे.कल से ज़्यादा आयिल ले के आना. और रोज अपनी चूत में नहाने के बाद आयिल से मालिश किया करना उगली डालना अंदर बाहर धीरे धीरे खुल जाएगी.तो तुझे इतना दर्द नही होगा

स्वेता-हाए मैं क्यूँ करूँगी यह सब आप खुद ही कर लीजिएगा मेरी चूत में उंगली अंदर बाहर करियेगा फिर अपना लंड अंदर बाहर करियेगा . देखिए ना आपका लंड तो अभी भी खड़ा है आओ ना चढ़ जाओ ना चोद दो ना एक बार प्लीज़ नाराज़ होके मत रहो .

राज- मैं नाराज़ नही हूँ बस अब चोदने का मन नही कर रहा दीदी से मैने कभी इतनी बदतमीज़ी से बात नही की मैं कल सुबह उनसे माफी माँग लूँगा

मैने बहुत ग़लत किया आज दीदी ने मेरे लिए इतना कुछ किया.मैने आज उससे ठीक से बात नही की.

स्वेता- मुझे तो अभी भी लगता है कि दीदी जानबूझ के अंदर आई थी.

मे-चुप कर एक तो तेरे लिए वो मुझे डाँट रही थी और अब तू खुद उसके खिलाफ बोल रही है.

स्वेता- नही ऐसा नही है देखो ना अभी दीदी की एज ही क्या है 31 की होंगी. उनका पति नही है उनकी जवानी अभी ढली थोड़ी ना है. उन्हें भी तो गर्मी चढ़ती होगी ना कभी कभी इसीलिए वो खुद पे काबू नही रख पाई.

राज-अब तूने एक शब्द भी बोला दीदी के खिलाफ तो एक थप्पड़ पड़ेगा. हमेशा के लिए आवाज़ बंद हो जाएगी याद रखना मेरी दीदी ने मेरी जिंदगी मे जो बलिदान दिए हैं वो एक माँ भी नही देती अपने बेटे के लिए वो अंदर आई थी हमारी हेल्प करने को तू अपनी गंदी सोच को ख़तम कर दे.समझ गयी ना?

स्वेता- सॉरी. आज से ऐसा नही बोलूँगी हम दोनो सो गये.

लेकिन मेरे दिमाग़ में अभी भी कयि सवाल उठ रहे थे. दीदी जानती थी कि मैं अंदर स्वेता को चोद रहा हूँ फिर भी वो अंदर आ गयी. उसने हमसे कपड़े पहनने के लिए नही कहा. मेरे खड़े लंड को बार बार घूरती रही उसकी चूत के बारे में बोलती रही उसने बहुत ही गंदे वर्ड्स यूज़ किए.

कहीं स्वेता सही तो नही कह रही है? कहीं दीदी की जवानी गर्मी तो नही पकड़ रही है? मैं यह सब सोचते सोचते कब सो गया पता नही चला. अगले दिन नींद खुली तो देखा कि दीदी मॉर्निंग टी लिए हुए बेड के साइड पे खड़ी हुई थी. मैने साइड में देखा तो दीदी ने कहा कि स्वेता नहाने गयी हुई है उठो चाइ पी लो. दीदी ने बड़े प्यार से मुझे चाइ कप में डाल के दी.

दीदी- भाई मुझे कल के लिए माफ़ कर दो. मैं भी एक औरत हूँ और मुझसे स्वेता का दर्द देखा नही गया.इसलिए मैं अपने होश खो बैठी.मैं चाहती हूँ कि तुम एक बहुत ही सुन्दर और आरामदायक जिंदगी जियो. तुम्हें मॅरीड लाइफ की वो सब खुशिया मिलें जो मुझे कभी नही मिल पाई.

मैं कल की ग़लती कभी नही करूँगी. तुम उसके हज़्बेंड हो और अब इस घर के तुम ही मालिक हो. यहाँ सब कुछ तुम्हारे अनुसार ही होगा और मैं भी अब हमेशा से तुम्हें ही बड़ा मानूँगी. मैं कभी तुमपे कोई हुकुम नही चलाउन्गी प्लीज़ कल के लिए मुझे माफ़ कर दो.

राज- दीदी यह क्या कह रही हो. माफी तो मुझे माँगनी चाहिए. मैने कल आपसे इतनी बदतमीज़ी से बात की. मैं बहुत शर्मिंदा हूँ.

दीदी- नही भाई. तुम सही थे तुम दोनो के बीच मुझे नही आना चाहिए.वो तुम्हारे हिसाब से अड्जस्ट कर लेगी. मुझे बीच मे बोलने की ज़रूरत नही है.तुम बस उसका ख्याल रखो और एक बहुत ही अच्छी लाइफ जियो. अब हम दोनो कल की बात भूल जाते हैं. मैं तुमसे नाराज़ नही हूँ और उम्मीद करती हूँ कि तुम भी मुहे माफ़ कर दोगे.

राज- दीदी आपसे नाराज़ होने का तो सवाल ही नही उठता.

दीदी वापिस जाने लगी.मैं चाइ पीने लगा.तभी दीदी दूर पे रुकी पीछे पलटी और मुझे देख के बोली कि वैसे भी स्वेता बहुत ही खुशनसीब है. इतना बड़ा हथियार हर औरत को नसीब नही होता. धीरे धीरे वो इसे चलाना भी सीख लेगी.तुम एक सच्चे मर्द हो.उसे पलंग पोलो खेलने में बहुत मज़ा आएगा.

दीदी यह कह के बिना रुके बाहर चली गयी मेरा दिमाग़ ठनक गया. थोड़ी देर पहले वो माफी माँग रही थी और फिर उन्होने ने ऐसी डबल मीनिंग वाली बात बोली. लेकिन मैं दीदी के लिए इतना भावुक हो चुका था कि मैं यही सोचता रहा कि वो मज़ाक कर रही होंगी और शायद मूड को हल्का करने के लिए उन्होने यह सब कहा होगा. उसके बाद का दिन नॉर्मल बीता.
मैं ऑफीस चला गया और शाम को जब लौटा तो देखा कि दीदी और स्वेता दोनो टीवी देख रहे थे और बहुत ही गहरी सहेलियों की तरह मिल जुल कर बातें कर रहे थे. माँ अपने कमरे में थी. मुझे देख कर स्वेता आई और मेरा बॅग ले कर साइड में रख दिया. दीदी उठी और कुछ स्नॅक्स बनाने के लिए चली गयी. मैं सोफे पे बैठ गया तो स्वेता आई और उसने मेरे जूते उतारे और मेरे पैरों को धीरे धीरे मसाज करने लगी.
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10-15-2019, 12:13 PM,
#6
RE: Incest Kahani दीदी और बीबी की टक्कर
मुझे तो जैसे जन्नत मिल गयी तभी दीदी आई और उन्होने ने मुझे चाइ के साथ कुछ स्नॅक्स दिए. में आराम से बैठ हुआ था सोफे पे पैर सामने फैले हुए थे मसाज हो रहा था. मुझे लगा कि में कोई महाराजा हूँ और दो औरतें मेरी सेवा कर रही हैं. कुछ देर के बाद में उठा और फ्रेश होने के लिए चला गया बाथरूम में आया तो देखा कि वहाँ पे 2 सेट ब्रा और पैंटी सूख रहे थे.

में स्वेता की ब्रा पैंटी तो पहचान गया लेकिन दूसरी सेट मेने पहली बार देखी थी. में वॉश बेसिन पे झूका और मुँह पे पानी मारा. जब उठा तो शीशे में देखा कि दीदी पीछे खड़ी हुई थी. उन्होने मुझे साइड में होने को कहा और एक सेट ब्रा पैंटी उठा ली.और चुपचाप बाहर चली गयी. में मुँह धोने के बाद पैंट उतार कर अब आराम से अपने पैर धो रहा था.

मेने सिर्फ़ बनियान और अंडरवेर पहना हुआ था कि दीदी फिर से बाथरूम में आई. और बोली अर्रे ग़लती से मैं स्वेता की ब्रा पैंटी ले गयी. मेरी वाली तो यहीं है. स्वेता की ब्रा तो इतनी छोटी है कि में पहन लूँ तो साँस भी ना ले पाऊ.और अगर एक साँस ले भी लूँ तो ब्रा टूट जाए और उसकी पैंटी भी मेरी छुपाती कम दिखाती ज़्यादा है. अच्छा हुआ मेने जाके पहन के देख ली नही तो गड़बड़ हो जाती. रुक में अपनी ब्रा और पैंटी ले लूँ फिर तू आराम से नहा ले.

दीदी यह सब इतनी सहजता से बोल गयी जैसे में कोई लड़की हूँ. वो अपना काम कर के बाहर चली गयी. मेने देखा कि उनकी बात सुन के मेरे लंड ने गदर मचा दिया था. मेरी छड़ी आगे से फटी जा रही थी. में छुपा भी नही सकता था उस वैद्य की दवाई का यही साइड एफेक्ट था कि अगर एक बार लंड खड़ा हो जाए तो बिना झडे बैठता ही नही था अब तो प्राब्लम हो गयी.

अब तो मुझे मूठ मारनी ही थी. मेने सोचा कि स्वेता को बुला लेता हूँ फिर सोचा कि वो चिल्लाएगी तो सब मज़ा बिगड़ जाएगा. मेने बाथरूम का डोर बंद किया और लगा घिसने अपना लंड. थोड़ी देर में लंड ने पानी निकाल दिया. और अब में ठीक था. में बाहर आया और स्वेता और दीदी के साथ बैठ गया. माँ भी आ गयी माँ के आने से मुझे राहत मिली. नही तो मुझे डर लग रहा था कि दीदी कहीं फिर से ना शुरू हो जाएँ.नही तो लंड फिर से तबाही मचाने लगेगा.

हम सब बड़े प्यार से बैठे बातें कर रहे थे. किसी को किसी से कोई शिकायत नही थी. रात में खाना खाने के बाद में बाहर टीवी देख रहा था. और स्वेता अपने रूम में चली गयी. थोड़ी देर बाद माँ भी अपने रूम में चली गयी. में भी सोच ही रहा था कि जाउ अपने रूम में. तभी दीदी आई. टीवी वाले रूम में सिर्फ़ हम दो ही थे. उसने मुझे एक आयिल की बॉटल दी.

और कहा कि इसे यूज़ करना.नही तो तू सारी रात मज़े लेता रहेगा और तेरी बीवी हम लोगों को सोने नही देगी इतना चिल्लाएगी. लगा लेना ठीक से.खुद को भी और उसको भी.चल अब जा अंदर कब से तेरा वेट कर रही है. कह के दीदी ने मुझे सोफे से उठा के खड़ा कर दिया और मेरे रूम के डोर तक धकेल के ले आई. में अंदर आया तो देखा कि स्वेता बेड पे लेटी हुई है और उसने एक बहुत ही सेक्सी जाँघो तक का गाउन पहना हुआ है. मेने दूर बंद कर लिया.

राज- यह गाउन कहाँ से आया?

स्वेता-दीदी ने दिया. उन्ही का है.

राज-दीदी ऐसा गाउन तो कभी नही पहनती.

स्वेता -पता है उन्होने कहा कि जब वो अपने हनिमून पे गयी थी तो उनके हज़्बेंड ने खरीदा था. दीदी कितना सॅड थी आज कि वो हमारे लिए हनिमून अरेंज नही कर पाई इसलिए उन्होने मुझे यह गाउन दे दिया.

राज-इसमे तो तू कमाल लग रही है.मन कर रहा है अभी घुसेड दूं पूरा का पूरा.

स्वेता- आप फिर से शुरू हो गये. धीरे धीरे करो ना. इतना बड़ा तो हथियार है आपका और वो भी पूरा घुसा देते हो एक बार में.धीरे करो.में कहीं भागी थोड़ी ना जा रही हूँ.

राज-अर्रे भगेगी तो पीछे से पकड़ के पीछे से घुसा दूँगा.

स्वेता-पीछे से कहाँ घुसा दोगे जी?

राज-तेरी गान्ड में.

स्वेता-मेरी चूत में तो घुसता नही यह.मेरी गान्ड में तो कभी नही घुसेगा.

राज-तू आज बड़े मूड में है री.बड़ा चूत लंड गान्ड कर रही है.क्या बात है.

स्वेता-कुछ नही.बस मेने यह रीयलाइज़ किया कि में कितनी खुशनसीब हूँ जो मुझे इतना बड़ा हथियार मिला है. थोड़ा टाइम लगेगा लेकिन में इसे चलना सीख ही जाउन्गी. पलंग पोलो की एक्सपर्ट बन जाउन्गी में देख लेना मेरा माथा फिरसे ठनका.

दीदी ने यही बात मुझे मॉर्निंग में कही थी.और ठीक यही बात और यही वर्ड्स स्वेता ने मुझसे कहे कहीं दीदी स्वेता को चुदाई की ट्रैनिंग तो नही दे रही है फिर मेने सोचा कि यह सब बाद में देखा जाएगा अभी तो इसे बजा लूँ

राज- ओह्ह तो यह बात है.तो ठीक है चल तुझे हथियार चलाना सिखाता हूँ.

स्वेता- सुनो दीदी ने कुछ दिया क्या आपको यहाँ आते टाइम?

राज-हां क्यूँ तुझे कैसे पता?

स्वेता- उन्होने कहा था कि आपको कुछ देंगी आज रात में बताओ ना क्या दिया ?

राज- यह देख. आयिल की शीशी दी है.

स्वेता- हाए राम तभी दीदी कह रही थी कि आज में चाहे जितना चिल्ला लूँ वो तो नही आने वाली.

राज- चिंता मत कर आज तुझे मज़े ले ले के आराम से चोदुन्गा.

हम दोनो नंगे हो गये. मेने अपने लंड पे ढेर सारा आयिल लगा लिया और उसकी चूत में भी. में आज धीरे धीरे लंड उसके अंदर डाल रहा था. वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी और जो भी दर्द था उसे अच्छे से सह रही थी. मेरा लंड आधा गया तो उसने कहा कि आज के लिए इतना काफ़ी है इतने में धक्के मार के झड जाओ मेने उसकी बात मान ली.में कल रात जैसा नाटक नही खड़ा करना चाहता था.

तो मेने आधे लंड से ही उसे चोदा और करीब 15 मिनिट के बाद में झड गया. वो तो ना जाने कितनी बार झड चुकी थी.हमारी बेडशीट पूरी गीली हो चुकी थी आयिल से भी और हमारे सेक्स के जूस से भी. हम वही बाहों में बाहें डाल के सो गये. आज की रात अब तक की सबसे बढ़िया रात थी. मेने पूरा लंड तो नही डाला लेकिन उसने मेरा पूरा साथ दिया और मेने उसका.
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10-15-2019, 12:13 PM,
#7
RE: Incest Kahani दीदी और बीबी की टक्कर
ऐसे ही अगले कुछ दिन चलते रहे फिर कुछ दिनो के बाद स्वेता का छोटा भाई उसे घर लेके जाने के लिए आया. उसके यहाँ कोई रस्म थी और उसे करीब 10 दिनो के लिए अपने माइके जाना था. उसका भाई एक दिन रहा और फिर अगले दिन वो उसे ले गया. मेने अभी तक स्वेता की चूत में पूरा लंड डाल के चोदना शुरू नही किया था.

पहले दो दिनो के बाद से में उतना ही लंड डालता था जितना वो सह लेती थी. और फिर उतने से ही चोद चोद के झड जाता था. में पूरा सॅटिस्फाइड तो नही था लेकिन इस बात की खुशी थी कि मेरी बीवी मेरे लंड से दूर नही भागती थी बल्कि वो पूरी कोशिश कर रही थी कि मुझे पूरा सुख दे सके.

स्वेता के जाने से घर सूना सूना सा हो गया था. स्वेता के जाने के दूसरे दिन की बात है में ऑफीस से लौट के आया तो देखा कि माँ अपने कमरे में सो रही है. मेने दीदी से पूछा कि इस टाइम पे क्यू सो रही है माँ तो उसने कहा कि सेहत ठीक नही है. में सोफे पे बैठ गया और दीदी मेरे लिए कुछ स्नॅक्स ले आई हम बैठे टीवी देख रहे थे तभी दीदी ने कहा-
दीदी- तुझे स्वेता की बड़ी याद आती है ना?

राज- ऐसा क्यूँ बोल रही हो?

दीदी- जब से गयी है तू उदास सा हो गया है. ना कुछ बोलता है ना कुछ हँसी मज़ाक करता है.

राज-नही दीदी ऐसी बात नही है.काम का लोड ज़रा ज़्यादा है.

दीदी-हां और आजकल ओवरटाइम करने लगा है. तुझे पैसों की इतनी कमी है कि तुझे ओवरटाइम करना पड़ता है.में तो इतना कमा भी नही पाती कि तुझे एक सुखी जिंदगी दे सकूँ.

राज- ऐसी बात नही है दीदी. मुझे बस घर ज़रा सूना सूना सा लगता है इसलिए ऑफीस में ज़्यादा देर तक रहता हूँ.यहाँ आता हूँ तो स्वेता की कमी खलती है.

दीदी-हाए राम यह बात है तो तूने मुझे कहा क्यूँ नही. में भी कितनी पागल हूँ कि अपने भाई की फिकर ही नही करती ठीक से. चल अबसे में तुझे स्वेता की कमी बिल्कुल भी नही खलने दूँगी. तू घर से दूर मत रहा कर.

राज-नही दीदी.आप क्यूँ तकलीफ़ करोगी.में ठीक हो जाउन्गा. कुछ ही दिनो के बाद तो वो आ ही रही है.

दीदी- हाय रे. में इतनी भी बुरी नही हूँ कि मेरे भाई को दिखाई ही ना दूं. चल अब तू फ्रेश हो जा. और में पूरी प्लॅनिंग करती हूँ कि कैसे तेरा मन बहलाया जाए जब तक तेरी पलंग पोलो की पार्ट्नर नही आ जाती.

में उठ के अपने रूम में आया. कपड़े उतारे और बाथरूम में चला गया. घर में एक ही बाथरूम था. मेने जाते ही नोटीस किया कि वहाँ फिर से दीदी की पैंटी और ब्रा सूख रही थी.मेने इग्नोर किया और मुँह हाथ धोकर बाहर चला आया.माँ अभी भी सो रही थी. बाहर आया तो दीदी ने सोफे पे बैठने को कहा.

दीदी-चल अब बता मुझे तुझे स्वेता क्यूँ इतनी याद आती है.

राज- जाने दो ना दीदी.क्यूँ इसी बात पे अटकी हुई हो.

दीदी- नही तू बता मुझे. उसमे ऐसा क्या खास है जो तेरी दिल जीत लिया उसने.

राज- दीदी आप तो जानती हैं कि मेरी कभी कोई गर्लफ्रेंड नही रही और एक मर्द की लाइफ में औरत का तो बहुत बड़ा हाथ होता है.वो मेरी जिंदगी की पहली औरत है और मेरे लिए बेस्ट है.मेरा इतना ख्याल रखती है.

दीदी- हां वो तेरी जिंदगी की फर्स्ट औरत है लेकिन आख़िरी तो नही है ना. तू उसके अलावा सब को भूल जाएगा तो यह तो बुरा लगने वाली बात है ना.

राज- नही दीदी यह बात नही है आप और माँ तो मेरे लिए हमेशा भगवान के समान हो. पर बीवी तो बीवी होती है ना उसकी जगह तो कोई नही ले सकता. जैसे वो आपकी जगह नही ले सकती.

दीदी-हां सही कहा बीवी तो बीवी ही है मैं भी थी किसी की बीवी लेकिन उस भडवे ने तो मुझे ठीक से देखा भी नही कभी

मे-दीदी यह इतनी गालियाँ कहाँ से सीख ली?

दीदी-सुन सुन के सीख गयी रे ऑफीस में राह चलते ना जाने कितने लोग कितनी कितनी बातें सुना देते हैं. सब कुछ तो इग्नोर नही कर सकती.कुछ रह जाता है दिमाग़ में.तो बस कभी कभी बोल देती हूँ.मन की भडास निकल जाती है वरना किससे कहूँ कि मेरे अंदर क्या क्या तूफान चलते रहते हैं.

मे- दीदी आपने अपने आपको अकेला कर लिया है.में हूँ ना मेरे सामने आपको किसी प्रकार का कोई लिहाज नही करना चाहिए. जो आपके मन में आए वो बोलो.खुल के बोलो.में आपके इतना काम तो आ ही सकता हूँ.हम दोनो एक दूसरे के बेस्ट फ्रेंड्स बन सकते हैं

दीदी- हां भाई मुझे भी एक दोस्त की बहुत सख़्त ज़रूरत है. पता है मेरे ऑफिस में सभी लोग मेरे सामने तो ठीक से बात करते हैं लेकिन मेरी पीठ पीछे मुझे बहुत ही गंदा गंदा बोलते है मेरा वहाँ कोई दोस्त नही है मुझे वहाँ बिल्कुल भी अच्छा नही लगता.इसीलिए में जल्दी से जल्दी घर आने का रास्त ढूढ़ लेती हूँ.

मे-बस दीदी कुछ दिनो में मेरा काम चल निकलेगा और फिर आपकी काम करने की कभी ज़रूरत नही पड़ेगी.मेरी दिली तमन्ना है कि आपको और माँ को सब सुख दूं.

दीदी- और तेरी बीवी का क्या होगा? उसे कौन सुख देगा रे?

मे- क्या आप भी ना घुमा फिरा के मेरी बीवी पर ही आ जाती हो जानती हो कि मुझे इतनी याद आ रही है फिर भी.

दीदी- अरे मेरे देवदास में तो मज़ाक कर रही थी.

हम लोग काफ़ी देर तक बात करते रहे.फिर दीदी ने खाना बनाया. माँ भी उठ गयी थी लेकिन उसे बहुत वीकनेस थी तो दीदी ने उसे कुछ गोलियाँ दे दी वो खाना खा के सो गयी. में और दीदी कुछ देर तक टीवी देखते रहे और फिर अपने अपने रूम में चले गये. मैं बेड पे लेटा हुआ था लेकिन मुझे नींद नही आ रही थी.मेरा लंड खड़ा हो के बीवी की चूत के लिए तड़प रहा था.फाइनाली मेने सोचा कि बिना मूठ मारे तो सारी रात नींद नही आएगी.

तो में धीरे से अपने रूम के बाहर आया और बाथरूम में चला गया. वहाँ फेर्श पे बैठ के मेने मज़े से मूठ मारी.करीब 15 मिनिट लगे होंगे. जब झडा तो लगा कि वाटेरफाल से पानी गिर रहा हो इतना रस निकाला मेरे लंड ने. में उठा हाथ धो कर जैसे ही बाथरूम का गेट खोला तो बाहर दीदी खड़ी थी.मुझे देख के ज़ोर से हंस दी. मेने सिर्फ़ अंडरवेर पहना हुआ था और कुछ भी ना और मेरा लंड अभी ठीक से बैठा भी नही
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10-15-2019, 12:13 PM,
#8
RE: Incest Kahani दीदी और बीबी की टक्कर
मेरा लंड अभी ठीक से बैठा भी नही था.दीदी को सामने देख कर में चौंक सा गया.

दीदी- क्या कर रहा था?

मे- कुछ नही बस

दीदी-चल जाने दे मुझे पता है क्या कर रहा था. अभी और करना है कि बस हो गया?

मे- नही बस अब में सोने जा रहा हूँ.

दीदी-ठीक है.बड़ी देर से तेरे निकलने का वेट कर रही हूँ अब तू जा सोने अब मेरी बारी है करने की.

मे- क्या कहा?

दीदी- तू सोने जा.

मे- नही तुम्हारी किस चीज़ की बारी है?

दीदी- तो इसमे इतना शॉक क्यूँ हो रहा है? तू कर सकता है तो में नही कर सकती क्या. चल अब टाइम मत वेस्ट कर मुझसे और रहा नही जा रहा मुझसे अब और रहा नही जा रहा बड़ा परेशान कर रही है आज यह.

मे- ठीक है.

मेरी कुछ समझ में नही आया मेने खुद को यह सोच के बहला लिया कि दीदी मूतने के बारे में कह रही होगी में यह नही आक्सेप्ट कर पाया कि दीदी अंदर बाथरूम में अपनी चूत में उंगली करने गयी है.में अपने रूम में आ गया लेकिन क्यूरीयासिटी के कारण फिर से बाहर आया और बाथरूम के डोर के पास खड़ा हो गया. अंदर से कोई आवाज़ नही आ रही थी.

में थोड़ी देर खड़ा रहा फिर डोर को धीरे से नॉक करके धीमे से कहा दीदी तुम हो क्या अंदर? अंदर से दीदी की धीमी सी आवाज़ आई हां मुझे थोड़ी देर लगेगी.डिस्टर्ब मत कर और फिर उसके बाद दीदी के मोन करने की आवाज़ आई आह आह सी सी ऐसी कुछ आवाज़ आई तो मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया मेने यकीन कर लिया कि दीदी अंदर चूत में उंगली कर रही है में बाहर ही खड़ा रहा मेरे लंड ने फिर से तूफान मचा दिया था मेरी अंडरवेर फटने को थी मेने धीरे से चड्डी में हाथ
डाला और मसलने लगा तभी दीदी ने बाथरूम का गेट खोला अब यह सीन तो और भी अजीब सा था

दीदी ने अब एक ब्रा पहनी हुई थी और नीचे पेटिकोट था जो कि कमर के काफ़ी नीचे था उनका गाउन उनके हाथ में था और दूसरे हाथ में उन्होने ने अपनी पैंटी पकड़ी हुई थी मीन्स दीदी पेटिकोट के नीचे नंगी थी और उसके सामने में खड़ा था सिर्फ़ अंडरवेर में और मेरा एक हाथ मेरे लंड को सहला रहा था दीदी को सामने देख के में पीछे मूड गया दीदी ने कुछ कहा नही फिर मेरे पास आई और बोली.
दीदी- फिर से जाना है क्या तुझे?

मे-नही.में तो सोने जा रहा था बस.

दीदी-जाना हो तो चला जा नही तो रात भर सो नही पाएगा मुझे भी अब अच्छी नींद आएगी तू अपना देख ले में तो चली सोने. दीदी ने कोई ऐसी बात नही की कि जैसे उन्हें कोई परेशानी हो वो पहले से यह आक्सेप्ट कर चुकी थी कि हम दोनो के बीच ऐसी बातें करना यूषुयल है और ठीक है. मेने सोचा कि अब मूठ नही मारूँगा सो में बेड पे आया और सो गया.


अगले दो दिन भी ऐसे ही बीते.दीदी बड़े आराम से मेरे अपनी मर्ज़ी के कपड़े पहन के रहती थी. माँ तो बस अपने कमरे में ही रहती थी सारा टाइम तो दीदी को कोई रोकने वाला भी नही था. वो टाँग फैला के बैठती थी.पल्लू का ज़रा भी ख्याल नही करती थी. में भी उसकी जवानी देख देख के पागल हुआ जा रहा था लेकिन मुझे लगा कि अभी इनकी उम्र ही क्या है. और अकेली भी हैं. तो इन्हें यह सब करने से रोकना नही चाहिए. जैसे भी रहना चाहें रहने देना चाहिए.


और फिर एक दिन खबर आई कि स्वेता आज रात की गाड़ी से वापिस आ रही है. में ऑफीस से लौटा तो दीदी ने मुझे चाइ दी और जब हम बैठे टीवी देख रहे थे तब उन्होने ने मुझे यह खबर दी. मुझे तो जैसे जन्नत मिल गयी. इतने दिनो से अपनी बीवी की याद में मरा जा रहा था. आज वो वापिस आ रही है यह सुन के बहुत ही अच्छा लगा.

दीदी मुझे देख के अजीब ढंग से स्माइल कर रही थी.उसे भी पता था कि आज रात में तो जोरदार चुदाई होने वाली है मेरी बीवी की. हमने खाना खाया. स्वेता अभी तक आई नही थी. वो करीब 10 बजे आने वाली थी.अभी 2 घंटे बाकी थे. खाने के बाद में और दीदी टीवी देख रहे थे. मेने दीदी से कहा¡*

मे- वो उस दिन स्वेता को जो आयिल दिया था वो और है क्या?

दीदी- कौन सा आयिल?

मे- अर्रे वो दिया था ना उसे आयिल आपने?

दीदी- मुझे याद नही. कौन सा आयिल? किस काम के लिए दिया था?

मे-अर्रे समझो ना प्लीज़ दिया तो था आयिल.

दीदी-पागल मुझे नही याद आ रहा बता ना कौन सा आयिल था किस काम के लिए था?

मे- वो उसे श्वेता को उसमे प्राब्लम वो दिया तो था आपने उसे.

दीदी- अर्रे तुझे याद है तो ठीक से बता ना कौन सा आयिल था.मुझे सच में नही याद आ रहा है भगवान कसम.

मे-वो स्वेता को दर्द होता था ना तो आपने वो प्यार वाला आयिल दिया था.

दीदी- अच्छा अच्छा तेरे डंडे के दर्द वाला आयिल. अर्रे तो पागल ऐसे बोल ना कि पलग पोलो वाला आयिल. में तो सोच रही थी कि ना जाने किस आयिल की बात कर रहा है अच्छा आज स्वेता आने वाली है इसलिए चाहिए तुझे क्या इरादा है तेरा?

मे-क्या दीदी आप भी में तो ऐसे ही पूछ रहा था कि आयिल और है क्या?

दीदी- हां है ना लेकिन तुझे क्या करना?

मे-अर्रे वो स्वेता को ज़रूरत पड़ेगी ना तो इसलिए माँग रहा हूँ.

दीदी- लेकिन अभी तो आई भी नही जब आ जाएगी तो उससे कह देना मुझसे आके माँग लेगी. में कल दे दूँगी उसे.

मे-नही आज दे दो ना में माँग तो रहा हूँ. उसे शर्म आएगी आपसे माँगने में.

दीदी- और तुझे नही आएगी शर्म? चल अच्छा है तू मुझसे शरमाएगा तो मुझे भी अच्छा नही लगेगा में तुझे दे दूँगी कल शाम को ले लेना.

मे- नही आज दे दो ना प्लीज़

दीदी-अर्रे पगले वो इतनी दूर से सफ़र करके आ रही है एक दिन आराम तो करने दे आज ही चढ़ जाएगा क्या उसके उपर?

मे- क्या दीदी? आप तो कुछ भी बोल देती हो प्लीज़ दे दो ना आयिल.

दीदी- चल ठीक है दे देती हूँ लेकिन सुन तू ज़रा हमें सोने देना नही तो स्वेता सारी रात चिल्ला चिल्ला के हमारी नींद हराम कर देगी खूब सारा आयिल दे देती हूँ.

मे- पूरी बॉटले दे दो ना बार बार माँगने का झंझट ही ना हो.

दीदी- हां बाबा दे देती हूँ जा कि अभी से अपने उपर लगा ले. दीदी ने मुझे आयिल दे दिया. बड़े कातिल अंदाज में मुझे देख देख के दीदी मुस्करा रही थी. और मुझे अब सच कहूँ तो शर्म भी नही आ रही थी. मुझे बड़ा कंफ्ट था अब मेने सोचा दीदी ही तो है वो तो यह सब जानती है.
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10-15-2019, 12:14 PM,
#9
RE: Incest Kahani दीदी और बीबी की टक्कर
उससे क्या छुपाना तो मेने आयिल लिया और अपने रूम में आ गया फिर दीदी थोड़ी देर बाद अपने रूम में चली गयी. मेने अपने कपड़े उतारे और अपने लंड पे आयिल लगाना शुरू कर दिया. खूब मालिश की लंड और गोटियाँ दोनो ही आयिल से भीगा ली थी. अब तो में रेडी था कि स्वेता जैसे ही आएगी उसे पकड़ के खूब चोदुन्गा.

करीब आधे घंटे बाद गेट की घंटी बजी और में फन्फनाते हुए लंड के साथ गेट पे गया और गेट खोला. तब तक दीदी भी बाहर हॉल में आ गयी थी. गेट खोला तो देखा कि स्वेता के साथ उसका छोटा भाई भी आया हुआ था. उसे अकेले नही भेजा उसके घर वालों ने. तो में अपने साले को देख के खुश हुआ. उन दोनो को अंदर ले के आया. अभी हम बैठे ही थे कि साले ने साले जैसी हरकत कर दी.

उसने बड़े इतरा के कहा कि दीदी मुझे नींद आ रही है में थक गया हूँ मुझे सोना है. स्वेता ने भी उससे कह दिया कि तू मेरे रूम में जा के सो जा. साला उठा और सीधे मेरे बेड पे चला गया. में और दीदी स्वेता के साथ हॉल में थे यह देख के मेरी झान्टे जल गयीं इसका मतलब यह था कि आज स्वेता की चूत नही मिलेगी स्वेता ने तो इस्पे ध्यान भी नही दिया लेकिन दीदी को सब समझ में आ गया और वो ज़ोर से हंस दी.

वो मेरी हालत पे हंस रही थी, में तो तेल लगा के बैठा और उसपे मेरे साले ने चोट कर दी. कुछ देर बैठने के बाद दीदी अपने रूम में चली गयी मेने हॉल की लाइट बंद की और स्वेता को जकड लिया.

स्वेता-आज नही राजीव अंदर ही है. अच्छा नही लगता.

मे-वो तो सो रहा है.हॉल में सिर्फ़ हम दोनो हैं प्लीज़ एक राउंड चोद लेने दे.में तो मर गया तेरे बिना,

स्वेता-मर तो में भी गयी मेरी भी पूरी गीली है लेकिन आज नही राजीव अंदर सो रहा है प्लीज़ आज नही कल वो चला जाएगा कल चाहे तो पूरी रात मुझे रगड़ के चोद लेना बिना तेल लगाए लेकिन आज नही प्लीज़

मे-मेरा मूड मत खराब कर यार एक राउंड कर लेने दे बाद धीरे से करूँगा.जल्दी कर लूँगा प्लीज़

स्वेता- आपका एक बार अंदर गया तो मेरी चीख निकल ही जाएगी और आप भी इतनी जल्दी तो झडोगे नही. तो प्लीज़ आज मत करो यह सोच लो कि में कल आउन्गि आज की रात और काट लो मेरे बगैर.लेकिन आज नही प्लीज़ स्वेता इतना कह के उठी और बेडरूम की तरफ चल दी. में अभी भी पीछे पीछे आ रहा था उसके कि शायद उसका मूड बन जाए. लेकिन भाई का प्यार और डर मेरे लंड की प्यास से ज़्यादा स्ट्रॉंग थे वो सीधे रूम में गयी.

और उसने कहा कि वो रूम अंदर बंद कर रही है ताकि में रात में आके उसे चोद ना सकूँ.मेने कहा एक चुम्मा तो दे दे. उसने कुछ नही किया.मुझे रूम से बाहर धकेला और रूम अंदर से बंद कर लिया. अब में हॉल में था. अकेला.लाइट बंद और मेरा दिमाग़ भी बंद था. मेरा मन कर रहा था कि अभी गेट तोड़ के जाउ और राजीव के सामने ही उसकी बहन की चूत फाड़ के भोसड़ा बना दूं. लेकिन कुछ नही कर सकता था.मेने गुस्से में मूठ भी नही मारी और सोफे पे आके लेट गया.

लेकिन नींद कहाँ आने वाली थी. करीब 2 घंटे बाद दीदी वाले रूम का गेट खुला. में तो जाग ही रहा था दीदी भी हाल में बाहर आ गयी.मुझे देखा हॉल में ज़ीरो वॉट के तीन बल्ब थे.उसने तीनो चालू कर दिए. काफ़ी रोशनी हो गयी मेने दीदी को देखा.कुछ कहा नही वो तो जानती ही थी कि मेरे दिमाग़ में क्या चल रहा होगा. वो चुपके से गयी और स्वेता वाले रूम को बाहर से भी बंद कर दिया.
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10-15-2019, 12:14 PM,
#10
RE: Incest Kahani दीदी और बीबी की टक्कर
में थोड़ा सर्प्राइज़ हुआ कि ऐसे क्यूँ किया. लेकिन कुछ कहा नही. और चुपचाप सोफे पे लेटा रहा दीदी आई और साइड वाले सोफे पे बैठ गयी अपने साथ दो ग्लास पानी भी लाई थी. एक मुझे दिया और एक ग्लास खुद पीने लगी थोड़ी देर तक हम ऐसे ही बैठे रहे. बिना बात किए में उपर की तरफ देख रहा था और दीदी ना जाने कहाँ देख रही थी. थोड़ी देर बाद बोली.
दीदी- तेरे साले ने तो तेरे खड़े पे चोट कर दी आज

मे-आपको सोना नही है

दीदी-मेने कहा था कि तेल कल लेना.मुझे पता था कि वो अपने भाई के साथ आ रही है.

मे-मुझे बात नही करनी दीदी आप प्लीज़ जा कर सो जाओ.

दीदी-मुझपे क्यूँ अपना गुस्सा निकाल रहा है.जिसने तेरी जलाई है जा उसे बोल ना.

मे- आप भी तो जला ही रही हो ना अभी. सो जाओ जा के.

दीदी-तू भी पागल है एक रात का वेट कर लेगा तो मर थोड़ी ना जाएगा.

मे- प्लीज़ दीदी आप जाओ ना यार यहाँ से.

दीदी- तू तो ऐसे कर रहा है जैसे कोई बच्चा हो कि खिलौना आज ही चाहिए. कल से तेरा खड़ा नही होगा क्या?

मे- आप को क्या पता में अभी क्या फील कर रहा हूँ? कितने दिनो से वेट कर रहा था. मेरा दिमाग़ पहले ही खराब है.आप जाओ यहाँ से.

दीदी-मुझे पता है रे कि तू अभी क्या फील कर रहा है. में कितने ही सालों से हर रात ऐसा ही फील करती हूँ. मुझे बहुत अच्छे से पता है.इसीलिए कह रही हूँ कि ज़्यादा गुस्सा ना कर. स्वेता ने कुछ ग़लत नही किया उसका भाई आया हुआ है. तुझे खुश होना चाहिए. और अपने भाई के रहते हुए वो तुझसे दूर ही रहेगी. हमारा घर भी इतना बड़ा नही है कि एक गेस्ट रूम बनवा सकें. मुझे बड़ी चुभति है यह बात कि तेरी शादी शुदा जिंदगी में इतनी प्रॉब्लम्स हैं.

मे- ऐसा नही है दीदी.में बस गुस्से में ना जाने क्या बोल गया . सॉरी दीदी.और आपको बिल्कुल भी सॅड नही होना चाहिए.में इस घर में खुश हूँ.और आप बस देखो कि में अब इस घर को कितना बड़ा बना दूँगा. मेरा बस थोड़ा मूड खराब था. अब में ठीक हूँ.

दीदी- वेरी गुड अब ज़्यादा मूड ऑफ मत कर नही तो मेरा भी खून जलेगा. चल अब उठ के बाथरूम में जा के हिला ले और फिर सो जा चुपचाप. जो करना है कल कर लेना. वो कही भागी नही जा रही है.ना ही कल से उसका छेद बंद हो जाएगा. इतनी जल्दबाज़ी ना कर. बल्कि खुश हो जा कि वो आ गयी.जा जा के बाथरूम में हिला के आ जल्दी.

मे-क्या? क्या कहा?

दीदी- क्यूँ एक बार में समझ में नही आया क्या? फिर से कहूँ?

मे-नही लेकिन आपने इतनी आसानी से कहा जैसे कितनी नॉर्मल बात हो तो ज़रा शॉक सा हो गया.

दीदी-तू कब तक बच्चा बना रहेगा रे तेरी दीदी की भी शादी हुई थी कभी उसका भी एक मर्द था कभी वो अच्छे से जानती है मर्दों के बारे में. समझ गया अब जा और अपना काम ख़तम कर फिर मुझे भी जाना है बड़ी रात हो गयी सोउंगी कब.

मे- हां बाबा जा रहा हूँ दीदी एक बात पूछूँ?

दीदी- सब बाद में पूछ लेना पहले जा जल्दी.

मेरे बिना कुछ कहे ही दीदी ने मुझे हाथ पकड़ के सोफे से उठाया और बाथरूम के गेट तक धक्का देती हुई ले आई
इस दौरान वो मेरी पीठ से चिपकी हुई थी और उसने अपने चुचियों को मेरी पीठ से बिल्कुल चिपका रखा थी मेरा लंड अब रेडी था. में बाथरूम में जा के गेट बंद किया और आराम से बैठ कर मूठ मारी बड़ा मज़ा आया. करीब 15मिनट लगे और फिर में बाहर आ गया दीदी अभी भी सोफे पे बैठ हुई थी मुझे देख के मुस्काराई और बोली
दीदी-तुझे बड़ी देर लगती है रे.

मे-आप मेरा कितना मज़ाक उड़ाती हो.

दीदी-हाए अब तेरा मूड ठीक हुआ है इतनी देर से गुब्बारा जैसा मुँह फूला के बैठा हुआ था तू एक नंबर का रोंदू है हमेशा से.

मे- नही दीदी लेकिन जब ऐसी चोट होती है तो दिमाग़ तो फिर ही जाता है ना

दीदी- हां मुझे पता है तू क्या पूछने वाला था मुझसे?

मे-हां वो में पूछ रहा था कि वो आप मतलब कब से.

दीदी-क्या?

मे-पूछ रहा हूँ ना रूको तो में आप जैसा बोल्ड नही हूँ

दीदी-तेरी शादी हो गयी लेकिन तू है पूरा बच्चा ही यही पूछना चाहता है ना कि में रात में बाथरूम में क्या करती हूँ?

मे-क्या करती हो वो में जानता हूँ.में तो यह पूछ रहा था कि म्म्मे मतलब कैसे कहूँ रहने दो मुझे कुछ नही पूछना.

दीदी- तू कब मेरे साथ फ्री होगा इतना तो में नही शरमाती जितना तू शरमाता है. चल तू बैठ आराम से या नींद आ जाए तो सो जाना.में बाथरूम से हो के आती हूँ.

दीदी उठी और चली गयी में सोफे पे लेटा रहा नींद तो आ नही रही थी. दीदी ने एक गाउन पहना हुआ था जब वो करीब 20मिनट बाद बाथरूम से निकली तो मेने देखा कि उसने गाउन उतार दिया है फिर से. अब उपर वही ब्लॅक रंग की ब्रा है और नीचे एक लूस बँधा हुआ पेटिकोट नेवेल से भी काफ़ी नीचे बँधा हुआ. उसके एक हाथ में उसका गाउन था और दूसरे में उसकी पैंटी.

पल भर को हमारी नज़रें मिली.मेने उसके कपड़े देखे जो पहने हुए थे और जो हाथ में थे दीदी ने भी मुझे देखते हुए देखा उन्होने कपड़े वही साइड में फेर्श में डाल दिए और मेरे सोफे की तरफ आई.
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