Maa Sex Kahani हाए मम्मी मेरी लुल्ली
01-13-2019, 11:38 PM,
#11
RE: Maa Sex Kahani हाए मम्मी मेरी लुल्ली
राहुल कमरे में जाते ही अपनी पेंट नीचे करता है और लंड मुट्ठी में भरकर मसलता है |

“हाएएएएएएईएएए मम्मी.....म्म्मम्म्मी” उसे सलोनी के तने हुए मुम्मे याद आते हैं, उसे गुलाबी रंग के तीखे निप्पल याद आते हैं |

“उम्म्म्ममम्मम्मम.... मम्म्म्ममी” उसे सलोनी की उभरी हुई गोल मटोल कसी हुई गांड याद आती है |

“आआअह्ह्ह्ह......ऊऊउफ़्फ़्फ़्फ़.....” उसे अपनी माँ की भीगी पेंटी से झांकती चूत की याद आती है | उसे याद आता है कैसे पेंटी उसकी चूत के होंठो को चूम रही थी, कैसे वो उसके होंठो के बीच की लकीर के अन्दर को घुसी हुई थी | राहुल अपना हाथ लंड पर चलाता हुआ मुट्ठ मारने लगता है | मगर तभी उसे याद आता है कि उसकी मम्मी ने उसे क्या कहा था | उसे अपने लंड को आराम देना चाहिए था | मगर वो खुद पर काबू नहीं कर सकत था, सलोनी ने जो शो उसे दिखाया था उसे देखने के बाद उसकी उत्तेजना चरम पर पहुँच गई थी | वो फिर से मुट्ठ मारने लगता है | उसके कानों में अपनी माँ के बोल फिर से गूंजते हैं, ‘रात को इसे फिर से बहुत मेहनत करनी है’ राहुल ना चाहते हुए भी अपने लंड से अपना हाथ हटा लेता है | वो सच में सुबह का दो बार झड चूका था और अगर उसे अब मुट्ठ मारी तो हो सकता है उसका लंड इतना थकने के बाद रात को जवाब दे जाए और अगर उसे रात को जैसा उसकी माँ ने कहा था कि बहुत मेहनत करनी पड़ेगी और जो दिन भर की घटनायों को देखते हुए लगभग तय भी लग रहा था तो कहीं वो अपनी मम्मी के सामने शर्मिंदा ही ना हो जाए | राहुल अपने लंड से हाथ हटा लेता है | वो बुरी तरह से झटके मार रहा था | राहुल तकिये पर सर रखकर अपने झटके मारते हुए लंड को देखता है | लंड का फूला हुआ सुपाड़ा देखते हुए वो कल्पना करता है कि उसका वो सुपाड़ा अपनी माँ की गुलाबी चूत में घुस रहा है और उसकी माँ अपने बेटे के लंड को अपनी चूत में लेते हुए सिसक रही है | वो पूरी नंगी है उसके मुम्मे उभरे हुए हैं, राहुल लंड को चूत में घुसाते उन्हें पकड लेता है और कस कर धक्का मारता है ......

“आआअह्ह्ह्ह............उफफ्फ्फ्फ़.....बेटा....” उसके कानो में अपनी माँ की सिसकी गूंजती है | वो कल्पना मात्र से इतना उत्तेजित हो उठा था कि उसके हाथ फिर से अपने लंड पर पहुँच जाते हैं और वो उसे मसलने लगता है | मगर अगले ही पल वो फिर से अपने लंड पर से हाथ हटा लेता है और झटके से उठ खड़ा होता है | 

“मुझे खुद पर काबू पाना है....मुझे खुद पर काबू पाना है.....उफफ्फ्फ्फ़... मम्मी यह तुमने मुझे क्या कर दिया है” राहुल खुद को समझा रहा था |

उधर सलोनी को बहुत मस्ती चडी हुई थी | उसे अपने अन्दर आज इतनी ऊर्जा, इतना जोश महसूस हो रहा था कि उसके पाँव धरती पर नहीं लग रहे थे | वो बेटे के स्पर्श मात्र से झड गई थी और वो स्पर्श भी सीधा नहीं था | उसने उसकी चूत को कच्छी के ऊपर से सह्लाया था, उसके मुम्मो को टीशर्ट के ऊपर से मसला था, हाए क्या होगा जब वो उसकी नंगी चूत को छुएगा....जब उसके बेटे की उँगलियाँ उसकी चूत को कुरेदेंगी...उसे सह्लायेंगी..................

“ऊऊऊऊऊउन्न्नन्न्न्हह्ह्ह्हह्ह्ह्ह........”

जब वो अपने होंठ उसकी चूत पर रगड़ेगा......... जब उसकी जिव्हा उसकी चूत को चाटेगी.........जब उसकी जिव्हा उसके दाने को सहलाएगी ...........

“आआअह्ह्ह्ह.................उन्न्नन्न्न्हह्ह्ह्ह.....”

और फिर जब वो अपना लंड उसकी चूत के होंठो पर रखेगा, उसका लंड उसकी चूत की पंखुड़ियों को फैलाएगा और फिर उसका वो मोटा लम्बा लौड़ा उसकी चूत में घुसता चला जाएगा...घुसता चला जाएगा..............

“बेटाआआअह्ह्ह्ह....आआअह्ह्ह्ह”

वो अपने लंड से उकी पूरी चूत भर देगा.......... उसका बेटा अपने मोटे लम्बे लंड से अपनी माँ की चूत को भर देगा...........उसे इतना फैला देगा जितना उसका बाप आज तक नहीं फैला पाया ....फिर उसका बेटा उसे चोदेगा.....

“बेटाआआआह्ह्ह्ह ...............हाएएएए.........ईईई.....”

उसक बेटा अपना लंड उसकी चूत में अन्दर बाहर करते हुए उसे चोदेगा....उसका बेटा अपनी माँ को चोदेगा...........और माँ बेटे से चुदवाएगी..........उसका लंड अपनी चूत में लेकर उससे तब तक चुदवाएगी जब तक वो झड़ नहीं जाता ....जब तक वो अपने गर्म वीर्य से अपनी माँ की चूत को भर नहीं देता......

“मेरे लाल........मेरा बेटा..........हे भगवान............” सलोनी झड़ रही थी | उसके हाथ उसके अंगो को मसल रहे थे और सखलित होते उसके दिल में तीव्र इच्छा उठती है कि उसका बेटा उस समय उसके अंगो को मसले | अगर राहुल उस समय बाथरूम में होता तो सही इस समय उसका लंड उसकी चूत में होता और सलोनी बेटे से चुद रही होती | रात तक इंतज़ार करना उसके लिए बहुत भारी था | उसका दिल कर रहा था वो उसी समय अपने बेटे के कमरे में जाये और उससे चुदवा ले | धीरे धीरे सख्लन के ठंडा पड़ने के बाद सलोनी खुद पर काबू पाने में सक्षम हुई | ठन्डे पानी से नहाकर और सख्लन के पश्चात उसकी गर्मी थोड़ी सी कम हो गई थी |


उसे खुद को व्यस्त करना होगा....... तभी वो चुदवाने की अपनी जबरदस्त इच्छा को दबा सकेगी | वैसे भी शाम तक छे बज चुके थे, रात का खाना बनाने का समय हो चूका था | वो शावर से बाहर निकलती है और तौलिये से बदन पोंछती है | गोरे जिस्म से पानी पोंछते हुए सलोनी यही सोच रही थी कि वो क्या पहने? वो कुछ ऐसा पहनने की फ़िराक में थी जिससे वो राहुल की उत्तेजना को बढ़ाए, उसकी भावनाओं को भड़काए | उसके पास कुछ पारदर्शी कपडे थे मगर नहीं वो कुछ और पहनना चाहती थी | अचानक उसका धयान बाल्टी में पड़े धोये कपड़ों पर जाता है तो उसके होंठो पर मुस्कान फ़ैल जाती है ....उसे अपनी समस्या का हल मिल गया था |

राहुल कंप्यूटर पर नज़रें गडाए बैठा था जब उसे किचन से बर्तन खटकने की आवाजें आती सुनाई देने लगती है | नाजाने राहुल क्या देख रहा था, जा क्या पड़ रहा था कि वो किचन में जाने की अपनी बलवती इच्छा को कुछ देर दबाने में सफल हो गया | स्क्रीन पर जो कुछ भी था शायद राहुल के ख़ास काम का था, राहुल पूरा धयान देकर उसे समझने की कोशिश कर रहा था |

सात बजे के करीब राहुल निचे आता है और सीधे रसोई में जाता है |

“आ गया मेरा राजा बेटा, क्या कर रहा था” सालोनी खाना बनाते हुए बिना दरवाजे की तरफ देखते बोलती है | जब राहुल इतनी देर से निचे नहीं आया था तो उसके मन में चिंता के बादल घिरने लगे थे |

“हाँ मम्मी , वो लैपटॉप पर पढ....” राहुल से बात पूरी नहीं होती | सामने उसकी मम्मी उसके कपडे पहने खड़ी थी | सलोनी ने वही अंडरवियर और शर्ट पहनी थी जो राहुल उसे धोने के लिए देकर आया था |

“उम्म्म्म.... तुम्हे देखकर लगता है तुम्हे मेरी ड्रेस खूब पसंद आई है” सलोनी राहुल को मुख खोले खुद को घूरते हुए देखती बोलती है, “तुम्हारे कपडे धोकर और सुखाकर जब मैंने इन्हें सुंघा तो इनसे इतनी प्यारी खुशबू आई कि मैंने इन्हें ही पहनने का फैसला कर लिया, तुम्हे कोई आपत्ति तो नहीं है ना?” सलोनी बेटे की हाफ पेंट में बना हुआ उभार देखते हुए कहती है | उसका उभर अपनी माँ की शर्ट के खुले बटनों और उनके बीच का नज़ारा देख लगातार बढ़ रहा था |

“मुझे कोई आपत्ति नहीं है और तुम इनमे बहुत सुन्दर लग रही हो और..........और........” राहुल अपनी बात पूरी करने से कतराता है |

“और........और क्या....बोलो ना....चुप क्यों हो गये ....और क्या? सलोनी जैसे बेताब थी उसकी बात सुनने के लिए |

“और और आप इनमे बहुत सेक्सी भी लगती हो” राहुल ने दिल तगड़ा करते हुए धीमी आवाज़ में कहा |

“ओह्ह्ह्हह .... सच में मैं सेक्सी दीखती हूँ या फिर मुझे बहलाने के लिए कह रहे हो”, सलोनी राहुल से भी धीमे स्वर में बोलती है जैसे वो कोई गुप्त राज़ साँझा कर रहे हों |

“सच मम्मी....आप सच में बहुत सेक्सी दिख रहे हो.......बहुत बहुत सेक्सी दिख रहे हो” राहुल जोश में आ जाता है | सलोनी की हंसी छूट जाती है | राहुल अपने जोशीलेपन पे थोडा शर्मिंदा हो जाता है | सलोनी फिर से मूड कर खाने की और ध्यान देने लगती है | राहुल अपनी माँ की गांड को अपने अंडरवियर में चमकते देखता है | उसका अंडरवियर यु शेप का था और वो सलोनी की गांड के उस तरह दर्शन नहीं कर सकता था जिस तरह उसने कुछ देर पहले उसकी वी शेप कच्छी में किये थे | मगर फिर भी जो नज़ारा उसके सामने था वो भी कम नहीं था | उसका अंडरवियर सलोनी के नितम्बो को कस कर उनके अकार को खूब अच्छे से दर्शा रहा था | उनकी गोलाई , उनकी मोटाई और उनके बीच की घाटी...... ‘उन्ह्ह्हह्ह्ह्ह’ बहुत जानलेवा गांड थी उसकी माँ की | नीचे उसकी मोटी गोरी जांघें कितनी लुभावनी थी और ऊपर से उस शरारती माँ ने शर्ट के दो बटन खुले रख छोड़े थे इससे उसके मुम्मो का उपरी भाग और उनके बीच की खाई काफी हद तक नगन थी |

राहुल सलोनी के पास जाकर खड़ा हो जाता है | वो अपनी माँ के पीछे खड़ा उसकी गांड को देख रहा था | सलोनी को राहुल की मौजूदगी का पूरा एहसास था | राहुल की नज़र माँ की उभरी हुई गांड पर जमी हुई थी और उसका हाथ स्वयं ही उठता हुआ सलोनी की गांड की तरफ बढ़ता है जैसे उसका अपने हाथ पर कोई कण्ट्रोल ना हो |

“उन्ह्ह्हह्ह्ह.........” सलोनी गांड पर बेटे के हाथ को महसूस करते ही ‘आह’ सी भरती है | राहुल नितम्ब की गोलाई पर अपना हाथ फेरता है |

“तुम सच में सेक्सी हो माँ , इतनी सेक्सी कि मैं तुम्हे बता नहीं सकता” माँ की मादक गांड ने राहुल के दिल पे वार किया था | वो फिर से होश खोने लगा था |

“ऊऊऊउम्म्म्मम्मम्मम्म..........” सलोनी फिर से थोड़ी आह भरती है, “मुझे इसका एहसास बहुत प्यारा लगा रहा है, मेरी पेंटी से कहीं ज्यादा आरामदायक है........ और......और.....” सलोनी थोडा पीछे हटती है तो उसका बेटा उसकी गांड से हाथ हटा लेता है और उसकी कमर को थाम लेता है | सलोनी तब तक पीछे होती है जब तक उसकी उभरी गांड अपने बेटे के लंड को चूम नहीं लेती | सलोनी अपनी गांड को हलके से लंड पर दबाती है और उसका बेटा अपने लंड को माँ की गांड पर |

“उन्न्न्नम्मम्मम्ममह्ह्ह्हह....... हाएएएएए.........”, सलोनी बेटे की तरफ मुंह घुमाती है, “और मैने सच कहा था, तुम्हारे अंडरवियर में से सच में बहुत अच्छी खुशबू आ रही थी, शायद तुमने इसमें कुछ गिराया था....... मुझे लगता है दोपहर को कुछ गिराया होगा” सलोनी की बात से राहुल के गाल लाल होने लगते हैं |

“बता ना क्या गिराया था तूने अपने अंडरवियर में” सलोनी बेहद कामुक आवाज़ में लौड़े पर गांड दबाती बोलती है |

“तुम भी ना मम्मी........” राहुल और भी शर्मा जाता है | मगर वो अपनी कमर पीछे नहीं हटाता बल्कि उसे हल्का सा और दबाता है | उसका लंड कूल्हों की खाई के बीच धंसता जा रहा था | सलोनी को एहसास होता है कि सिचुएशन फिर से पहले वाली होती जा रही है | खुद उसकी चूत पूरी गीली हो चुकी थी | मगर अभी सही समय नहीं था अभी उन्हें कुछ देर इंतज़ार करना था इसीलिए वो जिस तरह पीछे को हुई थी उसी तरह आगे को बढ़ गई | राहुल का लंड उसके नितम्बो की घाटी में से निकला तो बुरी तरह से झटके मार रहा था |

“तुम तो कहते थे घर के काम में मेरी मदद करोगे, यह मदद करोगे, मुझे भी काम नहीं करने देते, जब देखो अपने इसको घुसा देते हो मेरी ....” सलोनी राहुल को डांटने के स्वर में बोलती है |

“वो मम्मी....वो मम्मी” राहुल शर्मिंदा था और अपनी मम्मी की इस अचानक तबदीली से हतप्रभ भी |

“इधर आओ ...और यह सलाद काटो, सब्जी बन गई है, मैं रोटी पका लेती हूँ” सलोनी बेटे का उतरा हुआ चेहरा देखकर चह्कती है, “खाली पेट मेहनत नहीं की जाएगी.... ..पहले पेट पूजा फिर......बाकी खाने के बाद” |

“जी मम्मी” राहुल बुझे मन से बोलता है, “उफ्फ्फ्फ़ कैसी ज़ालिम औरत है मेरी मम्मी” जितना उस समय राहुल को अपनी माँ पर प्यार आ रहा था उतना गुस्सा भी |

सलोनी राहुल के उतरे चेहरे को देखती है तो वो मुंह घुमा कर होंठ काटती हंसती है “बेचारा” अपने मन में दोहराती है 
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01-13-2019, 11:38 PM,
#12
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राहुल सलाद को काटने लगता है मगर वो कनखियों से बीच बीच में अपनी माँ को देखता रहता है | जिसकी रोटी पकाते हुए कमर कुछ ज्यादा ही हिल रही थी | साथ ही हिल रहे थे उसके चूतड़ | टाइट गोल मटोल चूतड़ जो बाहर को बेहद गोलाई में उभरे हुए थे | किसी जवान लड़की जैसी अपनी माँ की कसी करारी गांड को देखते हुए उसके मुंह में, नहीं उसके लंड में पानी आ गया था | उसने कुछ देर पहले जब अपना लंड उसकी गांड में चुभोआ था और खुद उसकी माँ ने भी अपनी गांड को वापिस उसके लंड पर दबाया था तो वो ऐसा ज़बरदस्त एहसास था, खुद उसने पेंट पहनी हुई थी और उसकी माँ ने उसका अंडरवियर पहना हुआ था मगर फिर भी वो सलोनी के नितम्बो की तपिश अपने लंड पर दोनों कपड़ों के अवरोध के बावजूद बखूवी महसूस कर सकता था, कैसी मुलायम सी, नर्म सी, कोमल सी गांड महसूस हुई थी |

‘हाएएएएए...... घोड़ी बनाकर मम्मी की मारने में कितना मज़ा आएगा.....’ राहुल अपनी सोच में गुम था |

“सलाद काटने की तरफ धयान दो बरखुरदार, अपनी नज़रें और दिमाग को अपने सामने सलाद पर रखो वरना ऊँगली कट जाएगी” सलोनी बेटे को चिताती है तो राहुल शर्मिंदा हो जाता है | मगर वो करे भी तो क्या? वो खुद ही उसकी ऐसी हालत के लिए जिम्मेदार थी | खैर राहुल अपनी नज़र कटाई बोर्ड पर जमाने का प्रयास कर सलाद काटता है और उधर सलोनी की रोटी पक चुकी थी |

“देखो तुमसे सलाद भी नहीं काटा गया और मैंने रोटी भी बना दी है, अगर एक दिन तुम्हे खाना बनाना पड़े, तुम तो पूरा दिन निकाल दोगे” सलोनी बेटे को छेडती है |

“मम्मी आप भी ना, मैं कौन सा खाना बनाने का काम करता हूँ, थोड़े दिन करूंगा फिर आप देखना कितना फ़ास्ट फ़ास्ट करता हूँ |

“अरे अगर नज़र सामने रखेगा तो ही काम करेगा ना, अगर मेरी कमर के बल गिनता रहेगा तो क्या काम करेगा!" सलोनी की छेड़ छाड़ और भी तीखी हो जाती है |

“वैसे मुझे मालूम है, शुरू-शुरू में आदमी को सिखाने में समय लगता है, लेकिन मैं देखूंगी कुछ दिनों के या......कुछ रातों के एक्सपीरियंस के बाद तू कितना फ़ास्ट फ़ास्ट काम कर सकता है.......” सलोनी का असल मतलब क्या था, राहुल बाखूबी समझता था शायद इसीलिए उसके गाल लाल हो रहे थे | वो अपनी मम्मी को क्या जवाब दे क्या नहीं, उसकी समझ नहीं आ रहा था और उसकी ऐसी हालत देख सलोनी को जैसे बहुत ख़ुशी मिल रही थी | वो उसे इस तरह परेशान करने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहती थी |

“अभी क्या बोलती बंद हो गई? अभी से डर लगने लगा कि यहाँ पे परफॉरमेंस भी चेक होगी, हुंह... टेंशन में आ गये लाट साहब? अब क्या करूँगा? कैसे करूँगा? यही सोच रहे हो ना” सलोनी इतनी बेरहम भी हो सकती थी, उसे खुद मालूम नहीं था |

“क्या मम्मी, अब बस भी करो ... आप अच्छे से जानती हैं, मैं कभी पीछे नहीं हटता, कभी घबराता नहीं हूँ, हमेशा अव्वल आता हूँ” राहुल अपने आत्मसम्मान की रक्षा करता है |

“ओह्ह्ह्ह.....देखो तो कभी पीछे नहीं हटता... कभी घबराता नहीं.... फिर टाँगे क्यों कांप रहे हैं तुम्हारी ...देखना कहीं गिर ना जाना” सलोनी कमर पर हाथ रखे चेहरे पर खुशक भाव लिए राहुल को कहती है | मगर उसे ना जाने कितनी कोशिश करनी पड़ रही थी अपनी हंसी रोकने के लिए |
“किसकी टाँगे कांप रही हैं.......कहाँ टांगें कांप रही हैं” राहुल खीझ उठता है |

“किसकी टांगें कांप रही हैं? तुम्हारी और किसकी... देखो अब कहीं डर के मारे पेंट ना गीली कर देना...... ओह यह क्या ... मुझे तो लगता है तुमने वाकिया में पेंट गीली कर दी है...” सलोनी हैरान होने का नाटक करती हुई राहुल की पेंट की और इशारा करती है | यहाँ ज़िपर की साइड में एक गीले धब्बे का निशान था हालाँकि वो बाखूबी जानती थी कि वो धब्बा उसकी गांड की करतूत का नतीजा था मगर राहुल को परेशान करने का मौका वो हाथ से कैसे जाने देती |

“मम्म्म्मम्मम्ममी........” राहुल खीझ कर लगभग चिल्ला ही पड़ता है | उसे यकीन नहीं हो रहा था उसकी माँ उसे इस हद्द तक परेशान कर सकती है | सलोनी मुंह घुमा लेती है | उसका बदन हिल रहा था अब उससे हंसी रोकना बहुत मुश्किल काम जान पड़ती था |

“ठीक है....... ठीक है, चिल्लाने की जरूरत नहीं है, मुझे तो चिंता हो रही थी कि कहीं दोपहर की तरह फिर से पेंट तो गीली नहीं कर दी क्योंकि अब मेरा दिल कपडे धोने को बिलकुल भी नहीं कर रहा”, सलोनी मुंह घुमाए किचन काउंटर से सामान समेटती अपनी हंसी छुपाने का प्रयत्न कर रही थी |

“मम्मी भगवान के लिए बस भी करो” राहुल हथियार डालता बोलता है | उसे मालूम था जुबानी जंग में माँ से जीतना उसके बस की बात नहीं थी |

“अरे भगवान को क्यों बीच में ला रहा है, तुम्हारी पेंट तुमने गीली की है, कोई भगवान ने थोडे की है” सलोनी प्लेट्स में सब्जी डालती बोलती है |

“ठीक है नहीं मानोगी तो ना सही, बोलो जो बोलना है, डैड आएँगे तो मैं उनसे आपकी शिकायत करूँगा कि आप मुझे किस तरह परेशान करते हो” राहुल अपनी माँ पर दवाब डालने की कोशिश करता है |

“ओह्ह्ह्ह.... डैड से शिकायत? सच में आने दो डैड को, मैं भी शिकायत करूंगी, तू मुझे किस किस तरह परेशान करता है, अपना वो मुझे कहाँ कहाँ चुभोता है, फिर बार बार पेंट गीली करके मेरे धोने के लिए छोड़ देता है, मैं भी सब बताउंगी, मगर तू खुद ही तो कहता था कि तु मुझे कंपनी देगा, तुझसे मेरा अकेलापन नहीं देखा जाता और अब इतनी जल्दी ऊब गया” सलोनी प्रहार पर प्रहार किये जा रही थी | हंसी से उसकी बुरी हालत थी |

“मैं ऊबा नहीं हूँ , आप ही मुझे मज....”

“सलाद की प्लेट्स मेज़ पर रखो”, सलोनी अचानक से राहुल की बात बीच में काटकर बोलती है, “फ्रीजर से थोडा ठंडा पानी निकाल लो, मैं रोटी, सब्जी और रायता रखती हूँ, जल्दी करो, बातों पे ध्यान कम दो और काम पे ज्यादा, कब से बातें किये जा रहे हो, बातें किये जा रहे हो, रुकते ही नहीं” राहुल आँखें गोल करके सलोनी को घूरता है और उसके माथे पर बल पड़ जाते हैं |

“और मुझे ऐसे घूरना बंद करो, मुझे बहुत भूख लगी है, तुम्हारा पेट तो बातों से भर जाता होगा, मगर मेरा नहीं भरता, कब से सुन रही हूँ, कानो में दर्द होने लगा, मगर तुम हो कि मानते ही नहीं” सलोनी कमर पर हाथ रखे राहुल को चिडाती है | राहुल कुछ बोलने के लिए मुंह खोलता है मगर फिर से चुप्प हो जाता है और अविश्वास से सर हिला सलाद की प्लेट उठाता है और खाने के मेज़ की तरफ बढ़ जाता है |

खाने के टेबल पर सलोनी और राहुल दोनों चुपचाप खाना खा रहे थे | खाना कितना मजेदार था, इस बात का पता इस बात से चलता था कि राहुल बहुत खीझा होने के बावजूद खाने को मज़े से खा रहा था | मगर फिर भी वो बीच बीच में ‘आहत’ भरी नज़र अपनी माँ पर जरूर डालता | जो उसकी तरफ खाना खाते हुए बिलकुल बेपरवाही से देख कंधे झटक देती है |

सलोनी पानी का गिलास उठा के घूँट भरती है, तभी राहुल फिर से उसकी और गुस्से भरी निगाह से देखता है | सलोनी इस बार कण्ट्रोल नहीं कर पाती और खिलखिला कर हंस पड़ती है | वो ज़ोरों से खुल कर हंसने लगती है | उसके हंसने से राहुल और भी खीझ उठता है | सलोनी ‘ओके... ओके’ बोलती खुद को रोकने की कोशिश करती है मगर वो चुप नहीं रह पाती | हर बार वो खिलखिला कर हंस पड़ती है |

राहुल शुरू से जानता था उसकी माँ उसे जानबूझकर चिढ़ा रही है मगर वो उसके इस तरह जोर से हंसने से खीझ उठा और खाना बंद कर दिया | उसका दिल किया वो वहां से उठ कर चला जाये | ‘सॉरी.......सॉरी..... प्लीज’ सलोनी उसे हाथ से इशारा करके खाना खाने को कहती है | राहुल जैसे ही चम्च मुंह की तरफ लेकर जाता है | कमरा फिर से सलोनी की हंसी से गूँज उठता है | अब बस.....और नहीं’ वो उठने से पहले एक नज़र अपनी माँ पर डालता है जो अपने मुंह पर हाथ रखे खुद को रोकने की कोशिश कर रही थी, अचानक राहुल भी ज़ोरों से हँसने लगता है | कमरे का माहोल बेहद्द ख़ुशनुमा हो उठता है | दोनों माँ बेटा खाना छोड़ काफी देर तक हँसते रहते हैं | अंत में दोनों थोड़े शान्त पड़ जाते हैं |

“उफ्फ्फ्फ़... हे भगवान......” सलोनी को खुद याद नहीं था वो इस तरह खुल कर पहले कभी हंसी थी | बल्कि उस घर में इस तरह पहले कभी ऐसी हंसी कब गूंजी थी | सलोनी अपनी जगह से उठती है और मुस्कराते हुए राहुल के पास जाती है | राहुल उसे सवालिया नज़रों से देखता है मगर सलोनी उसे कोई जवाब नहीं देती |
सलोनी राहुल के पास जाकर उसके चेहरे को अपने हाथों में थाम लेती है और बिना कुछ कहे अपने होंठ उसके होंठो पर रख देती है | सलोनी राहुल के होंठो पर एक ज़ोरदार चुम्बन लेती है | अपनी जिव्हा से उसके होंठो को चाटती है और फिर से एक मीठा सा चुम्बन लेकर अपना चेहरा उसके चेहरे से दूर हटा लेती है |

“थैंक यू बेटा, थैंक यू सो मच” सलोनी ने वो अलफ़ाज़ सिर्फ अपने मुंह से नहीं बोले थे बल्कि राहुल अपनी माँ की आँखों में उन लफ्जों की भावना भी देख सकता था कि उसकी माँ कितनी खुश थी और इसके लिए वो उसकी कितनी शुक्रगुज़ार थी |

वो चुम्बन एक प्यासी नारी का अपने बेटे से कामौत्तेजना में लिया चुम्बन नहीं था | हालाँकि वो एक माँ बेटे का चुम्बन भी नही कहा जा सकता था मगर उस चुम्बन में राहुल ने सिर्फ और सिर्फ अपनी माँ का प्यार ही अनुभव किया था, इसके सिवा कुछ नहीं, इसके सिवा कुछ भी नहीं |
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01-13-2019, 11:38 PM,
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RE: Maa Sex Kahani हाए मम्मी मेरी लुल्ली
सलोनी वापिस अपनी कुर्सी की और जाने लगती है और जैसे ही उसकी राहुल की और पीठ होती है तो राहुल उसके जाते जाते पीछे से उसकी गांड पर हाथ फेर देता है |

“ईईईईईई....आअह्ह्ह्ह.... शैतान” सलोनी मुस्कराती हुई वापिस कुर्सी पर बैठ जाती है | दोनों माँ बेटे फिर से खाना खाने लगते हैं | दोनों बहुत खुश थे और मुस्करा रहे थे | राहुल की नज़र बार बार अपनी माँ के चेहरे की और उठ जाती है | इतना हंसने के बाद सलोनी का चेहरा कुछ लाल गुलाबी सा पड़ गया था | उसके होंठो की मुसुराहट उसके चेहरे की मासूमियत और सबसे बढ़कर उसके नाक की बाली ....... ‘उफ्फ्फ कितनी प्यारी कितनी सुन्दर है उसकी माँ...........’राहुल बस यही सोचे जा रहा था | अपनी माँ की सुन्दरता पर उसका मन मोहित होता जा रहा था |

राहुल अपनी जगह से उठता है और अपनी माँ और जाता है | सलोनी उसे सवालिया नज़रों से देखती है | वो सलोनी के चेहरे को हाथों में थाम लेता है और अपना चेहरा उसके चेहरे पर झुका देता है | उसके माथे पर, उसकी आँखों पर, उसके गालों पर, उसकी नाक पर जी भरकर चुम्बन लेने के बाद राहुल अपना चेहरा उपर उठाता है तो देखता है कि उसकी माँ की आँखें बंद थी | उसके चेहरे की मासूमियत उसकी वो सुन्दरता जो उसके मन को ठग रही थी, अब और भी बढ़ गई थी | राहुल फिर से अपना चेहरा नीचे लाता है और फिर से अपनी माँ के चेहरे को चूमने लगता है | वो सलोनी को चूमता जाता है, चूमता जाता है जैसे उसका मन नहीं भर रहा था, खास कर वो उसकी नाक की बाली की जगाह पर बार बार चूम रहा था | आखिरकार जब वो अपना चेहरा ऊपर उठाता है तो सलोनी धीरे से आँख खोल देती है | उसकी आँखें बता रही थी कि वो अपने बेटे के इस प्यार प्रदर्शन से कितनी खुश थी |

सलोनी अपने होंठ सिकोड़ कर चूमने के अंदाज़ में बाहर को निकालती है और राहुल को देखकर अपनी ऊँगली को होंठो से छूते हुए उसे इशारा करती है | राहुल फिर से अपना चेहरा नीचे लाता है और अपने होंठ अपनी माँ के होंठो से सटा देता है |

“उम्म्मम्ह्ह्ह.......उम्म्मम्ह्ह्हह्ह.......उम्म्म्मम्म्म्हह्ह्ह्ह” एक के बाद एक सलोनी राहुल के होंठो पर चुम्बन लेती है या कहिए देती है | जब राहुल और सलोनी अपन चेहरे वापिस खींचते हैं तो दोनों के होंठ ही नहीं चेहरे भी मुस्करा रहे थे | सलोनी राहुल के हाथ अपने हाथों में ले लेती है |

“थैंक यू बेटा, थैंक यू सो मच, तुम्हे नहीं मालूम, तुमने मुझे आज कितनी ख़ुशी दी है, आज कितने सालों बाद मुझे लग रहा है कि ज़िन्दगी कितनी खूबसूरत हो सकती है,” सलोनी बेटे के हाथ को चूमती है तो राहुल उसके सर पर हाथ फेरता है और फिर से उसके होंठो पर एक प्यारा सा चुम्बन लेता है | राहुल को उस समय ऐसा लग रहा था जैसे उसकी माँ से बढ़कर दुनिया में कुछ भी प्यारा नहीं हो सकता |

“चलो अब बहुत प्यार कर लिया अपनी माँ को, अब खाना फिनिश करो” दोनों फिर से खाना शुरू करते हैं | माँ बेटे दोनों के दिल में मीठी सी गुदगुदी हो रही थी | अब राहुल को भी पहले के मुकाबले थोड़ी कम शर्म आ रही थी वो अपनी माँ के साथ सहजता महसूस कर रहा था |

खाने के बाद दोनों सिंक में अपने अपने बरतन डालते हैं | सलोनी के मना करने के बावजूद राहुल उसके साथ बरतन धुलवाने लगता है | जैसे ही एक प्लेट धुलती और राहुल उसे होल्डर में रख देता है | सलोनी उसे देखती है और अपना मुंह आगे करती है | राहुल भी तुरंत अपना मुंह आगे को बढ़ा देता है | दोनों के होंठ मिल जाते हैं |

“मुव्व्व्वाआह्ह्ह्ह.....” की आवाज़ के साथ दोनों के होंठ अलग होते हैं | माँ बेटा दोनों एक दुसरे को देख हँसते हैं | उसके बाद अगली प्लेट धुलने के बाद फिर से राहुल सलोनी की और देखता है | सलोनी तुरंत अपना मुंह आगे बढ़ा देती है |

“मुव्व्व्वाआह्ह्ह्ह....” के साथ फिर से उनके होंठ अलग होते हैं और बच्चों की तरह खिलखिला कर हंस पड़ते हैं | फिर तो माँ बेटे के बीच चुम्बनों का सिलसिला सा शुरू हो गया | हर प्लेट, हर कप, हर बर्तन यहाँ तक कि एक छोटा सा चम्च भी धोने के बाद वो एक दुसरे को चुमते | दोनों के मन शरारत से भरे हुए थे | दोनों से ख़ुशी संभाली नहीं जा रही थी | जब तक बर्तन धुलते तब तक वो इतनी दफा एक दुसरे को चूम चुके थे कि उनकी साँसे गहरी हो चुकी थीं , धडकने बढ़ चुकी थी | राहुल का लंड झटके मार रहा था और सलोनी कि चूत रस से सरोबर हो चुकी थी | बर्तन धोने के पश्चात् दोनों ने एक लम्बा सा चुम्बन लिया और तौलिये से हाथ पोंछते सलोनी राहुल को ड्राइंग रूम में भेजती है | खुद दूध गर्म करने लग जाती है |

सलोनी हाथ में ट्रे पकड़े ड्राइंग रूम में दाखिल होती है | ट्रे में दूध के साथ एक पॉपकॉर्न का पैकेट भी था | राहुल पहले की तरह टेबल पर पाँव रख सोफे की पुश्त से टेक लगाकर सोफे की एक साइड में बैठा था | सलोनी ट्रे को टेबल पर रखती है तो राहुल दूध देखकर नाक भोंह सिकोड़ता है | उसे शुरू से दूध पसंद नहीं था मगर पीना उसे हर रोज़ पड़ता था |

“क्या माँ.... आज तो रहने देती? एक दिन नहीं पियूँगा तो कुछ हो नहीं जाएगा मुझे”

“आज तो तुझे दूध की सख्त जरूरत है....कोई और दिन होता तो और बात थी... आज तो तुझे सख्त मेहनत करनी है”

“दूध पिए बिना कोई क्या सख्त मेहनत नहीं कर सकता?”

“कर सकता है अगर उसकी पेंट गीली ना होती हो” राहुल ने अपनी माँ की और आहत नज़रों से देखा |

“वैसे भी दूध नहीं पिएगा तो ताकतवर कैसे बनेगा और ताकतवर नहीं बनेगा तो फिर फ़ास्ट फ़ास्ट कैसे करेगा?”

“मुझमे बहुत ताकत है.... सारा दिन तुमको उठाके घूम सकता हूँ” राहुल जैसे चैलेंज करता है |

“अच्छा चलो देखते हैं कितनी ताकत हैं तुममे........ घूमाना बाद में... पहले बिठाकर तो दिखा” कहकर सलोनी खड़ी होती है और आगे बढ़कर सीधा राहुल की गोद में बैठ जाती है और अपनी बांह उसकी गर्दन पर लपेट देती है |

“आ...आऊच” राहुल लंड पर सलोनी की गांड का वजन पड़ते ही कराह उठता है | वो इस अचानक हमले से हडबडा गया था |

“क्या हुआ, तकलीफ हो रही हो तो उतरूं” सलोनी राहुल की और आँख नचाकर कहती है | राहुल सलोनी की पीठ पीछे हाथ घुमाकर उसे अपनी गोद में अच्छे से थाम लेता है और फिर दुसरे हाथ से उसकी पूर्णतया नंगी जांघो को सहलाता है |

“तुम्हारा जब तक दिल चाहे तुम मेरी गोद में बैठ सकती हो, मैं तुम्हे उठने के लिए नहीं कहूँगा” राहुल का हाथ सलोनी के घुटने से शुरू होकर उसके अंडरवियर के निचले सिरे तक घूम रहा था |

“चाहे मेरे वजन से तुम्हारी जान ही निकल जाये?” सलोनी राहुल की आँखों में देखती बोलती है |

“तुम्हारा कौन सा वजन है मम्मी, तुम तो फूलों से भी हलकी हो” राहुल ने अपनी माँ के कान में कहा | 

“अच्छा ,,,, जैसे मुझे नहीं मालूम मैं कितनी वजनी हूँ” सलोनी धीमे से स्वर में कहती है |


“अपनी तारीफ़ करवाना चाहती हो....?” सलोनी कुछ नहीं बोलती तो राहुल जांघो को सहलाता अपना हाथ अंडरवियर के ऊपर तक लाने लगता है |

“मम्मी आपकी स्किन कितनी कोमल है...... कितनी नरम और मुलायम ... आप कितनी गोरी गोरी हो मम्मी” सलोनी कुछ देर चुप रहती है | बेटे के हाथ के स्पर्श से उसके पूरे बदन में सिहरन दौड़ रही थी | चूत से रस बहकर बाहर आने लगा था | वो खुद अपने रस की सुगंध ले सकती थी |

“क्यों झूठी तारीफ कर रहा है, मुझे मालूम है, मैं कितनी सुन्दर हूँ” सलोनी के कान तरस रहे थे बेटे के मुंह से अपने हुस्न की तारीफ सुनना | उसे बहुत अच्छा लग रहा था |

“झूठ नहीं मम्मी..... सच में ..... आप जैसी सुन्दर मैंने कभी कोई नहीं देखी... आपका चेहरा कितना प्यारा है” राहुल से रहा नहीं जाता | वो फिर से अपनी माँ के गाल को चूम लेता है “और मम्मी..... और....” राहुल कुछ ज्यादा ही जोश में था | वो जो कुछ भी कह रहा था, कर रहा था, उसकी मम्मी उसका कोई बुरा नहीं मान रही थी बल्कि चेहरे से लग रहा था उसे अच्छा लग रहा था |

“और .... और क्या .... बोल ना....” सलोनी बैचेनी से बोल उठती है |

“मम्मी आपकी नाक की बाली आप पर बहुत जंचती है, इससे आपका चेहरा और भी प्यारा लगता है, आप सच में बहुत सुंदर हो मम्मी... आपका मंगलसूत्र ...” राहुल झिझक उठता है |

“मेरा मंगलसूत्र ... वो क्या ... बोलो ना मेरा मंगलसूत्र क्या?” सलोनी राहुल की गर्दन पर तेज़ साँसे छोडती उसे जीव्ह से चाट रही थी |

“आपका काला मंगलसुत्र आपके गोरे रंग पर कितना फबता है .... और ... और” 

“अब बोल भी दो......क्यों सता रहे हो” सलोनी अधीरता से बोल उठती है |

“आप बुरा मान जाओगे मम्मी” राहुल मासूमियत से बोलता है |

“अब कैसे गुस्सा करुँगी... तेरी गोद में बैठी हूँ... तेरे इसने गुस्सा करने लायक छोड़ा कहाँ है” सलोनी भड़के हुए लंड पर गांड रगडती बोलती है, “तू कुछ भी बोल... कुछ भी...” सलोनी बुरी तरह अकड़े लंड को धीरे धीरे नितम्ब हिलाकर रगड़ रही थी | राहुल का चेहरा वासना से लाल होता जा रहा था |

“माँ वो आपका मंगलसूत्र ... वो जब दोपहर को ... मैंने देखा था... बाथरूम में... जब आपने कपडे नहीं पहने थे... आपका मंगलसूत्र ... वो आपके सीने पर... आपके ... आपके ... उन दोनों के बीच ... उफ्फ्फ्फ़... मम्मी... काला मंगलसूत्र... उन दोनों के बीच बहुत प्यारा लग रहा था” |

“सिर्फ प्यारा लग रहा था...... तूने तो सब कुछ देख लिया था..... मैं सोचती थी तुझे कुछ भी लगा होगा.....” सलोनी राहुल के कान की लौ को दांतों से काटती बोलती है |

“हाँ मम्मी.... वो... वू.... बहुत ... बहुत ... सेक्सी भी... सेक्सी भी लग रहा था... आपक्ली नाकिकी बाली भी कितनी सेक्सी है ... आप बहुत सेक्सी हो मम्मी... सच में मम्मी... आप बहुत.. बहुत सेक्सी हो”

“तूने तो मुझे लगभग निराश ही कर दिया था.. मुझे लगा शायद मैं तुझे सेक्सी नहीं लगती...” सलोनी पहले की तरह राहुल के कान की लौ काटती बोलती है, कुछ देर दोनों में छुपी छा जाती है |

“मम्मी..... मम्मी....” राहुल बिलकुल धीमें से फुसफुसा कर बोलता है |

“अब क्या...... बोल ना... जो भी बोलना है ..............” सलोनी लंड को अपनी गांड से सहलाती बोलती है |

“मम्मी आप मुझे कह रहे थे ....” राहुल एक पल के लिए चुप हो जाता है फिर अपना मुंह सलोनी के कान के नज़दीक लाकर फुसफुसाता है | 

“मम्मी आप मुझे कह रही थीं..... मगर आप ने भी अंडरवियर को गीला कर दिया है” |

सलोनी की नज़र नीचे जाती है तो उसे अंडरवियर के सामने एक गीला धब्बा दिखाई देता है |

“मैं तो सुबह से ही गीली हूँ, मेरी तो गंगा यमुना की तरह रस बहा रही है” |

“सुबह से मम्मी?”

“सुबह से ... जब से तेरे इसको चूसा है... ऊपर से तू बार बार इसे मेरे चुभो रहा था... अभी भी देख कैसे चुभ रहा है... बड़ा शैतान है यह तेरा... देख मेरी क्या हालत कर दी है” सलोनी राहुल का हाथ अपने घुटने से हटाकर अपनी अंडरवियर 
पर अपनी चूत के ऊपर रख देती है | राहुल तुरंत चूत पर हाथ रखकर दबा देता है | उसे चूत के होंठ महसूस हो रहे थे मगर मर्दों का अंडरवियर होने के कारण सामने से उसका डिजाईन ऐसा था कि वो अपनी माँ की चूत को वैसे नहीं महसूस कर सकता था जैसे उसने दोपहर को उसी सोफे पर की थी जब उसने पायजामे के अन्दर हाथ डालकर उसकी चूत को भीगी कच्छी के ऊपर से मसला था, तब तो उसे ऐसे लगा था जैस उसकी माँ ने कच्छी पहनी ही नहीं थी | उसने दिल में सोचा काश उसकी माँ ने उसके अंडरवियर की जगह अपनी कच्छी पहनी होती | राहुल के सहलाने से सलोनी सिसकियाँ भरने लगी थी | उसे लगने लगा था कि शायद उसके चुदने का समय आ गया था |

“राहुल.... राहुल....” सलोनी अपने बेटे को पुकारती है जो अपनी दुनिया में खोया हुआ था |

“बेटा मैं सोच रही थी क्योंकि अब तुम घर पर रहने वाले हो तो अगर हम सारा दिन घर पर खाली हाथ बैठेगें तो सही नहीं होगा, हमें कुछ ना कुछ ऐसा काम करना चाहिए जैसे हमारी थोड़ी बहुत कसरत हो जाए..... काम तो यहाँ कुछ... है नहीं” सलोनी सिसकीयों के बीच बोलती है |

“क्या मतलब मम्मी... मैं समझा नहीं” राहुल अब बेहिचक चूत को अंडरवियर पर से मसले जा रहा था |

“मेरा मतलब सारा दिन खाली बैठने से हम आलसी होते जायेंगे... शरीरक क्षमता कम होती जाएगी.. इसलिए हमें कोई काम वगैरा करना चाहिए जैसे ... हमारी सेहत ठीक रहे...” सलोनी की सिसकियाँ ऊँची होती जा रही थी और वो राहुल की आग को और भड़का रही थी |

“कोन...सा ...कोन..सा..काम... मम्मी” राहुल की उँगलियाँ अंडरवियर के सामने की उस डिजाईन में घुसने लगती हैं यहाँ लंड बाहर निकाल कर पेशाब किया जाता है |


“यही तो मैं सोच रही थी... काम तो यहाँ है नहीं.....” सलोनी राहुल के लंड को अपनी गांड पर झटके मारता महसूस कर रही थी,“क्यों... ना हम कोई खेल खेले.. तो कैसा रहेगा” सलोनी राहुल की उँगलियाँ को अंडरवियर को सामने से खोलते महसूस कर रही थी | अब उसका बेटा जल्द ही उसकी नंगी छूट को छूने वाला था | यह सोचकर सलोनी के पूरे बदन में कम्कम्पी सी होंने लगती है | पहली बार उसका बेटा उसकी नंगी चूत को छूने वाला था |

“कैसा खेल मम्मी....” राहुल की उँगलियाँ अंडरवियर के होल से होती हुई चूत को स्पर्श करती हैं |

“आहह्ह्हह्ह्ह्ह.... हे भगवान.......” सलोनी चीख पड़ती है “कोई भी ऐसा खेल..... जिसमें उफ्फ्फ्फ़......हम दोनों खूब मज़ा करें ... आह......खूब.......खूब... मस्ती करने को मिले...... आह्ह्ह्ह.......उन्न्न्नन्न्गग्गह्ह्हह्ह्ह्ह..... ऊउफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ ... थोडा तुम्हारा ज़ोर लगे.... इइइइइआह.... थोडा मेरा ज़ोर लगे... कोई ऐसा खेल....” सलोनी दांतों से निचे वाला होंठ काटते हुए ऐसे सिसक सिसक कर बोल रही थी |

राहुल अपनी उँगलियों को चूत में धकेलना चाहता था मगर अंडरवियर के होल की बनावट उसकी ऊँगली को ज्यादा अन्दर तक नहीं जाने दे रही थी |

“आऊऊन्न्नन्नग्गग्ग्ग... कोई ना कोई ....खेल... सोच लेंगे... अपना बना लेंगे ..उफफ्फ्फ्फ़... ऐसा खेल जो दिन और रात को हम दोनों मिलकर खेलेंगे.. हाए बेटा.. तू खेलेगा मेरे साथ वो खेल... अपनी मम्मी के साथ... आह्ह्ह..... बोल ना मेरे लाल... मस्ती करेगा मेरे साथ...” |

“हाँ मम्मी. ........ हाँ......... मैं खेलूँगा...... तुम्हारे साथ...... वो मस्ती वाला खेल.. ...... हाए मम्मी मैं दिन रात तुम्हारे साथ मस्ती करूँगा...... दिन रात......” राहुल अपनी उँगलियाँ अंडरवियर के होल से बाहर निकालता है और अपना हाथ अंडरवियर की इलास्टिक के अन्दर डाल देता है | राहुल का हाथ सीधा अपनी माँ की चूत पर जाता है और उसकी चूत को कस कर मुठी में दबोच लेता है |

सलोनी एक झटके से उठ राहुल की गोद से निकल सोफे पर थोड़ी दूर खड़ी हो जाती है | राहुल हक्का बक्का रह जाता है | सलोनी की अंडरवियर राहुल के हाथ अन्दर डालने के कारण थोड़ी नीचे खिसक गई थी | उसकी चूत पर हलके–हलके, छोटे-छोटे बाल थे जिन्हें शायद उसने अपने पति के जाने के बाद शेव नहीं किया था |

सलोनी ट्रे से दूध के गिलास उठाती है और राहुल की और बड़ती है | राहुल कुछ कहने के लिए मुंह खोलता है तो सलोनी उसके बोलने से पहले ही उसके होंठो पर अपनी ऊँगली रख देती है |

“अभी नहीं.... यहाँ नहीं... दूध पीकर मेरे कमरे में आ जाना ... आज रात तुम्हे वहीँ सोना है ... मेरे साथ मेरे बेड पर....” 

राहुल सलोनी को जाते हुए देखता है, उसकी नज़र अपनी माँ की गांड पर जाती है जिसमें अंडरवियर अंदर को धंसा हुआ था | जो शायद उसके लंड की करतूत थी | फिर उसका ध्यान अपने झटके खाते लंड और अपने हाथ पर जाता है जो उसकी माँ की चूत के रस से बुरी तरह भीगा हुआ था | उसे समझ नहीं आ रहा था कि अभी अभी क्या हुआ था |
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01-13-2019, 11:39 PM,
#14
RE: Maa Sex Kahani हाए मम्मी मेरी लुल्ली
सलोनी अपने कमरे में जाती है और सीधे बाथरूम में घुस जाती है | कुछ देर नहाने के बाद बदन पोंछती है | अपने वार्डरोब से एक पेंटी और एक सिल्क की नाईटी निकालती है | अपनी देह को शीशे में निहारती वो अपने चेहरे को देखती है | उसके चेहरे पर कैसे अजीब से भाव थे | वो एक तरफ को हट जाती है | वो ड्रायर से कोई परफ्यूम निकालती है और उसे बदन पर लगाती है | फिर वो अपनी पेंटी और नाईटी पहनती है | अपने बालों का जुड़ा बनाती है | चेहरे पे हल्का सा मेकअप करती है, अंत में दोबारा शीशे में खुद पर एक निगाह डालती है | उसके सामने शीशे में सलोनी नहीं कयामत थी | उसकी सिल्क की नाईटी से हालाँकि उसके अंग तो नहीं दिख रहे थे मगर सिल्क की वो नाईटी उसके बदन के कटावों और उभारों को इस तरह से चूमती, सहलाती थी और उन्हें इस प्रकार अलींगनबध करती थी कि वो किसी पारदर्शी नाईटी से बढ़कर उत्तेजनात्मक दृश्य पैदा करती थी | संतुष्ट होकर सलोनी बेडरूम में चली जाती है |

राहुल बेड पर एक तरफ टांगें लटका कर बैठा हुआ था | सलोनी दूसरी तरफ से बेड के ऊपर चड़ती है |

“बेटा ऐसे क्यों बैठे हो? ऊपर आराम से बैठो ना” सलोनी उसे प्यार से कहती है और कमरे की लाइट बुझा देती है और नाईट बल्ब को जला देती है | कमरे में काफी अँधेरा था, मगर कुछ समय बाद जब उनकी आँखें अँधेरे में एडजस्ट होती हैं तो दोनों एक दुसरे को बाखूबी देख सकते थे, एक दुसरे के चेहरे को बाखूबी पढ़ सकते थे |

“राहुल ऊपर आओ ना बेड पर, इस तरह क्यों बैठे हो” राहुल पहले की तरह ही बेड के सिरहाने टाँगे नीचे लटका कर बैठा रहता है और वो अपनी माँ की और देखता है तो सलोनी उसके चेहरे पर नाराज़गी साफ़ देख सकती थी |

“मुझसे नाराज़ हो” सलोनी धीमे से पूछती है |

“नहीं मैं भला क्यों नाराज़ होने लगा आपसे”, आखिरकार राहुल मुंह से कुछ फूटता है और अपनी टाँगे उठाकर बेड पर रख लेता है और तकिए पर सर रखकर बेड पर लेट जाता है |

“देखो बेटा अगर तुम इस बात के लिए नाराज़ हो कि ...”

“मैंने कहा ना मम्मी, मैं आपसे नाराज़ नहीं हूँ, आप खामखाह परेशान हो रही हैं”, सलोनी जैसे ही अपनी बात कहनी चालू करती है, राहुल उसे एकदम से काट देता है | उसके खुशक स्वर से मालूम चलता था वो थोडा नहीं बहुत नाराज़ था | राहुल छत की और घूर रहा था जबकि सलोनी पिल्लो पर कोहनी के सहारे ऊपर उठी हुई थी और राहुल की और देख रही थी |

कमरे में चुप्पी छा जाती है | सलोनी को समझ नहीं आता वो उसे कैसे मनाये? कमरे का माहोल कुछ ऐसा बन चूका था कि वो सीधे जाकर राहुल से लिपट नहीं सकती थी | वो बहुत ही अटपटा होता |

सलोनी उसी तरह लेटे हुए कोहनी के बल अपना सर उठाए राहुल को घूर रही थी जो अपने माथे पर अपनी बांह रखे छत को घूर रहा था | उसका लंड अब पूरी तरह से नर्म पड़ चूका था |

बेटे को घूरती सलोनी अचानक महसूस करती है कि उनके रिश्ते ने एक दिन में क्या से क्या मोड़ ले लिया था | कहाँ वो एक माँ थी, एक पवित्र माँ, जिसके लिए बेटे से बढ़कर कुछ भी नहीं था | शायद अब भी उसकी ममता में कुछ फर्क नहीं पड़ा था, बस अब उनके रिश्ते में वो पवित्रता नहीं रही थी |

सुबह की उस छोटी सी घटना के बाद सब कुछ जैसे एकदम से बिखर गया था | वो उसके लंड को सहलाती किस तरह अपने पर काबू खो देती है और उसके लंड को चुस्ती है और उसके वीर्य को पी जाती है | ‘उफ्फ्फ’ जबकि उसे वीर्य पीना कभी अच्छा नहीं लगता था | वो कभी कभी अपने पति की ख़ुशी के लिए उसके वीर्य को पीती थी | मगर उसे यह कतई पसंद नही था | मगर आज तो वो किस तरह अपने बेटे के लंड से वीर्य पी गई थी, उसने एक पल के लिए भी नहीं सोचा था कि इस सबका नतीजा क्या होगा?

नहीं बाद में अपने कमरे की तन्हाई में उसने यह जरूर सोचा था बल्कि फैसला किया था कि वो फिर कभी भी इस तरह की वाहियात हरकत नहीं करेगी | मगर उसका फैसला ‘रेत का महल’ साबित हुआ था जो हवा का पहला झोंका आते ही ढह गया था | उसने खुद दोपहर को अपने बेटे के साथ ड्राइंग रूम में क्या किया था? किस तरह वो उसके लंड को अपनी मुट्ठी में भरकर सहलाने लगी थी और जब उसके बेटे ने उसके मुम्मे को टीशर्ट के ऊपर से मसलना चालू किया था तो उसने खुद उसको बढ़ावा दिया था | किस तरह राहुल ने उसके पायजामे में हाथ डालकर उसकी चूत को कच्छी के ऊपर से सहलाया था और जब उसने उसकी चूत को अपनी मुट्ठी में भरा था | वो खुद अपनी चूत उसके हाथ में उछाल रही थी और फिर उसका सख्लन हो गया था | यह शायद जिंदगी में पहली बार हुआ था कि सलोनी ने बिना चुदवाए सख्लन हासिल कर लिया था मात्र अपने बेटे के स्पर्श से और वो भी कच्छी के ऊपर से |

और फिर......... और फिर बाथरूम में वो कैसी बेशर्म बन गई थी | सलोनी को बाथरूम की याद आती है जब उसका बेटा उसे कपड़े देने आया था तो उसे मात्र एक भीगी हुई कच्छी में देखकर उसकी क्या हालत हो गई थी, सलोनी के होंठो पर मुस्कराहट फ़ैल जाती है | किस तरह वो उसकी गांड में अपना लंड ठोक देता है और जब सलोनी उसकी और घूमी थी तो किस तरह उसका मुंह खुला रह गया था | बेचारा पलक भी ना झपका रहा था अपनी माँ को अपने सामने एक कच्छी में देखकर उसकी क्या हालत हो गई थी? किस तरह वो उसके नंगे मुम्मो को घूर रहा था, जैसे अभी आगे बढ़कर उन्हें मुंह में भर लेगा | सलोनी दिन की घटनाओं को याद करती करती गर्म हो रही थी | उसकी चूत से रस बहना चालू हो गया था 

और अब उसने क्या किया था, किस तरह तपाक से उसके लंड पर जाकर बैठ गई थी | किस तरह उसके लंड को अपनी गांड से मसल रही थी और जब राहुल की उँगलियाँ अंडरवियर के होल से उसकी चूत से टकराई थीं ...... हाएएएएएए .. और फिर उसने अपना हाथ ही उसके अंडरवियर में घुसाकर पहली बार उसकी नंगी चूत को अपनी हथेली में भर लिया था...... ऊऊफ़्फ़्फ़्फ़.... वो फिर से सख्लन के करीब पहुँच गई थी ...... वो महसूस कर सकती थी..... उसके बेटे के स्पर्श में जादू था.... या शायद उनके रिश्ते की पवित्रता उनके इस पाप से हासिल होने वाले आनंद को कई गुणा बढ़ा रही थी कि वो अपने बेटे के हल्के से स्पर्श से ही भड़क उठती थी... और यही हालत शायद राहुल की भी थी.... वो भी शायद अपनी माँ के स्पर्श से बहुत ज्यादा उत्तेजित हो जाता था..... शायद मेरे जैसे वो भी खुद पर काबू खो देता है.... और इसीलिए मैंने उसे वहीँ रोक दिया था.... जिस तरह उसका लंड मेरी गांड के निचे झटके मार रहा था और वो जिस तरह सिसक रहा था वो ज्यादा देर टिकने वाला नहीं था..... वो जल्द ही सखलित हो जाता .. फिर मेरा क्या होता... अगर वो इतना उत्तेजित ना होता तो मैं उसे ना रोकती.. उससे वहीँ चुदवा लेती.. मगर वो उस समय शायद ही मेंरी चूत में लंड घुसा पाता.. हो सकता है वो यह सब पहली बार कर रहा हो.. नहीं लगभग तै था कि वो पहली बार किसी औरत के साथ का आनंद प्राप्त कर रहा था .........

मगर अब क्या... अब वो उससे नाराज़ हो गया था.. अब वो उसे मनाए कैसे .. सलोनी सोचती है.... उसे समझ नहीं आ रहा था वो अपनी बात की शुरुआत कहाँ से करे... 

अचानक बेड की पुश्त पर रखे मोबाइल की घंटी बज उठी, सलोनी और राहुल दोनों एकदम से चौंक उठते हैं | राहुल अपना बाजू अपनी आँखों से हटाकर अपनी माँ की और मुख घुमाकर देखता है | सलोनी बेड की पुश्त से मोबाइल उठाती है और जैसी उसने उम्मीद की थी , फ़ोन उसके घरवाले का ही था | सलोनी ओके का स्विच दबाकर मोबाइल को कान से लगाती है | वो अब भी पहले की तरह सिरहाने पर कोहनी के बल उचककर राहुल की और देख रही थी और अब राहुल भी उसकी और देख रहा था |

“हेल्लो.... हाँ जान कैसे हो?” सलोनी राहुल की आँखों में झांकती मोबाइल के माइक्रोफोन में बोलती है |

दूसरी तरफ से : ……………………………………………………

“हाँ हम ठीक हैं, राहुल भी ठीक है, पूरी मस्ती कर रहा है, बहुत शरारती बन गया है आजकल, ऐसी ऐसी शरारतें करता है कि क्या बतायुं आपको, आप सुनाइए आप कैसे हैं? आपकी तबीअत तो ठीक है ना”

दूसरी तरफ से : ……………………………………………………

“और काम काज कैसा चल रहा है?” सलोनी राहुल की और घूर रही थी | जिसने फिर से अपना चेहरा मोड़कर ऊपर की और कर लिया था और अपनी आँखों पर फिर से बांह रख ली थी |

दूसरी तरफ से : ……………………………………………………

“मैं क्या करूंगी वही कर रही थी जो पूरा दिन करती हूँ, बस आपको याद कर रही थी”

दूसरी तरफ से : ……………………………………………………

“नींद किसे आती है जान, यहाँ तो पूरी पूरी रात करवटें बदलते बदलते निकल जाती है, ना दिन को चैन, ना रात को, बस किसी तरह दिन काट रहे हैं आपकी राह देखते”

दूसरी तरफ से : ……………………………………………………


“इतनी याद आती है तो फिर छोड़ कर क्यों गए थे.... यह भी नही सोचा मैं किसके सहारे दिन काटूँगी.... इतनी लम्बी लम्बी रातें बिना आपके कैसे काटूं” 

दूसरी तरफ से : ……………………………………………………

“राहुल? वो अपने कमरे में सोया हुआ है उसकी आप चिंता मत कीजिये , जो भी बात करनी है, खुल कर कीजिये”, सलोनी थोडा ऊँचे स्वर में बोलती है |

दूसरी तरफ से : ……………………………………………………

“उफफ्फ्फ्फ़.... मेरी कौन सी हालत आपसे कम बुरी है, आपको कैसे बताऊं, सारा दिन गीली रहती है बेचारी, हर पल आपके लंड के लिए तरसती है”, सलोनी का स्वर कामुक होता जा रहा था |

दूसरी तरफ से : ……………………………………………………

“आपका खड़ा है तो मेरी चूत भी रस टपका रही है, मेरी कच्छी पूरी भीग गई है”’ सलोनी की नज़र राहुल के चेहरे से बदलकर अब उसकी पेंट पर थी | यहाँ जिपर के स्थान पर एक तम्बू बनना शुरू हो गया था |

दूसरी तरफ से : ……………………………………………………

“हाए जानू, क्या बतायुं जितना मैं तुम्हे याद करती हूँ, उससे बढ़कर मेरी चूत तुम्हारे लंड को याद करती है, इसीलिए सारा दिन मेरी कच्छी भीगी रहती है”

दूसरी तरफ से : ……………………………………………………

“मुझे तो आपकी हर बात याद आती है, जब आप मेरे मुम्मे निचोड़- निचोड़ कर चूसते थे.. जब आप मेरी चूत चाटते थे.. उफफ्फ्फ्फ़.. जब भी आपकी जीभ की याद आती है तो चूत में सनसनी होने लगती है.... किस तरह आप अपनी जीभ मेरी चूत में घुसा कर अन्दर तक चाटते थे.... और जब आप उसे मेरे दाने पे रगड़ते थे.... जब आप पूरी-पूरी रात मुझे चोदते थे.... हाए..... जब आप अपने मोटे लम्बे मुसल से मेरी चूत को पेलते थे.... आआह्ह्ह्ह.... कभी घोड़ी बनाकर .. कभी डौगी स्टाइल में..... उफ्फ्फ्फ़” सलोनी एक हाथ सर के निचे टिकाए और दुसरे हाथ से मोबाइल कान को लगाए बेटे की पेंट में मचल रहे तूफ़ान को देख रही थी | 

दूसरी तरफ से : ……………………………………………………

“उफफ्फ्फ्फ़.. मैं भी चूत में ऊँगली कर रही हूँ, जान.... तुमने मेरी चूत में आग लगा दी है .... हाए मेरी चूत.... मेरा मुंह.... मेरी गांड... आपके लंड के लिए तड़प रही है”, सलोनी सिसकियाँ भरकर बोल रही थी |

दूसरी तरफ से : ……………………………………………………

“हाए आपको मेरी चूत की याद में दिन में एक बार मुट्ठ मारनी पड़ती है, मगर मैं नाजाने कितनी बार आपके लंड को याद करके चूत में ऊँगली करती हूँ”

दूसरी तरफ से : ……………………………………………………

“हाएएए... मुझे भी आपके जाने से पहले बाली रात का एक एक पल याद है.. हाए... पूरी रात आपने सोने नही दिया था, जैसे दो महीने की कसर एक ही रात में पूरी करनी हो...... किस तरह आपने आधे घंटे तक मेरी चूत चाट चाट कर झाड़ी थी, फिर आपने जब मेरे मुंह को चोदा था...... उफ्फ्फ्फ़... मेरी तो सांस ही बंद हो गई थी... गले तक घुसा दिया था आपने ... एक एक पल याद है मुझे, उस रात का... आपने जब मुझे खड़े खड़े अपनी गोद में उठा लिया था और फिर अपने लंड पर उछाल उछाल कर पूरे कमरे में घूमते हुए मुझे चोदा था.. इस कोने से उस कोने तक... और फिर सुबह जब आपने मुझे घोड़ी बनाकर मेरी गांड मारी थी..... हाए आपने मेरी तंग गांड में अपना मुसल पेल पेल कर मेरी गांड सुझा दी थी.. मुझसे दो दिन ठीक से चला नहीं गया था..” सलोनी अब बोल नहीं रही थी केवल सिसकियाँ भर रही थी |

दूसरी तरफ से : ……………………………………………………

“मैं भी तड़प रही हूँ जान, कुछ कीजिए ना जान, प्लीज कुछ कीजिये”

दूसरी तरफ से : ……………………………………………………

“हाँ हाँ मुझे भी आपसे चुदवाना है जान.... प्लीज चोद दीजिये ना...”

दूसरी तरफ से : ……………………………………………………

“हाए क्यों तरसा रहे हो, डाल दो ना अन्दर.... पेल दो अपना लंड मेरी चूत में”

“आआईईईईए .. हाए रे जालिम, एक ही झटके में पूरा घुसा दिया..... उफफ्फ्फ्फ़ मेरी जान निकाल दी”

दूसरी तरफ से : ……………………………………………………

“पेलते रहे जान .. पेलते रहो..... बस ऐसे ही ... उफफ्फ्फ्फ़... आह्ह्हह्ह .. जड़ तक पेलते रहो...”

दूसरी तरफ से : ……………………………………………………

“हाँ... हाँ... ऐसे ही.... ऐसे ही... चोदो अपनी जान को... उफ्फ्फ्फ़.... एक मिनट ... एक मिनट.. रुकिए मेरी टाँगे उठाकर अपने कंधे पर रखिये.. हाँ अब चोदो मुझे ... अब मेरी चूत में पेलो.....”

दूसरी तरफ से : ……………………………………………………

“मारो..... मारो.... और जोर से ... और जोर से .. उफ्फ्फ... मेरे मुम्मे पकड़ो... मेरे मुम्मे मसल मसलकर अपना लंड पेलो मेरी चूत में......”

दूसरी तरफ से : ……………………………………………………

“आअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह्ह..... हाए....... आअह्ह्ह्ह.... चोद दीजिये.. जोर से ... पेलो ... और जोर से ... उफफ्फ्फ्फ़ मेरा भी निकलने वाला है... हाए मारिये मेरी चूत .......... मार मार कर सुजा दीजिये ... आगे से भी और पीछे से भी... ऐसे ही.... ऐसे ही हाँ मार मार कर आगे पीछे से सुजा दीजिये....”

दूसरी तरफ से : ……………………………………………………


“आआआअह्हह्हह्हह्ह्ह्हह्ह्हह..... मेरा भी निकल रहा है... मेरा भी निकल रहा है...... हे भगवान..... इसे मेरे मुंह में डाल दीजिये ... मुझे आपकी मलाई खानी है”

दूसरी तरफ से : ……………………………………………………

“लीजिये आपका लंड बिलकुल साफ़ कर दिया है..... देखिये कैसे चमक रहा है.....”

दूसरी तरफ से : ……………………………………………………

“उफफ्फ्फ्फ़.... मैं आपको क्या बतायुं मुझे कितना मज़ा आया, आपने तो फ़ोन पर ही मेरी ऐसी हालत कर दी, घर आकर क्या करेंगे...”

दूसरी तरफ से : ……………………………………………………

“मैं इंतज़ार करुँगी बेसब्री से “

दूसरी तरफ से : ……………………………………………………

“राहुल की आप चिंता मत कीजिये, मैं उसका पूरा ख्याल रख रही हूँ, बल्कि अब तो वो मेरा ख्याल रखने लगा है”

दूसरी तरफ से : ……………………………………………………

“फिर बतायुंगी, अब मुझे नहाने जाना है, आपने मेरी हालत ख़राब कर दी है, पूरी पसीने से भीग गई हूँ”

दूसरी तरफ से : ……………………………………………………


“आप भी अपना ख्याल रखना घर की चिंता मत कीजिये, आपने काम और सेहत का ध्यान रखना, अच्छा रखती हूँ, ओके बाये ... स्वीट ड्रीम्स जान.. मुवाआआआअह्ह्ह्हह”
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01-13-2019, 11:39 PM,
#15
RE: Maa Sex Kahani हाए मम्मी मेरी लुल्ली
सलोनी फ़ोन रख देती है | अपने पति से पूरे वार्तालाप में उसकी नज़र राहुल से नहीं हटी थी | दोनों माँ बेटे उसी हालत में लेटे हुए थे जैसे फ़ोन आने से पहले लेटे थे | सलोनी अब भी कोहनी पर सर टिकाए राहुल की और झांक रही थी | जबकि राहुल छत को घूर रहा था | उसके लंड की क्या हालत थी वो सलोनी पेंट में बने तम्बू से देख सकती थी और उसने जब अपने पति से खुले लफ़्ज़ों में बात करनी शुरु की थी तो उसने साफ़ साफ़ देखा था कि राहुल का बदन कांप रहा था | अब भी उसमें हल्के हल्के कम्पन को वो महसूस कर सकती थी |

‘लोहा पूरा गर्म है... अब चोट करने का वक़्त आ गया है’ सलोनी खुद को बोलती है |

“राहुल..... बेटा...” सलोनी धीमे से फुसफुसाती है |

“हाँ मम्मी”, इस बार राहुल तुरंत जवाब देता है | उसकी आवाज़ से पहले वाली नाराज़गी पूरी तरह से गायब थी |

“सोये नहीं क्या अब तक?”

“नींद.... नींद नहीं आ रही मम्मी” |

“नींद क्यों नहीं आ रहा बेटा... कोई दिक्कत तो नहीं” |

“नहीं मम्मी बस मालूम नहीं क्यों...” |

राहुल किसी तरह से बात को उस तरफ ले जाना चाहता था | मगर कैसे? उसे सूझ नहीं रहा था |

“बेटा कहीं तुम्हे दर्द तो नहीं हो रहा .... वो सुबह की तरह.........” सलोनी बेटे को मुसीबत से निकालने में मदद करती है |

“नहीं मम्मी... अब दर्द नहीं है” राहुल अचानक अपने होंठ काटता है | उसने उत्तेजना में अपने ख्यालों में गुम अपनी माँ की बात सुने बिना जवाब दे दिया था और उसके हाथ से सुनहरी मौका निकल गया था |

“ठीक है बेटा.... सोने की कोशिश करो... नींद आ जाएगी... मुझे भी नींद आ रही है... अगर कुछ प्रॉब्लम हो तो जगा लेना बेटा... ओके” सलोनी कहकर पीठ के बल बिस्तर पर लेट जाती है | कोहनी पर इतनी देर से बल डालने के कारण बांह में दर्द होने लगा था | राहुल ने जल्दबाज़ी में उसकी बात नहीं पकड़ी थी और अब उसे खुद कुछ उपाए करना होगा |

राहुल पछतावे से भर उठता है | उसकी माँ ने उसे इतना अच्छा मौका दिया था और उस बेवकूफ ने ... अब वो क्या करे... वो सोने जा रही थी.. अगर वो सच में सो गई तो .... नहीं... नहीं.. उसे कुछ सोचना होगा.. उसे कुछ करना होगा |

राहुल हालाँकि ड्राइंग रूम में अपनी माँ के एक दम से भाग आने के कारण उससे बहुत नाराज़ हो गया था क्योंकि वो चरम पर पहुँच चूका था और उस समय वो आगे बढ़ना चाहता था | वो समझ नहीं सकता था कि सलोनी एकदम से क्यों उठ गई थी | गुस्से से उसका लंड भी मुरझा गया था और उसकी सेक्स की इच्छा भी कम हो गई थी | मगर जब उसकी माँ ने बेशर्मी की सारी ह्द्दें पार करते हुए जब उसके सामने जानबूझकर दिखावा करते हुए अपने पति से फ़ोन सेक्स किया था तो राहुल की कामाग्नि इस तरह भड़की थी कि वो जल उठा था |

उसकी माँ के मुख से निकला एक एक लफ्ज़ उसे जला रहा था | उसने खुद को इतना उत्तेजित कभी नहीं पाया था | उत्तेजना से उसका बदन कांपने लगा था | वो जानता था, उसकी माँ उसके बाप को नहीं बल्कि उसे सुना रही थी | वो उसे कह रही थी वो चूत में ऊँगली कर रही थी जबकि उसने तो चूत को छुआ तक नहीं था |

मगर अब समस्या यह थी कि अब वो क्या करे? उसकी माँ सोने जा रही थी | हालाँकि उसके हिलने डुलने से साफ़ ज़ाहिर था वो अभी जाग रही थी | मगर वो सच में सो सकती थी... अब उसके पास एक ही रास्ता था | वो अपनी हिम्मत बांधने लगा | ‘मुझे कहना ही होगा’ वो खुद को समझा रहा था | उसके होंठ कांप रहे थे, मुंह सुख रहा था, एक मिनट ... दो मिनट .. तीन... चार... आखिरकार दस मिनट बीत गए मगर उसकी बात होंठो तक नहीं आई | अचानक उसकी माँ उसकी तरफ पीठ करके करवट लेने लगी | वो एकदम से घबरा उठा |

“मम्मी.. मम्मी”

“हाँ बेटा ... क्या हुआ .. कुछ चाहिए क्या” सलोनी के होंठो पर मुस्कान दौड़ गई थी, वो तो अब तक निराश हो चली थी |

“मम्मी वो मुझे ... वो मुझे...”

“क्या हुआ बता ना...”

“मम्मी वो मुझे ... मुझे मुझे वहां दर्द हो रहा है” राहुल ने अपनी हिम्मत जुटाकर आखिर कह दिया |

“दर्द हो रहा है... कहाँ दर्द हो रहा है...” सलोनी ने भोले बनते हुए पूछा |

“वो यहाँ सुबह...सुबह..जब आपने चूसा था”

“सुबह ...उफ्फ्फ्फ़... यह क्या पहेलियाँ बुझा रहा है... बोल ना दर्द कहाँ हो रहा है” |

“वो मम्मी वो मेरी लू... वो सुबह जब पेंट की ज़िपर में ...वो मेरी...मेरी लुल्ली में मम्मी” राहुल का दिल इस कदर धड़क रहा था कि जैसे वो फटने वाला हो |

“ओह्ह तो यह बात है... तो बोला क्यों नहीं पहले...इधर आ” सलोनी बेड से उठ खड़ी होती है |

राहुल भी उठ कर खड़ा हो जाता है | सलोनी मुडकर दीवार से स्विच ओन करती है और पूर कमरा रौशनी से भर उठता है | राहुल एक पल के लिए शर्मा उठता है | सलोनी आगे हो कर बेड से निचे उतरती है और राहुल को बेड के सिरे पर आने का इशारा करती है | राहुल आगे आता है तो सलोनी उसे बेड के किनारे पर घुटनों के बल खड़ा होने का इशारा करती है | दोनों माँ बेटे के दिल की धडकनें पूरी रफ़्तार से चल रही थीं | कमरे में दोनों की सांसों की आवाजें गूँज रही थी |

सलोनी फर्श पर खड़ी थी और राहुल बेड पर घुटनों के बल | सलोनी राहुल की टीशर्ट को पकडती है और उसे ऊपर उठाती है | राहुल की बाहें खुद बा खुद ऊपर उठ जाती हैं | सलोनी उसकी टीशर्ट निकाल फर्श पर फेंक देती है और फिर उसकी पेंट को निचे खिसकाने लगती है मगर फूला हुआ लंड उसे निचे नहीं जाने दे रहा था | सलोनी पेंट की इलास्टिक से अन्दर हाथ डालती है और लंड को राहुल के पेट से दबाती है और फिर दुसरे हाथ से उसकी पेंट निचे खींचती है | इस दौरान उसकी नज़र कई बार राहुल से टकरा जाती है जो उत्तेजना के चरम पर होने के बाबजूद भी शर्मा उठता है | राहुल की पेंट निकलते ही वो उसे फिर से घुटनों के बल खड़ा होने को कहती है | सलोनी पेंट को भी फर्श पर दूर फेंक देती है | अब बेटा अपनी माँ के सामने पूरी तरह नंगा था | उसका लंड तना हुआ था और इस कदर अकड़ा हुआ था कि उस ज़बरदस्त अकड़ाहट के कारण वो झटके भी नहीं मार सकता था | लंड मांसपेशियों का ना होकर लोहे की रोड लग रहा था | लंड के उस भयंकर रूप को देख कर एक बार तो सलोनी भी सिहर उठी थी |

“उफफ्फ्फ्फ़ ... यह तूने इसका क्या हाल बना रखा है ...देख तो..और तू इसे अब भी लुल्ली कहता है... उफ्फ्फ... मैंने तुझे सुबह ही कहा था ना.. कि तेरी लुल्ली अब लौड़ा बन गई है” सलोनी की बात का राहुल कोई जवाब नहीं देता | सलोनी उसके लंड को सहलाती है तो राहुल की सिसकी निकल जाती है | लंड और भी अकड़ने लगा था और उसकी इस अकड़न से राहुल को दर्द होने लगा था |

“अब बोल मैं क्या करूँ इसके साथ... बता ना... तेरा दर्द कैसे कम होगा” सलोनी अपने बेटे की आँखों में झांकती होंठ काटती बोलती है |

“मम्मी वो सुबह जैसे आपने ... अपने मुंह से... किया था.. वैसे ही अब भी” राहुल हकलाते हुए बोलता है |

“ओह.. तो तू चाहता है.. मैं तेरे लौड़े को मुंह में लेकर चुसू... यही कहना चाहता है ना तू” सलोनी अपने बेटे से सुनना चाहती थी | राहुल कुछ झिझकता है तो सलोनी अपना मुंह थोडा निचे करती है और उसकी छाती पर छोटे से निप्पल को अपनी जिव्हा से सहलाने लगती है और दुसरे को अपने नाख़ून से कुरेदती है |

“हाँ मम्मी... हाँ”

“तो बोल ना... जब तक तू बोलेगा नहीं.. मुझे क्या पता चलेगा.. तू क्या चाहता है” सलोनी उस छोटे से निप्पल को दांतों में दबाते बोलती है, दुसरे को नाख़ून पहले की तरह कुरेदता है | उधर उसके हाथ राहुल के लंड और उसके अन्डकोशों को सहला रहे थे |

“मम्मी मेरा .. मेरा लौड़ा चुसो” राहुल उत्तेजना में डूबा बोल उठता है |

“फिर से बोल ना एक बार ...” सलोनी उसकी छाती से मुंह हटाती बोलती है और बेड पर निचे टाँगे लटकाकर बैठने का इशारा करती है | राहुल बेड के किनारे टाँगे लटका कर बैठ जाता है |

“मम्मी मेरा लौड़ा चुसो ना” राहुल इस बार सहजता से बोलता है | सलोनी उसकी और देखकर मुस्कराती है और उसके सामने घुटनों के बल बैठ जाती है और लंड को अपने हाथ में पकड़ लेती है |

“एक बार और” सोलोनी अपने बेटे की और याचना करती बोलती है |

“मम्मी मेरा लौड़ा चुसो ना” इस बार राहुल कामौत्तेजना में खुद ही बोल उठता है और अपनी माँ के सर को अपने हाथों में थाम अपने लौड़े पर झुका देता है | सलोनी लंड के लाल सुपाड़े पर होंठ रख देती है |
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01-13-2019, 11:39 PM,
#16
RE: Maa Sex Kahani हाए मम्मी मेरी लुल्ली
सलोनी घुटनों के बल बैठी अपने बेटे की जांघो पर हाथ रखकर अपना मुंह बेटे के लंड के सामने लाती है |

“माँ मेरा लौड़ा चुसो ना” इस बार राहुल बिना किसी उकसावे के खुद बोल उठता है | वो अपनी माँ के सर पर हाथ रखकर उसे अपने लंड पर झुकाता है | 

सलोनी बेटे की आँखों में झांकते अपना चेहरा लंड पर झुकाती चली जाती है | जैसे ही सलोनी के होंठ लंड की अति संवेदनशील त्वचा पर स्पर्श करते हैं, राहुल के मुंह से आह निकल जाती है | सलोनी बिलकुल धीमे-धीमे से, बिलकुल कोमलता से लंड के सुपाड़े को जगह जगह चूमती है | सुपाड़े पर खूब चुम्बन अंकित करने के बाद उसके होंठ लंड के पिछले भाग की और बढ़ने लगे थे | सलोनी के तपते होंठ लंड को जला रहे थे | अचानक सलोनी चुम्बन लेना रोक देती है और चेहरा पीछे खींच लेती है |

“थोडा सा आगे आ जाओ...ऐसे मुझसे सही से नहीं हो रहा”, सलोनी चेहरा हटाकर राहुल से बोलती है |

राहुल आगे को होता है | अब उसके कूल्हों का ज्यादातर हिस्सा बेड से बाहर था | वो एकदम किनारे पर बैठा था | सलोनी ने इशारा किया तो राहुल ने अपनी टाँगे चौडी कर ली और सलोनी घुटनों के बल उसकी टांगो के बीच खड़ी हो गई | उसने राहुल की जांघो पर हाथ रखे और चेहरा आगे बढ़ाया | उसकी लपलपाती जिव्हा बाहर आई |

“आआह्ह्ह्ह... मम्म्म्ममी” सुपाड़े की कोमल त्वचा पर खुरदरी जीभ का एहसास पाकर राहुल सीत्कार भरने लगता है |

सलोनी की जिव्हा लंड के पूरे सुपाड़े पर घूमने लगती है | उसे चाटते हुए वो जैसे सुपाड़े को अपनी जीभ से रगड़ रही थी | सलोनी ने अपना एक हाथ राहुल की जांघ से हटा कर उसका लंड पकड़ लिया और उसे ऊपर की और उठाकर वो लंड के पूरे निचले हिस्से को चाटने लगी | जल्द ही उसका हाथ लंड को ऊपर-निचे , दायें-बाएं घुमाने लगा और वो पूरे लंड को चाटने लगी | जब भी सलोनी की जीभ सुपाड़े पर पहुँचती तो राहुल आअह्ह्ह्ह.... उफफ्फ्फ्फ़... करने लग जाता |

लंड को खूब चाट-चाट कर सलोनी ने अपना मुख एक पल के लिए हटाया और फिर अपने होंठ सुपाड़े के गिर्द कस दिए और उस पर अपनी जीभ चलाते हुए उसे चूसने लगी | राहुल से यह दो तरफा प्रहार बर्दाश्त नहीं हुआ और उसने सिसकते हुए अपने हाथ फिर से अपनी मम्मी के सर पर रख दिए | सलोनी ने अपने होंठ लंड की जड़ की तरफ बढ़ाते हुए उसे चुसना चालू रखा और साथ ही साथ अपनी जीभ से सुपाड़े को सहलाती रही |

“मम्म्म्ममी.......आअह्ह्ह्ह...” सलोनी अपने एक हाथ से उसके अन्डकोशों को पकड़ लेती है और उन्हें सहलाने लगती है और दुसरे हाथ से उसकी जांघो को सहलाती धीरे-धीरे अपना मुंह लंड पर आगे पीछे करने लगी |

“मम्मम्मम्मम्मम्मी..........मम्मम्मम्मम्मम्मी.......... उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़...” राहुल से अब बर्दाश्त करना मुश्किल था | सलोनी के मुख की गर्माहट, मुखरस के कारण उसके लंड की फिसलन, मुख की कोमलता के साथ-साथ जीभ के खुरदरेपन ने उसे कुछ ज्यादा ही जोश दिला दिया था और उसने अपनी माँ के बालों को मुट्ठियों में भर लिया और अपना लंड सलोनी के मुंह में पेलने लगा | कुछ पलों तक सलोनी ने बेटे की जाँघों पर हाथ रखकर उसे अपना मुंह चोदने दिया और फिर अचानक से जाँघों पर हाथों से दवाब डालकर जोर से अपना मुख वापिस पीछे को खींचा | लंड उसके मुंह से बाहर निकल गया | लंड उसके मुखरस से भीगा चमक रहा था | सुपाड़े से मानो खून छलक रहा हो | लंड इतना हार्ड था कि बिलकुल भी हिलडुल नहीं रहा था |

“क्या हुआ मम्मी... आओ ना प्लीज...” राहुल आग को बढ़कर अपनी माँ का सर थामने की कोशिश करता है | मगर सलोनी उसके हाथों को झटक देती है और उठ कर खड़ी हो जाती है | वो भी उठकर खड़ा हो गया था | अब दोनों माँ बेटा एक दुसरे के सामने थे और दोनों में इतनी दूरी थी कि सलोनी के मुम्मे राहुल के सीने में चुभ रहे थे |
“मम्मी कीजिये ना प्लीज ...चूसिये ना...” राहुल इस बार रुआंसी आवाज़ में बोलता है |

“तू चूसने दे तब ना.... तू तो झट से मेरे मुंह में धक्के मारने लग जाता है... जैसे यह मेरा मुंह नहीं.. मेरी चूत हो” सलोनी ने पहली बार बेटे से बात करते हुए सीधे चूत शब्द का इस्तेमाल किया था |

“नहीं मम्मी.. अब नहीं मारूँगा धक्के ...प्लीज..आओ ना मम्मी”

“नहीं तुझसे कण्ट्रोल नहीं होता...सुबह भी नहीं हुआ था..इसे मुंह में डालकर चूसा जाता है...धक्के मारने हों तो इसे कहीं और घुसाना पड़ता है ...अब तू ही फैसला कर ले... तू लंड चुस्वाना चाहता है जा फिर धक्के मरना चाहता है....” सलोनी राहुल की आँखों में देखती बोलती है | राहुल कोई जवाब नहीं दे पाता | हाँ वो धक्के मरना चाहता था मगर वो अपनी बात को कहे कैसे? 

“मैं सारी रात तेरा इंतज़ार नहीं कर सकती.. जल्दी फैसला कर ले ...” इतना कहकर सलोनी पीछे हटती है और बेड पर चड़ जाती है | बेड के एकदम बीचोबीच वो पीठ के बल लेट जाती है | उसकी नाईटी उसकी जाँघों तक चड़ गई थी | सलोनी लेटने के बाद राहुल की और देखती है जो उसे अपना फैसला सुनाने के लिए शब्द ढूंड रहा था जो उसे मिल नहीं रहे थे |

सलोनी का एक हाथ नाईटी के सामने लगी बड़ी सी गांठ के सिरे से खेलते हैं और वो राहुल की आँखों में आँखें डाल कर कहती है, 
“वैसे तुझे मालूम है ना अगर धक्के लगाने हों तो इसे कहाँ डाला जाता है ...” सलोनी के हाथ गांठ के सिरों से खेल रहे थे और वो ऐसे ज़ाहिर कर रही थी कि जैसे वो गांठ को खोल रही हो |

राहुल एक पल के लिए अपनी माँ की आँखों में देखता है और फिर उसकी नज़र सलोनी के हाथों में नाईटी की गाँठ पर जाती है | राहुल धयान से देखता हुआ बेड पर चड़ता है और सलोनी की कमर के पास पहुँच जाता है | राहुल एक बार फिर से सलोनी के चेहरे की और देखता है तो वो धीरे से सर हिलाकर आगे बढ़ने की अनुमति देती है | राहुल के काम्पते हाथ आगे बढ़ते हैं और सलोनी के हाथों को छूते हुए गाँठ के सिरे थाम लेते हैं | राहुल धीरे से गाँठ के सिरों को खींचता है तो गाँठ आराम से खुल जाती है | सलोनी अपने हाथ अपनी बगलों पर रख लेती है | नाईटी खुल चुकी थी और उसके दोनों पल्लू हल्का सा खुल गये थे | जिससे सलोनी के मुम्मो की घाटी नज़र आने लगी थी और राहुल देख सकता था कि उसकी माँ ने ब्रा नहीं पहनी है | राहुल नाईटी के दोनों पल्लू पकड़ता है, उसका और सलोनी दोनों का बदन कांप रहा था | राहुल नाईटी के पल्लू पूरी तरह फैला देती है | सलोनी अपने बेटे के सामने मात्र एक लाल पेंटी पहने थी और कमर के उपर से पूरी तरह नंगी थी | उसके गोल मटोल मुम्मे और नुकीले निप्पल छत का निशाना लगाये हुए थे | 
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01-13-2019, 11:40 PM,
#17
RE: Maa Sex Kahani हाए मम्मी मेरी लुल्ली
राहुल की नज़र अपनी माँ के मुम्मो से हट नहीं रही थी | उनकी दूध सी रंगत, उनकी मोटाई, उन पर गहरे गुलाबी रंग का घेरा और हल्के गुलाबी रंग के निप्पल और निप्पल कैसे अकड़े हुए थे | राहुल आगे होकर धडकते दिल के साथ अपना हाथ अपनी माँ के मुम्मो की और बढ़ाता है | सलोनी के दिल की धडकने भी बढ़ने लगती हैं |
“उन्न्न्नग्ग्गह्ह्ह्हह” सलोनी के गले से घुटी सी आवाज़ निकलती है |

“उफ्फ्फ्फ़....” राहुल भी अपनी माँ के मुम्मे को छूते ही सिसक पड़ता है | नर्म मुलायम मुम्मे और सख्त निप्पल से जैसे ही उसका हाथ टकराता है तो दोनों माँ बेटे के बदन में झुरझुरी दौड़ जाती है | उसकी एक ऊँगली निप्पल को छेड़ती है, उसे सहलाती है, फिर वो पूरे मुम्मे को अपनी हथेली में भर लेता है | कितना नर्म, कितना मुलायम, कितना कोमल एहसास था | वो मुम्मे को अपनी हथेली में समेट हल्के से दबाता है |

“उन्न्न्नग्गग्घ्ह्ह.....” सलोनी फिर से सीत्कार भर उठती है | वो अपना सीना उठाकर अपना मुम्मा अपने बेटे के हाथ में धकेलती है |

राहुल यहाँ मुम्मे की भारी कोमलता से हैरान था | वहीँ उसको दबाने से उसकी कठोरता से स्तब्ध रह जाता है | तने हुए गुलाबी निप्पल को घूरते हुए वो अपना चेहरा नीचे लाता है | सलोनी बेटे के चेहरे को अपने मुम्मे पर झुकते देखती है तो एक तीखी सांस लेती है |

“आअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह .......” राहुल के होंठ जैसे ही सलोनी के निप्पल को छूते हैं, सलोनी एक लम्बी सिसकी लेती है |

राहुल निप्पल को चूमने लगता है | कुछ देर चूमने के बाद वो अपना चेहरा हटाकर निप्पल को घूरता है और फिर से अपना चेहरा मुम्मे पर झुका देता है | इस बार उसकी जिव्हा बाहर आती है और सलोनी के निप्पल को चाटती है |

“आआह्ह्ह्ह...........उन्न्नन्न्गग्ग्गह्ह्ह्हह ...” सलोनी का बदन तेज़ झटका खाता है | जिस तरह उसकी खुरदरी जीभ ने राहुल को सिसकने पर मजबूर कर दिया था उसी तरह अब अपने बेटे की जीभ के प्रहार से वो खुद सिसकने पर मजबूर थी | राहुल निप्पल को चाटता जा रहा था | निप्पल चाटते हुए वो उसके निप्पल को अपने होंठो में दबोच लेता है और उसे बच्चे की तरह चुसना शुरु कर देता है | सलोनी अपना सीना ऊपर उठाकर बेटे के मुंह में मुम्मा धकेल रही थी | उसके मुंह से फूटने वाली सिसकियाँ और भी तेज़ और गहरी हो गई जब राहुल ने एक मुम्मे को चूसते हुए, दुसरे पर अपना हाथ रख दिया और उसे हल्के हल्के दबाने लगा, सहलाने लगा, उसके निप्पल को अंगूठे और ऊँगली के बीच लेकर मसलने लगा |

निप्पल चूसते चूसते वो उसे धीरे धीरे दांतों से हल्का हल्का सा काट भी रहा था | जब भी उसके दांत निप्पल को भींचते, सलोनी सर को जोर से झटकती | वो अपने बेटे के सर पर हाथ रख देती है और उससे अपने मुम्मे चुसवाते हुए उसके बालों में उँगलियाँ फेरने लगती है | राहुल उत्साहित होकर और भी जोर जोर से मुम्मे को चूसता है | कभी कभी वो पूरे मुम्मे को मुंह में भरने की कोशिश कर रहा था जिसमे स्पष्ट तौर पर वो सफल नहीं हो सकता था क्योंकि उसकी माँ के मोटे मुम्मे उसके मुंह में पूरे समाने से तो रहे |

“दुसरे को भी...दुसरे को भी चुसो बेटा....” सलोनी राहुल का मुंह अपने एक मुम्मे से हटाकर दुसरे की तरफ ले जाती है और राहुल झट से उसके निप्पल को होंठो में भरकर चुसना शुरु कर देता है | उसका हाथ दुसरे मुम्मे को सहलाने, दबाने लगता है |

“उन्न्नन्न्गग्ग्गह्ह्ह्हह ... आआह्ह्ह्ह...........” सलोनी की सिसकियाँ कुछ ज्यादा ही ऊँची हो जा रही थी | राहुल कुछ ज्यादा ही जोर से निप्पल को चूस रहा था | सलोनी राहुल के सर को अपन मुम्मे पर दबा रही थी | राहुल अपनी माँ के मुम्मे से मुंह हटाता है और दोनों मुम्मो को उनकी जड़ से दोनों हाथों में भर लेता है | इससे उसके निप्पल और मुम्मो का ऊपरी हिस्सा उभर कर सामने आ जाता है | राहुल फिर से मुंह नीचे करके अपनी माँ के मुम्मे को चूसने लगता है | मगर इस बार थोडा सा चूसने के बाद वो अपना मुंह उठाकर दुसरे मुम्मे पर ले जाता है | हाथ से मुम्मो को दबाता राहुल बदल बदल कर मुम्मो को चूसने लगता है | 
“राहुल....बेटा....ऊऊफ़्फ़्फ़....” सलोनी कामौंध में पूरी तरह डूब चुकी थी |
राहुल पर सर पर उत्तेजना का भूत सवार था | वो दोनों मुम्मो को बारी बारी से चूस रहा था, चाट रहा था, अपनी जीभ की नोंक से चुभला रहा था | उसका मुंह अब दोनों मुम्मो के बीच की घाटी में घूमने लगा | वो मुम्मो के बीच की घाटी को चूमता, चाटता, अपना मुंह धीरे धीरे नीचे ले जाने लगता है | मुम्मो से होकर नीचे की और जाता उसका मुख उसके गोरे पेट पर घुमने लगा | राहुल की जिव्हा सलोनी के पूरे पेट पर घुमती उसे चाट रही थी | उसके होंठ अपनी माँ के दुधिया पेट के हर हिस्से को चूम रहे थी | हर बीतते लम्हे के साथ सलोनी की आहें ऊँची होती जा रही थीं | चूत की आग उसे जला रही थी और उसका बेटा था जो उस आग को बुझाने की बजाए उसमें तेल डालकर उसे और तेज़ भड़का रहा था |

राहुल की जिव्हा अब सलोनी की नाभि तक पहुँच गई थी | वो जिव्हा को नाभि के आखरी छल्ले पर घुमाता है | नाभि के दस बारह चक्कर काटने के बाद राहुल अपनी जिव्हा नाभि में घुसा देता है और उसके होंठ नाभि के ऊपर जम जाते हैं | राहुल नाभि में जीभ घुमाता उसे चाटता और चूसता है | सलोनी कमर को कमान की तरह तान रही थी | कमरे में बस उसकी सिसकियों और राहुल की भारी साँसों की आवाज़ आ रही थी | राहुल पेट पर होंठ सटाए अपना मुंह नाभि से नीचे, और नीचे, और नीचे लाता है और उसका मुंह सलोनी की लाल कच्छी की इलास्टिक को छूता है | सलोनी का बदन कांपने लगता है | उसके बेटे के होंठ उसकी चूत से मात्र कुछ इंच की दूरी पर थे | राहुल पहले अपनी जिव्हा कच्छी की इलास्टिक में घुसाता है और उसे सलोनी की कमर पर एक सीरे से दुसरे तक इलास्टिक में घुसाए रगड़ता है | फिर वो अपना चेहरा हटा लेता है और सलोनी के मुम्मो पर से भी हाथ हटा लेता है | सलोनी के मुम्मो की दुधिया रंगत उसके बेटे ने मुम्मो को चूस, चुम्म, चाट, मसलकर गहरे लाल रंग में तब्दील कर दी थी | मगर राहुल का ध्यान अब अपनी माँ के मुम्मो की और नहीं था | उसकी नज़र सलोनी की भीगी लाल कच्छी में से झांकती उसकी चूत पर था | राहुल की हरकतों से सलोनी इतनी गर्म हो चुकी थी कि उसकी चूत ने पानी बहा बहाकर सामने से पूरी कच्छी गीली कर दी थी | राहुल को अपनी चूत घूरते पाकर सलोनी की बैचेनी और भी बढ़ गई थी | राहुल की नज़र कच्छी में से झांकती अपनी माँ की चूत के होंठो पर ज़मी हुई थी | जिनसे भीगी कच्छी इस प्रकार चिपक गई थी कि सलोनी की चूत के होंठो के साथ साथ उनके बीच की हल्की सी दरार भी साफ़ नज़र आ रही थी | सलोनी बहुत बेताबी से राहुल के आगे बढ़ने का इंतज़ार कर रही थी | उस पर एक एक पल अब भारी गुज़र रहा था |
शायद राहुल अपनी माँ के बदन में छाये तनाव से उसकी बेताबी को भांप लेता है | वो अपना चेहरा नीचे लाता है | सलोनी गहरी और तीखी सांस लेती है | राहुल तब तक चेहरा नीचे करता है जब तक उसका चेहरा लगभग अपनी माँ की चूत को छूने नहीं लग जाता | राहुल अपनी माँ की चूत से आती खुशबू को सूंघ सकता था | वो चूत से नाक सटाकर गहरी सांस अन्दर खींचता है जैसे चूत को सूंघ रहा हो | 

“उन्न्न्नग्ग्गह्ह्ह्हह्ह .....” सलोनी कराह उठती है | चूत की खुशबू में बसी मादकता और कामुकता से राहुल का अंग अंग उत्तेजना से भर उठता है और वो अपना चेहरा झुकाकर अपने होंठ अपनी माँ की चूत पर लगा देता है |

“हाएएएएएएएएएएह्ह्ह्ह ...ओह्ह्ह्हह्ह.......” सलोनी के पूरे बदन में झुरझुरी दौड़ जाती है |
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01-13-2019, 11:40 PM,
#18
RE: Maa Sex Kahani हाए मम्मी मेरी लुल्ली
“आअह्ह्ह्ह..........” सलोनी नंगी चूत पर बेटे की जीभ से सिहर उठती है | राहुल कई बार जिव्हा को लकीर पर ऊपर से निचे सौर निचे से ऊपर फेरता है और फिर अपनी जिव्हा दरार में घुसा देता है और घुसाए हुए उसे फिर से ऊपर से निचे और निचे से ऊपर फेरने लगता है |

“राह्ह्ह्हूहूलल्ल .... ररररआह्ह्ह्हूहूलल्ल.....” सलोनी से बर्दाश्त नहीं हुआ और वो चीकने लग जाती है | सलोनी अपने सर पर हाथों का दवाब देकर खुद को कण्ट्रोल करने की कोशिश करती है |

राहुल अपनी माँ की प्रतिकिर्या से खुश और उत्साहित होकर अपना मुंह अपनी मम्मी की चूत पर दबा देता है | उसके होंठ चूत के होंठो पर दब जाते हैं और वो चूत के अन्दर गहराई तक जीभ घुमाने लगता है |

“आआअह्ह्ह्हहए ......बेटाआआअह्ह्ह्ह....” सलोनी ने ऐसा एहसास ज़िन्दगी में पहले कभी नहीं किया था | राहुल जितनी गहराई तक जीभ घुसा सकता था, घुसा रहा था और चूत को जीभ से चाट रहा था | अपने होंठो से वो चूत से बहकर आने वाले रस को लगातार चाटता जा रहा था | उधर सलोनी से चूत की नर्म और कोमल त्वचा पर राहुल की जीभ की रगड़ बर्दाश्त नहीं हो रही थी | चूत को जीभ से चाटते चाटते राहुल अपनी माँ के घुटने पकड़ उसकी टांगें पूरी चौड़ी कर देता है | अब चूत थोड़ी खुल गई थी | राहुल के सामने चूत का दाना थरथरा रहा था | राहुल अपने होंठ चूत के अन्दर तक घुसाते हुए चूत को चूसने चाटने की कोशिश कर रहा था |

“बेटा....उन्घ्ह्हह्ह...बे...टा...” सलोनी बेड की चादर को मुट्ठियों में भर चीख चिल्ला रही थी |
चूत को अन्दर तक जिव्हा से चूस चूस कर, चाट चाटकर राहुल अपना ध्यान सामने छोटे से चूत के दाने की और करता है और झट से उसे अपने होंठो में दबोच लेता है | उस पर अपनी जीभ रगड़ने लगता है |

“राहूल्ल्ल्ल....नहीईई..नहीईईईईईईईईईईईईईईइ...बेटाआआअह्ह्ह्ह.....उफफ्फ्फ्फ़...बेटा....आआआअह्हह्हह्ह...” सलोनी का पूरा बदन कांपने लगा | उसका पूरा बदन झटके मार रहा था | राहुल अपनी मम्मी की हालत देखकर और जोश में आ गया था | उसने दाने को अपने होंठो में दबा जोर जोर से चुसना शुरु कर दिया |

“बेटाआआअह्ह्ह्ह..... नहीईईईईईईईईईईईईईईइ...प्ली.....ज....उफ्फ्फ्फ़...राहुल....” सलोनी दायें बाएं जोरो से सर पटकने लगी | उसके बदन में तेज़ कम्कम्पी होने लगी | वो अपनी गांड हवा में उठाकर अपनी चूत अपने बेटे के होंठो पर दबा देती है और अपने हाथ अपने मुम्मो पर रखकर खुद ही अपने मुम्मे मसलने लगती है |

राहुल को नहीं मालूम था उसकी माँ को क्या हो रहा था मगर वो इतना ज़रूर जानता था कि उसकी इस हालत का दोषी वो खुद था और वो यह भी जान चूका था कि उसकी माँ के जिस्म का सबसे संवेदनशील बिंदु जो उसे तडपने पर मजबूर कर सकता था वही चूत के ऊपर की और वो दाना था जिसे वो अपनी जिव्हा से सहला रहा था | जब भी उसकी जिव्हा दाने से टकराती थी उसकी मम्मी खुद पर पूरा नियंत्रण खो देती थी | इसीलिए उसने पूरे मुंह का दवाब उसकी चूत के दाने पर केन्द्रित कर दिया | उसे जीभ से सहलाते, दबाते, रगड़ते वो उसे होंठो में भरकर चूसता रहा | अचानक सलोनी के बदन में तनाव भरने लगा | वो अपनी कमर को कमान की तरह तान लेती है और अपनी टांगें राहुल की गर्दन पर लपेट देती है | वो जोर जोर से सर पटक रही थी | राहुल अपनी मम्मी की चूत में संकुचन को देख रहा था | राहुल एक पल के लिए भी नहीं रुका और ना ही उसने अपने होंठो और जीभ का दवाब कम किया |

“राहुल ....बेटा...उन्न्ग्गग्घ्ह ...बेटाआ.....ऊह्ह्हह्ह....” अचानक सलोनी की चूत रस उगलने लगती है | सलोनी की देह और भी तेज़ झटके खाने लगती है | राहुल चूत से बाहर आ रहे रस को चुसना चालू कर देता है | वो पूरी चूत को अपने मुंह में भर लेता है और उसे चूसता है | अब जाकर उसे समझ आई थी कि उसकी माँ झड रही थी | उसने अपनी माँ की चूत को चाट चाट कर झाड दिया था |

“राहूल्लल्ल्ल ......बे..एएएएए...टा......हाएएएए....भगवान......आअह्ह्ह्ह....” सलोनी की चूत लगातार रस बहाए जा रही थी और राहुल उसे पीता जा रहा था | वो एक बूँद भी जाया नहीं होने देना चाहता था | सलोनी के बदन के झटके अब कम होते जा रहे थे | उसके मुख से निकलने वाली सिसकियों की तीव्रता अब कम पड़ने लगी थी | उसके जिस्म की ऐंठन कम होने लगी थी और उसकी कमर वापिस बेड पर लौट आई थी | सलोनी के हाथ अपने मुम्मो पर ढीले पड चुके थे और उसकी जांघें अपने बेटे की गर्दन पर ढीली हो चुकी थी |

“बेटा....बेटा...बेटा...बेटा....” सलोनी के मुख से धीमी धीमी सिसकियाँ अभी भी फूट रही थी | एक बार जब सलोनी शान्त पड गई और उसने अपना जिस्म पूरी तरह ढीला छोड़ दिया तो राहुल ने अपनी माँ की गांड के निचे हाथ डालकर उसे ऊपर को उठाया ताकि उसकी चूत उभरकर उसके सामने आ जाये और वो उसे अच्छी तरह चाट चाट कर साफ़ करने लगता है | चूत के अंदरूनी हिस्से को साफ करके वो उसके बाहर चाटने चूसने लगता है | अपनी माँ की चूत को अच्छी तरह चाट चाट कर साफ़ करने के बाद वो उसकी गोरी जांघें चूमने लगता है |

“बेटा....बेटा....ओह्ह्ह्हह...बेटा....” सलोनी के होंठ धीरे धीरे बुदबुदा रहे थे | जाँघों को अच्छी तरह चूमने के पश्चात वो सलोनी की कमर को चुमते ऊपर को जाने लगता है | जिस तरह वो उसके पेट को चुमते हुए निचे आया था | अब ठीक बिलकुल वैसे ही वापिस ऊपर की तरफ जा रहा था | नाभि से सीधा ऊपर की और जाता वो जल्द ही वापिस अपनी माँ के मुम्मो पर पहुँच जाता है | यहाँ पर अभी भी उसकी माँ के हाथ थे | राहुल का चेहरा जैसे ही सलोनी के मुम्मो पर के ऊपर रखे हाथों से टकराता है तो वो अपने हाथ हटा लेती है और राहुल को अपने मुम्मे चूमने देती है | राहुल फिर से सलोनी के निप्पल बदल बदल कर चूस रहा था | सलोनी अपने बेटे के बालों में उँगलियाँ घुमा रही थी | उस जबरदस्त सख्लन के पश्चात बिलकुल सुस्त पड चुकी सलोनी अब अपने जिस्म में कुछ हरकत महसूस कर रही थी |
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01-13-2019, 11:40 PM,
#19
RE: Maa Sex Kahani हाए मम्मी मेरी लुल्ली
निप्पलों को चूसते चूसते राहुल ने अपनी नज़र अपनी माँ पर डाली जो उसके बालों में उँगलियाँ फेरती उसे बेहद प्यार, स्नेह और ममतामई नज़र से देख रही थी | दोनों माँ बेटे की नज़रें मिलती हैं और राहुल आगे अपनी माँ के चेहरे की और बड़ता है | सलोनी भी उसका चेहरा अपने हाथों में थाम अपने मुंह पर खींचती है | राहुल का चेहरा सीधा अपनी माँ के चेहरे पर झुक जाता है और दोनों बेटे माँ के होंठ आपस में जुड़ जाते हैं | दोनों प्रेमियों की तरह एक दुसरे को चूम रहे थे | कभी सलोनी राहुल के तो कभी राहुल सलोनी के होंठों को चूस रहा था | उधर सलोनी को अपनी जांघों पर राहुल का लंड ठोकरें मारता महसूस होता है | बेटे के लंड को अपनी चूत के इतने नजदीक पाकर उसके बदन में कामौत्तेजना लौटने लगती है और उसकी साँसों की गहराई बढ़ने लगती है | सलोनी की जिव्हा राहुल के होंठो को चाटने लगती है और वो उसे उसके मुंह में धकेलती है | राहुल अपना मुंह खोल देता है और सलोनी की जिव्हा उसके मुख में प्रवेश कर जाती है |

सलोनी राहुल के मुंह को उसकी जिव्हा को अपनी जिव्हा से सहलाती है | मगर राहुल एकदम से उसकी जिव्हा अपने होंठो में दबा लेता है और चूसने लगता है |

“उन्न्न्गग्घ्ह्ह......” सलोनी अपने बेटे के मुंह में सिसकती है और वो अपनी कमर इधर उधर हिलाने लगती है | राहुल यह समझकर कि उसकी माँ क्या चाहती है अपनी कमर को थोडा सा हिलाता डुलाता है और फिर दोनों माँ - बेटा एकदम से सिसक उठते हैं | राहुल का लंड अपनी माँ की चूत पर था और उससे निकल रहा हल्का हल्का रस उसकी चूत को भिगो रहा था | सलोनी बेटे के चेहरे को दबाती है तो राहुल उसकी जिव्हा को और भी जोर जोर से चूसता है | उन दोनों की कमर हल्की हल्की हिलना शुरु हो गई थी | जिससे राहुल का लंड अब सलोनी की चूत को रगड़ रहा था |

“उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़.....” सलोनी आह भरती है जब दोनों के होंठ सांस लेने के लिए जुड़े होते हैं |

“मम्मी....मम्मम्मम्मममी....” राहुल भी लंड पर चूत के स्पर्श से सिसक उठा था |

सलोनी राहुल के चेहरे को झुकाती है और उसके मुख पर लगे जगह जगह अपनी चूत के रस को चाट चाट कर साफ़ करने लगती है | उसकी नाक से, उसके गालों से, उसकी ठोड़ी से, राहुल का चेहरा साफ़ करने के पश्चात वो फिर से उसके मुख में अपनी जिव्हा घुसेड़ देती है | राहुल फिर से उसकी जिव्हा को चूसने लगता है | दोनों अब एक दुसरे की कमर पर अपनी कमर खूब जोर जोर से रगड़ने लगे थे | राहुल का लंड बार बार सलोनी की चूत को छूता है और उसे सहलाते हुए उस जगह में घूम रहा था | उधर सलोनी जो अब फिर से पूरी तरह गर्म हो चुकी थी इस बार बेटे की जिव्हा को अपने होंठो में दबोच कर उसे चूसने लगती है |

“आआह्ह्ह्ह......हाएएएएईएएएएइइइइइ...” अचानक सलोनी को झटका लगता है और वो सिसक कर अपना चेहरा हटा लेती है |

“मम्म्म्ममी ......मम्म्म्मी ...उफफ्फ्फ्फ़...” राहुल भी सिसक उठा था | उसका लंड उसकी कमर की रगड़ से अचानक चूत के होंठो को फैलाकर थोडा सा अन्दर घुस गया था | अगर थोड़ा सा जयादा जोर लगा होता तो शायद सुपाड़ा अन्दर चला जाता |

सलोनी चूत में लंड के एहसास को पाकर ठिठक गई थी | वो राहुल के चेहरे की और देखती है जो उसी की और देख रहा था | सलोनी धीरे से हल्के से सर हिलाती है जैसे राहुल के किसी सवाल का जवाब दे रही हो | राहुल अपनी माँ के इशारे को पाकर वापिस उठ जाता है और सलोनी की जाँघों के बीच बैठ जाता है | वो सलोनी की टांगों को ऊपर उठाता है तो सलोनी खुद अपनी टांगें घुटनों से मोड़कर खड़ी कर देती है | राहुल सलोनी के घुटनों को पकड़ उन्हें पूरी तरह फैला देता है | उसकी माँ की चूत खुल चुकी थी | राहुल अपने सामने अपनी माँ की चूत के छेद को देख रहा था | राहुल एक बार फिर से निगाह उठाकर सलोनी की और देखता है | सलोनी फिर से सर हिलाकर उसे इशारा करती है | राहुल सलोनी की पतली सी कमर को कस कर थाम लेता है और थोडा सा उचककर आगे को बढ़ता है | उसका लंड चूत के बेहद करीब था | सलोनी कुहनियों के बल अपना सर ऊँचा उठा लेती है | वो अपने और अपने बेटे के बीच अपनी चूत पर दस्तक दे रहे अपने बेटे के लंड को देख रही थी |

राहुल थोडा सा आगे को होता है और उसका लंड सलोनी की चूत के छेद पर फिट हो जाता है |

"ईइइइइइस्सस्ससह्ह्ह्हह्ह......" सलोनी होंठ काटते हुए आँख बंद करके सिसक पड़ती है |
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01-13-2019, 11:40 PM,
#20
RE: Maa Sex Kahani हाए मम्मी मेरी लुल्ली
राहुल अपनी मम्मी की कमर को थामे अपने कुल्हे आगे को धकेलता है | उसके लंड का सुपाड़ा चूत का मुंह हल्का सा खोलता है और ऊपर को फिसल जाता है | हालाँकि लंड अन्दर नहीं घुसा था मगर माँ - बेटे दोनों उस स्पर्श मात्र से सिसक उठे थे | राहुल फिर से कमर को थाम लंड अन्दर धकेलता है और इस बार सुपाड़ा चूत के छल्ले को खोलता हुआ हल्का सा अन्दर जाता है और फिर से फिसल कर बाहर आ जाता है | सलोनी की चूत रस से दोबारा भीग चुकी थी इसीलिए लंड को सीधा रख पाना राहुल को बहुत मुश्किल लग रहा था |

“एक मिनट रुक” अचानक सलोनी राहुल को रोकती है | वो अपना एक हाथ आगे बढ़ाती है और लंड को कस कर पकड़ लेती है और उसे चूत के छेद पर फिट कर देती है | “अब घुसाओ बेटा” सलोनी अब एक कोहनी के बल उचककर अपनी चूत में ठोकर मार रहे अपने बेटे के लंड को देख रही थी | राहुल उसी तरह कमर को अपने हाथों में दबाए लंड को आगे धकेलता है | वो फिर से फिसलने वाला था मगर सलोनी उसे मजबूती से अपनी चूत के मुंह पर टिकाए रखती है | राहुल और जोर लगाता है | उसके लंड का सुपाड़ा जैसे ही चूत के छल्ले पर और बल डालता है वो खुलती चली जाती है |

“ओह्ह्हह्ह्ह्ह....राहुल .....राहुल........राहुल....” सलोनी अपनी चूत में लंड के दाखिल होते ही सिसक पड़ती है | उसका हाथ लंड से हट जाता है और वो फिर से दोनों कोहनियों के बल होकर अपने बेटे के लंड को देखने लगती है जिसका सुपाड़ा उसकी चूत में घुस चूका था | सलोनी की तंग चूत जैसे ही राहुल के सुपाड़े को कसती है तो वो कराह उठता है और अपना लंड और आगे को धकेलता है |

“आआह्ह्ह्ह......ऊफ्फ्फ्फ़.........बेटा धीरे........धीरे...” सलोनी बेटे के मोटे लंड से अपनी चूत फैलती हुई महसूस करती है | चूत इतनी गीली थी कि बहुत तंग होने के बावजूद राहुल का लंड आराम से घुसता जा रहा था और तभी वो चूत की गर्मी या अपने लंड पर चूत की पकड़ के उस जबर्दस्त अनोखे एहसास से जोश में आ जाता है और एक ज़ोरदार धक्का मारता है |

“ओह्ह्ह्हह......आह्ह.....आआह्ह्ह्ह......हाएएएए...राहुललल्ल .... प्लीज... बेटा धीरे.......धीरे डालो... उफ्फ्फ्फ़.......” सलोनी लंड के उस ज़बरदस्त प्रहार को सेहन नहीं कर पाती और चीख पड़ती है | मगर राहुल इस समय उसकी सुन नहीं रहा था | वो तो अपने लंड को अपनी माँ की टाइट चूत में घुसाकर ऐसा आनंद ले रहा था कि वो फिर से एक करारा झटका मारता है और पूरा लंड चूत में घुसेड देता है |

"आईईईईईईईए...........आउच.......आआउच ............हे भगवान.........उफफ्फ्फ्फ़ शैतान................. हाएएएए.......मार डालेगा क्या"

"मम्मी........ मम्मी..........ओह्ह्ह्ह गॉड............म्म्म्मम्म्म्ममम्मी.... हाए....” राहुल भी जलती हुई चूत में लंड पेल कर उस पीड़ादायक आनंद की परिसीमा महसूस करता है |

सलोनी अपनी जाँघों के बीच देख रही थी यहाँ उसके बेटे के लंड उसकी चूत में पूरा घुस चूका था | चूत के होंठो ने लंड को चारों तरफ से कस लिया था और उसके बेटे के लंड को सहला रहे थे | 

“उफफ्फ्फ्फ़....मम्मी कितनी टाइट है तुम्हारी और कितनी गर्म भी... अन्दर से... उफ़... मेरा जल रहा है मम्मी” राहुल चूत की तपिश से लंड को जलता हुआ महसूस कर रहा था |

“यह गर्मी तेरे लंड को ही नहीं मुझे भी दिन रात जलाती है... दिन रात मेरी पूरी देह इस आग में झुलसती है... अब तुम्हे ही इस आग को बुझाना है मेरे बेटे....अब तुझे ही इस आग को बुझाना है” कहकर सलोनी पीछे को लेट जाती है और राहुल की तरफ अर्थपूर्ण नज़रों से देखती है | राहुल फिर से अपनी माँ की कमर थाम लेता है और लंड को पीछे खींचता है और फिर से अन्दर डालता है |

“आअह्ह्ह्ह........आराम से .......बेटा.......आराम से ...” सलोनी पहले ही धक्के पर कराह उठती है और जब उसके बेटे के लंड उसकी चूत को पूरा रगड़ता हुआ वापिस अन्दर तक घुस जाता है | वो शुक्र मना रही थी कि उसकी चूत इतनी गीली थी वरना उसके बेटे का मोटा लंड उसे खूब तकलीफ देने वाला था |

राहुल अपनी माँ की नाज़ुक चूत में लंड पेलने के उस अनोखे मज़े से गदगद हो उठा था | यह आनंद उसकी कल्पनायों से कहीं बढ़कर था | वो फिर से अपना लंड बाहर निकालता है और वापिस अन्दर घुसेड देता है | सलोनी फिर से सीत्कार भरती है, फिर तीसरा, चौथा , पांचवा, छठा ...राहुल चूत से लगभग आधा लंड बाहर निकालता और उसे अपनी माँ की चूत में पेल देता | हर धक्के के साथ उसका जोश दौगना होता जा रहा था | कुछ समय आराम से धक्के मारने के बाद वो लंड को खींच जोर से पेलता है |

“आआआअउच... आउच........ आउच” राहुल माँ की सिसकियों से और भी जोश में आ जाता है और वो और भी जोर जोर से लंड पेलने लगता है |

“आईईईईए...बेटा......आआराम से ...आराम से....” सलोनी चीखती है और राहुल माँ की चीखो पुकार के जवाब में खींच कर ऐसा धक्का मारता है कि सलोनी की सांस अटक जाती है |

“हाए मार डाला ज़ालिम ...धीरे...मेरे लाल...धीरे मार....उफफ्फ्फ्फ़ ....आअह्ह्ह्ह...आउच....ऊऊउच...धीरे से कर ना ...आऊऊऊऊऊउच्च्च्घ.... बेटा...हाए तेरा लौड़ा .....उइफ़्फ़्फ़्फ़ ...... हाए जान निकाल दी मेरी....... हाए धीरे चोद ...धीरे चोद अपनी मम्मी को ....” राहुल अब खुद को पूर्ण मर्द महसूस कर रहा था | उसकी माँ ठीक वैसे ही सिसक रही थी, जैसी उसने कल्पना की थी कि जब वो अपनी माँ को चोदेगा तो वो ऐसे ही चीखेगी चिल्लाएगी | खुद राहुल भी चूत में अपनी लंड की रगड़ से ज़बरदस्त मज़े को अनुभव कर रहा था | अब समय आ गया था वो अपनी मम्मी को दिखाता कि वो कितना तगड़ा मर्द है कि वो चुदाई के मामले में उसे कितना सुख दे सकता है |

राहुल लंड को सुपाड़े तक खींचता है और कमर पर अपने हाथ कस अपने कुल्हो का पूरा ज़ोर लगा कर अपनी मा की चूत में अपना लंड पेल देता है |

"आआईईएईईईए......हहाअयईईए मेरी चूत.....हाए मरररर गययययीईई......उउउफफफफ़फफ्फ.......धीरे.......धीरे मारो .....बेटा..." सलोनी उस जबरदसत धक्के से पीड़ादायक मज़े से सिहर उठी थी | राहुल अब पूरा लंड खींच खींच कर धक्के मार रहा था | सलोनी उसके हर धक्के पर चीख पड़ती थी | राहुल ने हालांकि अभी तक तेज़ स्पीड नही पकड़ी थी और वो अब वही करने जा रहा था | राहुल अपनी गति बढ़ाता है और पूरा लंड खींच कर धक्के मारता है | मगर यह क्या तेज़ गति से लंड सुपाड़े तक बाहर खींचने के समय उसका लंड टककककक करता हुआ पूरा बाहर आ जाता है | वो फट से लंड अंदर घुसाता है | लंड का सुपाड़ा अंदर जाते ही सलोनी चिहुंक पडती है | राहुल दो तीन धक्कों के पशचात जैसे ही फिर से स्पीड बढ़ाता है | उसका लंड फिर से जल्दबाज़ी में बाहर आ जाता है | राहुल फिर से अंदर डालता है और अपनी मा को चोदने लगता है | मगर जैसे ही वो स्पीड पकड़ता है और लंड वापस खींचता है लंड फिर से बाहर आ जाता है |

"क्या कर रहा है...........क्यों बार बार बाहर निकाल रहा है...." इस बार सलोनी चुप्प नही रह पाती | एक तो बार बार चुदाई रुकने से उसे मिलने वाले मज़े से वो वंचित हो जाती जिसके लिए वो इतना तरसी थी, उपर से राहुल जब भी दोबारा अपना मोटा लंड उसकी चूत में घुसाता तो वो दर्द से बिलबिला उठती | वो नही चाहती थी कि लंड चूत से बाहर निकले |

"सॉरी मम्मी.........वो फिसलन बहुत है...." राहुल फिर से लंड अंदर घुसाता है और कुछ धक्के लगाने के बाद वो जैसे ही स्पीड पकड़ता है लंड फिर से बाहर |

लंड बाहर निकलते ही राहुल पूरी गति से उसे वापस अपनी मा की चूत में घुसेड देता है और घबराता हुआ जैसे ही लंड खींच कर धक्का लगाता है, लंड हल्का सा बाहर आकर उपर को फिसल जाता है | सलोनी राहुल को घूर रही थी | राहुल बिजली की तरह अपना लंड थामे फिर से चूत में घुसाने की कोशिश करता है मगर वो इतना घबरा चुका था कि उसके हाथ कांप रहे थे | लंड अंदर जाने की वजाए एक तरफ को फिसल जाता है |

अचानक सलोनी ज़ोरों से खिलखिला कर हंस पड़ती है | राहुल के चेहरे पर घबराहट और मासूमियत का वो भाव इतना प्यारा था कि सलोनी खुद को रोक नही पाती और खुल कर हँसने लगती है | अपनी माँ को इस तरह हंसते देख राहुल जो उसकी चूत में फिर से लंड घुसाने की कोशिश कर रहा था, रुक जाता है | उसके चेहरे का रंग लाल हो जाता है | उसके चेहरे पर घबराहट की जगह शर्मिंदगी छा गयी थी | उसे समझ नही आ रहा था जब बाकी सब कुछ ठीक था तो यहाँ आकर उससे क्या गलती हो जाती थी | 

सलोनी बेटे के चेहरे पर शर्मिंदगी देखकर उसे इशारे से अपनी तरफ बुलाती है | राहुल थोडा नीचे को होता है तो सलोनी उसके चेहरे को थाम उसके होंठो को चूमती है | 

"अब बताओ आख़िर इतना तेज़ी क्यों पकड़ रहे हो कि बार बार बाहर निकाल लेते हो?" 


"वो मैने पढ़ा था कि तेज़ तेज़ करने से.......औरतों को बहुत मज़ा आता है, इसलिए मैं भी.....मगर वो बार बार बाहर निकल जाता है" 

"पढ़ा था? कहाँ? कब?" सलोनी जिगाय्सु हो उठती है |

"आज शाम को.......जब आप कपड़े धो रहे थे" राहुल के पास अब सच बोलने के सिवा और कोई रास्ता नही था |

"ओह अब समझी.. तो यह पढ़ाई कर रहे थे तुम..........सोचा होगा माँ चोदने को मिलेगी.... थोड़ी सी जानकरी हासिल कर लेता हूँ......हुं क्या बोलते हो?" मगर राहुल कुछ बोल नही पाता | उसके चेहरे पर छाई शर्मिंदगी और भी गहरी हो गयी थी |

"इधर देखो मुझे....मेरी तरफ.........." सलोनी राहुल का चेहरा पकड़ कर अपनी तरफ घूमाती है जो उसने शर्मिंदगी की वजह से एक तरफ को मोड लिया था | 

"मुझे इंप्रेस करने की कोशिश कर रहे थे" राहुल झिझकता हुआ हाँ में सर हिलाता है | 

सलोनी ठंडी आह भरती है और उसके चेहरे को पकड़ कर फिर से उसके होंठो को चूमती है | 

"बेवकूफ़ कहीं का........ अरे तूने तो मुझे सुबह ही इंप्रेस कर दिया था......तेरे लंड पर तो मैं सुबह ही मर मिटी थी........याद नही उसे मुँह में लेकर चूसा था.... तेरा वीर्य पिया था मैंने .......अगर तुझसे इंप्रेस ना होती तो इस समय तेरी माँ होने के बावजूद तेरे नीचे ना लेटी होती और तू मेरा बेटा होने के बावजूद मेरे उपर ना चढ़ा होता और तेरा लंड मेरी चूत में ना घुसता", राहुल को अपनी माँ की बातों से जहाँ थोड़ी तस्सली हुई थी कि वो उसके लंड से इतनी प्रभावित थी वहीं उसकी ज़ुबान से निकलने वाले वो अश्लील अलफ़ाज़ उसकी आग को भड़का रहे थे |

"देखो बेटा सेक्स एक नेचुरल चीज़ है.... इसमे तुम खुद बा खुद सब कुछ सीखते जाओगे.... अभी देखो तुम कितना बढ़िया चोद रहे थे और स्पीड पकड़ने की कोशिश की तो क्या हुआ? तुम पहली बार किसी को चोद रहे हो.... बस आराम आराम से करो..... तुम्हे खुद बा खुद शायद पहली चुदाई में ही तजरबा हो जाएगा कि अपनी कमर कितनी वापस खींचनी है कि तुम्हारा लंड मेरी चूत से पूरा बाहर ना निकले..... जब तुम्हे एक्सपीरियेन्स हो जाएगा तो फिर तुम पूरा लंड बाहर निकाल निकाल कर पूरी स्पीड से चोद पाओगे.... नेट से तुम्हे सीखने की कोई ज़रूरत नही है.... यह सब तुम दो बार चुदाई करके खुद बा खुद सिख जाओगे और अगर कुछ सीखना है भी तो वो मैं तुम्हे सिखायुंगी.... समझे.....वैसे तुमने जिस प्रकार मेरी चूत चाटी थी वैसे लगता नही मुझे तुम्हे कुछ सीखाना पड़ेगा......चलो अब देर मत करो....जलद से अपना लंड मेरी चूत मैं घुसाओ और मुझे चोदो" 

राहुल अपनी माँ की दोनों साइड में हाथ रखकर अपने बदन को उपर उठाता है और अपना लंड फिर से अपनी माँ की चूत पर रखता है | सलोनी फिर से अपने हाथ से लंड को पकड़ती है, "अब घुसा दो अंदर" | राहुल कूल्हे को धकेलता है तो लंड चूत का मुँह खोलता अंदर समा जाता है | सलोनी फिर से सिसक उठती है | वो लंड से हाथ हटा कर उसके कंधो को पकड़ लेती है और अपनी टाँगे उसकी कमर पर लपेट देती है | वो राहुल को खींच कर अपने ऊपर लेटा लेती है |

"हाययईई......अब देर मत कर .... चोद मुझे........चोद मुझे..........हाए चोद अपनी मम्मी को" सलोनी अपने बेटे के कानों में सरगोशी करते हुए बोलती है | राहुल अपनी माँ की अश्लील भाषा से उत्तेजित अपनी कमर को हिलाना शुरू कर देता है | उसका लंड फिर से अपनी माँ की चूत के अंदर बाहर होने लगता है | फिर से सलोनी उँची उँची सिसकारियाँ भरने लगती है |

राहुल हालांकि डर रहा था कहीं उसका लंड फिर से फिसल कर बाहर ना आ जाए इसलिए वो उसे आधा ही बाहर निकालता और वापस अंदर पेल देता | उसकी माँ की सिसकियां, उसके अशलील लफ्ज़ जिनसे वो उसे उत्साहित कर रही थी और सलोनी की टाइट चूत में लंड पेलने का जबरदसत मज़ा वो जल्द ही सब कुछ भूल गया और उसकी स्पीड बड़ने लगी |

"आआअहह.........ऊऊुऊउक्कककचह.........ऊऊुऊउक्ककचह.......ऊओह रहहुउऊउल्ल.......राआहहुउउल्ल्ल.........चोदो मुझे.......हाएयययय....ई.......ऐसे ही मारो बेटा........हाअयययययईई..........ऊऊऊफफफफफफफफ़फ्ड......" सलोनी की सिसकियाँ आग मैं घी डाल रही थी | 

राहुल और ज़ोर ज़ोर से अपनी कमर खींच खींच कर अपना लंड अपनी माँ की चूत में घुसेड़ने लगा | उसे एहसास ही नही था अब उसका लंड उसके सुपाड़े तक बाहर आ रहा था | सलोनी हर धक्के पर चीख पड़ती थी |


"मम्मी मज़ा आ रहा है ना........" राहुल उत्तेजना की अधिकता में बोल उठता है |

"पूछ मत....... ऊऊऊऊुऊउक्ककच......हायय....ईई.........बस चोदता रह.....
मैं झड़ने वाली हूँ........ हाए अब तेरी माँ हर रोज़ तुझसे चूदेगी.....हर दिन हर रात...........आआहह.........." 

"मैं भी मम्मी.....मैं भी मम्मी........." राहुल अब फुल स्पीड में अपनी मा को चोद रहा था | उसके टट्टो में वीर्य उबल रहा था | जो शाम से बाहर आने को तड़प रहा था | अचानक सलोनी अपनी कमर उछाल उछाल कर अपने बेटे के धक्कों का ज्वाब धक्कों से देने लगती है | राहुल और भी जोश में आ जाता है | वो अपनी माँ के कंधे थाम खींच खींच कर अपना लंड उसकी चूत में पेलता है |

"राहुल मेरे बेटा.......मेरे बेटे..........हे भगवन्......." सलोनी राहुल के सर को थाम उसके होंठो पर अपने होंठ रख देती है और अपनी जिव्हा उसके मुख में घुसेड देती है | राहुल तुरंत जिव्हा को अपने होंठो में दबा कर चूस्ता हुआ अपनी माँ की चूत में कस कसकर धक्के लगाता है | सलोनी भी उसकी ताल से ताल मिला रही थी | अचानक सलोनी बदन ऐंठने लगती है | वो धक्के मारने बंद कर देती है | उसका मुँह अपने बेटे के मुँह से हट जाता है और वो अपनी टाँगे उसकी कमर पर और कस कर लपेट देती है |


"बेटा......बेटा.......मेरे लाल.......मेरे लाल......" सलोनी झड़ रही थी | राहुल अपनी माँ के उपर से उठ पहले की तरह उसकी कमर को पकड़ लेता है और पूरी शक्ति से धक्के लगाता है | मुश्किल से पाँच सात धक्के ही लगाए होंगे कि वो ज़ोरदार हुंकार भरता है |

"मम्मी........आहह......मम्मी....." राहुल सिसक पड़ता है | उसके लंड से वीर्य की पिचकारियाँ उसकी मा की चूत को भरने लगी थी | 

"मेरे लाल....आआहह.....उउउन्न्ननज्ग्घह......भर दे मेरी चूत अपने रस से......मेरे लाल.....हइईए........भर दे मेरी चूत" सलोनी अपनी चूत में राहुल के लंड से निकलती वीर्य की तेज़ धारों को महसूस करती है तो उसका सखलन और भी तीव्र हो जाता है |
"ऊऊहह...........उूउउफफफफफफ्फ़.......बेटा.......बेटा.....बेटा....." 

आख़िरकार दोनो का सखलन मंद पड़ जाता है और राहुल अपनी माँ के उपर लेट जाता है | सलोनी अपनी बाहें उसकी गर्दन में डाल देती है |

"मेरा बेटा......मेरा लाल....."
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