Nangi Sex Kahani अय्याशी का अंजाम
02-06-2019, 05:13 PM,
#11
RE: Nangi Sex Kahani अय्याशी का अंजाम
जय की बात सुनकर रानी का डर थोड़ा कम होता है.. वहीं विजय उसके चूचुकों को बड़े आराम से चूस रहा था.. तो रानी को मज़ा आ रहा था।
रानी- आह्ह.. हाँ बाबूजी.. आह्ह.. मज़ा तो बहुत आ रहा है.. लेकिन अन्दर मत डालना.. नहीं तो मैं मर जाऊँगी..
जय- अरे डर मत.. कुछ नहीं होगा.. बस ऊपर से मज़ा दूँगा.. थोड़ा अन्दर टच करूँगा.. तू डर मत.. हाँ बस आँख बन्द करके मज़ा लेती रह.. समझी..
जय ने लौड़े को रानी की चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया.. जिससे उसकी चूत की आग और भड़क गई।
रानी- कककक.. आह.. बाबूजी.. आह्ह.. आप जैसा कर रहे हो.. उससे आह्ह.. बहुत अच्छा लग रहा है.. आह्ह.. थोड़ा जल्दी इससस्स.. आह्ह.. जल्दी करो ना..
विजय रानी के निप्पल को चुटकी में दबाता हुआ कहता हैं भाई लोहा गर्म है.. मार दो हथौड़ा..
इतना सुनकर जय की आँखों में वासना दिखने लगती है.. वो लौड़े को चूत पर सैट करता है.. और हाथ से दबाव बनाता है.. मगर रानी की चूत बहुत टाइट थी.. लौड़ा आगे जाने का नाम ही नहीं ले रहा था.. तो जय ने ढेर सारा थूक लौड़े पर लगाया।
रानी की चूत तो पानी-पानी हो ही रही थी.. उसको गीला करने की जरूरत नहीं थी.. बस इस बार जय ने रानी की चूत को एक हाथ से फैलाया और सुपारे को उसमे फँसा दिया।
रानी- इससस्स.. आह.. बाबूजी उफ़फ्फ़ मेरी फुद्दी में कुछ हो रहा है.. आह्ह.. ज़ोर से रगड़ो ना.. आह्ह..
ये पहली बार था कि रानी ने ‘नीचे’ की जगह ‘फुद्दी’ कहा था.. अब वो गरम हो कर चरम पर आ गई थी.. किसी भी पल उसका बाँध टूट सकता था और जय को इसी मौके की तलाश थी।
जय ने थोड़ा दबाव बढ़ाया तो लौड़ा फिसल कर ऊपर को निकल गया।
रानी कमर को झटके देने लगी.. उसकी चूत से पानी बहने लगा.. वो मदहोशी में झड़ रही थी.. बस तभी जय ने चूत को सहलाया.. सुपारा वैसे ही सैट किया और अबकी बार हाथ हटाए बिना ज़ोर से धक्का मारा..
रानी अभी झड़ कर पूरी भी नहीं हुई थी कि ये काण्ड हो गया.. वो बेचारी तो जन्नत में घूम रही थी.. अचानक दहकता हुआ अंगार के समान जय का लौड़ा चूत को फैलाता हुआ 3″ अन्दर घुस गया और खून की एक लकीर लौड़े से चिपक कर होते हुए चूत से बाहर आने लगी। 
रानी को एक ही पल में जन्नत से दोजख की याद आ गई.. वो इतने ज़ोर से चीखी कि पूरे फार्म पर उसकी ये चीख सुनाई दी होगी।
रानी- आआअ… आआआअ… बा..बू..जी.. आहह्हह्ह… मैं मर गई रे.. अहह.. मम्मी रे..
जय- अरे क्या सुन रहा है.. साली ने कान के पर्दे हिला दिए.. बन्द कर मुँह..
विजय रानी के सर के पास उकड़ू बैठा और अपना लौड़ा उसके मुँह में घुसा दिया।
अब उसकी चीखें तो बन्द हो गई थीं.. मगर उसकी आँखों से आँसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।
जय- आह.. उहह.. क्या गर्म चूत है रे.. रानी तेरी.. आह.. लौड़ा जलने लगा है उफ़फ्फ़…
विजय- चूस ना साली.. क्या कर रही है.. उफ्फ.. दाँत मत लगा रे आह्ह..
जय लौड़े को चूत में बहुत कसा हुआ महसूस कर रहा था.. वो धीरे-धीरे लौड़े को आगे पीछे कर रहा था और रानी बस रोए जा रही थी, उसकी आँखें एकदम लाल हो गई थीं.. विजय का लौड़ा मुँह में होने के कारण उसको सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। 
तभी जय ने एक जोरदार धक्का मारा और पूरा लौड़ा चूत को फाड़ता हुआ अन्दर घुस गया।
इस ख़तरनाक प्रहार को रानी सह नहीं पाई और अपना होश खो दिया.. जिसे देख कर विजय घबरा गया और जल्दी से मुँह से लौड़ा बाहर निकाल लिया।
विजय- भाई ये मर गई क्या.. कुछ बोल नहीं रही.. देख इसकी आँखें कैसे फटी हुई हैं..
जय- अरे कुछ नहीं हुआ इसे.. पूरा लौड़ा अन्दर गया तो ये ऐसी हो गई.. थोड़ा हिला इसको.. आह्ह.. मज़ा आ गया क्या टाइट चूत है।
विजय ने रानी के चेहरे को थोड़ा हिलाया तो वो होश में आई और रोने लगी कि उसको बहुत दर्द हो रहा है।
जय- अरे रानी.. बस थोड़ी देर दर्द होगा.. उसके बाद तुझे मज़ा आएगा.. आह्ह.. बस थोड़ा सहन कर ले आह्ह.. उहह..
जय चूत में झटके देने लगा और रानी हर धक्के के साथ ‘आह’ भरती।
करीब 15 मिनट की चुदाई के बाद रानी का दर्द कुछ कम हुआ।
विजय उसके पास बैठा हुआ.. उसके गालों को सहला रहा था.. उसे तसल्ली दे रहा था।
रानी- आह्ह.. ईसस्स.. आह.. बाबूजी ये आपने क्या कर दिया.. उउउहह.. मुझे कहीं का नहीं छोड़ा.. ओह्ह..
जय- अरे पगली रोती क्यों है.. तुझे रानी बना कर रखूँगा.. आह्ह.. ले.. अब आह्ह.. चुदाई का मज़ा ले आह्ह.. उहह..
जय की ठुकाई से अब रानी की चूत में दर्द के साथ एक मीठा अहसास भी होने लगा था.. उसकी कामवासना फिर से जाग उठी थी।
रानी- आह उईई.. बाबूजी उफ़फ्फ़ आह.. मर गई.. आह्ह.. ज़ोर से करो आह.. उईई…
अब जय स्पीड से लौड़े को अन्दर-बाहर करने लग गया और कुछ ही देर में उसके लौड़े ने वीर्य की धार रानी की चूत में मारी.. जिससे चूत पानी-पानी हो गई और धारा से धारा मिल गई यानि रानी भी झड़ गई।
जय ने जब चूत से लौड़ा बाहर निकाला तो सफेद और लाल रंग का मिला-जुला पानी लौड़े के साथ बाहर आया।
जय- आह रानी.. तेरी चूत तो आग की भट्टी थी रे.. साला लौड़ा देख कैसे लाल हो गया है।
रानी कुछ ना बोली और बस उसी हालत में पड़ी रही।
विजय- यार तेरा तो हो गया.. मेरा लौड़ा वैसे का वैसा तना खड़ा है।
जय- तुझे किसने रोका है.. कर दे इसका मुहूरत तू भी..
विजय- मुहूरत तो आपने कर दिया.. अब मैं क्या खाक करूँ.. और चूत का हाल तो देखो.. कैसे पानी और खून से भरी पड़ी है.. इसमें कौन लौड़ा पेलेगा..
रानी- आह्ह.. आह्ह.. बाबूजी.. मुझ पर रहम करो.. आह्ह.. मेरी फुद्दी में बहुत दर्द है.. मैं अब सह नहीं पाऊँगी.. आह्ह.. मर जाऊँगी..
विजय- अरे साली.. कुछ नहीं होगा तुझे.. अभी तो सील टूट गई.. अब क्या होने वाला है तुझे..
जय- तुझे करना है तो कर.. मैं तो चला कमरे में.. पूरा गंदा हो गया हूँ.. जाकर नहाऊँगा..
जय वहाँ से चला गया.. तो विजय ने चादर से रानी की चूत को अच्छे से साफ किया। वो कराह रही थी मगर विजय पर तो चुदास सवार थी.. उसने रानी के पैरों को मोड़ा और लौड़े को चूत पर टिका कर ज़ोर का धक्का मार दिया.. बस आधा लौड़ा घुसते ही रानी के चीखें फिर से कमरे में गूँजने लगीं और विजय के तगड़े लौड़े ने रानी का हाल से बेहाल कर दिया।
विजय- उफ्फ.. भाई सही कह रहा था.. तेरी चूत तो बड़ी क़यामत है रे साली..
रानी- आह उहह.. नहीं बाबूजी.. आह्ह.. मेरी जान निकल रही है.. आह नहीं.. करो..

विजय दे दनादन लौड़ा पेले जा रहा था और रानी चीखे जा रही थी।
कुछ देर बार रानी की चूत में दर्द कम हुआ और चूत की चिकनाहट के कारण लौड़ा आसानी से अन्दर-बाहर होने लगा।
रानी- आह.. ईससस्स.. नहीं उईईइ.. आह.. मर गई ओह.. बाबूजी आह्ह.. आराम से उफ्फ.. आह्ह.. नहीं ओह.. उउउहह आह ससस्स..
विजय का लौड़ा पहले ही बहुत गर्म था अब रानी की सीत्कारों से उसकी वासना और बढ़ गई। वो तेज़ी से धक्के देने लगा और कुछ ही देर में उसका ज्वालामुखी चूत नाम की गुफा में फट गया और वो निढाल सा होकर रानी के पास में लेट गया।
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02-06-2019, 05:13 PM,
#12
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दोस्तो, अब यहाँ कुछ नहीं रहा, रानी थक गई है.. इसे आराम लेने दो.. हम दूसरी जगह चलते हैं।
हरिया और प्रमोद अपने कमरे में बैठे चाय पी रहे थे और बातें कर रहे थे।
हरिया- अरे प्रमोद भाई.. अब तो बता दे रात क्या हुआ था.. तू किसके साथ मज़ा ले रहा था?
प्रमोद- अरे बताता हूँ ना.. सुन तुझे तो पता है.. मैं रात को हॉस्टल के हर कमरे के पास आँख लगा कर देखता हूँ कि कोई हसीना नंगी दिख जाए या कोई दो लड़की मज़े लेती दिख जाएं..
हरिया- अरे हाँ.. ये तो पता है.. कल रात क्या हुआ.. वो बता?
प्रमोद- अरे बता रहा हूँ ना.. कल साली कोई लड़की की चूत ना देख पाया तो परेशान होकर काजल के कमरे के पास गया.. उसका तो तेरे को पता है ना.. साली पक्की छिनाल है.. सब लड़कियों को उसने ही बिगाड़ा है। मैंने सोचा आज इस हॉस्टल की सबसे हसीन लड़की रश्मि के साथ वो जरूर कुछ करेगी.. तो उसकी चूत देखने का मौका मिल जाएगा।
हरिया- अरे ये बात मेरे दिमाग़ में क्यों नहीं आई.. नहीं तो मैं भी आ जाता.. रश्मि को नंगा देखने की तलब तो यहाँ सब करते हैं.. वो है ही चाँद का टुकड़ा।
प्रमोद- हाँ यार.. इसी चक्कर में तो उसके कमरे के पास गया था। मैंने होल से देखा तो कमरे में हल्की रोशनी थी और रश्मि अकेली बेसुध सोई पड़ी थी, वो साली काजल वहाँ नहीं थी, मैंने दरवाजे को हल्के से खोलना चाहा.. तो खुल गया।
हरिया- अरे बापरे.. तुझे डर नहीं लगा.. वो जाग जाती तो?
प्रमोद- अरे मैंने तो बस ऐसे ही देखा था.. अब दरवाजा खुल गया तो मैंने हिम्मत करके अन्दर का मुआयना किया कि वो काजल कहाँ है। जब काफ़ी देर वो नहीं आई.. तो मैं समझ गया वो रंडी किसी दूसरे कमरे में अपनी प्यास बुझाने गई होगी और ये सोच कर मेरी हिम्मत बढ़ गई। मैं धीरे से बिस्तर के पास गया और वहाँ का नजारा देख कर मेरी हालत पतली हो गई रे.. वो एकदम सीधी सोई थी और सांस के साथ उसके चूचे ऊपर-नीचे हो रहे थे। उसकी नाईटी भी जाँघों से भी ऊपर तक थी.. उसे कोई होश नहीं था.. उसकी गोरी टाँगें नंगी मेरे सामने थीं.. और मैं उसको देख कर बेहोश सा होने लगा। मेरे लंड महाराज घंटी की तरह हिलने लगे।
हरिया- अरे वाह.. ऐसा नजारा देख कर मेरा लंड घंटी क्या घंटा बन जाएगा.. तू आगे बता ना..
प्रमोद- आगे क्या बताऊँ.. मुझसे रहा नहीं गया.. तो मैंने डरते हुए उसकी जाँघों पर हाथ रख दिया। उफ्फ.. क्या गर्म थी यार.. और ऐसी मुलायम की बस मेरे हाथ काँपने लगे।
कुछ देर तक जाँघ पर हाथ फेरने के बाद मैंने उसके चूचों को छुआ.. बड़े ही लाजवाब थे यार.. मेरा लंड झटके खाने लगा था। थोड़ा डर भी लग रहा था कहीं कोई आ ना जाए..
हरिया- भाई ऐसे समय डर तो लगता ही है मगर ऐसे मज़े के आगे सब डर दूर हो जाते हैं..
प्रमोद- हाँ यार वो साली ऐसी सोई थी जैसे 4 बोतल पीके सोई हो। उसको होश ही नहीं था और मेरी हालत खराब हो रही थी। अब मेरी हिम्मत बढ़ गई.. मैंने आगे से उसकी नाईटी को खोल दिया.. सामने उसका बेदाग जिस्म था। एकदम गोरे जिस्म पर उसकी काली ब्रा और पैन्टी देख कर लौड़े से पानी की बूँदें बाहर आ गईं। उसके बाद तो बस मेरा सर डर निकाल गया.. मैं उसकी चूत की महक लेने लगा। धीरे से उसको छुआ तो 440 वोल्ट का झटका लगा मुझे.. मैंने उसकी कसी हुई चूत पर अपने होंठ रख दिए।
अब साली थोड़ा कसमसाई.. मैं समझा कहीं उठ ना जाए.. तो धीरे से बस उसको सहलाता रहा। अब मेरा लंड काबू में नहीं था.. मैंने उसे बाहर निकाल लिया और रश्मि की चूत पर हल्के से रगड़ने लगा। कसम से क्या बताऊँ उसकी चूत को छूते ही लौड़े में करंट पैदा हो गया.. जैसे अभी झड़ जाएगा। तभी मुझे बाहर कुछ आवाज़ सुनाई दी.. मैं एकदम से डर गया और जल्दी से कमरे से बाहर निकल आया।
हरिया- उफ़फ्फ़ प्रमोद भाई.. क्या सुना दिया.. मेरा लौड़ा तो सुनकर झटके खा रहा है.. तूने तो उस कमसिन कन्या की चूत को छुआ है.. आह्ह.. क्या मज़ा आया होगा ना.. उसके बाद क्या हुआ.. वो बता ना यार..
प्रमोद- अरे उसके बाद मेरी अन्दर जाने की हालत नहीं थी.. लौड़ा बुरी तरह अकड़ा हुआ झटके खा रहा था.. बस वहाँ से निकल कर सीधा टॉयलेट गया.. लौड़े को ठंडा किया.. तब जाकर सुकून मिला.. मगर वो नजारा आँखों के सामने से हट ही नहीं रहा था। दोबारा हिम्मत करके गया.. तो सामने से काजल आती दिखाई दी.. तो मैं जल्दी से वापस मुड़ गया और भाग कर कमरे में आ गया।
हरिया- अरे बाप रे, वो कहाँ से आ गई.. साली रंडी.. यार ऐसा मौका दोबारा मिले तो मुझे भी बुलाना.. उसकी चूत देखने की बड़ी तमन्ना है मेरी.. दिल करता है साली को उठा के ले जाऊँ।
यहाँ अब बस बातें रह गई हैं.. चलो वापस रानी के पास जाते हैं।
दर्द के मारे रानी अभी तक सिसक रही थी और विजय उसके पास लेटा हुआ उसके मम्मों को मसल रहा था।
रानी- आह ईससस्स.. नहीं बाबूजी अब और ताक़त नहीं है.. आह्ह.. काम के बहाने आप मेरे बदन से खेल गये.. अब मेरा क्या होगा.. उउउह उउहह.. मैं क्या करूँगी अब..
विजय- अरे अरे.. रोती क्यों है.. कुछ नहीं होगा तुझे.. मैं हूँ ना.. देख चुप हो जा.. अब तेरे साथ जो होना था सो हो गया.. अब तू मज़े करेगी बस.. चल आज की इस ठुकाई के तुझे 2 हज़ार देते हैं.. बस अब खुश चुप हो जा तू..
रानी- नहीं बाबूजी पैसे से इज़्ज़त का सौदा मत करो.. मुझे घर जाना है.. बस अब यहाँ नहीं रहना मुझे..
विजय- अरे मेरी भोली रानी घर जाने से क्या होगा.. अब यहीं रह.. देख तेरी माँ बहुत गरीब है.. तू यहाँ रह कर पैसे कमा उसका सहारा बन..
विजय बहुत देर तक रानी को समझाता रहा.. जब जाकर वो मानी।
रानी- अच्छा ठीक है बाबूजी.. मगर आप दोनों एक साथ मुझे परेशान नहीं करोगे.. बहुत दुःखता है मुझे..
विजय- हा हा हा हा अरे बस.. इतनी सी बात.. चल नहीं करेंगे बस.. अकेला मैं ही करूँगा।
रानी- आप ही करेंगे तो बड़े बाबूजी का क्या होगा?
विजय- ओये मेरी सोणिए.. क्या बात है बड़ी फिकर है उसकी.. अरे उसके साथ भी मज़े ले लेना यार अकेले में… और सुन ये क्या ‘बाबूजी बाबूजी..’ लगा रखा है.. जानू बोलो.. डार्लिंग बोलो.. अगर ये नहीं तो यार हमारे इतने प्यारे नाम हैं.. वो लिया करो..
रानी- ठीक है विजय जी.. हा हा हा ये अच्छा है ना..
रानी को हँसता देख कर विजय को उस पर बड़ा प्यार आया। उसने रानी को अपनी बाँहों में भर लिया।
कुछ देर वो दोनों बातें करते रहे.. उसके बाद विजय की मदद से रानी बाथरूम तक गई.. उसको बहुत दर्द था मगर वो एक बहादुर लड़की थी.. सब दर्द को सह गई और चूत को अच्छी तरह साफ किया। बाद में कमरे को भी ठीक किया तब तक विजय जा चुका था।
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02-06-2019, 05:13 PM,
#13
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दोपहर तक सब नॉर्मल हो चुका था। हाँ रानी के पैर ठीक से काम नहीं कर रहे थे.. उसको चूत में दर्द था और उसको बुखार भी हो गया था.. तो विजय ने उसे कुछ दवा और ट्यूब देकर कहा कि वो कमरे से बाहर ना आए.. बस आराम करे, शाम तक ठीक हो जाएगी।
दोनों भाइयों ने लंच किया और टीवी देखने लगे.. तभी वहाँ सुंदर और आनंद आ गए।
आनंद- हाय विजय हाय जय.. कैसे हो?
जय- अरे आओ आओ.. तुम्हारा ही इंतजार था और साजन कहाँ है.. वो नहीं आया क्या?
सुंदर- वो बस आता ही होगा.. हम जरा पहले आ गए।
विजय- वो साला कहाँ रह गया.. ऐसे तो बड़ा बोलता था एक बार मैं गेम में आ जाऊँ.. तो ऐसा कर दूँगा.. वैसा कर दूँगा.. अब गाण्ड फट गई क्या उसकी?
आनंद- अरे ऐसी बात नहीं है भाई वो यहाँ से कुछ दूर कॉलेज का कैंप लगा है वहाँ उसकी बहन भी है। मुझे फ़ोन किया था.. उसको वहाँ छोड़ कर आते वक़्त यहाँ आएगा वो..
विजय- अच्छा उस साले हरामी की बहन भी है क्या?
सुंदर- हाँ यार बहन तो सबकी होती हैं.. उसमें नया क्या है.. बस बीवी नहीं है किसी के पास हा हा हा हा..
जय- अबे कुत्ते गेम जीत और बना ले अबकी बार नई-नई बीवी.. पूरा मौका मिलेगा हा हा हा..
रंगीला- हैलो कमीनो.. क्या हाल हैं?
दोस्तो, यह है रंगीला इसकी उम्र 22 साल है.. अच्छी कद काठी का बांका जवान है.. लड़कियाँ इसको देख कर अपना बना लेने की तमन्ना रखती हैं.. मगर यह बिंदास है, हर महीने गर्लफ्रेण्ड बदलता है और मज़ा करता है।
जय- अरे आओ आओ मेरे बब्बर शेर.. तुम्हारी ही कमी खल रही थी।
रंगीला- सब आ गए क्या?
आनंद ने बताया कि साजन नहीं आया.. वो अपनी बहन को छोड़ कर आएगा।
तभी वहाँ साजन भी आ गया.. उसके साथ कोमल भी थी। आज कोमल ने लाल रंग की स्कर्ट और काली टीशर्ट पहनी हुई थी, बहुत हल्का सा मेकअप किया हुआ था.. उसके होंठों पर लाल लिपस्टिक उसकी खूबसूरती को और बढ़ा रही थी।
जब वो अदा के साथ चलकर आ रही थी उसके चूचे थिरक रहे थे और कमर नागिन की तरह बल खा रही थी। वो ऐसे चल रही थी जैसे कोई मॉडलिंग कर रही हो, उसको देखकर जय की लार टपकने लगी।
साजन- हैलो दोस्तो.. हाउ आर यू.. क्या मीटिंग चल रही है यहाँ पर?
आनंद- अरे आओ आओ बॉस.. आपका ही इंतजार हो रहा था.. लेकिन यह कोमल को यहाँ क्यों ले आए.. इसे तो आप कैंप छोड़ने गए थे ना..
रंगीला- अरे जाना तो वहीं था.. बाइक ने धोखा दे दिया.. आधे रास्ते में ही दम तोड़ दिया.. साली पंचर हो गई यहाँ तक ऑटो में आया हूँ।
सुंदर- यहाँ ऑटो में आए.. सीधे वहीं चले जाते..
साजन- अरे साला ऑटो वाला नहीं माना वहाँ जाने को.. तो मैंने कहा अच्छा फार्म पर छोड़ दे.. आगे मैं चला जाऊँगा..
ये सब बातें कर रहे थे और कोमल बड़ी शराफत के साथ एक तरफ खड़ी बस जय के सामने नजरें झुका कर खड़ी थी और जय भी बस उसको निहार रहा था।
बीच-बीच में कोमल जय की ओर देखती और हल्का सा मुस्कुरा देती।
विजय- अब तू चाहता क्या है.. ये बोल?
साजन- यार.. तू अपनी गाड़ी की चाभी देना जरा.. बस अभी इसको कैम्प तक छोड़ कर अभी आता हूँ.. उसके बाद अपनी मीटिंग शुरू..
जय- अरे साजन.. तेरी बहन बोल नहीं सकती क्या.. गूंगी है?
साजन कुछ बोलता.. उसके पहले कोमल बड़ी सेक्सी अदा के साथ बोली- जी नहीं.. मैं बोल सकती हूँ.. मगर आप दोस्तों के बीच.. मैं क्या बोलूँ.. इसलिए चुप खड़ी हूँ।
जय- अरे, कम से कम ही हैलो ही कर लेती..
साजन- बस बस.. जय ज़्यादा स्मार्ट मत बन.. ला चाभी दे.. इसको छोड़ कर आता हूँ.. अपन बाद में बात करेंगे।
कोई कुछ नहीं बोला और बस सब कोमल को ही निहारते रहे। विजय ने गाड़ी की चाभी साजन को दी.. वो कोमल के साथ जाने लगा.. तो जय की नज़र बस कोमल की मटकती गाण्ड को घूरती रही, उसका लौड़ा पैन्ट में टेंट बनाने लगा।
रंगीला- अरे बस भी कर.. चली गई वो.. अब क्या कैम्प तक अपनी नजरें ले जाएगा.. हा हा हा हा हा..
सभी ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगे।
जय- अबे चुप रहो कमीनों.. मैं तो बस यूँ ही देख रहा था.. कि लड़की बहुत ही खूबसूरत है।
आनंद- ये गलत बात है भाई.. साजन अपना फ्रेण्ड है.. और उसकी बहन अपनी बहन जैसी ही है.. उसको ऐसे देखना ठीक नहीं है यार..
जय- अबे चुप साले कुत्ते.. बहन होगी तेरी.. मैं तो उसको गर्लफ्रेण्ड बनाने की सोच रहा हूँ।
सुंदर- ठीक कहा यार.. मेरी भी काफ़ी समय से उस पर नज़र थी.. साली एकदम से पटाखा लगती है।
रंगीला- अरे कमीनों.. अच्छा हुआ वो चली गई.. वरना तुम यहीं उसकी चूत का चीर-फाड़ कर देते।
आनंद- नहीं भाई.. कुछ भी कहो ये सब गलत है.. अगर साजन को पता लगेगा तो वो लफड़ा करेगा।
विजय- क्या लफड़ा करेगा.. हमको मारेगा क्या..? अबे सालों हमारे फेंके हुए टुकड़े उठाते हो.. हमको आँख दिखाओगे क्या?
आनंद- विजय.. ये कुछ ज़्यादा हो रहा है समझे.. हम यहाँ बेइज़्ज़ती करवाने नहीं आए हैं..
रंगीला- अरे कूल यार.. दोस्तों में ये सब चलता रहता है..
जय- अरे किसी को कोई प्राब्लम नहीं है.. तो तू क्यों भड़क रहा है?
रंगीला- हाँ सही है.. दोस्तों में ये सब चलता रहता है और जय चाहे तो कुछ भी मुमकिन हो सकता है.. कहीं ऐसा ना हो कि साजन खुद अपनी बहन को इसके हवाले कर दे..
सुंदर- नहीं नहीं यार.. ऐसा नहीं हो सकता.. कोई भाई ऐसा नहीं कर सकता..
विजय- पैसे में बहुत ताक़त होती है साले.. हम जिसे चाहे खरीद लें..
आनंद- अच्छा अगर ये बात है.. तो कोमल को हासिल करके दिखाओ.. तब मानूँगा कि तुम कितने बड़े रईस हो..
जय- तू मुझे चैलेन्ज करता है.. अब देख.. मैं कैसे साजन को मनाता हूँ।
काफ़ी देर तक ये बहस चलती रही.. तब तक साजन भी वापस आ गया..
साजन- अरे क्या बात है.. किस बात पर इतना हंगामा हो रहा है।
रंगीला ने आनंद को चुप रहने का इशारा कर दिया.. ताकि बात बिगड़े ना..
जय- अरे कुछ नहीं.. इस बार क्या करें.. बस इस बात पर बहस हो रही है.. ये रंगीला कहता है कि हर बार गर्लफ्रेण्ड को साथ लाते हैं और गेम खेलते हैं अबकी बार कुछ अलग ट्राइ करते हैं।
जय ने ये बात रंगीला की तरफ़ आँख मारते हुए कही थी।
साजन- अरे यार ऐसे सूखे-सूखे प्लान बनाओगे क्या.. मज़ा नहीं आ रहा है.. पहले कुछ खुराक-वुराक पिलाओ.. ताकि दिमाग़ ठीक से काम कर सके।
विजय ने नौकर को आवाज़ दी तो वो ठंडी बियर लेकर आ गया। अब सब बियर का मज़ा लेने लगे और बातों का दौर फिर शुरू हुआ।
जय- अब बताओ साजन क्या सोचा.. मेरी बात समझ में आई कि नहीं?
साजन- हाँ तो सही है ना.. मैं बहुत पहले एक बार आ चुका हूँ और ये दोनों पहली बार आए हैं.. तो अबकी बार कुछ धमाल होना चाहिए।
आनंद और सुंदर बस उनकी ‘हाँ’ में ‘हाँ’ मिला रहे थे।
रंगीला- तूने कुछ तो सोचा ही होगा साजन.. इस बार के लिए वैसे भी तेरा शैतानी दिमाग़ कुछ ना कुछ सोचता रहता है।
साजन- नहीं अभी कुछ सोचा तो नहीं है.. पर सोच लेते हैं और मेरा दिमाग़ कहाँ इतना फास्ट चलता है बड़े भाई.. आप भी कहाँ की बोल रहे हो..
विजय- साले ज़्यादा भोला मत बन.. तेरी सब हरकत हम जानते हैं। अब जो सोच कर आया है.. बता दे..
विजय की बात सुनकर एक बार तो साजन को झटका लगा कि इनको प्लान के बारे में कैसे पता लगा.. मगर उसने बात को संभाल लिया।
साजन- अच्छा बाबा माफ़ करो.. तुम ऐसे मानोगे तो है नहीं.. तो सुनो.. मेरा प्लान क्या है.. इस बार भी गर्लफ्रेण्ड ही लाएँगे.. मगर अबकी बार वर्जिन होंगीं.. समझे…
रंगीला- तू कहना क्या चाहता है?
साजन- देखो बड़े भाई हर बार चुदी-चुदाई गर्लफ्रेण्ड को लाते हैं इस बार फ्रेश माल पटाओ.. उसको गेम के लिए राज़ी करो.. और यहाँ लेकर आओ.. तो मज़ा दुगुना हो जाएगा।
आनंद- हाँ.. ये आइडिया अच्छा है.. सील पैक लड़की होगी तो गेम खेलने में मज़ा ज़्यादा आएगा..
विजय- हम तो फ्रेश माल को पटा भी लेंगे.. तुम तीनों ला पाओगे?
साजन- बस क्या गुरु.. हमको क्या समझा है.. साजन नाम है मेरा.. जिस लड़की पर हाथ रख दूँ ना.. वो अपनी हो जाती है समझे..
जय- अच्छा इतना भरोसा है खुद पर.. तो चल अब मेरा प्लान सुन..
साजन- हाँ बताओ भाई.. सब अपना आइडिया दो.. जिसका आइडिया सबसे अच्छा होगा.. वही हम करेंगे..
जय- मैं तुम्हें एक लड़की का नाम बताऊँगा.. अगर तुम उसको ले आओ तो इस बार इनाम की रकम 5 लाख होगी और गेम के रूल भी चेंज करेंगे।
साजन- क्या बात है भाई.. 5 लाख.. अरे आप बोलो बस कौन है वो लड़की.. साली को चुटकियों में ले आऊँगा।
साजन के अलावा बाकी सब समझ गए कि जय किसका नाम लेगा.. सबकी दिल की धड़कन तेज़ हो गईं कि अब क्या होगा?
जय- तेरी बहन कोमल को ला पाएगा तू?
जय के इतना बोलते ही साजन गुस्से में आग-बबूला हो गया और झटके से खड़ा हो गया- जय ज़बान को लगाम दे अपनी.. साले तू पैसे वाला होगा.. तेरे घर का.. तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरी बहन का नाम लेने की?
रंगीला- साजन चुप रहो.. रूको एक मिनट मैं बात करता हूँ.. यार जय ये क्या है.. तू कुछ भी बोल देता है। हम सब दोस्त हैं अगर ये मजाक था तो बहुत बुरा था.. चल सॉरी बोल..
जय- रंगीला तुम होश में तो हो.. मैं जय खन्ना हूँ.. मैं सॉरी बोलूँ? अरे इसकी बहन पर दिल आ गया मेरा.. इसको बोल 10 लाख दूँगा.. अब तो उसको अपना बना के ही रहूँगा..
इतना सुनते ही साजन और ज़्यादा भड़क गया.. लड़ने की नौबत आ गई, बड़ी मुश्किल से आनंद और सुंदर उसको बाहर लेकर गए।
इधर विजय ने जय को काबू में किया- भाई आप को क्या हो गया है.. ऐसे लड़ना ठीक नहीं और उसके सामने बोलने की क्या जरूरत थी आपको.. वो लड़की चाहिए ना.. उसको तो कैसे भी आप पटा सकते हो.. 
जय- नहीं विजय.. मैं इसका गुस्सा देखना चाहता था। अब तू देख ये खुद उसको यहाँ लाएगा.. खरीद लूँगा मैं इस कुत्ते को.. रंगीला जा उसको कीमत पूछ.. उसकी बहन की? मैं हर कीमत पर उसको यहाँ लाना चाहता हूँ। इसको किस बात पर इतना घमण्ड है.. बहुत बार ये मुझसे उलझ चुका है। मैं इसका घमण्ड तोड़ कर रहूँगा..
रंगीला- होश में आओ जय.. ऐसा नहीं होता.. वो उसकी बहन है.. कोई रंडी नहीं.. जो तुम उसकी कीमत लगा रहे हो.. संभालो अपने आपको.. अब मैं उसको लेकर आता हूँ। ये बात दोबारा मुँह से मत निकालना.. वरना उनके साथ मैं भी चला जाऊँगा।
जय कैसा भी हो.. रंगीला की बात मानता था, उसने ‘हाँ’ में सिर हिला दिया और रंगीला बाहर गया और साजन को समझाने लगा।
रंगीला- अरे क्या हो गया तुझे.. तू जय को जानता नहीं क्या.. पीने के बाद ऐसे ही बकवास करता है और रही तुम्हारी बहन की बात.. उसके बोलने से वो आ गई क्या? ऐसे लड़ना ठीक नहीं है यार!
साजन- उसको अपने पैसों पर बहुत घमण्ड है ना.. साले को 2 मिनट में ठंडा कर सकता हूँ।
सुंदर- बॉस आप शान्त हो जाओ और चलो यहाँ से.. अब यहाँ रुकने का कोई फायदा नहीं।
साजन- नहीं अब उस कुत्ते को सबक़ सिखा कर ही जाऊँगा..
रंगीला- देख तू अन्दर चल.. जय को मैं समझा दूँगा.. बस तू चुप रहना ओके..
साजन भी गुस्से को काबू करके अन्दर आ गया। वैसे तो दोनों एक-दूसरे को देख कर आँखें दिखा रहे थे.. मगर कोई कुछ बोल नहीं रहा था।
रंगीला- हाँ तो फ्रेश माल लाने का प्लान सबको मंजूर है या किसी के दिमाग़ में कुछ और है..
विजय- मुझे यही ठीक लगता है.. इससे ज़्यादा क्या होगा?
साजन- इससे भी ज़्यादा हो सकता है.. अब जब बात मुँह से निकल ही गई तो उसे पूरा भी कर ही लो।
रंगीला- मैं कुछ समझा नहीं.. तुम क्या कहना चाहते हो..
साजन- जय ने मेरी बहन पर गंदी नज़र मारी है.. तो इस बार सब अपनी बहनों को ही क्यों ना लेकर आएं..
विजय- साजन कुत्ते.. तेरी ये मजाल तूने ऐसी बात सोची भी कैसे?
साजन- क्यों जब जय मेरी बहन के बारे में सोच सकता है तो बहन इसकी भी है.. उसको लाने में क्या दिक्कत है.. बड़ा घमण्ड है ना इसको अपने खिलाड़ी होने पर.. तो डर किस बात का.. ये तो हारेगा भी नहीं..
रंगीला- ये क्या बकवास है साजन.. तुम ऐसा कैसे बोल सकते हो.. एक खेल के लिए हम अपनी बहन को लाएं.. इतने गिरे हुए नहीं हैं।
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02-06-2019, 05:13 PM,
#14
RE: Nangi Sex Kahani अय्याशी का अंजाम
जय- ओके मैं कुछ ज़्यादा बोल गया था.. तू साजन अपनी बहन को मेरी बहन से मिला कर बड़ी ग़लती कर दी तूने.. अब देख मैं क्या करता हूँ।
साजन- हाँ जानता हूँ… तू पैसे के दम पर मुझे मरवा देगा या मेरी बहन को उठा लेगा.. मगर इसमें तेरी जीत नहीं हार होगी.. अगर दम है तो खेल में मुझे जीत कर दिखा.. मैं कसम ख़ाता हूँ कि मेरी बहन को तेरे सामने लाकर खड़ा कर दूँगा.. मगर अगर तू हार गया तो तेरी बहन मेरी होगी.. बोल है मर्द तो कर मुकाबला.. नहीं तो दोबारा ऐसी बात मुँह से मत निकालना..
जय गुस्से में पूरी बोतल एक सांस में पी गया।
विजय- भाई ये आपको फंसा रहा है आप कुछ मत बोलो.. मैं इस साले को अभी सीधा करता हूँ।
जय- नहीं विजय नहीं.. अगर ऐसा है तो ऐसा ही सही.. इसका गुरूर मैं तोड़ कर ही रहूँगा.. मुझे हराने की हिम्मत किसी में नहीं.. अब तो ये खेल सिर्फ़ हम दोनों के बीच में होगा।
साजन- हाँ ठीक है.. हम दोनों ही खेलेंगे अब तो फैसला हो ही जाए।
रंगीला- चुप रहो दोनों.. जय मुझे तुमसे कुछ जरूरी बात करनी है.. चलो मेरे साथ.. विजय तुम भी आओ मेरे साथ..
रंगीला ज़बरदस्ती दोनों को साथ ले गया इधर साजन बियर का घूँट लेकर मुस्कुराने लगा।
आनंद- बॉस ये क्या हो गया.. हमने तो सोचा था कि हम जय को इस बात के लिए रेडी करेंगे.. मगर साला वो तो खुद शुरू हो गया।
सुंदर- लेकिन ये रंगीला काम बिगाड़ देगा साला.. बॉस आपको ऐसे गुस्सा नहीं होना चाहिए था।
साजन- अबे चुप… साले फट्टू.. अगर मैं गुस्सा नहीं होता.. तो उनको शक हो जाता.. अब देख खेल का असली मज़ा।
उधर दूसरे कमरे में विजय गुस्सा हो रहा था।
विजय- भाई आप पागल हो गए हो क्या..? उस दो कौड़ी की लड़की के लिए हमारी बहन को दांव पर लगा रहे हो?
जय- नहीं विजय.. मैं इतना पागल नहीं हूँ.. जो बहन को यहाँ लाऊँगा.. मैं बस उसके साथ गेम खेलूँगा और जीत भी मेरी होगी.. उसके बाद उसकी बहन को उसके सामने चोदूँगा.. तब जाकर मेरा गुस्सा ठंडा होगा।
रंगीला- पागल हो तुम.. अगर ग़लती से वो जीत गया.. तो क्या करोगे?
जय- ना मुमकिन है ये.. मुझे वो नहीं हरा सकता..
विजय- भाई पत्तों का गेम है.. सब लक पर चलता है..
जय- ठीक है अगर मैं हार भी गया तो क्या.. साले का मुँह पैसों से बन्द कर दूँगा.. अपनी बहन थोड़े ही उस कुत्ते को दूँगा..
रंगीला- जय, वो कोई बच्चा नहीं है.. जो मान जाएगा.. मैंने कल विजय को कहा था कि इस बार वो कोई गेम खेलेगा.. और देखो उसने गेम में तुम्हें फँसा लिया। अरे कोमल का यहाँ आना कोई इत्तफ़ाक़ नहीं है.. वो प्लान करके उसको यहाँ लाया है.. तुम मेरी बात सुनो.. सब समझ जाओगे..
विजय- क्या बात कर रहे हो.. ये बात रात को क्यों नहीं बताई? 
रंगीला- रात को मुझे खुद नहीं पता था कि इसका ये प्लान है.. अब सुनो रात को मैं बुलबुल के पास था.. वहाँ इसको देख कर शक हुआ.. तो मैंने छुप कर इसका पीछा किया। इसने बुलबुल को बुक किया.. फिर फ़ोन पर किसी से बात की कि काम हो गया.. अब कल देखना असली तमाशा.. उसके बाद ये सलीम गंजा से मिला और हंसों को जमा करने और पार्टी में पाउडर लाने का काम उसको दिया.. तभी मुझे शक हुआ कि कहीं कुछ गड़बड़ है और मैंने विजय को फ़ोन करके बता दिया।
जय- नहीं नहीं.. उन सब बातों का इस बात से कोई लेना-देना नहीं.. वो क्यों अपनी बहन को यहाँ लाएगा.. ये सब इत्तफाक ही है और शुरूआत मैंने की.. उसने नहीं.. तो ये बात मानने वाली नहीं है।
विजय- चलो मान लिया.. कि ये बात अलग है.. मगर आप आगे उसकी ऐसी कोई बात ना मान लेना.. बस ये गेम किसी तरह क्लोज़ करो.. बहन यहाँ नहीं आएगी.. ओके.. अगर वो आपके रूल ना माने.. तो आप उसको मना कर देना।
जय- मानेगा कैसे नहीं.. साले को मानना पड़ेगा.. अब चलो..
कुछ देर बाद सब उसी जगह बैठे थे। अब साजन कुछ शान्त हो गया था.. उसके हाथ में बोतल थी और बियर के एक घूँट के साथ उसने बात शुरू की।
साजन- क्यों जय.. क्या सोचा.. गेम खेलना है.. या हार मान ली?
जय- तेरे जैसे कुत्ते से मैं हार जाऊँ.. यह हो नहीं सकता.. अब सुन, यह गेम आज ही हम दोनों के बीच खेला जाएगा, 7 राउंड होंगे.. जो 4 जीत गया वो विनर.. उसके बाद जो होना है वही होगा.. तू समझ गया ना?
साजन- वाह वाह.. क्या चाल चली है भाई.. आज तक तो लड़कियाँ साथ लेकर खेलते थे.. अब यह रूल चेंज क्यों? अगर गेम खेलना है तो उसी तरह खेलो.. एक तरफ़ मेरी बहन होगी दूसरी तरफ तेरी.. उसके बाद खेल शुरू होगा.. हाँ अगर तुझे पास में ये पब्लिक नहीं चाहिए तो मुझे कोई हर्ज नहीं.. मगर खेल ऐसे ही खेलेंगे।
साजन की बात से विजय को बड़ा गुस्सा आ रहा था.. मगर रंगीला ने उसके हाथ को दबा कर उसको चुप रहने का इशारा किया।
जय- नहीं ऐसा नहीं हो सकता.. वो मेरी बहन है.. ऐसे कैसे इस गेम के लिए उसको तैयार करूँ?
साजन- यही बात तेरे मुँह से सुनना था.. अरे तू हार गया.. तो बाद में कैसे तैयार करेगा.. देख तेरे दिल में कुछ धोखा देने की बात है.. तो उसको निकाल दे.. गेम होगा तो पुराने रूल से ही होगा.. वरना मैं समझूँगा तेरे में दम नहीं.. कि तू मुझसे मुकाबला करे!
जय को बहुत ज़्यादा गुस्सा आ गया, उसने बियर की आधी बोतल एक सांस में गटक ली।
जय- चुप कुत्ते.. अब मेरी सुन गेम होगा और पुराने तरीके से ही होगा.. अब हम दोनों नहीं.. ये चारों भी हारने वाली लड़की को चोदेंगे.. बोल है तेरे को मंजूर?
विजय और रंगीला तो बस एक-दूसरे को देखने लगे कि यह जय ने क्या कह दिया.. वो कुछ बोलते इसके पहले साजन ने ‘हाँ’ कह दी।
साजन- ठीक है.. ऐसा ही सही अब बात ज़ुबान की है.. तो मैं पीछे नहीं हटूँगा। किसी भी तरह मेरी बहन को मना लूँगा, बोल कब लाना है.. समय तू ही बता दे.. बाद में यह ना कहना कि तेरी बहन नहीं मान रही थी.. हा हा हा हा.. जरा सोच समझ कर बताना।
जय- नहीं.. मैंने जो बोल दिया वो बोल दिया.. अब पीछे हटने का सवाल ही नहीं पैदा होता।
विजय- रूको.. तुम दोनों पागल हो गए हो.. मुझे यह बात मंजूर नहीं.. मेरी बहन इस गंदे खेल का हिस्सा नहीं बनेगी.. बस..
जय- क्या बकवास कर रहा है.. मैंने बोल दिया ना और वो सिर्फ़ तेरी बहन नहीं.. मेरी भी है.. तू डर मत.. हम जीतेंगे और इसकी बहन को इसके सामने नंगा करेंगे।
साजन- वो तो समय ही बताएगा.. कौन किसको नंगा करता है.. बोल गेम कब शुरू होगा?
जय- देख बहन को मना कर लाना आसान काम नहीं है.. कुछ दिन तो लग ही जाएँगे.. समय हम बाद में तय कर लेंगे.. ओके..
साजन- ठीक है.. मगर बस 10 दिन का समय होगा.. उस दौरान तू अपनी बहन को पटा कर लाएगा.. नहीं तो तू हार जाएगा.. ओके..
जय- ठीक है साले.. मगर तू भी याद रखना.. अगर तू ना पटा पाया.. तो क्या होगा..
साजन- मेरी फिकर मत कर.. मुझे पता है.. मुझे किस तरह पटाना है।
रंगीला और विजय बस बेबस से अपने आप को कोस रहे थे कि जय ने यह क्या कर डाला.. देर शाम तक वो सब वहीं बैठे बकवास करते रहे।
रंगीला- अरे यार शाम होने को आई है.. मीटिंग तो ओवर हो गई.. अब क्या इरादा है?
जय- इरादा तो बहुत कुछ है.. मगर आज मूड दूसरा हो गया.. तुम लोग जाओ.. हम सुबह आ जाएँगे..
साजन- ठीक है यार.. अब जाने में ही भलाई है.. वरना जय कहीं अपनी बात से मुकर ना जाए।
जय- कुत्ते.. ये किसी ऐरे-गैरे की ज़ुबान नहीं.. जय खन्ना की ज़ुबान है तू अपना संभाल..
आनंद- तुम हमारे साथ आ जाओ साजन.. रंगीला तो अपनी कार से जाएगा।
रंगीला- हाँ तुम निकल जाओ.. मैं बाद में आता हूँ ओके..
वो तीनों वहाँ से निकल गए और रंगीला और विजय गेट के बाहर तक उनको छोड़ने आए।
काफ़ी देर तक रंगीला और विजय बाहर खड़े बातें करते रहे.. उसके बाद अन्दर आ गए।
जय- विजय मेरे भाई.. यहाँ आओ.. यार मुझसे ऐसे नाराज़ मत हो।
विजय- भाई ये आपने क्या कर दिया.. आप उस साजन की बातों में आ गए.. अब क्या होगा? हमारी बहन को आप यहा इस गंदे गेम का हिस्सा बनाओगे? अरे वो कितनी स्वीट है.. मासूम है!
जय- चल हट.. तू मुझे पागल समझता है क्या.. उस कुत्ते को मैंने अपने जाल में फँसा लिया है। वो कौन सा हमारी बहन को जानता है.. हम किसी और को बहन बना कर लाएँगे।
विजय- ओह्ह वाउ.. भाई मान गया आपके दिमाग़ को.. आप तो बहुत माइंडेड हो.. अब उस कुत्ते की बहन को सबके सामने नंगा करेंगे।
रंगीला- यार सच्ची जय.. तेरे दिमाग़ को मान गया.. साले शैतान को भी पीछे छोड़ दिया। वैसे बहन का रोल देगा किसे?
विजय- भाई रानी कैसी रहेगी.. वो उमर में भी छोटी है और माल भी मस्त है.. साजन तो उसको देखते ही लट्टू हो जाएगा..
जय- नहीं यार रानी गाँव की गोरी है.. साला कुत्ता.. उसको तुरंत पकड़ लेगा। अब उसको ये तो पता है ना हमारी बहन गुड्डी कॉलेज में है और रानी ठहरी अनपढ़… सारा गेम खराब हो जाएगा।
विजय- तो अब क्या करेंगे भाई.. किसको गुड्डी की जगह लेकर आएँगे?
जय- इसकी फिकर ना कर.. दिल्ली जाकर किसी ना किसी को ढूँढ ही लेंगे.. आज रानी को ठीक से चोद कर कल निकल जाएँगे.. ठीक है ना..
रंगीला- यार ये रानी कौन है?
विजय- अरे एक कच्ची कली है यार.. आज ही उसका मुहूरत किया है.. साली बड़ा मज़ा देती है।
जय- उसकी चूत इतनी टाइट है क्या बताऊँ.. साला लंड अन्दर जाते ही ऐसा महसूस करता है कि किसी भट्टी में फँस गया हो।
रंगीला- अरे यार मेरा तो सुनकर ही ये हाल हो गया.. कहाँ है वो.. रूप की रानी.. काम की देवी?
जय- अरे नहीं यार रंगीला.. वो ऐसी लड़की नहीं है.. बड़ी मुश्किल हम दोनों से चुदी है। अब तेरे बारे में बात करूँगा तो गड़बड़ हो जाएगी।
रंगीला- अरे क्या मेरे यार.. मुझे इतना गिरा हुआ समझा है क्या.. जो तेरे माल पर हाथ साफ करूँगा.. बस दिखा दे एक बार.. पता तो लगे ये कामदेवी कैसी है?
जय- ठीक है रुक.. अभी दिखाता हूँ मेरी सोने की चिड़िया को..
इतना कहकर जय कमरे में गया उस वक़्त रानी नहा कर कपड़े पहन रही थी।
जय- हाय मेरी जान बहुत सोई रे तू.. अब नहा कर एकदम मस्त लग रही है। आज पूरी रात मज़ा लेंगे हम दोनों.. क्यों क्या बोलती है..?
रानी- आप भी ना ऐसे ही चले आते हो.. कपड़े तो पहने दो मुझे और आज कुछ नहीं होगा.. मेरी तबीयत ठीक नहीं है जी..
जय- अरे मेरी भोली रानी.. मेरे सामने नंगी हो चुकी है.. अब कैसी शर्म? पहन लिए ना अब कपड़े और शुरू में थोड़ा दर्द होता है.. उसके बाद बड़ा मज़ा आता है।
रानी- नहीं बाबूजी.. विजय जी ने बहुत ज़ोर से किया.. मुझे नीचे बहुत दर्द हो रहा है।
जय- अच्छा जाने दे.. ये बात बाद में कर लेंगे.. मेरा एक दोस्त आया है.. चल तुझे उससे मिलवाता हूँ.. प्यार से बात करना.. हाँ.. वो मेरा खास दोस्त है.. कहीं वो नाराज़ ना हो जाए..
रानी- नहीं नहीं बाबूजी.. मैं कोई वेश्या नहीं हूँ.. जो आप सबके सामने मुझे भेज रहे हो.. मैंने आपको अपना माना.. आपके कहने पर आपके भाई को भी मैंने बर्दाश्त किया.. मगर अब और नहीं बस..
रानी के बोलने का तरीका उसकी आँखों में गुस्सा देख कर एक बार तो जय भी घबरा गया।
जय- अरे पगली.. तू गलत समझ रही है.. मैंने कब कहा तुझे ऐसस? तू बस उससे मिल ले.. वो कुछ ऐसा-वैसा नहीं करेगा.. ठीक है ना..
रानी- ठीक है बाबूजी.. आप जाओ.. मैं अभी आती हूँ।
जय बाहर आ गया और रंगीला को कहा- साली गुस्सा हो गई.. अब आ रही है.. देख लेना यार कुछ कहना मत.. नहीं तो साली रात को चुदवाएगी नहीं..
रंगीला- अरे गाँव की होकर साली के इतने नखरे.. चल आने तो दे.. मैं भी देखूँ.. कौन है ये रानी मस्तानी?
रानी ने लाइट ब्लू सलवार सूट पहना हुआ था.. उसके बाल खुले थे.. जिसमें वो अप्सरा जैसी लग रही थी। जैसे ही रानी और रंगीला की नजरें मिलीं.. दोनों ही एक-दूसरे में खो गए.. रानी धीरे-धीरे रंगीला के पास आकर खड़ी हो गई।
रानी- नमस्ते बाबूजी..
रंगीला कुछ नहीं बोला.. बस रानी को घूरता रहा।
जय- अरे कहाँ खो गया रंगीला.. ये है रानी.. देख लो..
रंगीला- अह.. ह.. हाँ अच्छी है.. मुझे ऐसा क्यों लगता है.. कि मैंने तुम्हें पहले भी कहीं देखा है..
रानी- क्या बाबूजी.. आप भी कैसा मजाक करते हो.. मैं अपने गाँव से कभी बाहर ही नहीं निकली.. आपने कहाँ देख लिया मुझे?
रंगीला- ना ना शहर में नहीं.. मैंने गाँव में ही देखा है तुझे.. यार कहाँ देखा है ये समझ नहीं आ रहा.. लेकिन देखा है मैंने!
विजय- अरे क्या रंगीला भाई.. ये गाँव की गोरी है.. आप शहर के नुस्खे ना आजमाओ.. हा हा हा.. ये नहीं पटने वाली..
जय भी हँसने लगा और रानी भी हँसती हुई वापस अन्दर चली गई, मगर रंगीला वैसे ही खड़ा बस सोचता रहा।
लो दोस्तो, अब ये क्या हो रहा है.. ये गुड्डी कौन है.. इसकी एंट्री भी जल्दी होगी और ये रंगीला को रानी के बारे में क्या याद आ गया। अब ये सब तो पता लग ही जाएगा.. सोचते रहो और आगे कहानी का आनन्द लेते रहो।
विजय और जय अब भी हंस रहे थे मगर रंगीला चुपचाप खड़ा हुआ बस उस कमरे की ओर देख रहा था.. जिसमें रानी गई थी..
विजय- अरे रंगीला क्या हुआ.. बहुत पसन्द आ गई क्या.. बोलो.. तब तो आज रात यहीं रुक जाओ.. तुमको भी इसका रस पिलवा देंगे.. हा हा हा हा..
जय- अरे नहीं रे.. वो नहीं मानेगी साली.. आज के लिए तो मेरे को ही मना कर रही है।
विजय- उस अनपढ़ गंवार को मनाना कौन सा मुश्किल है भाई?
रंगीला- चुप रहो यार.. दोनों मेरी बात को मजाक में मत लो.. ये रानी को मैं जानता हूँ.. कुछ तो है साला.. याद नहीं आ रहा.. मगर देख लेना मैं बता दूँगा.. इसको मैं जानता हूँ। अब तुम ही चोदो इसको.. मुझे एक काम है.. अभी मेरा जाना जरूरी है।
जय- ठीक है जाओ.. और याद आ जाए तो मुझे भी बता देना.. कि रानी कौन है.. हा हा हा..
रंगीला के जाने के बाद विजय अपने कमरे में चला गया और जय नौकरों को कुछ खाना बनाने को बोल कर रानी के पास चला गया।
रानी- जय बाबू.. ये आपके दोस्त क्या बोल रहे थे.. इन्होंने मुझे कहाँ देखा है?
जय- अरे तेरी जवानी देख कर उसका मन बहक गया था.. बस ऐसे ही बोल रहा था.. वैसे तू है बड़ी क़यामत.. यार आज पूरी रात मेरे साथ बिता ले.. मैं तेरी लाइफ बना दूँगा..
रानी- नहीं नहीं बाबूजी.. सच्ची आज मेरी ‘वो’ बहुत दर्द कर रही है.. कल कर लेना.. आज नहीं..
जय- अरे ‘वो’ क्या दर्द कर रही है.. साफ-साफ बोल ना.. उसको चूत कहते हैं और मेरे हथियार को लौड़ा बोला कर..
रानी- छी: बाबूजी.. आप बड़े बेशर्म हो.. मुझसे नहीं बोला जाएगा..
जय- अरे मेरी जान.. नाम लेगी तो ज़्यादा मज़ा आएगा.. चल यहाँ मेरे पास बैठ और बता..
जय ने रानी को अपने से चिपका कर बैठा लिया और उसके मम्मों को हल्के से दबा कर उसको पूछा।
जय- तेरे इन चूचों में भी दर्द है क्या.. मेरी जान?
रानी- हाँ बाबूजी.. थोड़ा इनमें भी है.. आह्ह.. दबाओ मत.. दुःखता है।
जय ने ज़ोर से दबाते हुआ कहा- इनका नाम बोल.. नहीं ऐसे ही दबाता रहूँगा और दर्द करता रहूँगा।
रानी- आह्ह.. बाबूजी.. उफ़फ्फ़.. मेरे चूचे मत दबाओ ना.. आहह..
जय- यह हुई ना बात.. अब तू अपने हर अंग का नाम बताएगी.. तभी मुझे सुकून मिलेगा.. ठीक है..
रानी- आह्ह.. बाबूजी.. आप तो ससस्स बेशर्म हो.. मुझे भी ऐसा ही बना दोगे.. आह्ह.. अब आप मानोगे नहीं.. ओह.. मेरे चूचों पर रहम करो.. और आह्ह.. मेरी चूत को सहलाओ.. आह्ह.. आपके मोटे लौड़े ने मेरी चूत को सुजा कर रख दिया है आह..
जय- ओह.. मार डाला रे.. मेरी रानी.. ये हुई ना बात.. अब लगा कि तू मेरी रानी है। चल मुझे दिखा तेरी चूत.. मैं उसको अपनी जीभ से चाट कर आराम दिए देता हूँ।

रानी- अभी नहीं.. रात को दिखाऊँगी.. अभी मुझे जोरों की भूख लगी है.. कुछ खाने के बाद आप देख लेना.. ठीक है..
जय- अरे मेरी जान.. मैं हूँ ना.. मुझे खाले.. इससे ज़्यादा अच्छा खाना तुझे कहाँ मिलेगा.. हा हा हा..
रानी- नहीं बाबूजी.. मुझे माँस खाना पसन्द नहीं.. मैं तो सब्जी ही खाऊँगी.. अब आप जाओ.. रात को आ जाना.. मुझे भी रसोई में जाने दो..
जय मस्ती के मूड में था.. मगर रानी जल्दी से वहाँ से निकल कर रसोई में चली गई और जय कुछ ना कर सका।
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02-06-2019, 05:14 PM,
#15
RE: Nangi Sex Kahani अय्याशी का अंजाम
दोस्तो, उम्मीद है.. आपको कहानी में मज़ा आ रहा है। अब रानी तो गई चलो साजन के पास चलते हैं। वहाँ क्या हो रहा है.. अभी ये भी जान लो।
सुंदर- बॉस अपने तो कमाल कर दिया.. एक बार तो मैं डर ही गया था कि सारा प्लान चौपट हो गया।
आनंद- अरे ऐसे-कैसे चौपट हो जाता.. बॉस पर मुझे पूरा भरोसा था.. मगर एक बात अभी भी समझ के बाहर है बॉस?
साजन- कौन सी बात.. तेरी समझ के बाहर है रे.. चल बता?
आनंद- बॉस हमने तो उसकी बहन को देखा भी नहीं है.. कहीं वो भी हमारी तरह नकली बहन ले आया तो?
साजन- हा हा हा तुम दोनों मुझे क्या समझते हो.. मैंने कच्ची गोली नहीं खेली हैं। तुम दोनों ने क्या मैंने भी अब तक उसकी बहन को नहीं देखा है.. मगर ये खेल का असली विलेन तो उसकी बहन को जानता है ना..
आनंद और सुंदर दोनों एक साथ चौंक उठे और एक ही सुर में बोले- ये असली विलेन कौन है बॉस?
साजन- अरे चौंको मत.. मेरे दोस्तो.. ये काम में उसके लिए ही कर रहा हूँ। अब वो क्या चाहता है.. ये तो पता नहीं मगर गेम कुछ बड़ा है.. इतना मैं समझ गया हूँ।
सुंदर- बॉस हम तो समझ रहे थे.. कि ये आपकी दुश्मनी का खेल है.. मगर ये तो पहेली उलझती ही जा रही है.. एक चूत के लिए इतना पंगा?
साजन- अरे दोस्तो, तुम नहीं समझोगे दुनिया में छोटी सी चूत बड़ी-बड़ी तबाही मचा देती है.. भाई को भाई से लड़वा देती है.. ये चूत सिर्फ़ चूत नहीं.. बल्कि ये चूत एक पहेली होती है.. समझे.. जिसने इसको सुलझा दिया.. वो दुनिया का सबसे अकलमंद आदमी होता है।
आनंद- बॉस जो भी हो.. हमें तो पैसे से मतलब है.. अब देखो ना हम जैसे कंगलों को आपने इतनी बड़ी पार्टी में घुसाया.. गेम खेला और जीत कर चूत के गेम के दावेदार बने। अब तो बस मज़ा ही मज़ा है। आज तक रण्डियों को ही चोदा है.. अब किसी शरीफजादी को चोदने का मौका मिलेगा।
सुंदर- बॉस आपने बताया नहीं कि कोमल को कहाँ छोड़ा आपने?
साजन- इसमें क्या बड़ी बात है.. टैक्सी को दूर खड़ा करके आया था। बस जय को उसकी क़ातिल जवानी दिखा कर वापस टैक्सी में छोड़ आया और खुद गाड़ी को इधर-उधर घुमा कर समय पास किया और वापस आ गया समझे..
सुंदर- आपका दिमाग़ बहुत चलता है.. इसलिए आप हमारे बॉस हो.. अब आगे क्या करना है?
साजन कुछ बोलता उसके पहले उसका फ़ोन बजने लगा।
साजन- हैलो भाई कैसे याद किया.. काम हो गया.. मैंने उसको बातों में फँसा लिया। अब उसकी बहन गेम में आएगी और हम उसको नंगा कर देंगे। आप बस नजारा देखो अब..
भाई- ओह्ह.. रियली.. ये हुई ना बात.. अब आगे क्या करना है.. पता है ना?
साजन- नहीं भाई.. आपने कहा था.. पहले जय और विजय को जाल में फँसाओ.. उसके बाद आगे का प्लान बताऊँगा।
भाई- हाँ याद है.. तू पहले ये बता वहाँ क्या हुआ था?
साजन ने सारी बात भाई को बताई.. जिसे सुनकर वो खुश हो गया।
भाई- अब सुन तेरे फ़ोन में मैसेज भेज रहा हूँ.. ये एक जगह का पता है.. तू कल वहाँ चला जा..
काफ़ी देर तक भाई बोलता रहा और साजन बस चुपचाप सुनता रहा।
साजन- वाह भाई मान गया.. आप तो मेरे दिमाग़ को पढ़ लेते हो.. मुझे भी यही शक था कि साला कोई नकली बहन ना ले आए.. अब देखता हूँ साला कैसे बचाता है.. अपनी बहन को.. मैं ठीक समय पर वहाँ पहुँच जाऊँगा।
आज के दिन से कुछ दिन पहले की बात है.. जब इस साजिश का जन्म हुआ था।
साजन एक ऐय्याश किस्म का लड़का है.. बड़े घर के लड़कों के साथ इसकी दोस्ती है.. तो शराब-कबाब सब इसको आराम से मिल जाता है.. क्लब में जाना.. वहाँ गेम खेलना.. सब काम में आगे है और वहीं विजय और जय से इसकी दोस्ती हो गई। रंगीला भी इनका साथी है और भी कुछ लड़के हैं ये सब दोस्त हैं।
मगर साजन और जय की ज़्यादा नहीं बनती.. हर बार किसी ना किसी बात पर लड़ते ही रहते हैं। अब जय और विजय का दुश्मन.. जिसे भाई के नाम से आप जानते हो.. उसने मौके का फायदा उठा कर साजन को फ़ोन किया। उसको पैसों का लालच देकर इन दोनों भाइयों के खिलाफ खड़ा कर लिया.. बाकी सुंदर और आनंद के बारे में तो आप जानते ही हो। ये दोनों आवारा लड़के हैं और छोटी-मोटी चोरियां भी करते हैं और साजन के चमचे हैं। तो बस साजन ने इनका सहारा ले लिया। आगे जो चल रहा है.. आप सबको पता ही है.. तो चलो अब उलझन दूर हुई ना.. अब आप लोग आगे की कहानी पर ध्यान दीजिएगा।
फ़ोन रखने के बाद साजन ने उन दोनों को मुस्कुरा कर देखा.. उनके चेहरे भी चमक गए।
आनंद- क्या हुआ.. भाई ने क्या कहा?
साजन- अरे ये देख.. कल इस जगह हमें जाना है.. वो चिड़िया कल यहीं मिलेगी और वो दोनों हरामी भी वहीं अपनी बहन के साथ होंगे.. तब हम आराम से उसको पहचान लेंगे।
आनंद- मगर बॉस वो वहाँ आएँगे कैसे.. वो दोनों तो फार्म पर हैं ना.. और उनको वहाँ भेजेगा कौन?
साजन- अरे कुत्तों.. ये भाई ऐसी-वैसी चीज नहीं है.. वो कल के लिए कोई ना कोई जुगाड़ लगा ही लेगा..
सुंदर- वाह.. बॉस ये भाई तो बड़ा माइंडेड है.. कैसे सब प्लान बना लेता है..? अब उसकी बहन नहीं बचने वाली है.. बस कल सब काम ठीक से हो जाए।
साजन- अरे सब ठीक ही होगा.. चलो अब कुछ खाने का बंदोबस्त करो.. बहुत जोरों की भूख लगी है।
लो यहाँ तो खाना शुरू हो गया.. अब यहाँ रहकर क्या फायदा.. तो आगे ही चलते हैं.. शायद कुछ मिल जाए।
उधर विजय अपने कमरे में बैठा हुआ था तभी जय वहाँ आ गया।
विजय- आओ भाई.. कहाँ रह गए थे.. अब क्या सोचा आपने.. हम तो एक हफ्ते के लिए यहाँ आए थे.. मगर आपके गेम के चक्कर में अपन को कल ही जाना पड़ेगा।
जय- अरे अब करें भी तो क्या करें.. बात ज़ुबान की आ गई है.. कल जाकर किसी लड़की को तलाश करते हैं जिसे साजन ना जानता हो।
विजय- हाँ ये बात तो है.. रंगीला को पूछें शायद वो कुछ जुगाड़ जमा दे।
जय- हाँ ये सही रहेगा.. उसका दिमाग़ हमसे ज़्यादा चलता है.. वो कोई ना कोई जुगाड़ लगा ही देगा।
विजय ने रंगीला को फ़ोन लगाया और ये बात बताई।
रंगीला- ऐसी लड़की जिसको साजन ना जानता हो.. बहुत हैं मगर वो ऐसा गेम खेलने के लिए राज़ी होगी.. ये थोड़ा मुश्किल है यार..
विजय- अरे यार लड़की को मनाना हमारा काम है.. तुम बस किसी लड़की का जुगाड़ करो।
रंगीला- ठीक है.. करता हूँ.. तुम आओ तो सही.. यहाँ आकर बात करेंगे मगर एक बात का ख्याल रहे.. साजन बहुत हरामी है.. उसको ज़रा भी भनक ना लगने पाए.. इसलिए तुम दोनों अपनी बहन को अपने साथ कहीं मत ले जाना। अगर साजन या उसके किसी चमचे ने गुड्डी को देख लिया तो सब प्लान चौपट हो जाएगा।
विजय- अरे इसकी फिकर मत करो.. वैसे भी गुड्डी को बहुत कम लोग जानते हैं। वो कहीं आती-जाती तो है नहीं.. बस अपनी पढ़ाई से मतलब रखती है।
रंगीला- तब ठीक है.. अब उस साजन का काम तमाम हो गया समझो.. तुम दोनों आ जाओ.. लड़की हम ढूंढ लेंगे.. मगर फिर भी सावधानी के लिए मुझे साजन पर नज़र रखनी होगी।
विजय- हाँ ये ठीक रहेगा.. तुम उस पर नज़र रखो.. हम कल आ रहे हैं बाकी बातें वहीं आकर करेंगे।
जय- गुड्डी को साजन ने कभी नहीं देखा और ना कभी देख पाएगा क्योंकि पापा कितने सख़्त मिज़ाज हैं गुड्डी को लेकर उस बेचारी को किसी फ्रेण्ड तक के साथ अकेली बाहर जाने की इजाज़त नहीं है। हमारे पड़ोसी तक गुड्डी को नहीं पहचानते.. तो वो कुत्ता क्या खाक जान पाएगा।
विजय- अरे यार वो सख़्त इसलिए हैं कि गुड्डी को बहुत प्यार करते हैं। याद है एक बार गुड्डी के पैर में हल्की सी मोच आ गई थी। कैसे पूरे घर में हंगामा मचा दिया था।
जय- हाँ सब याद है.. चल यार भूख लगी है.. खाना खा ही लेते हैं। उसके बाद दोनों मिलकर रानी का गेम बजाएँगे।
विजय- अरे खाना ऐसे ही खाओगे क्या.. पहले कुछ पीना हो जाए?
जय- सुबह से पी ही रहे हैं चल आ जा.. अब खाना ही खाएँगे.. बड़ी भूख लगी है।
दोस्तों इनको खाने दो.. हम थोड़ा घूम कर आते हैं।
हॉस्टल में रात को सभी लड़कियाँ खाना खाने के बाद अपने कमरों में बैठी बातें कर रही थीं।
काजल- अरे यार तू दिखने में तो बड़ी स्टाइलिश है.. मगर सेक्स से इतनी दूर क्यों रहती है?
रश्मि- अरे में कोई गाँव की थोड़ी हूँ.. जो स्टायल में नहीं रहूँगी.. बस ये सेक्स मुझे पसन्द नहीं..
काजल- अरे आजकल तो ये फैशन बन गया है.. लड़की जब तक एक आध ब्वॉय-फ्रेण्ड ना बनाए.. उसको शक की निगाह से देखा जाता है कि कहीं ये लेसबो तो नहीं.. मगर तू तो वो भी नहीं है..
रश्मि- अरे ये सब बकवास बात है.. लड़के बस मज़े लेकर लड़की को छोड़ देते हैं उनको तो बस तड़पाओ.. मगर घास ना डालो..
काजल- अरे तू तो हर बात को उल्टा ही बोलेगी.. कभी किसी को देखा है सेक्स करते हुए.. कितना मज़ा आता है उसमें.. तू क्या जाने?
रश्मि- बस बस.. तू क्या समझती है.. मुझे कुछ पता नहीं.. अरे मैं इन सब से दूर रहती हूँ… तो क्या हुआ.. जानकारी सब है मुझे..
काजल- हा हा हा.. आजकल नेट के जमाने में जानकारी तो बच्चे को भी हो जाती है.. तूने कौन सा तीर मार लिया।
रश्मि- अरे तूने जब सोचा भी नहीं होगा.. तब मैंने लाइव सेक्स देख लिया था और तब से मुझे सेक्स से नफ़रत हो गई।
रश्मि जोश में बोल तो गई.. मगर जब उसको ख्याल आया कि वो यह क्या बोल गई.. तब उसके चेहरे पर परेशानी के भाव आ गए और वो चुप हो गई।
काजल- ओये होये.. मेरी भोली रश्मि.. तूने कब और क्या देख लिया.. बता ना यार.. इतने साल पहले किसे देखा.. बता ना यार.. मुझे जानना है..
रश्मि- नहीं किसी को नहीं देखा.. बस ऐसे ही मुँह से निकल गया.. सच्ची..
काजल- बस यार ये नाटक मत कर.. मुझे पता है तूने अपने मॉम-डैड को ही देखा होगा.. इतने साल पहले.. तो वही देख सकती है। मैंने भी बहुत देखा है अपनी मॉम को डैड से चुदवाते हुए.. उनकी फिल्म देख कर ही तो मैं सब सीखी हूँ।
रश्मि- चल हट.. कुछ भी बकवास करती है.. मैंने ऐसा कुछ नहीं देखा। अब दूसरी बात कर..
काजल- अरे यार.. अब बता भी दे.. इसमें शरमाना कैसा और तुझे सेक्स से नफ़रत क्यों हो गई.. बता ना यार?
रश्मि- ठीक है बताती हूँ.. मगर किसी को कहना मत तू.. प्लीज़ यह मेरे घर की बात है।
काजल- अरे पागल है क्या.. मैं किसी को कुछ नहीं बताऊँगी.. चल अब बता..
रश्मि- ये बहुत साल पहले की बात है जब मैं छोटी थी.. तो एक रात मेरे सर में बड़ा दर्द हो रहा था। मैं अपने कमरे से निकल कर मॉम के कमरे के पास गई.. गेट को नॉक करने ही वाली थी कि दूसरे कमरे से कुछ आवाजें सुनाई दीं। वो कमरा मेरी आंटी का था.. मैं धीरे से उस कमरे के पास गई और खिड़की से झाँक कर अन्दर देखा तो मेरे होश उड़ गए।
काजल- ऐसा क्या देखा तूने आंटी के कमरे में.. बता ना यार?
रश्मि- मेरी आंटी एकदम नंगी लेटी हुई थीं और मेरे पापा उनके मम्मों को चूस रहे थे, उनके नीचे हाथ से रगड़ रहे थे।
काजल- ओह वाउ.. तेरे पापा अगर आंटी के साथ थे तो तेरी मॉम अकेली क्या कर रही थीं।

रश्मि- मॉम अपने कमरे में सोई हुई थीं। उनको ऐसी हालत में देख कर मुझे कुछ समझ नहीं आया। उस समय सेक्स का पता भी नहीं था.. मैं डर गई और जल्दी से मॉम के कमरे की तरफ़ भागी और नॉक किया।
काजल- अरे तेरी की.. कर दी ना गड़बड़.. पहले चुदाई का खेल तो देखती.. उसके बाद क्या हुआ.. तेरी मॉम उठ गई होगी और झगड़ा शुरू हो गया होगा?
रश्मि- नहीं ऐसा कुछ नहीं हुआ.. तू आगे तो सुन.. नॉक के साथ ही दरवाजा अपने आप खुल गया। मैं धीरे से अन्दर गई तो मॉम बैठी रो रही थीं मुझे देख कर अपने आँसू पोंछे।
मॉम- अरे बेटा क्या हो गया.. इतनी रात को तू यहाँ क्यों आई है?
रश्मि- मॉम मेरे सर में बहुत दर्द हो रहा है.. इसलिए आई हूँ।
मॉम- अरे आ.. मैं दवा दे देती हूँ.. सब ठीक हो जाएगा।
मैं मॉम के पास जाकर बैठ गई.. वो बड़े प्यार से मेरा सर दबाने लगी।
रश्मि- मॉम सब ठीक तो है ना..
मॉम- हाँ बेटा सब ठीक है.. क्या हुआ.. तूने यह सवाल क्यों पूछा?
रश्मि- सब ठीक है तो आप रो क्यों रही थीं?
मॉम- नहीं बेटा.. मैं कहाँ रो रही हूँ.. वो वो बस ऐसे ही आँख में कुछ चला गया था।
मॉम ने बहुत कोशिश की.. मुझे टालने की.. मगर उनकी आँखों से 2 बूँद आँसू और आ गए।
रश्मि- नहीं मॉम.. कुछ तो बात है.. देखो आपकी आँख फिर से भर आईं और पापा कहाँ हैं?
मॉम- मैंने कहा ना.. कुछ नहीं हुआ और तेरे पापा को कुछ काम था.. वो बाहर गए हैं।
रश्मि- मॉम आप झूठ बोल रही हो.. मैंने पास के कमरे में सब देखा है.. पापा और आंटी..
मैं आगे कुछ बोलती.. मॉम ने मुझे एक चांटा मार दिया और मुझे सीने से चिपका कर रोने लगीं।
मॉम- आई एम सॉरी बेटा.. प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो.. मैंने तुम्हें मारा.. तेरे पापा को ये बात मत कहना.. वो नाराज़ होकर कहीं चले जाएँगे.. बेटा मेरी तो लाइफ बर्बाद हो गई। अब अगर तेरे पापा चले गए तो हम सब की जिंदगी बर्बाद हो जाएगी। तू अभी बच्ची है.. भूल जा सब.. किसी को कुछ मत कहना।
रश्मि- लेकिन मॉम ये सब क्या है.. वो इतने गंदे काम कर रहे हैं.. आप कुछ बोलती क्यों नहीं?
मॉम- चुप रह तू.. मैंने कहा ना.. तेरी आंटी का घर में आना मेरी जिंदगी में तूफान से कम नहीं.. तेरे पापा अब बदल गए हैं। बस अब तू ये बात किसी को मत बताना.. ले दवा ले.. चुपचाप अपने कमरे में चली जा..
मॉम ने मुझे दवा देकर वहाँ से भेज दिया। जब तक मैं अपने कमरे में नहीं चली गई.. वो दरवाजे पर खड़ी मुझे देखती रहीं।
बस उस दिन से मुझे मेरी आंटी से नफ़रत हो गई। मेरे पापा बहुत अच्छे थे.. मगर उनके आने के बाद वो काफ़ी बदल से गए, अक्सर मेरी मॉम को मैंने रोते देखा है।
मुझे पता लग गया कि ये सब सेक्स के कारण हुआ और बस मुझे सेक्स से नफ़रत हो गई।
काजल- अरे यार तेरी मॉम के साथ तो बुरा हुआ.. वैसे तू गलत है यार तेरे पापा के कांड के कारण तू सेक्स से क्यों नफ़रत करती है। तुझे उनसे नफ़रत करनी चाहिए थी। अपनी लाइफ क्यों बर्बाद कर रही हो?
रश्मि- नो वे.. मेरे पापा मुझे अभी भी उतना ही प्यार करते हैं। ये सब तो मेरी आंटी का किया-धरा है.. मैंने बहुत बार उनको जलील भी किया.. मगर वो पक्की रंडी हैं उनके कानों पर जूँ तक नहीं रेंगती.. बस इसी सब के चलते मुझे हॉस्टल में आना पड़ा.. घर में घुटन सी होने लगी थी मुझे, मैंने पापा को राज़ी किया कि मुझे पढ़ाई में दिक्कत है.. हॉस्टल में रह कर ठीक से पढ़ाई कर सकूँगी।
काजल- तेरे पापा को पता है कि तू उनके राज़ जान गई है?
रश्मि- ये मैं नहीं जानती.. शायद उस रंडी ने उनको बताया होगा.. मगर मैंने कभी पापा को यह बात नहीं कही और ना ही कभी उनको मेरे आगे शरमिंदा होना पड़ा.. वो मेरी हर बात मानते हैं। मुझे बहुत प्यार करते हैं। मैं चाहती तो उनको उस रंडी से दूर कर सकती थी.. अपनी कसम देकर मगर मैं अपने पापा को अपनी नज़रों में गिरने नहीं दे सकती.. इसलिए मैंने कुछ नहीं कहा।
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02-06-2019, 05:14 PM,
#16
RE: Nangi Sex Kahani अय्याशी का अंजाम
काजल- वाह यार.. तू भी कमाल की है.. आंटी को रंडी और पापा को कुछ नहीं.. ये भेदभाव क्यों?
रश्मि- मेरे पापा शुरू से अच्छे थे और अब भी अच्छे हैं.. उस रंडी ने उनको बहका दिया.. उसमें पापा का क्या कसूर? मेरी माँ ओल्ड टाइप की हैं.. और वो रंडी मॉर्डन.. बला की खूबसूरत.. जिसे देख कर वो क्या.. कोई भी बहक जाए.. खास कर जब कि वो अपने हुस्न के जलवे दिखाए.. समझी?
काजल- अच्छा तो ये बात है.. तेरी आंटी जलवा दिखाती हैं.. मगर ये तो बता तेरे अंकल कहाँ हैं? वो कैसे कुछ नहीं कहते?
रश्मि- यार अब बस भी कर.. क्या बकवास टॉपिक लेकर बैठ गई? तू अपनी सुना ना.. कैसे तूने पहली बार सेक्स किया था और किसके साथ किया था?
काजल- अरे ये टॉपिक तो तेरे टॉपिक से भी ज़्यादा बकवास है.. तू सुन नहीं पाएगी और वैसे भी तेरी नज़र में मेरी इज्जत कम है.. वो बात सुनकर तो तू मेरे को थर्ड क्लास रंडी का दर्जा दे देगी।
रश्मि- अरे नहीं नहीं.. ऐसा कुछ नहीं है.. मैं क्यों तुझे गलत समझूँगी.. यार तेरी लाइफ है.. तू जैसे चाहे जिए.. चल बता..
अब काजल आराम से सीधे होकर बैठ गई और वो बोली- अब पूरी बात सुनने के बाद ही कुछ बोलना समझी..
रश्मि ने कुछ सोचा और खड़ी हो गई।
काजल- अरे क्या हुआ.. तेरे को मेरी बात नहीं सुनना क्या?
रश्मि- अरे नहीं नहीं.. सुन रही हूँ ना.. लेकिन तू शुरू करे उसके पहले मैं बाथरूम जाकर आती हूँ.. ताकि बाद में तेरी बात काटकर ना जाऊँ.. बड़े जोरों की लगी है यार..
काजल- अरे अभी असली मज़ा शुरू भी नहीं हुआ और तेरी चूत रिस गई क्या.. हा हा हा हा.. जा जल्दी आना..
रश्मि- तू बहुत बेशर्म है.. अब बाथरूम जाने में भी गंदी बात बोल दी.. तू नहीं जाती क्या..
काजल- अच्छा बाबा सॉरी.. अब जा जल्दी आ जाना ओके..
रश्मि के जाने के बाद काजल वहीं बैठ कर पुराने लम्हों को याद करके मुस्कुराने लगी।
दोस्तो, अब रश्मि जब तक नहीं आ जाती.. यहाँ हम क्या करेंगे.. चलो हमारे दोनों हीरो को देख लेते हैं।
जय और विजय खाने के बाद अपने कमरे में बैठे थे.. तभी वहाँ रानी आ गई.. जिसे देख कर दोनों के होश उड़ गए क्योंकि रानी ने अपने जिस्म पर सिर्फ़ एक तौलिया लपेटा हुआ था।
जय- अरे रानी.. ये क्या.. ऐसे अधनंगी क्यों घूम रही हो.. क्या इरादा है तुम्हारा.. क्यों हमारा ईमान खराब कर रही हो तुम?
रानी- बाबूजी.. आप बुरा ना मानना.. मगर आप जैसे बेईमान का ईमान कहाँ होता है.. मुझे काम के बहाने यहाँ लाए और यहाँ मुझसे दूसरा ही काम करवा रहे हो।
विजय- हा हा हा मेरी जान.. ऐसे तो ना कहो.. हमने काम ही कहा था और मालिश की बात की थी.. उसके अलावा क्या बेईमानी की.. बता तू?
रानी- अब रहने दो.. आप लोगों ने तो इतना बड़ा बम्बू मेरी छोटी से जगह में घुसा दिया.. ये कौन सा काम हुआ?
जय- अरे अभी भी तेरी शर्म नहीं निकाली क्या.. जगह नहीं चूत बोल चूत.. हा हा.. और ये तो बता ऐसे क्यों आई है?
रानी- अब कपड़े पहने का फायदा ही क्या.. कुछ देर बाद तो आप निकाल ही दोगे.. मैंने सोचा ऐसे ही आपके पास चली आती हूँ.. और एक बात भी पूछनी है।
विजय- आ जाओ मेरी जान.. यहाँ आओ.. सही कहा.. जब नंगी होना ही है तो कपड़े पहने का फायदा क्या.. बोल क्या बात पूछनी थी तेरे को?
रानी- वो आप कल चले जाओगे तो मैं यहाँ अकेली क्या करूँगी.. आप मुझे अपने साथ शहर ले चलो ना..
जय- अरे रानी रानी.. तुझसे अब दूर कहाँ रहा जाएगा.. बस कुछ दिन की बात है.. हम वापस आ रहे हैं ना.. और तू यहाँ मत रहना तुझे वापस गाँव छोड़ देंगे.. जब दोबारा आएँगे तू साथ आ जाना समझी..
रानी ने ‘हाँ’ में सर हिलाया और खुश हो गई। अब वो दोनों के बीच में बैठी हुई थी और शर्मा रही थी।
जय धीरे-धीरे उसके गालों को सहला रहा था और विजय उसकी जाँघों को दबा रहा था। रानी ने आँखें बन्द कर ली थीं.. और आने वाले पलों के बारे में सोच कर मज़ा ले रही थी।
जय- उफ़फ्फ़ रानी.. तेरे ये पतले होंठ मुझे पागल बना रहे हैं कल क्या मज़ा दिया था तूने.. अपने इन मुलायम होंठों से मेरे लंड को.. आह्ह..
विजय- हाँ.. रानी तू लौड़ा बहुत अच्छा चूसती है.. चल आज तुझे घोड़ी बना कर चोदूँगा में.. और तू भाई का लौड़ा चूस के मज़ा ले.. चल आ जा..
रानी- नहीं बाबूजी.. मैंने कहा था ना.. दोनों एक साथ मत करना.. मुझे बहुत दुःखता है।
विजय- अरे यार दोबारा वही बाबूजी.. बड़ा अजीब लगता है.. नाम लो यार तुम.. उसमें ज़्यादा मज़ा आएगा।
जय- अरे रानी.. दो का मज़ा ही कुछ और होता है.. आज तेरे को डबल का असली मज़ा देंगे.. तू बस देख और विजय ठीक कहता है.. नाम ले हमारा..
रानी- अच्छा जय जी.. आप जैसा कहो.. ठीक है.. अब मैं मना नहीं करूँगी.. जैसे चाहे चोद लो मुझे.. बस खुश.. अब शुरू हो जाओ..
विजय- ये हुई ना बात मेरी जान.. अब आएगा असली मज़ा..
रानी- विजय जी.. एक बात कहूँ.. मुझे आज पूरा मज़ा दे दो.. ताकि कल जब आप लोग चले जाओ.. तो मैं बस आपको याद करके दिन बिताऊँ..
विजय- हा हा हा हा.. देखा भाई.. यह है लंड का चस्का.. साली एक दिन में ही हमारी गुलाम हो गई।
जय- हाँ.. अब ऐसे मस्त लौड़े इसे कहाँ मिलेंगे.. चल मेरी जान.. पहले हम दोनों के लौड़े को चूस कर चिकना कर.. उसके बाद तेरी चुदाई करेंगे..
इतना कहकर दोनों ने अपने कपड़े निकाल दिए और बिस्तर पर सीधे लेट गए, रानी ने भी अपना तौलिया उतार दिया, अब वो भी नंगी थी और दोनों के पैरों के बीच बैठ कर दोनों हाथों से एक साथ दोनों के लौड़े सहला रही थी।
जय- आह्ह.. तेरे हाथ भी कमाल के हैं लंड को छूते ही इसमें करंट पैदा हो जाता है.. देख ये कैसे अकड़ने लग गया है..
रानी- जय जी.. आप भी बहुत उतावले हो.. विजय जी को देखो कैसे आँखें बन्द किए हुए मज़ा ले रहे हैं अब बस आप चुप रहो.. मुझे प्यार से सब करने दो..
उसके बाद कोई कुछ ना बोला और रानी बारी-बारी दोनों के लंड चूसने लगी.. जो अब पूरे विकराल रूप में आ गए थे।
रानी एक्सपर्ट तो नहीं थी मगर अपनी पूरी कोशिश कर रही थी कि किसी तरह दोनों को पूरा मज़ा दे सके।
जय- उफ्फ.. जालिम ऐसे ना चूस.. नहीं लौड़ा चूत में जाने से पहले ही ठंडा हो जाएगा..
विजय- आह्ह.. मज़ा आ रहा है भाई.. इसके 2 होल तो खोल दिए हमने.. आज तीसरा भी खोल ही देते हैं।
उन दोनों की बात सुनकर रानी ने लौड़ा मुँह से निकाला और सवालिया निगाहों से उनको देखने लगी।
जय- अरे क्या हुआ.. चूस ना मेरी रानी रुक क्यों गई..
विजय- लगता है थक गई भाई.. या इसकी चूत बहुत गीली हो गई है शायद..
रानी- आप दोनों ना बस गंदी बातें करना जानते हो.. ये होल का क्या मतलब है.. ये तो बताओ?
विजय- अरे होल नहीं जानती.. हा हा हा अरे जानेमन.. हम तेरे छेद की बात कर रहे हैं देख एक तेरा मुँह भी एक छेद है.. जिसका मज़ा हमने ले लिया.. दूसरा छेद है.. तेरी फड़कती चूत.. जिसको हमने खोल दिया। अब आख़िर का छेद बचा तेरी गाण्ड का.. आज उसको भी खोल कर तुझे पूरी तरह औरत बना देंगे हा हा हा हा..
रानी- नहीं नहीं बाबूजी.. भगवान के लिए आज ऐसा कुछ ना करना.. वरना कल माँ के सामने नहीं चल पाऊँगी.. मेरी फुद्दी में ही अभी बहुत दर्द है.. इसका दर्द तो ख़त्म होने दो.. अगली बार आऊँगी तो जो चाहे कर लेना.. मगर आज नहीं..
जय- अरे डरती क्यों है.. कुछ नहीं होगा.. तू हमें जानती नहीं है.. चोदने के पक्के खिलाड़ी है हम..
रानी- नहीं जय जी.. बस मेरी ये बात मान लो.. आपको भगवान की कसम है.. अगर मेरी बात ना मानी तो..
विजय- अरे डर मत.. जा आज नहीं करेंगे.. मगर जल्दी ही तेरी मुलायम गाण्ड का मुहूरत मैं ही करूँगा.. ठीक है..
जय- अरे तू क्यों.. मैं करूँगा.. इतनी प्यारी गाण्ड को तो मैं ही खोलूँगा..
विजय- नहीं भाई अपने चूत को खोला है ना.. अब गाण्ड की बारी मेरी है.. समझे आप..
रानी- हा हा हा दोनों लड़ाई मत करो.. सिक्का उछाल कर तय कर लेना कि कौन पहले करेगा..
विजय- अगर ऐसी ही बात है तो सिक्का क्यों.. हम ताश का गेम खेल कर तय करे लेंगे.. क्यों भाई क्या कहते हो.?
जय- अरे हार जाएगा.. तू जानता है ना.. किस्मत हमेशा मेरे साथ होती है तीन इक्के लाऊँगा हा हा हा..
विजय- वो तो समय आने पर पता लगेगा भाई.. कि कौन जीतेगा.. अभी क्यों मूड खराब करना.. इतनी प्यारी कन्या चूत फैलाए पड़ी है.. इसका तो इन्तजाम कर दे पहले..
जय को विजय की बात समझ आ गई उसने रानी को बिस्तर पर लिटा दिया और उसके निप्पल चूसने लगा।
इधर विजय ने उसकी चूत को अपना निशाना बनाया और चाटने लगा..
रानी- आह्ह.. नहीं उफ्फ.. विजय जी आह्ह.. दुःखता है.. आह्ह.. ऐसे ना करो ना.. आ…
विजय चूत के दाने को जीभ से हिला रहा था.. कभी पूरी चूत को होंठों में दबा कर ज़ोर से चूसने लगता.. जिससे रानी की सिसकी निकल जाती.. ऊपर से जय उसके निप्पल को दाँतों से दबा कर मज़ा दे रहा था।
उन दोनों के लौड़े उफान खाने लगे थे.. अब वासना का तूफान अपने चरम पर पहुँच गया था।
विजय- उफ्फ.. नारियल पानी से भी ज़्यादा टेस्टी रस है तेरी चूत का.. चल जानेमन अब तेरी चूत को ठंडा करता हूँ.. जल्दी से बन जा घोड़ी.. देर मत कर..
जय बिस्तर से टेक लगा कर बैठ गया और रानी जय के पैरों की तरफ़ मुँह करके घोड़ी बन गई।
अब जय का खड़ा लंड उसके मुँह के पास था, उधर पीछे विजय लौड़े को चूत पर टिका कर शॉट लगाने की तैयारी में था।
जय- अरे रानी रानी.. तू तो बहुत ज़बरदस्त घोड़ी बनी है रे.. चल.. सोच क्या रही है.. चारा तेरे सामने है.. तो खा ना.. हा हा हा..
रानी मुस्कुरा कर लौड़े को मुँह में लेके चूसने लगी और विजय ने सुपारा चूत में घुसा कर धक्का मारा.. तो दर्द के मारे रानी आगे को सरक गई। मगर विजय ने उसकी कमर को मजबूती से पकड़ कर ज़ोर का धक्का मारा.. पूरा लौड़ा चूत में समा गया और रानी दर्द से कराह उठी। मगर जय का लौड़ा मुँह में था तो बस बेचारी कसमसा कर रह गई..
विजय- आह्ह.. रानी.. तेरी चूत तो मक्खन जैसी है.. मज़ा आ गया रानी.. अब घोड़ी ठीक से बनी रहना.. मैं रफ़्तार बढ़ा रहा हूँ.. तेरी सवारी का मज़ा आराम से लेने में मज़ा नहीं आएगा.. जितनी स्पीड तेज होगी.. उतना ज़्यादा लुत्फ़ मिलेगा मेरी जान..।
विजय अब चूत में लौड़े की ठोकमठोक करने लगा था.. उधर बेचारी रानी आगे जय के लौड़े से और पीछे विजय के लौड़े से चुद रही थी। फ़र्क ये था जय आराम से बैठा था और रानी मुँह आगे-पीछे करके उसके लौड़े को चूस रही थी और विजय अपनी कमर को स्पीड से हिला रहा था।
जय- आह्ह.. चूस जान उफ्फ.. तेरा मुँह भी चूत जैसा मज़ा दे रहा है आह्ह..
विजय 10 मिनट तक स्पीड से चुदाई करता रहा। इधर जय भी लौड़े की चुसाई से बेहाल हो गया था। अब दोनों ने पोज़ चेंज किया। विजय सामने बैठा और जय चूत को पेलने लगा।
विजय- आह तेरी चूत में जो मज़ा है.. आ अब मुँह से वैसा ही मज़ा दे.. होंठ भींच कर चूस मेरी जान…
जय स्पीड से लौड़े को आगे-पीछे करने लगा.. वो झड़ने वाला था। इधर विजय का भी हाल बुरा था.. वो रानी के मुँह को ज़ोर से चोदने लगा.. कमर को झटके देने लगा। तभी उसके लौड़े ने रानी के मुँह में माल गिरा दिया.. इधर जय भी चूत में लावा भरने लगा।
इस दौरान रानी 2 बार झड़ चुकी थी उसकी कमर दुखने लगी थी। उसकी चूत का तो हाल पूछो मत.. पहले ही सूजी हुई थी.. अब तो और सूज गई, वो बेहाल सी होकर एक तरफ़ लेट गई..
दोस्तो, रानी ने तो दो का मज़ा एक साथ ले लिया.. अब यहाँ रुकने का फायदा नहीं.. इनको थोड़ा आराम करने दो.. वहाँ रश्मि वापस आ गई होगी.. तो वहाँ चलते हैं।
रश्मि आकर काजल के पास बैठ गई और कहा- अब सुना तेरी कहानी..
काजल- ठीक है सुन.. अब से 3 साल पहले की बात है.. जब मैं 18 साल की थी.. घर में मॉम-डैड के अलावा मेरा बड़ा भाई पुरषोत्तम उर्फ रेशू और छोटा भाई राजू भी है। रेशू उस समय 22 का था और कॉलेज में लास्ट इयर की पढ़ाई कर रहा था और राजू कम उम्र का था।
रश्मि- छी: पुरषोत्तम.. इतना पुराना नाम है तेरे भाई का?
काजल- ओए.. मेरे भाई के बारे में कुछ मत बोलो.. आई लव माय ब्रदर और यह मेरे दादा का नाम था.. सो डैड ने भाई को ये नाम दिया.. मगर सब उसे रेशू ही कहते हैं समझी..!
रश्मि- अच्छा अच्छा आगे बता क्या हुआ कैसे तू सेक्स की
काजल- हाँ.. सुन ना यार.. मेरा भाई मुझे बहुत प्यार करता था। वो बहुत स्मार्ट ब्वॉय है.. और मेरा फिगर भी उस समय 28-24-30 का था। एरिया के सब लड़के मुझे देख कर कमेन्ट करते थे कि इसके अमरूद छोटे हैं कौन खुशनसीब होगा जो इन्हें सेब बनाएगा.. मगर मैं समझ नहीं पाती थी। तू तो शायद अभी इतनी नादान नहीं है.. मगर मैं बहुत भोली थी।
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02-06-2019, 05:14 PM,
#17
RE: Nangi Sex Kahani अय्याशी का अंजाम
रश्मि- सच्ची तू इतना नहीं समझती थी.. ये तो सोचने वाली बात है और 3 साल पहले तेरे मम्मे इतने छोटे थे और अब इतने बढ़ गए.. ये कमाल कैसे?
काजल- अरे कहानी सुनेगी तो सब समझ जाएगी कि ये अमरूद को खरबूज कैसे बनाया जाता है हा हा हा..
कैसे?
‘आगे सुन, मैं बस अपनी पढ़ाई से मतलब रखती थी और यह सेक्स क्या होता है.. मुझे पता नहीं था.. हाँ.. बस इतना पता था कि लड़का और लड़की के बीच कुछ तो खास होता ही होगा। एक बार मॉम-डैड किसी शादी में दूसरे शहर गए.. मेरी स्कूल और भाई का कॉलेज था तो हम रुक गए मगर राजू ज़िद करके उनके साथ चला गया। सुबह से शाम तक सब नॉर्मल रहा.. मगर जब रात हुई.. तो मुझे डर लगने लगा और मैं भाई के कमरे में गई तब वो अपने लैपटॉप पर मूवी देख रहे थे।
मुझे देख कर वो मुस्कुराने लगे और इशारे से मुझे अपने पास बुलाया।
वे बोले- क्या हुआ?
काजल- भाई मुझे डर लग रहा है इसलिए यहाँ आई हूँ।
रेशू- हाँ.. जानता हूँ तेरी शक्ल देख कर पता लग गया मुझे..
उस समय भाई ने बस बरमूडा पहना हुआ था.. वो रात को टी-शर्ट नहीं पहनते थे.. और मैंने भी एक पिंक टी-शर्ट और शॉर्ट बरमूडा पहना हुआ था.. जो मैं रात को अक्सर सोने के समय पहनती हूँ।
काजल- भाई आज मैं आपके कमरे में सो जाऊँ क्या.. मुझे अकेले डर लग रहा है।
रेशू- क्यों.. आज क्या हुआ.. रोज अकेली सोती है ना तू?
काजल- अकेली कहाँ भाई.. राजू भी तो साथ सोता है मेरे..
रेशू- अरे वो बच्चा है.. उसे डर ना लगे इसलिए तेरे साथ सोता है.. पर तुझे किस बात का डर?
काजल- भाई प्लीज़.. मॉम-डैड भी नहीं है मुझे यहाँ सोने दो ना..
रेशू- अच्छा अच्छा ठीक है.. मगर मुझे मूवी देखनी है और तुझे सोना है.. ये दोनों काम एक साथ कैसे हो सकते है?
काजल- भाई मुझे अभी नहीं सोना पहले हम दोनों मूवी देखेंगे.. उसके बाद सो जाएँगे ओके..
रेशू- हाँ.. ये ठीक है.. चल आजा मेरे पास लेट जा.. ऐसे देखने में ज़्यादा मज़ा आता है।
भाई ने लैपटॉप टेबल पर रख दिया और हम दोनों सीधे पैर करके बिस्तर से टेक लगा कर बैठ गए।
रश्मि- वाउ यार.. रात को मूवी देखने का मज़ा ही अलग आता है.. मगर यार तू सेक्स की बात बता रही है या मूवी की..
काजल- तेरी चूत में बड़ी आग लगी है.. चुप करके सुन ना.. ये सब बातें चुदाई से रिलेटेड ही हैं।
रश्मि- ओह.. ऐसा क्या.. चल आगे बोल.. अब मैं चुप रहूंगी..
काजल- भाई को हॉलीवुड मूवी बहुत पसन्द हैं खास कर जेम्स बॉन्ड की.. तो बस आज भी बॉन्ड की ही फिल्म चालू थी.. कोई मिशन था.. दोनों बड़े आराम से देख रहे थे। तभी एक ऐसा सीन आया कि मेरी आँखें बस स्क्रीन पर जम कर रह गईं। एक आदमी एक बहुत ही मस्त लड़की को किस कर रहा था और उसके चूचे दबा रहा था.. तभी भाई जल्दी से लैपटॉप के पास गया और उस सीन को फ़ॉरवर्ड कर दिया।
रश्मि- ओह.. शिट ऐसी गंदी मूवी थी वो.. और तू भाई के साथ देख रही थी और हाँ.. तू तो बड़ी नादान थी ना.. तो किस करना चूचे दबवाना.. ये सब कैसे पता लगा तुझे?
काजल- ओ सती सावित्री.. तू भी तो बड़ी शरीफ़ बनी घूमती है.. क्या तुझे कुछ नहीं पता.. मैंने बताया था ना.. मैं सेक्स के बारे में ज़्यादा नहीं जानती थी.. मगर ऐसे सीन को देख कर पता ना लगे कि क्या हो रहा है.. मैं इतनी भी नादान नहीं थी।
रश्मि- ओके ओके.. आगे बता.. वैसे तेरा भाई है अच्छा लड़का.. ऐसे सीन को बढ़ा दिया उसने..
काजल- अरे यार वो तो अच्छा है ही.. लेकिन जब उसने सीन को बढ़ाया.. पता नहीं कैसे.. मेरे मुँह से ये निकल गया- अरे भाई आने देते ना.. आगे देखते क्या होता है..
इतना बोलने के बाद मुझे अपनी बात पर पछतावा हुआ कि ये मैंने क्या बोल दिया और मैं जल्दी से बात को पलटने के लिए बोली- मुझे तो नींद आ रही है आप ही देखो.. अपनी मूवी..
भाई को कुछ समझ नहीं आया कि ये अचानक मैंने क्या से क्या कह दिया वो बस दुविधा में मुझे देखता रहा और मैं जल्दी से करवट लेकर सो गई ताकि भाई की नज़रों से बच सकूँ कि मैंने ऐसी बात जो कही थी..
रेशू- तुझे नींद आ रही है तो तू सो जा मैं बाद में सो जाऊँगा ओके..
मैंने ‘हाँ’ कहा और सोने की कोशिश करने लगी और कुछ देर तो मूवी की आवाज़ आती रही.. उसके बाद कब मुझे नींद आ गई.. पता भी नहीं चला..
रश्मि- अरे यार ये क्या.. तू सो गई.. मूवी तो देखी होती और तू यह क्या कहानी सुना रही है.. इसमें सेक्स कब आएगा यार?
काजल- चुप कर तू.. सेक्स सेक्स.. लगा रखी है.. ऐसे नहीं होती चुदाई.. बहुत पापड़ बेलने पड़ते हैं उसके लिए.. अब आगे सुन.. मैं मज़े से सोई हुई थी.. पता नहीं कितना समय हुआ होगा। मुझे प्यास लगी तो मेरी आँख खुल गई। मेरे कानों में अजीब सी आवाज़ आई जैसे कोई कराह रहा हो। मैंने आँखें पूरी तरह खोलीं और मेरी नज़र सीधी लैपटॉप पर गई। जो मैंने देखा तो बस आँखें फट कर बाहर निकलने को हो गईं।
रश्मि- क्यों ऐसा क्या देख लिया तूने.. यार कोई भूत वूत की पिक थी क्या?
काजल- अरे पगली भूत की नहीं.. चूत की पिक थी.. सामने मूवी में एक लड़का नंगा खड़ा था और उसके पास एक लड़की बैठ कर उसके लौड़े को चूस रही थी मज़े से..
रश्मि- ओ माय गॉड तेरा भाई ब्लू-फिल्म देख रहा था और तू पास में सो रही थी..
काजल- हाँ.. यार वो सब देख कर मेरी तो जान निकल गई और मेरा पसीना निकलने लगा। मैंने दोबारा आँख बन्द कर लीं.. मगर फिर लगा जरा देखूँ तो.. क्या आ रहा है। मैंने थोड़ी आँख खोल ली और देखने लगी.. भाई बार-बार मेरी तरफ़ देख रहा था कहीं मैं जाग ना जाऊँ.. मगर उसको क्या पता.. मैं सब आराम से देख रही थी।
कुछ देर बाद भाई ने अपने बरमूडे को नीचे किया और अपना लंबा लौड़ा बाहर निकाल लिया। जिसे देख कर मेरी और ज़्यादा हालत खराब हो गई..
रेशू ने अपने लौड़े पर हाथ फेरना शुरू कर दिया और आहें.. भरने लगा। उस समय पता नहीं मुझे क्या हुआ मेरी चूत गीली होने लगी और जिस्म का तापमान बढ़ने लगा।
मुझसे रहा नहीं गया तो मैं झटके से पलटी और मैंने करवट ले ले ली.. जिससे भाई चौंक गया और मेरी तरफ़ देखने लगा..
रश्मि- यार बुरा मत मानना.. तेरा भाई बड़ा गंदा है.. बहन पास में होते हुए भी ऐसा काम किया उसने..
काजल- अरे चुप.. तुझे क्या पता सब लड़के ब्लू-फिल्म देखते हुए ऐसे ही करते हैं तेरा भाई नहीं देखता क्या?
रश्मि- देखता होगा.. लेकिन मेरे सामने कभी ऐसा नहीं किया समझी..
काजल- अरे अब तू कभी उसके साथ सोती तो देखती ना.. आगे सुन.. मैंने करवट ली तो मेरा मुँह भाई की तरफ़ हो गया था.. यानि उसके लंड से मेरा मुँह कुछ इंच की दूरी पर था। बड़ी अजीब सी बू आ रही थी मुझे..
मेरा भाई बस मुझे देखे जा रहा था और बड़बड़ा रहा था.. रेशू बोल रहा था कि ओह.. काजल तू क्यों आज यहाँ सो गई.. मेरा मज़ा खराब कर दिया तूने.. देख तेरे अचानक पलटने से बेचारा लौड़ा डर कर मुरझा गया।
भाई की बात सुनकर मैं घबरा गई कि कहीं इनको पता तो नहीं लग गया कि मैं जाग रही हूँ।
मैं बस सोच ही रही थी कि सामने सीन बदल गया। एक छोटी लड़की कमरे में बैठी अपनी पैन्टी के ऊपर से चूत को रगड़ रही थी.. तभी एक लड़का कमरे में आया और उसे देख कर लड़की चौंक गई और हाथ हटा लिया.. तब उस लड़के ने कहा- वॉट आर यू डूइंग माय स्वीट सिस्टर..
‘क्या.. वो भाई बहन वाली मूवी थी..?’
‘हाँ यार वो भाई बहन वाली मूवी थी.. मैं तुमको आगे बताती हूँ।’
रश्मि- मुझे मालूम है.. बता तू आराम से बता..
काजल- इसको हिन्दी में बताने में ज़्यादा मज़ा आएगा.. अब तू यूँ समझ ले कि वो ब्लू-फिल्म लाइव चल रही है इससे तुझे और ज्यादा मजा आएगा।
‘ठीक है सुना..’
उस लड़के ने कहा- क्या कर रही थी.. मेरी प्यारी बहना?
लड़की ने कहा- कुछ नहीं भाई.. बस खुजा रही थी..
तो लड़का उसके पास आया और बोला- मेरी प्यारी बहना यहाँ की खुजली हाथ से नहीं मिटेगी.. इसके लिए तुम्हें मेरे लौड़े की जरूरत पड़ेगी। 
इतना कह कर वो उसके पास गया और लौड़ा निकाल कर सामने खोल दिया.. वो लड़की मुस्कुराई और लौड़े पर हाथ फेरने लगी.. उसको चूसने लगी..
रश्मि- छी: छी: अपने भाई के साथ ऐसा किया.. ये अंग्रेज भी ना जानवर हो गए हैं कोई शर्म लिहाज नहीं..
काजल- अरे तू क्या बोल रही है विदेशों में तो ये आम बात है.. माँ-बेटा बाप-बेटी और भाई-बहन सब आपस में सेक्स करते हैं।
रश्मि- हाँ.. पता है पता है.. मैंने कभी ऐसी फिल्म देखी नहीं.. मगर पता सब है.. तू आगे बता.. उसके बाद क्या हुआ?
काजल- अरे होना क्या था.. मैंने ऐसा कभी नहीं देखा था.. उस समय मेरे लिए वो बहुत बड़ी बात थी। एक भाई अपनी बहन के साथ ऐसा कैसे कर सकता है..
बस सीन शुरू हो गया वही चूसना-चाटना और मेरा भाई उनको बड़े गौर से देखता हुआ बड़बड़ाने लगा- उफ्फ.. क्या जालिम जवानी है यार.. ये विदेशियों का अच्छा रिवाज है.. घर में ही मज़ा मिल जाता है.. काश..
इतना बोलकर वो चुप हो गया और मेरी तरफ़ देखने लगा।
मैंने जल्दी से आँखें बन्द कर लीं..
अब वो मेरे बालों में हाथ घुमाने लगा और बोलने लगा- काजल तुझ पे मेरी बहुत पहले से नज़र है.. तू दिन पर दिन कयामत बनती जा रही है.. तेरे ये कोमल होंठ चूसने का दिल करता है.. मगर ये रिश्ता मुझे रोक देता है। प्लीज़ आज मौका मिला है.. मुझे माफ़ करना.. आज तो तेरी जवानी का मज़ा लूट कर ही दम लूँगा.. चाहे कुछ भी हो जाए..
उसकी बात सुनकर मेरा जिस्म काँपने लगा कि भाई ये क्या बोल रहा है.. कहीं वो कुछ कर ना दे..?!!
वो धीरे-धीरे मेरे होंठों पर उंगली घुमाने लगा।
रश्मि- ओ माय गॉड.. तेरा भाई ऐसा कैसे कर सकता है.. छी: छी: छी: उसको ज़रा भी शर्म नहीं आई?
काजल- मेरी जान, यह जवानी होती ही ऐसी है.. जब लौड़ा खड़ा होता है.. तो उसको बस चूत ही चूत और चुदाई ही चुदाई दिखाई देती है। वो किसी रिश्ते को नहीं मानता.. समझी.. अब चुपचाप आगे सुन कि उस रात मेरी जिंदगी में क्या क्या बदलाव हुआ।
रश्मि- मुझे नहीं सुनना ऐसी गंदी बात.. जिसमें भाई ही अपनी बहन के साथ इतना गंदा काम कर रहा हो..
काजल- अरे सुन तो ले.. बहुत मजेदार बात है.. तू खुद समझ जाएगी ये सब एक जुनून था बस..
रश्मि ने कुछ सोचा और उसके बाद ‘हाँ’ में सर हिला दिया और काजल दोबारा शुरू हो गई- यार मेरी हालत खराब हो गई.. भाई तो धीरे-धीरे मेरे गले से होते हुए टी-शर्ट के अन्दर हाथ डालने लगा था।
अब मेरी साँसें तेज हो गई थीं.. भाई का हाथ मेरे मम्मों पर आ गया और वो उनको छूने लगा। मुझसे रहा नहीं गया और में झटके से बैठ गई- भाई ये क्या कर रहे हो आप?
रेशू घबरा गया.. जल्दी से उसने अपना लौड़ा अन्दर किया और लैपटॉप को भी बन्द कर दिया।
रेशू- ववव..वो एमेम.. मैं कुछ नहीं.. तू सो जा.. मुझे नींद नहीं आ रही..
काजल- आप झूट बोल रहे हो.. मैंने देखा आप क्या देख रहे थे और मेरे यहाँ हाथ लगा रहे थे..
रेशू- क्या देख रहा था? मैंने कहाँ हाथ लगाया.. वो तो बस में देख रहा था कि तेरी टी-शर्ट ऊपर थी.. मैंने ठीक की बस..
काजल- भाई आप झूट मत बोलो.. मैंने सब देख लिया है। मैं कब से जाग रही हूँ और वो मूवी भी देख रही हूँ.. समझे..!
रेशू- ओह.. तो यह बात है.. तू भी भाई बहन की चुदाई को देख मज़ा ले रही थी और मैं तुझसे ऐसे ही डर रहा था।
काजल- भाई ऐसा कुछ नहीं है.. मैं बस ये देख रही थी कि आप किस हद तक जाते हो.. छी: अपनी बहन के साथ आपने ऐसा करने की सोची कैसे?
रेशू- बस बस.. मुझे और जलील मत करो.. मैं वासना के भंवर में फँस गया था और मैं क्या कोई भी ऐसे मौके पर बहक सकता है।
काजल- नहीं ये झूट है.. मैं तो नहीं बहकी भाई.. मैंने भी सब देखा है!
रेशू- ऐसे नहीं मेरे साथ बैठ और फिर देख क्या होता है?
काजल- ठीक है चालू करो दोबारा से..
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02-06-2019, 05:14 PM,
#18
RE: Nangi Sex Kahani अय्याशी का अंजाम
रश्मि ने बीच में टोकते हुए कहा- यार तू पागल है क्या.. ऐसे कैसे हाँ.. कह दी तूने?
काजल- अरे यार उस समय पता नहीं मुझे कुछ समझ नहीं आया तो मैंने हाँ..कह दी बस..
रश्मि- अच्छा फिर क्या हुआ?
काजल- होना क्या था.. भाई ने मूवी चालू कर दी और बस हम दोनों देखने लगे और धीरे-धीरे मेरा जिस्म गर्म होने लगा। मेरी चूत गीली होने लगी.. मगर मैं बड़ी मुश्किल से अपने आपको रोके बैठी रही ताकि भाई को कुछ शक ना हो.. जब हालत काबू से बाहर हो गए.. तो मैंने चिल्ला कर कहा ‘बस बहुत हो गया.. अब बन्द करो देखो मैं नहीं बहकी ना..’
रेशू- झूट मत बोलो.. तेरी हालत मुझसे छुपी नहीं है.. अपनी चूत खोल कर दिखा.. कैसे गीली हो रही है?
काजल- भाई आपको शर्म नहीं आती.. ऐसा बोलते हुए?
भाई ने मेरी टाँगें पकड़ी और पैन्टी के साथ बरमूडा खींच कर निकाल दिया। मैं कुछ समझ पाती.. इसके पहले उनका हाथ मेरी चूत पर था..
रेशू- उफ़फ्फ़.. तेरी चूत है या जलता तवा.. देख कितनी गर्म है और पानी-पानी हो रही है..
काजल- भाई का हाथ चूत पर लगते ही मेरी सोईवासना जाग गई.. मैं पागल हो गई। एक तो उस मूवी का असर और अब भाई की ये हरकत.. मेरी आँखें मज़े में बन्द हो गईं.. मैं बहुत कुछ बोलना चाहती थी.. मगर भाई ने अपने गर्म होंठ मेरी चूत पर रख दिए और चूत को चाटने लगे।

रश्मि- छी: छी: बन्द करो यह बात, मेरा दिल बेचैन हो गया.. कैसे तुम राज़ी हो गईं.. तेरा भाई तो पक्का हरामी निकाला.. अपनी ही बहन के साथ छी:..
काजल- अरे क्या हुआ.. मज़ा नहीं आया क्या अरे चुदाई का सीन बताती हूँ न.. ज़्यादा मज़ा आएगा कि कैसे मेरे भाई ने मेरी चूत की सील तोड़ी!
रश्मि- नो.. अब कुछ मत बोलना.. मुझे ऐसी घटिया बात नहीं सुननी.. जिसमें भाई और बहन सेक्स करें.. ओके बाय मैं जा रही हूँ।
काजल- अरे साफ-साफ क्यों नहीं कहती.. कि तेरी चूत गीली हो गई है और तुझसे सहन नहीं हो रही.. ज़्यादा सीधी बन कर रहेगी तो लौड़े के लिए तरसती रहेगी। समझी किसी ना किसी को पटा ले.. वो तेरी चूत की आग मिटा देगा।
रश्मि- नो वे.. मेरे साथ ऐसा कुछ नहीं होगा.. समझी.. मुझे नफ़रत है सेक्स से ओके..
काजल- मेरी जान तू झूट बोल रही है.. अगर तू पूरी बात सुन लेगी तो तेरा मन भी चुदने का करेगा.. इसी डर से तू भाग रही है ना..
रश्मि- नहीं ऐसा कुछ नहीं है.. बस मुझे ये सब गंदा लग रहा है..
काजल- अरे बहाना मत बना.. भाई मेरा.. चूत मेरी.. तुझे क्या दिक्कत है सुनने में बोल?
रश्मि- तू नहीं समझेगी.. चल अब बता दे पूरी बात.. वैसे मुझे कुछ फ़र्क नहीं पड़ने वाला.. ओके।
काजल- अच्छा अच्छा.. तुझे फ़र्क पड़े या ना पड़े.. मगर तू सुन लेगी तो मैं समझूँगी.. तू डरी नहीं.. ओके.. अब आगे का हाल सुन..
भाई लगातार अपनी जीभ की नोक से मेरी चूत के दाने को छेड़ रहे थे और मैं हवा में उड़ रही थी।
रश्मि- छी: तू भी शरीफ़ होने का नाटक कर रही थी.. भाई से चटवाते हुए शर्म नहीं आई तुझे?
काजल- देख तू ऐसे बीच में बोलेगी.. तो कहाँ मज़ा आएगा। अब उस रात जो हुआ सब विस्तार से बता रही हूँ.. बीच में कुछ ना बोलना ओके..
रश्मि ने ‘हाँ’ कहा और काजल शुरू हो गई जैसे उस रात हुआ वैसे ही उसने पूरा किस्सा कह सुनाया।
रेशू- उफ़फ्फ़ काजल तेरी चूत कितनी टेस्टी है.. आह्ह.. मज़ा आ रहा है.. चाटने में आह्ह.. उफ्फ…
काजल- भाई मेरी चूत में लगे थे और.. आह्ह.. ईसस्स नहीं.. भाई आह्ह.. ये गलत है आ ऐसा मत करो ना प्लीज़ आह्ह..
रेशू- अब ये झूट मूट का नाटक मत कर.. तुझे पूरा मज़ा आ रहा है फिर भी ‘ना’ कह रही है। चल पूरी नंगी हो जा.. आज तुझे ऐसा मज़ा देता हूँ कि पूरी जिदगी याद करोगी मुझे..
भाई ने मेरे पूरे कपड़े निकाल दिए और खुद भी नंगा हो गया.. उसका लौड़ा एकदम तना हुआ था.. जिसे देख कर मेरी चूत पानी-पानी हो रही थी।
रेशू- अरे वाह तेरे मम्मे तो बड़े मस्त हैं एकदम छोटे शान्तरे जैसे.. ला ज़रा इनका भी रस पिला दे मुझको आह्ह.. क्या कड़क हैं तेरे मम्मे.. आज तो मज़ा आ गया।
काजल- नहीं भाई.. ये तो छोटे अमरूद हैं इन्हें सेब बना दो.. सब यही कहते हैं।
रेशू- अरे मेरी जान.. तू बस देखती जा.. मैं क्या-क्या बनाता हूँ।
रेशू मेरे जिस्म के साथ खेलने लगा.. वो बहुत मज़े से कभी मेरे मम्मों को दबाता कभी चूसता.. मेरी चूत में झनझनाहट होने लगी थी। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे जिस्म का सारा खून वहाँ जमा होकर बाहर निकलना चाहता हो।
काजल- एयेए आह.. इसस्स.. भाई आह्ह.. नीचे करो ना.. आह्ह.. मुझे कुछ हो रहा है आह्ह.. उइ.. आह्ह..
मेरी सिसकारियों को समझते हुए रेशू ने जल्दी से मेरी चूत को चूसना शुरू कर दिया.. उसी पल मैं झड़ गई।
रेशू ने रस मलाई की तरह मेरा सारा पानी चाट-चाट कर चूत को साफ कर दिया, अब मैं निढाल सी बिस्तर पर लेटी हुई थी।
रेशू- क्यों मेरी प्यारी बहना.. मज़ा आया ना.. इसे कहते है प्यार का खेल.. अब आगे-आगे देख तुझे कैसे मज़ा देता हूँ।
काजल- भाई ये सब सही है क्या?
रेशू- मेरी जान.. यह देख, लौड़ा कैसे तना हुआ तुम्हें निहार रहा है। इसको किसी रिश्ते की परवाह नहीं है.. चल इसको प्यार कर.. मज़ा आएगा..
भाई ने अपना 7″ का नाग मेरे सामने कर दिया। मैं बस उसको देख रही थी कि भाई ने मेरे बाल पकड़ कर लौड़े को मेरे होंठों पर रख दिया।
काजल- उउउ नहीं भाई.. मुझे नहीं करना ये गंदा है ना ना..
रेशू- अरे जान एक बार चूस कर देख.. दुनिया के सारे मज़े भूल जाएगी तू..
मुझे बड़ा अजीब लग रहा था.. मगर भाई ने ज़ोर दिया तो मैं लौड़े के टोपे को चूसने लगी और सच बताऊँ वो बहुत अच्छा था.. मुझे मज़ा आने लगा और मैंने पूरा लौड़ा मुँह में भर लिया और लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी, उसका रस बड़ा अजीब सा था।
रेशू- आह्ह.. चूस बहना.. आह्ह.. मज़ा आ रहा है आह्ह.. अब मेरे मज़े हो गए.. आह्ह.. अब बस रोज तू मेरे साथ ही सोना.. रोज आह्ह.. आह..
करीब 5 मिनट तक मैं लौड़े को मज़े से चूसती रही.. अचानक भाई ने मेरे सर को पकड़ कर ज़ोर-ज़ोर से झटके देने शुरू कर दिए।
कुछ ही देर में उनके लंड से तेज वीर्य की पिचकारी मेरे गले में उतरने लगी।
ना चाहते हुए भी मैं उनका सारा माल पी गई।
रेशू- आह्ह.. आह उफ़फ्फ़.. पीले आह्ह.. सारा माल पीले.. अपने भाई का.. आह्ह.. आज तूने मुझे बहुत मज़ा दिया आह्ह..
जब भाई का लंड शान्त हुआ.. वो पीछे हटा और मेरी जान में जान आई, मेरे मुँह से अभी भी उनके सफेद वीर्य की कुछ बूंदें बाहर आ रही थीं और उनके लंड पर भी कुछ माल लगा हुआ था।
रेशू- काजल ऐसे नहीं करते.. चल पूरा माल चाट कर साफ कर और पी जा सब.. तभी ज़्यादा मज़ा आएगा..
काजल- नहीं भाई, यह बहुत अजीब सा है मुझे उल्टी आने जैसा फ़ील हो रहा है।
रेशू- अरे कुछ नहीं होगा.. ये तो बड़ा फायदेमंद रस है.. चल आ जा चाट कर साफ कर.. उसके बाद मैं तुझे और मज़ा दूँगा.. चल आ जा..
काजल- भाई की बातों में एक जादू था। मैं बस उनकी हर बात मानती जा रही थी। मैंने लौड़े को जीभ से चाट कर साफ करना शुरू कर दिया और कुछ देर ऐसा करने के बाद लौड़ा साफ हो गया। मगर भाई की नजरों में वासना का तूफान नज़र आने लगा।
काजल- भाई आप ऐसे क्या देख रहे हो मुझे?
रेशू- मेरी जान.. तेरी जैसी हसीन बहन सामने नंगी हो.. तो और क्या देखूँ मैं.. आज तो मेरा बहनचोद बन जाने का दिन है..
काजल- नहीं भाई.. यह गलत होगा.. हमारी बहुत बदनामी हो जाएगी..
रेशू- अरे डार्लिंग, किसी को पता लगेगा तब बदनामी होगी ना.. इस रात के अंधेरे के मैं हम दोनों.. एक-दूसरे की जरूरत पूरी करेंगे.. दिन में वहीं रिश्ता रहेगा हमारा..
काजल- ओह.. भाई आपने क्या जादू कर दिया मुझ पर.. कुछ समझ नहीं आ रहा.. अब तो जो होगा.. देखा जाएगा आ जाओ.. बना लो मुझे अपना..
हम दोनों बिस्तर पर एक-दूसरे की बाँहों में चूमने में बिज़ी हो गए।
भाई मेरे छोटे-छोटे मम्मों को दबा रहा था, कभी मेरे निप्पल को चूस रहा था और मैं भी उनकी कमर पर हाथ घुमा रही थी, कभी उनके लंड को सहला रही थी..
लगभग 15 मिनट तक यह खेल चलता रहा.. हम दोनों बहुत गर्म हो गए थे, मेरी चूत रिसने लगी थी..
रेशू- उफ्फ़ काजल.. अब वक़्त आ गया है कि तेरी कुँवारी चूत को खोलकर मैं तुझे पूरी कच्ची कली से खिला हुआ फ़ूल बना दूँ।
काजल- आह्ह.. भाई उफ्फ.. अब मेरे से बर्दाश्त नहीं हो रहा.. आह्ह.. जो करना है जल्दी से कर दो इसस्स आह..
भाई ने मुझे लिटा दिया और मेरे पैर मोड़ कर एक बार अच्छे से मेरी चूत को चाट कर अपने थूक से तर कर दिया.. उसके बाद अपने लौड़े पर अच्छे से थूक लगा कर अपना लौड़ा चूत पर रखा।
मेरी जो हालत हुई.. क्या बताऊँ मैं.. भाई के लौड़े का स्पर्श बहुत ही मजेदार था, वो पल शब्दों में नहीं बताया जा सकता है.. बस महसूस किया जा सकता है।
काजल- ससस्स.. आह.. भाई.. आराम से करना.. मुझे डर लग रहा है कहीं इस खेल में कुछ गड़बड़ ना हो जाए..
रेशू- बस थोड़ा सा दर्द होगा मेरी काजल.. उसके बाद तू दुनिया के सबसे मजेदार खेल की पक्की खिलाड़ी बन जाएगी.. आह्ह.. अब मैं घुसा रहा हूँ।
रेशू ने लौड़े पर दबाव बनाया और सुपारा चूत में फँसा कर वो मेरे ऊपर लेट गया, मेरे निप्पल को चूसने लगा, मेरे होंठों को अपने होंठों से दबा कर ज़ोर लगाने लगा।
मेरी चूत का दरवाजा खुलना शुरू हो गया था और मेरे जिस्म में दर्द की एक लहर दौड़ने लगी थी.. जैसे कि चूत के रास्ते मेरे जिस्म में कोई तूफान जा रहा हो मेरी हालत खराब होने लगी।

रेशू- आह्ह.. उफ्फ.. तेरी चूत बहुत टाइट है साला लंड आगे जा ही नहीं रहा है.. आह..
काजल- उउउ भाई आह्ह.. नहीं.. प्लीज़ मुझे बहुत दर्द हो रहा है.. ससस्स अयाया.. लगता है.. मैं मार जाऊँगी.. आआ.. सस्स आह्ह.. अब और मत डालो ना..
रेशू- उहह अरे बहना.. अभी तो बस टोपा घुसा है.. लौड़ा तो पूरा बाहर है। मैं तुझे तकलीफ़ नहीं देना चाहता था। इसलिए प्यार से चोद रहा था.. मगर एक झटका देना ही होगा। अब तू देख बस एक बार का दर्द.. बाद में कैसे मज़ा देता है!
काजल- आह्ह.. नहीं भाई.. आह्ह.. नहीं.. थोड़े से इतना दर्द हो रहा है तो पूरा कैसे जाएगा आह्ह.. नहीं भाई..
रेशू ने जब यह देखा कि मैं डर रही हूँ और उसका काम बिगड़ रहा है.. तो उसने मेरे होंठ अपने होंठों में दबाए और कमर को पीछे करके ज़ोर से झटका मारा.. आधा लंड मेरी चूत को फाड़ता हुआ अन्दर घुस गया।
दर्द के मारे मेरी जान निकल गई.. मैं बहुत ज़ोर से चीखी.. मगर मेरी आवाज़ घुट कर रह गई।
मैं कुछ संभल पाती.. उसके पहले भाई ने दूसरा झटका मारा और पूरा का पूरा लौड़ा चूत की गहराई में समा गया।
मेरी आँखों से आँसू बहने लगे और दर्द के मारे पूरा बदन अकड़ने लगा.. मगर भाई लगातार झटके देता रहा.. वो वासना में अँधा हो गया था.. उसको मेरी तकलीफ़ का कोई अंदाज़ा नहीं था, वो बस दनादन चोदे जा रहा था और मैं सिसकती जा रही थी।
कोई 20 मिनट तक भाई मेरी चूत को पागलों की तरह चोदता रहा और मैं दर्द के दौरान भी एक बार झड़ गई थी और दोबारा भी मैं चरम पर थी।
अब दर्द के साथ एक मज़ा भी आने लगा था।
काजल- आह आईईइ.. भाई ससस्स.. आह्ह.. दर्द हो रहा है.. आह्ह.. छोड़ो आह्ह.. ना ना आराम से.. आह उ.. मर गई आह्ह..
रेशू- उहह उहह ले.. काजल.. आह्ह.. देख तेरे भाई का पावर देख.. आह्ह.. आज तूने मुझे बहनचोद बना दिया है.. आह्ह.. ले पूरा ले आह्ह..
काजल- आह छोड़ो.. आह्ह.. भाई आह्ह.. मेरी चूत आह.. में मीठा सा दर्द उठ रहा है.. आह्ह.. मुझे कुछ हो रहा है.. आह्ह.. मैं गई एयेए गई एयेए..
भाई ने स्पीड बढ़ा दी और कमर को इतनी ज़ोर से हिलाने लगे कि बस पूछो मत.. मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं दर्द से चीखूँ या मज़े से आहें भरूँ।
मेरी चूत का लावा फूट गया और मैं ठंडी पड़ गई।
तभी मेरी चूत की दीवारों पर गर्म गर्म वीर्य की पिचकारी जाकर लगी.. जिसके अहसास से मैं सिहर गई।
उसके बाद लगातार भाई के लंड से वीर्य निकलता गया और मेरी चूत को भरता गया। काफ़ी देर तक भाई मेरे ऊपर पड़ा रहा और हम दोनों लंबी साँसें लेते रहे।
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02-06-2019, 05:14 PM,
#19
RE: Nangi Sex Kahani अय्याशी का अंजाम
काजल- मेरी जान.. यह थी मेरी चूत की सील टूटने और चुदाई की कहानी.. उसके बाद रात भर में 3 बार और भाई ने मुझे चोदा.. मुझे इतना मज़ा दिया कि क्या बताऊँ.. उसके बाद तो जब मौका मिलता.. हम दोनों चुदाई का खेल खेलते। उसके बाद लंड का ऐसा चस्का लगा कि भाई के दोस्त से भी चुदाई की मैंने.. और अब मेरा प्रेमी मेरे मज़े ले रहा है। अब बोल तू क्या बोलती है.. मज़ा आया ना..
रश्मि सारी बात बड़े गौर से सुन रही थी, उसे पता भी नहीं चला कि कब काजल ने उसको आवाज़ दी, वो तो बस आँखें गड़ाए काजल को देख रही थी।
काजल- अरे क्या हुआ.. रश्मि कहाँ खो गई? तेरी चूत को भी भाई का लौड़ा चाहिए क्या.. हा हा हा हा बोल ना?
काजल की हँसी को सुनकर रश्मि जैसे नींद से जागी हो और उसका चेहरा शर्म से लाल हो गया.. वो मुस्कुराने लगी..
रश्मि- चल हट.. तू भी ना.. कुछ भी बोल रही है.. तू और तेरा भाई बहुत गंदे हो.. ऐसा काम करते हो मगर में ऐसी नहीं हूँ समझी..
काजल- अरे कभी तो चुदेगी ना.. वैसे आज तो तेरी चूत पूरी गीली हो गई होगी.. मेरी बात सुनकर..
रश्मि- नो वे.. ऐसा कुछ नहीं हुआ.. समझी.. मैंने कहा था ना.. मुझे कोई फ़र्क नहीं पड़ता। अब मैं जा रही हूँ तू बैठी रह यहाँ..
काजल- अरे झूटी कहीं की.. दिखा मुझे अभी पता लग जाएगा कि तेरी चूत गीली हुई या नहीं.. ऐसे कैसे भाग रही है?
रश्मि- अरे हट.. मेरा हाथ छोड़.. देख मैं मार दूँगी.. नहीं नहीं.. प्लीज़ मुझे जाने दे..
काजल ने ज़बरदस्ती रश्मि को पकड़ लिया और उसकी चूत को छूकर देखने लगी.. जो वाकयी में गीली थी।
काजल- अरे वाह झूठी.. इतना पानी गिरा दिया.. कि कपड़े भी गीले हो गए.. यार तू बड़ी जिद्दी है.. अपनी ज़िद में इस निगोड़ी चूत को क्यों सज़ा दे रही है.. बना ले किसी को अपना.. दे दे अपनी चूत को लौड़े का तोहफा.. कर दे सील का अंत..
रश्मि- बस बस.. तू जानती है… ऐसी बात से किसी का भी पानी रिसने लगता है.. मैं कोई अलग दुनिया से नहीं आई हूँ और यार ऐसे किसी को भी ये हक़ नहीं दे सकती.. समझी तू..
काजल- अरे यार किसी और से नहीं तो अपने भाई को ही पटा ले.. घर की बात घर में रहेगी और मज़ा का मज़ा मिलता रहेगा तुम्हें..
रश्मि- काजल ये क्या बकवास कर रही हो.. मैं तुम्हारी तरह नहीं हूँ और ना ही मेरा भाई इतना गंदा है.. जो अपनी बहन पर नज़र रखे.. समझी.. आज तो ऐसी गंदी बात मुझसे की.. पर दोबारा ना करना वरना अच्छा नहीं होगा..
रश्मि गुस्से में जाने लगी.. तभी काजल भी थोड़ा गुस्सा हो गई..
काजल- अरे जा जा.. बहुत सीधी बनती है.. जब चुद जाएगी ना.. तब पता लग जाएगा तेरे को.. समझी.. एक बार बस रात को भाई के पास सोकर देख.. पता लग जाएगा कि कितना सीधा और शरीफ है। वो तेरी चूत को ना चाट ले तो कहना.. मुझे बड़ी आई सती सावित्री।
काजल की बात सुनकर रश्मि को गुस्सा तो आया.. मगर वो वहाँ रुक कर और बहस नहीं करना चाहती थी.. इसलिए वो बाहर चली गई..
लो दोस्तो, इन दोनों के बीच तो लड़ाई हो गई। यह रश्मि भी ना बड़ी जिद्दी है.. अब उसके पीछे जाना है क्या आपको.. नहीं ना..
तो रानी के पास चलो.. अब तक तो उसकी साँसें ठीक चलने लगी होंगी ना.. तो आओ मेरे साथ!
जय और विजय दोनों रानी के दोनों तरफ लेटे हुए उसके जिस्म को सहला रहे थे, विजय का हाथ उसके होंठों पर था और जय का मम्मों पर लगा था।
रानी- उफ़फ्फ़ जय जी.. अब बस भी करो.. दोनों ने मिलकर मेरी चूत की हालत खराब कर दी है। अब क्या है थोड़ा आराम करने दो ना..
विजय- अरे रानी अभी तो एक राउंड हुआ है.. कल से तू लंबी छुट्टी पर जाओगी तो जान आज की पूरी रात तू मज़े ले.. हा हा हा हा..
जय- तेरी चूत को आज ऐसे खोल देंगे कि तू हर वक़्त लौड़ा माँगेगी हा हा हा हा.. मगर जान गाँव में किसी से मत चुदवाना.. वरना तेरी नौकरी गई समझ.. हम झूटा माल नहीं खाते.. हा हा हा हा…
रानी- यह आप कैसी बातें कर रहे हो.. जय जी मैं भला किसी और के पास क्यों जाऊँगी.. अब तो बस आपकी दासी बनकर रहूंगी.. मगर आप शहर से जल्दी आ जाना ठीक है..
विजय उसके निप्पलों को चूसने लगा और चूत को सहलाने लगा, अब शायद विजय का मन चुदाई करने का बन गया था।
रानी- आह्ह.. नहीं.. इसस्स.. दुःखता है आहह.. आप ऐसे काट क्यों रहे हो.. आह्ह.. आराम से चूसो ना..
जय- अरे जानेमन.. दु:खेगा तभी तो तू एक्सपर्ट बनेगी और वैसे भी विजय बहुत कम किसी लड़की के साथ दो बार करता है.. तू इसको भा गई है इसलिए ये इतना प्यासा हो रहा है।
रानी- आह्ह.. मुझे तो आप दोनों भा गए हो.. अब तो बस आपकी दासी बन गई हूँ मैं.. जब तक आपका मन करे मुझे भोगते रहो और अपने लंबे-लंबे लौड़ों से मज़ा देते रहो।
जय- वाह जान अब तू पक्की चुदक्कड़ बन गई है.. तेरी बातें अब मज़ा देने लगी हैं। चल आज तुझे नई-नई स्टाइल सिखाते हैं चल विजय के लंड पर बैठ कर अपने आप चुद.. मज़ा आएगा। तब तक मैं बाथरूम जाकर आता हूँ.. उसके बाद मैं तुम्हें गोदी में लेकर चोदूँगा।
जय के जाने के बाद रानी ने पहले विजय का लौड़ा चूसा और उसके बाद धीरे से उस पर बैठ गई.. पूरा लौड़ा चूत में समा गया।
विजय नीचे से झटके दे रहा था और रानी लौड़े पर कूद रही थी।
लगभग 15 मिनट तक ये खेल चलता रहा.. तब तक जय भी आ गया था।
अब विजय ने रानी को नीचे लिटा कर चोदना शुरू कर दिया था। जय अब उसको लौड़ा चूसने लगा था और 10 मिनट बीते होंगे कि विजय और रानी झड़ गए..
जय का लौड़ा बहुत अकड़ रहा था.. उसने रानी को 2 मिनट का रेस्ट दिया और खुद उस पर सवार हो गया। अब चुदाई का खेल दोबारा शुरू हो गया।
कुछ देर बाद जय भी ठंडा हो गया।
अब रानी में बिल्कुल हिम्मत नहीं थी.. वो थक कर चूर हो गई थी..
दोनों भाई और चोदना चाहते थे.. मगर रानी ने उनको बहुत मुश्किल से समझाया कि उसकी हिम्मत पस्त हो गई है.. तो मजबूरन दोनों मान गए और रानी को सोने का बोल कर खुद भी सोने चले गए।
दोस्तो, रानी की ताबड़तोड़ चुदाई हो गई.. अब इनको सोने दो।
वहाँ काजल अभी भी गुस्से में है या नहीं.. ये तो वहाँ जाकर ही देखते हैं। 
काजल बिस्तर पर लेटी हुई थी.. तभी रश्मि वापस आ गई.. जिसे देख कर काजल ने मुँह घुमा लिया..
रश्मि- सॉरी यार.. मैंने कुछ ज़्यादा ही बोल दिया आई एम रेयली सॉरी..
काजल कुछ नहीं बोली और बस वैसे ही पड़ी रही.. उसको बहुत गुस्सा आ रहा था मगर वो रश्मि से बात नहीं करना चाहती थी।
रश्मि भी कहाँ मानने वाली थी.. वो काजल के पास आकर बैठ गई और उसके बालों को सहलाने लगी।
काजल- यह क्या बदतमीज़ी है.. सोने दो मुझे.. जाओ अपने बिस्तर पर..
रश्मि- सॉरी यार मुझे तुमसे बहुत जरूरी बात करनी है।
काजल- मुझे तुमसे कोई बात नहीं करनी.. सो जाओ चुपचाप..
रश्मि- प्लीज़ प्लीज़ यार.. सुनो ना.. अच्छा बाबा कान पकड़ कर सॉरी बोलती हूँ.. बस..
रश्मि की मासूमियत के आगे काजल पिघल गई, रश्मि के उदास चेहरे को देख कर उसको हँसी आ गई।
काजल- हा हा हा.. अरे मुँह देख अपना कितना बकवास लग रहा है.. तू मुस्कुराती ही अच्छी लगती है ऐसे उदास तो बिल्कुल नहीं..
रश्मि- थैंक गॉड.. तुम मान तो गई यार.. मुझे अच्छा नहीं लगा मैंने बहुत ज़्यादा बोल दिया तुम्हें..
काजल- नहीं यार ग़लती मेरी भी है.. मुझे भी तुमसे ऐसी बात नहीं करनी चाहिए थी.. चल बैठ मेरे पास और वादा कर दोबारा नाराज़ नहीं होगी तू..
रश्मि- अच्छा बाबा नहीं होऊँगी मैं.. बस खुश.. चलो आज हम दोनों एक ही बिस्तर पर सोएंगे ठीक है..
काजल- क्यों कहा घूम कर आई हो और क्या इरादा है.. कहीं तुम्हारी भी चूत फड़फड़ा तो नहीं रही है?
रश्मि- अरे यार तुम दोबारा शुरू हो गई ना.. जाओ नहीं सोती मैं..
काजल- अरे मजाक कर रही हूँ यार.. चल आ जा.. सो जाते हैं वैसे भी कल हम घर चले जाएँगे..
काजल और रश्मि पास में लेट गई और बातें करने लगीं और बस यही बातों का दौर चलता रहा। कब दोनों की आँखें बन्द हो गईं.. उनको पता भी नहीं चला।
दोस्तो, सुबह का सूरज निकले.. उसके पहले एक बात बता देती हूँ।
साजन और उसके दोस्त खाना खाने के बाद ऐसे ही बैठे हुए थे.. तभी साजन को भाई का फ़ोन आया और उसने उसे फ़ौरन कहीं बुलाया। कोई 20 मिनट बाद साजन उस जगह पहुँच गया.. जहाँ भाई पहले से ही खड़ा हुआ था।
साजन- क्या हुआ भाई.. ऐसे अचानक अपने मेरे को यहाँ क्यों बुलाया?
भाई- प्लान थोड़ा चेंज हो गया है.. मैंने कहा था ना कल वो दोनों भाई यहाँ अपनी बहन के साथ होंगे.. तब तू आराम से देख लेना। मगर वो लोग ज़्यादा चालाक हैं शायद यहाँ ना आएं.. तो तू एक काम करना.. कुछ लड़के जो आवारा टाइप के हों.. उनको कल यहाँ बुलाना और उसको छेड़ने के लिए कहना..
साजन- भाई ये बहुत उलझन वाली बात अपने बोल दी.. पहले तो मुझे पूरी बात समझाओ.. बाद में मेरे को कोई ऑर्डर देना।
भाई- अरे बेवकूफ़.. कल दोपहर 12 बजे उन लड़कों को यहाँ खड़ा करना और अपने आवारा लड़कों से उसको छेड़ने को कहना.. जब वो लोग शुरू हो जाएं.. तब पीछे से आकर तुम झगड़ा शुरू कर देना.. बस…
साजन- ये बात तो मैं समझ गया.. जो आपने कहा.. हो जाएगा.. मगर इससे होगा क्या और वो रंडी को मैं पहचानूँगा कैसे.. असली बात वो है?
भाई- पूरी बात सुने बिना बोलता है… कल 12 बजे वो यहाँ से गुज़रेगी.. मैं तुम्हें कॉल करके इशारा दूँगा.. तू लड़कों को इशारा दे देना.. वो लड़के उसको छेड़ रहे होंगे.. तब वो उनसे झगड़ेगी.. तू उनको फटकार लगा कर भगाएगा.. वो कुछ ना कुछ जरूर बोलेगी.. बस किसी तरह उससे बात कर लेना.. उसका नाम पूछ लेना..
साजन- भाई बुरा ना मानना.. यह बहुत घुमा कर आप नहीं बता रहे मुझे.. इससे अच्छा तो एक काम है.. आप उसको पहचानते हो.. कल यहाँ मेरे साथ आ जाना.. बस एक इशारा कर देना.. मैं समझ जाऊँगा यह वही है..
भाई- जितनी तेरी सोच.. उतना ही बोलेगा साले.. उसकी पिक मेरे पास है चाहूँ तो वो दिखा कर भी बता सकता हूँ.. मगर तू नहीं समझेगा.. तुझे उसका नाम तो याद है ना?
साजन- अरे हाँ.. भाई याद है.. मगर उसका नाम पूछ कर उससे बात करके क्या हासिल होगा हमें? हम ऐसे भी जान सकते हैं उसको?
भाई- तू पागल है एकदम.. अब सुन उसका नाम जानकर उससे बातें कर.. उसके भाई के बारे में.. घर के बारे में.. सब कुछ पता कर… हाँ.. चुप पता है तू यही कहेगा न.. मैं सब जानता हूँ.. मगर उसको यह अहसास मत दिला। जब वो अपने भाई का नाम ले.. तब तू कहना.. वो तो मेरा दोस्त है और बस किसी बहाने उसके घर तक जा। मैं उस कुत्ते की आँखों में डर देखना चाहता हूँ और वो डर तब पैदा होगा.. जब तू उसकी बहन के साथ उसके घर तक चला जाएगा। उसका प्लान धरा का धरा रह जाएगा.. हा हा हा..
साजन- वाह भाई असली बात तो अब बताई आपने.. मगर अब भी एक सवाल है.. आप कल वहाँ होंगे तो कॉल करने की क्या जरूरत है.. साथ में रहकर बता देना।
भाई- नहीं जैसा मैंने कहा.. वैसा कर.. बस तेरा उसके साथ उनके घर तक जाना जरूरी है। मैं साथ रहूँ.. यह जरूरी नहीं.. समझा..
साजन- क्या जरूरी है और क्या नहीं.. मेरी समझ के बाहर है भाई.. मुझे तो आप जाने दो।
भाई- हाँ.. एक बात सुन.. कल बाइक नहीं.. कार लेकर जाना.. समझे..
साजन- अब ये क्या पंगा है?
भाई- यह बात तुझे कल अपने आप पता लग जाएगी.. तू मेरे दिमाग़ को नहीं जानता.. जहाँ सारी दुनिया सोचना बन्द करती है.. मैं वहाँ से सोचना शुरू करता हूँ.. समझा अब जा..
साजन- भाई आपका दिमाग़ तो दोधारी तलवार है.. दोनों तरफ़ से चलता है.. ओके कल आपका काम हो जाएगा।
भाई- सुन.. पहले वाला प्लान भी याद रखना.. शायद वो आ भी जाए। हर हाल में तुझे कल ये कम करना ही है.. समझा ना तू?
साजन- हाँ.. पता है.. अगर वो आए तो उनके सामने पहुँच जाऊँगा और बातों में फँसा कर उनके मुँह से उगलवा लूँगा कि यह हमारी बहन है.. नहीं तो ये दूसरा प्लान तो है ही ना..
भाई- गुड अब की ना तूने समझदारी वाली बात.. चल अब जा..
साजन- भाई एक बात है.. कल वो लड़के लाऊँगा.. तो थोड़ा रोकड़ा दे देते..
भाई- अरे इतनी जल्दी पैसे माँगने लगा.. वो जो दिए थे उनका क्या हुआ?
साजन- व्व..वो तो भाई ख़त्म हो गए.. अब आपने इतने काम बता दिए.. गेस्ट हाउस बुक किया.. कोमल को दिए.. उन दोनों को दिए.. फार्म पर आया.. अब आप बताओ इतने सब काम तो कर दिए..
भाई हँसने लगा और अपना पर्स निकाला उसमें से हजार के कुछ नोट साजन को दिए और कहा- अभी इनसे काम चलाओ बाद में और दे दूँगा..
जब भाई पर्स से पैसे निकाल रहा था.. तब साजन की नज़र उसके पर्स पर थी और उसमें एक तस्वीर देख कर वो चौंक गया.. क्योंकि वो तस्वीर जिसकी थी उसको साजन अच्छी तरह से जानता था। मगर उस वक़्त उसने चुप रहना ठीक समझा और भाई से पैसे लेकर वहाँ से निकल गया।
Reply
02-06-2019, 05:15 PM,
#20
RE: Nangi Sex Kahani अय्याशी का अंजाम
दोस्तो, उम्मीद है.. सस्पेंस के साथ मज़ा भी आपको बराबर मिल रहा होगा।
टेन्शन नॉट… अब धीरे-धीरे सब राज़ पर से परदा उठेगा और नए-नए ट्विस्ट सामने आएँगे।
वहाँ से साजन वापस सुंदर और आनंद के पास चला गया। उनको भाई से हुई बात बताई और कल के लिए कुछ लड़कों से फ़ोन पर बात भी कर ली। उसके बाद उनके पीने का दौर शुरू हुआ।
आनंद- बॉस मानना पड़ेगा.. यह भाई साला जो भी है.. बहुत माइंड वाला है.. कैसे आइडिया लाता है कि दिमाग़ घूम जाता है।
सुंदर- तू ठीक बोलता है यार.. मगर ये है कौन.. और अपना चेहरा क्यों छुपा कर रखता है।
आनंद- अपने को क्या है यार? होगा कोई भी.. अपने को तो बस पैसे और कुँवारी चूत से मतलब है..
साजन- चुप सालों क्या उसकी तारीफ कर रहे हो.. साला वो बहुत बड़ा हरामी है.. आज मैंने उसको पहचान लिया है। साला अपने आप को बहुत माइंडेड समझता है ना… मगर आज उसने मेरे सामने पर्स निकाल कर ग़लती कर दी। साला भूल गया कि उसमें जो फोटो लगी है.. साजन उसको देखते ही पहचान जाएगा कि वो किसकी है। उसके बाद भी साले ने मेरे सामने पैसे निकाले।
आनंद- क्या बात कर रहे हो बॉस किसकी फोटो देख ली और कौन है ये भाई.. हमको भी बताओ ना..?
साजन- नहीं.. अभी नहीं सालों.. तुम खेल को बिगाड़ दोगे.. अब मैं उसके नकाब हटने का इंतजार करूँगा.. देखता हूँ साला कितना बड़ा गैम्बलर है.. अब मैं उसके साथ डबल गेम खेलूँगा। तुम दोनों बस देखते जाओ।
वो तीनों काफ़ी देर पीते रहे और बस ऐसे ही बातें करते रहे। उसके बाद इधर-उधर लेट गए और नींद की गहराइयों में कहीं गुम हो गए।
दोस्तो, सुबह के 9 बजे रानी की जब आँख खुली.. तो उसका पूरा बदन दर्द से दु:ख रहा था और उसकी चूत भी दर्द कर रही थी.. मगर उसके होंठों पर एक मुस्कान थी.. जो साफ ब्यान कर रही थी कि एक कली अब फूल बन गई है।
रात की चुदाई की याद उसको तड़पा रही थी।
वो उठी और बाथरूम में चली गई.. अच्छे से नहा कर उसने कपड़े पहने और सीधी अपने प्रेमियों के कमरे की तरफ़ गई। मगर अन्दर से विजय की आवाज़ सुनकर वो वहीं रुक गई।
विजय- जी जी बड़े पापा.. नहीं.. नहीं.. हम ठीक हैं हाँ हाँ.. बस निकल ही रहे हैं समय से आ जाएँगे.. आप चिंता मत करो..
जय- अरे यार, यह पापा को क्या हो गया सुबह सुबह क्यों फ़ोन किया?
विजय- अरे यार पता नहीं.. बहुत गुस्सा थे.. बोल रहे थे कि जल्द से जल्द घर आ जाओ..
जय- अरे यार उनको बता कर आए थे ना कि हम एक हफ़्ता फार्म पर रहेंगे। यह तो गेम की वजह से आज जाना पड़ रहा है.. वैसे हुआ क्या?
विजय- अरे यार आने के पहले तुमको कोई पेपर साइन करने को कहा था.. तू जल्दी में भूल गया.. उसी के लिए गुस्सा हैं और हमसे क्या काम होगा?
जय- ओह.. शिट.. अब तो पापा और चिल्लाएँगे.. मुझे भी यहाँ आने के चक्कर में याद नहीं रहा..
विजय- अब बातें बन्द कर.. जल्दी रेडी हो जा.. नहीं तो और सुनना पड़ेगा। मैं रानी को उठा कर रेडी करवाता हूँ।
विजय दरवाजे के पास गया.. तभी रानी ने दरवाजा खोल दिया।
विजय- अरे उठ गई रानी रानी.. मैं अभी तुम्हारे पास ही आ रहा था.. अच्छा हुआ तू खुद आ गई और कमाल की बात है तू तो रेडी हो गई..
रानी- हाँ.. विजय जी.. मैं तैयार हूँ और आपको जगाने आई.. तो आपकी बात भी मैंने सुन ली थी। आप तो तैयार हो जय जी भी तैयार हो जाएं.. तो हम निकल जाएँगे.. मगर मुझे गाँव नहीं जाना.. आप मुझे अपने साथ ही ले चलो ना.. मैं आपके बिना नहीं रह सकती.. कुछ भी करो.. मुझे ले चलो..
विजय- अरे पगली.. ऐसे डायरेक्ट घर नहीं ले जा सकते.. तू बात को समझ .. जल्दी हम वापस आएँगे.. यहाँ एक खेल होने वाला है.. उसके बाद तुमको शहर साथ ले जाएँगे।
रानी ने बहुत ज़िद की.. मगर विजय ने उसको समझा कर मना लिया कि वो अगली बार उसको साथ ले जाएँगे और उसको 5000 रुपये भी दिए.. जिससे रानी खुश हो गई।
तब तक जय भी तैयार हो गया था, सबने जल्दी से नाश्ता किया और वहाँ से निकल गए।
दोस्तो, मेरे पास कुछ दोस्तों के ईमेल आए कि यहाँ के नौकरों का कोई नाम और जिक्र मैंने नहीं किया.. तो आपको बता दूँ.. उनका ऐसा कोई खास रोल ही नहीं है.. तो नाम जानकर क्या करोगे? ओके आगे का हाल देखो..
गाड़ी विजय चला रहा था और जय पीछे रानी के साथ बैठा हुआ उसके होंठों पर उंगली घुमा रहा था.. उसके मम्मों को दबा रहा था।
रानी- क्या हुआ जय जी.. आप तो बड़े बेसबरे हो रहे हो.. रात को मन नहीं भरा क्या आपका?
जय- अरे रात को तूने पूरा मज़ा लेने कहाँ दिया था..
विजय- हाँ.. भाई दो बार में ही थक गई थी ये.. अब अगली बार इसको बराबर चोद कर मज़ा लेंगे।
रानी- अरे आप लोगों के लिए 2 बार हुआ होगा.. मेरे लिए तो 4 बार हो गया था। आप दोनों अलग-अलग क्यों नहीं करते… जैसे एक रात जय जी और और एक रात आप.. तब ज़्यादा मज़ा आएगा.. आप दोनों को और मुझे भी..
जय- मेरी जान तेरी गाण्ड की सील खुल जाने दे.. उसके बाद तू खुद दोनों को एक साथ बुलाएगी.. क्योंकि तुझे आगे और पीछे एक साथ मज़ा मिलेगा और हो सकता है तीसरा भी माँग ले.. मुँह के लिए हा हा हा हा..
रानी- जाओ.. आप बहुत बदमाश हो कुछ भी बोल देते हो..
वो तीनों ऐसे ही बातें करते हुए जा रहे थे। कब रानी का गाँव आ गया.. पता भी नहीं चला.. वहाँ उसकी माँ को उन्होंने कहा- रानी बहुत अच्छा काम करती है.. और जल्दी ही इसको शहर ले जाएँगे।
जय ने उसकी माँ को एक हजार रुपये दिए- ये रखो.. आगे और ज़्यादा देंगे..
मगर जब वो वहाँ खड़े बातें कर रहे थे एक लड़का जो करीब 21 साल का होगा वो छुप कर उनको देख रहा था और उसके माथे पर बहुत पसीना आ रहा था जैसे उसने कोई भूत देख लिया।

कुछ देर वहाँ रहने के बाद वो दोनों वहाँ से शहर के लिए निकल गए।
गाड़ी में विजय ने जय को कहा कि रानी को और पैसे क्यों दिए.. मैंने सुबह उसको 5 हजार दे दिए थे।
जय- अरे यार ऐसी कच्ची कली के आगे ये पैसे क्या हैं चलेगा.. अगली बार डबल का मज़ा लेंगे ना..
विजय- वो बात नहीं है यार.. पैसे तो कुछ नहीं.. मगर इतने पैसे देख कर उसकी माँ को शक ना हो जाए..
जय- अरे कुछ नहीं होगा यार.. तू सोचता बहुत है.. चल अब जल्दी कर.. नहीं पापा का गुस्सा और बढ़ जाएगा और वो जाते ही बरस पड़ेंगे।
विजय ने गाड़ी की स्पीड बढ़ा दी और गाड़ी तेज़ी से दौड़ने लगी।
उधर इनके जाने के बाद सरिता बहुत खुश हो गई और रानी को गले से लगा कर प्यार करने लगी।
सरिता- बेटी वहाँ तुमको कोई परेशानी तो नहीं हुई ना?
रानी- नहीं माँ.. वहाँ पहले से बहुत नौकर हैं मुझे तो ज़्यादा काम भी नहीं करना पड़ा और ये दोनों बाबूजी भी बहुत अच्छे हैं इन्होंने मुझे वहाँ अच्छी तरह रखा।
वो दोनों अभी बातें कर ही रही थीं तभी वहाँ वो लड़का भी आ गया जो बहुत गुस्से में दिख रहा था।
दोस्तो, इसका परिचय भी दे देती हूँ.. यह जेम्स है इसी गाँव का है.. और रानी की माँ को काकी बोलता है।
जेम्स- क्यों काकी.. कितना कमा के लाई है रानी रानी.. जरा मुझे भी बताओ?
जेम्स को देख कर रानी खुश हो गई और जल्दी से रानी ने उसका हाथ पकड़ कर उसको घुमा दिया।
रानी- अरे जेम्स तू आ गया शहर से.. अरे कितने दिन मैंने तुझे याद किया… देख मुझे भी नौकरी मिल गई.. ये बाबू लोग बहुत अच्छे हैं।
सरिता- तुम दोनों बातें करो.. मैं खाना बना देती हूँ.. आज मेरी बिटिया को अपने हाथ से खाना खिलाऊँगी।
जेम्स- हाँ.. रानी अब बता.. यह सब क्या है.. तू उनके साथ कैसे गई.. मुझे सारी बातें विस्तार से बता?
रानी ने उसको सब बता दिया.. बस चुदाई की बात नहीं बताई.. झूट मूट काम का बोलकर अपनी बात पूरी की।
जेम्स- रानी तुम दोनों माँ-बेटी पागल हो गई हो.. ये बड़े घर के बिगड़े हुए लड़के हैं.. तुम इनको नहीं जानती.. ये कुछ भी कर सकते हैं। पता है ये कौन हैं..? मैंने शहर में इनको उस कुत्ते के साथ देखा है.. ये उसके ही साथी हैं ओह.. रानी तुम कैसे इनके यहाँ काम कर सकती हो.. इन लोगों की वजह से ही हमारी आशा हमसे दूर हो गई.. तुम भूल गई क्या वो दिन? 
रानी- तुम क्या बोल रहे हो जेम्स.. नहीं नहीं.. ऐसा नहीं हो सकता.. ये उसके साथी नहीं हो सकते.. वो दिन मैं कैसे भूल सकती हूँ.. नहीं तुमको कोई धोखा हुआ है शायद..
जेम्स- नहीं रानी.. मुझे कोई धोखा नहीं हुआ.. कुछ दिन पहले मैंने इन दोनों के साथ उस जालिम को देखा है। मैं उसकी सूरत कभी नहीं भूल सकता तुम मानो या ना मानो.. मगर इन दोनों का उसके साथ कोई ना कोई सम्बन्ध जरूर है..
जेम्स की बात सुनकर रानी के चेहरे का रंग उड़ गया.. उसकी आँखों में आँसू आ गए।
जेम्स- अरे क्या हुआ रानी.. तू क्यों रो रही है.. रोना तो उस कुत्ते को होगा। अब मैं शहर में नौकरी करने नहीं बल्कि उसको ढूँढने गया था। अब उसका पता ठिकाना मुझे पता चल गया है.. बस बहुत जल्द मैं उसको सबक़ सिखा दूँगा.. तू देखती जा..
रानी- हाँ.. जेम्स उसको छोड़ना नहीं.. उसने आशा के साथ बहुत बुरा किया था और एक बार मुझे भी उसको दिखाना। उस दिन मेरे मुँह पर कीचड़ था तो मैं उसको देख नहीं पाई थी।
जेम्स- हाँ.. रानी अबकी बार जब मैं शहर जाऊँगा.. तो तुम भी साथ चलना.. मैं तुमको दिखा दूँगा और हाँ.. अब तुम इन दोनों से साफ-साफ कह देना कि तुमको इनकी नौकरी नहीं करनी।
रानी- नहीं जेम्स.. सच में ये दोनों भाई बहुत अच्छे हैं हो सकता है.. वो इनका साथी हो.. मगर ये अच्छे लोग हैं और मुझे जल्दी शहर लेकर जाएँगे.. तब हम आसानी से उसको सबक़ सिखा देंगे.. सही है ना?
जेम्स- नहीं रानी.. तू बहुत भोली है.. इन अमीरों को नहीं जानती.. ये अच्छे बन कर भोली भाली लड़की का दिल जीत लेते हैं.. उसके बाद उसकी इज़्ज़त को तार-तार कर देते हैं।
जेम्स की बात सुनकर रानी सहम गई क्योंकि उसने तो अपनी इज़्ज़त गंवा दी थी.. मगर वो जेम्स को ये सब नहीं बताना चाहती थी.. इसलिए उसने बात को काटकर दूसरी बात शुरू कर दी।
कुछ देर बाद सरिता भी आ गई और वो सब बातों में लग गए। 
उधर विजय और जय तेज़ी से घर की तरफ़ जा रहे थे.. तभी जय का फ़ोन बजने लगा। स्क्रीन पर पापा का नम्बर देख कर वो थोड़ा परेशान हो गया।
विजय- भाई किसका फ़ोन है.. उठाते क्यों नहीं.. कब से बज रहा है?
जय- अरे यार पापा का है.. अब इनको भी बहुत जल्दी है क्या करूँ?
विजय- करना क्या है.. बोल दो बस पहुँचने वाले हैं..
जय ने फ़ोन उठाया तो सामने से गुस्से में आवाज़ आई- कहाँ हो तुम दोनों.. अब तक आए क्यों नहीं?
जय- बस पापा पहुँचने ही वाले हैं आप गुस्सा मत हो..
पापा- अरे गुस्सा कैसे नहीं होऊँ.. तुमसे एक काम भी ठीक से नहीं होता.. ये पेपर बहुत जरूरी हैं आज मुझे कहीं देने हैं अब बिना कहीं रुके सीधे घर आ जाओ बस..
फ़ोन रखने के बाद जय की जान में जान आई.. उसने विजय को स्पीड और तेज़ करने को कहा।
दोस्तो, इनको घर जाने की बहुत जल्दी है और शायद आपको भी तो चलो इनसे पहले मैं आपको वहाँ ले जाती हूँ ताकि उस घर में रहने वाले लोगों को आप जान लो और कहानी को समझ सको।
जय के पापा रणविजय खन्ना का इंट्रो मैंने शुरू में दे दिया था.. मगर आप भूल गए होंगे तो दोबारा बता देती हूँ।
रणविजय खन्ना की उमर करीब 42 साल की है.. अच्छी परसनेल्टी के मलिक हैं दिल्ली के बड़े प्रॉपर्टी डीलर हैं.. थोड़े गुस्से वाले भी हैं। इनकी धर्म पत्नी काम्या खन्ना.. जो एक धार्मिक किस्म की औरत हैं। उम्र लगभग 40 साल.. सांवला रंग और कम ऊँचाई की घरेलू औरत हैं।
इनके घर में प्रीति खन्ना भी इनके साथ ही रहती हैं उनकी उमर करीब 39 साल है.. रंग गोरा और दिखने में अभी भी 30 की लगती हैं। इन्होंने अपना फिगर भी मेंटेन किया हुआ है। 36-28-36 का फिगर बड़ा ही जबरदस्त लगता है। ये विजय की माँ हैं अपने पति आकाश की आकस्मिक मौत के बाद यहीं रहती हैं। 
वैसे तो दोनों भाई साथ मिलकर काम करते थे.. मगर आकाश की मौत के बाद सारा काम रणविजय ही संभालता है.. और विजय को अपने बेटे से ज़्यादा मानता है। इनके अलावा कुछ नौकर हैं.. जिनका इंट्रो देना जरूरी नहीं..
अरे अरे.. एक बात बताना भूल गई.. रश्मि को तो आप जानते ही हो.. वो भी रणविजय की ही बेटी है… मगर कुछ वजह से वो यहाँ नहीं रहती.. ज़्यादातर हॉस्टल में ही रहती है। बस छुट्टियों में यहाँ आती है.. अब इसके पीछे का कारण भी आप जानते हो.. वो अपनी चाची से नफ़रत करती है.. याद है ना उसने काजल को बताया था कि उसके पापा और उसकी चाची के बीच नाजायज़ सम्बन्ध हैं। अब वो सब कैसे और क्यों हैं.. इसका समय अभी नहीं आया.. सही समय पर सब बता दूँगी ओके..। तो चलो जान-पहचान हो गई.. अब घर में एंट्री मारते हैं।
रणविजय सोफे के पास चक्कर लगा रहा था.. तभी काम्या आ गई।
काम्या- आप आराम से बैठ जाए ना.. आ जाएँगे वो दोनों..
रणविजय- अरे क्या खाक बैठ जाऊँ.. ये पेपर मुझे लंच के पहले देने हैं.. नहीं बहुत नुकसान हो जाएगा..
काम्या- ओह्ह.. अब परेशान मत हो आप.. वो जल्दी आ जाएंगे और आप भी ना.. जब आपको पता है ये बच्चे लापरवाह हैं तो क्यों कोई ज़मीन इनके नाम पर लेते हो।
रणविजय- अरे खून है मेरा.. इनके नाम ज़मीन नहीं लूँगा तो किसके नाम पर लूँगा.. हाँ.. अब तुम जाओ मेरा दिमाग़ ना खराब करो।
रणविजय का गुस्सा देखकर काम्या वहाँ से अपने कमरे की तरफ़ चली गई.. कुछ ही देर बाद प्रीति ऊपर से नीचे आई और सोफे पर बैठ गई।
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