XXX CHUDAI नौकरी के रंग माँ बेटी के संग
09-20-2017, 11:37 AM,
#11
RE: XXX CHUDAI नौकरी के रंग माँ बेटी के संग
‘चलो मैं तुम लोगों को विदा कर देती हूँ फिर वापस आकर समीर जी के लिए चाय और नाश्ता बना दूँगी।’ रेणुका ने चाय का बर्तन रखने के लिए रसोई की तरफ कदम बढ़ाये और इधर वन्दना मेरे पास आकर खड़ी हो गई।
‘समीर जी, अपनी सेहत का ख्याल रखिये और आराम कीजिये, आशा करती हूँ कि मेरी माँ आपकी हर तरह से मदद करेंगी ताकि आप जल्दी ठीक हो जाएँ… फिर मैं कल वापस आकर चैक करुँगी कि आपकी तबियत ठीक हुई या नहीं।’ यह कहते हुए वन्दना ने मुझे ऊपर से नीचे तक देखा और वही हुआ जिसका डर था।
उसकी नज़र मेरे बरमूडा में छिपे सर उठाये शैतान पे चली गई जो अभी अभी उसकी माँ की गाण्ड को रगड़ कर तन गया था और लोहे की छड़ की तरह कड़क हो गया था।
उसकी आँखे खुल सी गईं और एक पल को वहीं अटक गईं।
उसने एक नज़र मेरी तरफ देखा मानो पूछना चाह रही हो कि यह क्या और क्यूँ है।
वन्दना की उम्र इतनी हो चुकी थी कि उसे इसका मतलब समझ में आ सकता था।
लेकिन उस वक़्त उसके मन में क्या सवाल आ रहे थे, यह बताना मुश्किल था।
उसके चेहरे पर बस उस तरह के भाव थे जैसे एक चूत को लंड देख कर होता है।
मेरे लिए यह एक अच्छी बात थी कि माँ तो माँ बेटी को भी इसका चस्का है। यानि मेरे लिए तो मज़े ही मज़े थे।
वन्दना की आँखें मेरे लंड पे टिकी थीं और तभी रेणुका जी बर्तन रख कर आईं और वन्दना का हाथ थम कर बाहर जाने लगीं।
उन्होंने मुड़कर मेरी तरफ देख और मुस्कुराते हुए कहा- समीर बाबू, आप तबतक फ्रेश हो लीजिये मैं अभी तुरन्त वापस आकर आपके लिए चाय और नाश्ते का इन्तजाम करती हूँ।
मैं तो ख़ुशी से पागल हो गया… एक तो रेणुका जी के मन में मुझसे चुदने का ख्याल भरा पड़ा था और ऊपर से यह भी पता चला किउसके पति अरविन्द जी और उनकी बेटी वन्दना कल शाम तक के लिए घर पर नहीं होंगे।
यानि कल शाम तक मैं रेणुका को नंगा करके उनकी खूबसूरत काया का जी भर के रसपान कर सकूँगा और उन्हें रहते दम तक चोदूँगा…
तीन महीनों के उपवास का इतना अच्छा फल मिलेगा, यह सोचा भी नहीं था।
मैंने फटाफट अपने ऑफिस में फोन कर दिया कि मेरी तबियत ठीक नहीं है और मैं दो दिन नहीं आऊँगा।
फिर जल्दी से बाथरूम में गया और फ्रेश होकर नहाने लगा।
नहाते नहाते अपने तड़प रहे लंड को सहलाने लगा और उसे मनाने लगा कि बेटा बस थोड़ी देर ठहर जा, फिर तो आज तेरा उपवास टूटने ही वाला है।
लेकिन वो हरामी माने तब न… ठुनक ठुनक कर अपनी उत्तेजना दर्शाने लगा… तब मज़बूरी में मुझे मुठ मरकर उसे शांत करना पड़ा।
मैंने यह सोच कर भी मुठ मार लिया था ताकि रेणुका जी को देर तक और मज़े ले लेकर चोद सकूँगा।
मैंने ख़ुशी के मारे बाहर का दरवाज़ा बंद ही नहीं किया था और बस बाथरूम में घुस कर नहाने लगा था।
जब बाथरूम से बाहर निकला तो मैंने एक तौलिया लपेट रखा था।
जैसे ही बाहर आया तो देखा की बाहर का दरवाज़ा लॉक है और रसोई से बर्तनों की आवाज़ आ रही है, मैं समझ गया कि रेणुका ही होगी…
मैं दबे पाँव रसोई की तरफ बढ़ा तो देखा कि रेणुका दीवार की तरफ मुँह करके चूल्हे पर दूध गर्म कर रही थी।
मुझसे रहा न गया और मैंने आगे बढ़कर पीछे से उन्हें अपनी बाहों में जकड़ लिया।
मेरी दोनों बाहों में सिमट कर रेणुका चौक पड़ी और गर्दन घुमाकर मुझे देखने लगी।
उनकी आँखों में एक शर्म, एक झिझक और इन सब के साथ लंड लेने की तड़प साफ़ दिखाई दे रही थी।
‘ओह्ह… छोड़िये भी समीर जी… क्या कर रहे हैं… कोई देख लेगा तो मुसीबत आ जाएगी !!’… रेणुका ने मुझसे लिपटते हुए बड़े ही सेक्सी आवाज़ में कहा।
बस इतना इशारा काफी था… दोस्तो, जब कोई लड़की या औरत आपसे यह कहे कि कोई देख लेगा तब समझो कि उसकी चूत में कीड़ा काट रहा है और वो चाहते हुए भी न चाहने का नाटक कर रही है।
मैं तो पहले से ही इन बातों का आदी था… सो मैंने उनकी एक न सुनी और उन्हें घुमाकर अपनी बाहों में भर लिया।
उनका चेहरा मेरी चौड़ी छाती से चिपक गया और उन्होंने तेज़ तेज़ साँसों के साथ अपनी आँखें बंद कर लीं।
-  - 
Reply
09-20-2017, 11:37 AM,
#12
RE: XXX CHUDAI नौकरी के रंग माँ बेटी के संग
उनके हाथ अब भी बिना किसी करकट के शिथिल पड़े थे और मैं उन्हें अपने बाहों में मसल रहा था।
उनकी गुन्दाज़ चूचियों को अपने बदन पे साफ़ महसूस कर सकता था मैं जो धीरे धीरे अपना आकार बढ़ा रही थीं।
‘उफ… छोड़िये न समीर बाबू… दूध उबल जायेगा…’ रेणुका ने मुझसे चिपके हुए ही मुझे छोड़ने की मिन्नत की लेकिन वो खुद हटना नहीं चाह रही थी।
मैंने धीरे से उन्हें अपनी बाहों से आजाद किया और उन्हें अपने सामने खड़ा किया ताकि मैं उन्हें ठीक से देख सकूँ।
रेणुका काँप रही थी और उनकी साँसें बहुत तेज़ चल रही थीं।
जब मैंने उसे अलग किया तब उन्होंने अचानक अपनी आँखें खोली मानो यूँ अलग होना उन्हें अच्छा नहीं लगा हो।
उन्होंने प्रश्नवाचक अंदाज़ में मेरी आँखों में देखा।
‘आप ठीक कह रही हैं… दूध तो सच में उबल रहा है… इसे तो शांत करना ही होगा…!!’ मैंने अपने हाथ उनकी चूचियों पे रखते हुए कहा।
‘उफ्फ… बड़े वो हैं आप!’ रेणुका ने लजाते हुए कहा और फिर वापस मुझसे लिपट गई।
‘हाय… वो मतलब… जरा हमें भी तो बताइए कि हम कैसे हैं..?’ मैंने उनकी चूचियों को दबाते हुए पूछा।
‘जाइए हम आपसे बात नहीं करते…’ रेणुका ने बड़े ही प्यार से कहा और मेरे सीने पे मुक्के मारने लगी।

ऐसा लग रहा था जैसे वो मेरी बीवी हो और हम अपनी पहली चुदाई करने जा रहे हों…
और वो शरमा कर और प्यार-मनुहार से मुझसे अपनी चूत फड़वाना चाह रही हो।
कसम से दोस्तो… इतनी चूतें मारी हैं आज तक लेकिन इतने प्यार से कभी किसी के साथ चुदाई का मज़ा नहीं आया था।
मैंने थोड़ा झुक कर उनके दो नाज़ुक रसीले होठों को अपने होठों में भर लिया और एक प्रगाढ़ चुम्बन में व्यस्त हो गया।
उन्होंने भी मेरा साथ दिया और बड़े प्यार से मेरे बालों में अपनी उँगलियाँ फिराते हुए मेरे चुम्बन का जवाब और भी गर्मजोशी से देने लगी।
मैंने धीरे से अपनी जीभ उनके मुख में डालने की कोशिश की लेकिन मेरे मन में यह ख्याल आया कि शायद छोटे शहर की देसी औरत होने की वजह से उन्हें यूँ फ्रेंच चुम्बन करने का तजुर्बा नहीं होगा लेकिन मेरे ख्याल को गलत साबित करते हुए उन्होंने मेरी जीभ को अपने होठों से चूसना शुरू कर दिया और अपनी जीभ मेरी जीभ से मिलाकर वो मज़ा दिया कि बस मज़ा ही आ गया।
चुम्बन के बीच मैंने अपना एक हाथ उनके गाउन के बेल्ट की तरफ किया और बेल्ट को धीरे से ढीला कर दिया।
वो रेशमी कपडा हल्के से झटके से ही पूरा खुल गया और अब उनका गाउन सामने से दो भागों में बंट गया।
मैंने उन्हें अपने बदन से और भी चिपका लिया और इस बार उनके बदन की त्वचा सीधे मेरे बदन से चिपक गई थी।
मैंने भी ऊपर कुछ नहीं पहना था इसलिए सीधे मेरी त्वचा से उनकी त्वचा का संगम हो गया।
रेणुका जी ने अपना बदन मेरे बदन से रगड़ना शुरू कर दिया और मेरे होठों को बिल्कुल खा जाने वाले अंदाज़ में चूसने लगीं।
मुझसे अब बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था, मैंने उन्हें कमर से पकड़ कर उठा लिया और रसोई के स्लैब पर बिठा दिया। 
अब स्थिति यह थी कि रेणुका जी थोड़ा ऊपर होकर स्लैब पर बैठ गई थीं… उनके पैर दो तरफ फ़ैल गए थे जिनके बीच में मैं खड़ा था और उनका गाउन दो तरफ लुढ़क चुका था।
कुल मिलकर वो नजारा इतना सेक्सी था कि बस पूछिए मत।
मैंने जरा भी देरी न करते हुए उनकी दोनों खूबसूरत गोलाइयों को अपनी हथेली में भर लिया और मसलने लगा।
‘उम्म्म… म्म्म… समीईईर… उफफ्फ… यह क्या कर दिया आपने… कई सालों के दबे मेरे अरमानों को यह कैसी हवा दे दी… हम्म्म्म… बस ऐसे ही प्यार करते रहो…’ रेणुका जी ने मदहोशी में अपनी गर्दन पीछे की तरफ झुका दी और अपने सीने को और भी उभार दिया।
इस तरह से उनकी चूचियाँ और भी तन गई और मैं उन्हें अब सहलाने के साथ साथ धीरे धीरे दबाने लगा… मेरी पकड़ अब बढ़ने लगी थी और मैंने अब और भी ज्यादा दबाव बढ़ा दिया।
‘उफ्फ्फ… समीर बाबू… जरा धीरे दबाइए… अब तो ये आपके ही हैं…’ रेणुका जी ने दर्द महसूस करते हुए मेरे बालों को अपनी उँगलियों से खींचते हुए कहा।
मेरे बालों के खींचने से मुझे भी यह एहसास हुआ कि शायद मैं कुछ ज्यादा ही जोर से उनकी चूचियों को मसल और दबा रहा था।
लेकिन यह बात तो आप सब जानते हैं और खास कर महिलायें की जब मर्द यूँ बेदर्दी से चूचियों को मसलता और दबाता है तो वो मीठा मीठा दर्द महिलाओं को और भी मदहोश कर देता है।
खैर मैंने अब अपनी गर्दन झुकाई और उनकी बाईं चूची के ऊपर अपने होठों से चुम्बन करने लगा… चूमते चूमते मैंने उनकी चूची के दाने को अपने मुँह में भर लिया।
‘ऊऊऊह… माआआ… उफ्फ्फ समीर बाबू… बस चूस डालिए इन्हें… कई दिनों से इन्हें किसी ने भी इस तरह नहीं चूसा… उफ्फ्फ्फ़!’ रेणुका जी ने एक आह भरी और बड़बड़ाते हुए मेरे सर को पकड़ कर अपनी चूचियों पे दबा दिया।
-  - 
Reply
09-20-2017, 11:37 AM,
#13
RE: XXX CHUDAI नौकरी के रंग माँ बेटी के संग
मेरा एक हाथ उनकी दूसरी चूची को सहला रहा था जो उन्हें और भी गर्म कर रहा था। मैंने काफी देर तक उनकी चूचियों का रस अदल बदल कर पिया और फिर अपने दोनों हाथों से उनकी मखमली जांघों को सहलाने लगा।
जैसे जैसे मैं अपने हाथ ऊपर की तरफ ले जाता वो और ही सिसकारने लगती और मुझे अपनी तरफ खींचने लगती।
आखिरकार मेरे दोनों हाथ उनकी जांघों के आखिरी छोर पर पहुँच गए और उनकी रेशमी झांटों भरी चूत से टकरा गए।
‘हाय… उफ़ समीर बाबू… छोड़ दीजिये हमें… हम पागल हो जायेंगे… उम्म्ह…’ रेणुका जी ने एक गहरी सांस भरते हुए मेरे हाथों को पकड़ लिया और मेरे हाथ वहीं टिक गए।
अब बस मेरी उँगलियाँ ही आजाद थीं और वो उनकी चूत को ढके हुए रेशमी मुलायम झांटों से खेलने लगीं।
मेरी उँगलियों को उस गीलेपन का एहसास हुआ जो अक्सर ऐसे मौके पर चूत से बह निकलता है… यानि रेणुका जी की चूत ने चुदाई के पहले निकलने वाले काम रस की बौछार कर दी थी।
उन्होंने मेरे हाथों को मजबूती से पकड़ रखा था जिसकी वजह से मेरे हाथ और कुछ भी नहीं कर पा रहे थे। 
यूँ तो हम मर्दों में इतनी ताक़त होती है कि हम आसानी से इन बाधाओं को दूर करते हुए अपनी मर्ज़ी से सब कुछ कर सकते हैं लेकिन मेरे विचार से ऐसी स्थिति में महिलाओं की मर्ज़ी के मुताबिक ही आगे बढ़ें तो ज्यादा मज़ा है।
खैर मैंने अपने हाथों को छुड़ाने की कोशिश नहीं की और धीरे से झुक कर उनके सपाट पेट को चूमने लगा।
उनकी बेचैनी और बढ़ गई।
मैंने धीरे से उनकी गोल छोटी सी खूबसूरत सी नाभि को चूमा और अपनी जीभ का सिरा नाभि में डाल दिया।
मेरा इतना करना था कि रेणुका जी ने मेरा हाथ छोड़ दिया और मेरा सर पकड़ लिया।
मैं बड़े मज़े से उनकी नाभि को अपनी जीभ से चोदने लगा और वो सिसकारियों पे सिसकारियाँ भरने लगीं!
अब हाथ पकड़ने की बारी मेरी थी क्योंकि अब मैं वो करने वाला था जिससे कोई भी महिला एक बार तो जरूर उत्तेजनावश उछल पड़ती है।
आपने सही समझा, मैंने रेणुका जी के हाथ पकड़ लिए और अपने होठों को सीधा उनकी गदराई फूली हुई चूत पे रख दिया।
‘आआअह्ह्ह्ह… ये ये ये… क्क्क्या कर दिया आपने समीर जी… उफ्फ्फ्फ़… ऐसा मत कीजिये… मैं मर ही जाऊँगी… उम्म्मम्ह…’ रेणुका ने टूटती आवाज़ में अपने बदन को बिल्कुल कड़क करते हुए कहा।
‘रेणुका भाभी… अब आप वो मज़ा लो जो शायद आपको अरविन्द जी ने भी कभी न दिया हो…’ मैंने एक बार उनकी चूत से मुँह हटाते हुए उनकी आँखों में झांक कर कहा और आँख मार दी।
रेणुका जी बस मुझे देखती ही रही, कुछ कह नहीं पाई…
उससे पहले ही मैंने फिर से अपना मुँह नीचे किया और इस बार अपनी जीभ निकाल कर उनकी योनि की दरार में ऊपर से नीचे तक चलने लगा।
‘उम्म्म्ह… उम्म्म्माह… हाय समीर बाबू… यह कौन सा खेल है… ऐसा तो मेरे साथ कभी नहीं हुआ… प्लीज ऐसा मत कीजिये… मुझसे बर्दाश्त नहीं होगा…’ रेणुका तड़पती हुई अपनी जांघों से मेरा सर दबाने लगी और अपने हाथों को छुड़ाने की कोशिश करने लगी।
मैंने उनके हाथों को बिना छोड़े अपनी जीभ से उनकी छोट की फांकों को अलग करके रास्ता बनाया और अब अपनी जीभ को उनके चूत के द्वार पे रख दिया…
एक भीनी सी खुशबू जिसे मैं तीन महीनों से ढूंढ रहा था, वो अब जाकर मुझे महसूस हुई थी।
मैंने अपनी पूरी जीभ बाहर निकाल ली और उनके चूत के अन्दर ठेलना शुरू कर दिया।
‘हाय राम… उफफ… उम्म्मम्म… तुम बड़े वो हो समीर… उम्म्मम्म… ‘ रेणुका ने अब अपना शरीर ढीला छोड़ दिया था और अपनी जाँघों को और भी फैला कर अपनी चूत की चुसाई और चटाई का मज़ा ले रही थी।
अब मैंने उनके हाथ छोड़ दिए और अपने हाथों से उनकी चूचियों को फिर से पकड़ कर सहलाना शुरू कर दिया।
अब रेणुका जी ने अपने हाथों से मेरा सर पकड़ लिया और अपनी चूत पर दबाने लगीं।
मैं मज़े से उनकी चूत चाट रहा था लेकिन मुझे चूत को अच्छी तरह से चाटने में परेशानी हो रही थी।
उनकी चूत अब भी बहुत सिकुड़ी हुई थी, शायद काफी दिनों से नहीं चुदने की वजह से उनकी चूत के दरवाज़े थोड़े से सिकुड़ गए थे।
मैंने अपना मुँह हटाया और उनकी तरफ देखा।
उनकी आँखें बंद थीं लेकिन अचानक से मुँह हटाने से उन्होंने आँखें खोलीं और मेरी तरफ देख कर पूछा- क्या हुआ समीर बाबू… थक गए क्या?
‘नहीं रेणुका मेरी जान… जरा अपनी चूत को अपने कोमल हाथों से फैलाओ तो सही ताकि मैं पूरा अन्दर घुस सकूँ।’ यह कहते हुए मैंने उन्हें आँख मारी और एक बार उनकी चूत को चूम लिया।
‘छीः… गंदे कहीं के… ऐसे भी कोई बोलता है क्या?’ रेणुका ने मेरे मुँह से यूँ खुल्लम खुल्ला चूत सुनकर शरमाते हुए कहा।
-  - 
Reply
09-20-2017, 11:37 AM,
#14
RE: XXX CHUDAI नौकरी के रंग माँ बेटी के संग
‘अरे मेरी जान… चुदाई का मज़ा तब ही है जब हम खुलकर इन सब बातों को बोलते हुए चोदा-चोदी करें… यकीन मानिए बहुत मज़ा आएगा… एक बार कोशिश तो कीजिये।’ मैंने उनकी चूचियों को दबाते हुए उनके गालों पे चुम्बन लिया और अपने हाथों से उनका हाथ पकड़कर उनकी चूत को फ़ैलाने के लिए इशारा किया।
रेणुका जी की चूत को मेरी जीभ का चस्का लग चुका था इसलिए अब वो भी खुलकर इस खेल का मज़ा लेना चाह रही थी।
उन्होंने शरमाते हुए अपने हाथों से अपनी चूत को थोड़ा सा फैला दिया और लज्जावश अपने शरीर को पीछे की दीवार पर टिका दिया ताकि मैं उनसे नज़रें न मिला सकूँ।
मैंने अब उनकी जांघों को थोड़ा और फैला दिया ताकि उन्हें भी अपनी चूत फाड़कर चटवाने का पूरा मज़ा मिल सके और उनकी चूचियों को थाम कर चूत के अन्दर अपनी पूरी जीभ डालकर चाटना शुरू कर दिया।
‘ओहह… समीर… उफफ्फ्फ्फ़… मेरे प्रियतम… यह क्या कर दिया तुमने… ऐसा तो कभी सोचा भी न था कि कोई मेरी… कोई मेरी…!’ रेणुका इतना बोलकर चुप हो गई…
शायद शर्म और नारी सुलभ लज्जा ने उनके होंठ बंद कर दिए थे।
‘कोई मेरी क्या भाभी…? बोलो न… प्लीज बोलो न…!’ मैंने चूत चाटने बंद करके उनसे बोलने का आग्रह किया।
‘कोई मेरी… कोई मेरी… चू चू चूत भी चाटेगा… उफ्फ्फ्फ़…’ रेणुका ने काम्पते और लजाते शब्दों में आखिर चूत का नाम ले ही लिया।
उनके मुख से चूत सुनते ही मेरा जोश दोगुना हो गया और मैंने जोर जोर से उनकी चूत को चाट चाट कर चूसना चालू कर दिया।
‘हाँ… उफ्फ्फ़… बस ऐसे ही… उम्म्म्म… हाय…’ रेणुका की सिसकारियाँ बढ़ गईं।
उसका बदन अकड़ने लगा और उसने मेरे सर के बालों को खींचना शुरू कर दिया।
मैं समझ गया कि अब वो झड़ने वाली है… मैंने और भी तेज़ी से चाटना शुरू किया और बस कुछ ही पल में उकी चूत ने ढेर सारा माल मेरे मुँह में उड़ेल दिया… पता नहीं कितने सालों से जमा कर रखा था इसको।
झड़ते ही उन्होंने अपना बदन एकदम ढीला छोड़ दिया और बिल्कुल निढाल सी हो गई… मैं उनसे थोड़ा अलग होकर उन्हें देखने लगा…
क्या मस्त नजारा था… वो दीवार पर अपना बदन टिकाये अपनी जाँघों को फैलाये अपने हाथों से अपनी चूत को मसल रही थी।
ये नज़ारा देखने लायक था।
अब इतनी देर से मेरे लण्ड ने जो आफत मचा रखी थी उसने भी सिग्नल दे दिया कि अब अगर चूत में नहीं गया तो बाहर ही अपना सारा लावा उगल देगा।
मुझसे रहा नहीं गया और मैंने झट से अपना तौलिया खोला और अपने लंड को अपने हाथों से सहलाते हुए हुए रेणुका जी के करीब आ गया।
उनकी बहती हुई चूत मेरे लंड को निर्विरोध आमंत्रण दे रही थी।
रेणुका जी अब भी अपनी आँखें बंद किये चूत के झड़ने का मज़ा ले रही थीं।
मैं धीरे से आगे बढ़ा और अपने लंड के सुपारे को चमड़ी से बाहर निकालकर उनकी गीली बहती चूत पर रगड़ने लगा।
जैसे ही मैंने लण्ड का सुपारा उनकी चूत के मुँह पे रखा उनकी आँखे खुल गईं और उन्होंने अपना हाथ आगे बढ़ा कर देखने की कोशिश की।
उनका हाथ मेरे गर्म तन्नाये लंड से टकरा गया और उन्होंने चौंक कर नीचे देखा।
एक अच्छे खासे डील डौल वाले तगड़े लंड को देख कर एक बार तो उनकी आँखें चौड़ी हो गईं… लेकिन चूत की चुसाई और इतने देर से चल रहे खेल ने अब उन्हें बेशर्म बना दिया था और उन्होंने अब आगे बढ़ कर मेरे लौड़े को अपने हाथों में थाम लिया।
‘हाय राम… कितना गर्म और कितना कड़क है तुम्हारा ये…’ रेणुका फिर कुछ बोलते बोलते रुक गई।
‘मेरा क्या रेणुका जी…? बोल भी दीजिये!’ मैंने अपने लंड को उनके हाथों में रगड़ते हुए कहा।
‘तुम्हारा… तुम्हारा लंड…’ और इतना कह कर शरमा कर आँखें तो बाद कर लीं लेकिन लौड़े को वैसे ही पकड़े रही।
फिर जब मैंने धीरे धीरे चूत के मुँह पर लंड को रगड़ना शुरू किया तो उन्होंने अपने हाथों से लण्ड को अपनी चूत पर तेज़ी से रगड़ देनी शुरू कर दी।
‘उफ्फ… समीर… बस ऐसे ही रगड़ दो अपने लंड को इस चूत पर… साली मुझे चैन से जीने नहीं देती… चोद डालो इस कुतिया को… ठेल दो अपना मूसल!’
यह क्या… रेणुका जी तो एकदम जोश में आकर गालियाँ देने लगी।
चलो उनकी यह अदा भी हमें घायल कर गई और मैं ख़ुशी से झूम उठा…
ख़ुशी के मारे मैंने जोश में एक तगड़ा झटका मारा और मेरा आधा लंड उनकी चूत में…
‘आआआआआ… हे भगवन… इतने बेरहम तो न बनो मेरे सैयाँ… तुम तो सच में फाड़ डालोगे मेरी कमसिन चूत को… उफ्फ्फ्फ़!’ रेणुका की चीख निकल गई।
उनकी चूत ने यह एहसास करवाया कि शायद कई दिनों से या यूँ कहें कि मुद्दतों बाद कोई लंड उस चूत में घुसा हो… शायद अरविन्द जी की बढ़ती उम्र की वजह से उनकी चूत बिना चुदे ही रह जाती है.. शायद इसीलिए उनकी चूत के दर्शन करने में मुझे ज्यादा वक़्त भी नहीं लगा था। शायद इतने दिनों की प्यास और उनकी उनके गदराये बदन की गर्मी ने उन्हें मेरे लंड की तरफ खींच लिया था।
खैर जो भी बात हो, इस वक़्त तो मुझे ऐसा महसूस हो रहा था मानो मेरी कई जन्मों की प्यास बुझ रही हो।
तीन महीनों से अपने लंड को भूखा रखा था मैंने इसलिए आज जी भरके चूत को खाना चाहता था मेरा लंड…
मैंने उसी हालत में अपने आधे लंड को उनकी चूत के अन्दर बाहर करना शुरू किया और थोड़ा इंतज़ार किया ताकि उनकी चूत मेरे मूसल के लिए जगह बन सके और मैं अपने पूरे लंड को उनकी चूत की गहराईयों में उतार सकूँ।
मैंने अपना सर झुका कर उनकी एक चूची को अपने मुँह में भरा और उसके दाने को अपने होंठों और अपनी जीभ से चुभलाते हुए अपने लंड का प्रहार जारी रखा।
चूत में लंड डालते हुए चूचियों की चुसाई औरत को बिल्कुल मस्त कर देती हैं और इस हालत में औरत गधे का लंड भी आसानी से अपनी चूत में पेलवा लेती हैं।
ऐसा मैंने पहले भी देखा और किया था।
इस बार भी वैसा ही हुआ और रेणुका जी की चूचियों को चूसते ही उनकी चूत ने एक बार और पानी छोड़ा और मेरा लंड गीला होकर थोड़ा और अन्दर सरक गया।
अब बारी थी आखिरी प्रहार की… मैंने उनकी चूचियों को मुँह से निकला और अपने होंठों को उनके होंठों पर रख कर उनकी कमर को अपने दोनों हाथों से थाम लिया फिर एक लम्बी सांस लेकर जोरदार झटका मारा।
‘गुऊंन्न्न… ऊउन्ह्ह्ह… ‘ रेणुका जी के मुँह से बस इतना ही निकल सका क्योंकि उनका मुँह मेरे मुँह से बंद पड़ा था।
उनकी इस आवाज़ ने यह इशारा किया की लंड पूरी ताक़त के साथ चूत के अंतिम छोर तक पहुँच चुका था।
-  - 
Reply
09-20-2017, 11:37 AM,
#15
RE: XXX CHUDAI नौकरी के रंग माँ बेटी के संग
मैंने अब बिना देरी किये अपने लंड को सुपारे तक बाहर खींचा और झटके के साथ अन्दर पेल दिया।
‘उफ्फ्फ… उम्म… हाए… समीईईर… थोड़ा धीरे… उफ्फ्फ…!’ रेणुका ने थोड़ा दर्द सहते हुए लड़खड़ाती आवाज़ में कहा और फिर मेरे होंठों को अपने होंठों से कस लिया।
मैंने ऐसे ही कुछ लम्बे लम्बे धक्के लगाये और फिर उन्हें स्लैब से अचानक उठा कर अपनी गोद में उठा लिया।
अब वो हवा में मेरी गोद में लटकी हुई थीं और अपने पैरों को मेरी कमर से लिपट कर मेरा होंठ चूसते हुए अपनी चूत में मेरा लंड पेलवाए जा रही थीं।
बड़ा ही मनोरम दृश्य रहा होगा वो… अगर कोई हमें उस आसन में चुदाई करते देखता तो निश्चय ही अपनी चूत में उंगली या अपने लंड को हिलाए या रगड़े बिना नहीं रह पाता !!
हम दोनों पसीने से लथपथ हो चुके थे और घमासान चुदाई का आनन्द ले रहे थे।
थोड़ी देर के बाद मेरे पैर दुखने लगे तो मैंने उन्हें नीचे उतार दिया।
अचानक से लंड चूत से बाहर निकलने से वो बौखला गईं और मेरी तरफ गुस्से और वासना से भरकर देखने लगी।
मैंने उन्हें कुछ भी कहने का मौका नहीं दिया और उन्हें घुमाकर उनके दोनों हाथों को रसोई के स्लैब पे टिका दिया और उनके पीछे खड़ा हो गया।
एक बार उन्होंने अपनी गर्दन घुमाकर मुझे देखा और मानो ये पूछने लगीं कि अब क्या… 
शायद अरविन्द जी ने उन्हें ऐसे कभी चोदा न हो… मैंने उन्हें झुका कर बिल्कुल घोड़ी बना दिया और फिर उनकी लटकती हुई गाउन को उठा कर उनकी पीठ पर रख दिया जो अब भी उनके बदन पे पड़ा था।
हम इतने उतावले थे की गाउन उतरने में भी वक़्त बर्बाद नहीं करना चाहते थे।
उनकी गाउन उठाते ही उनकी नर्म रेशमी त्वचा वाली विशाल नितम्बों के दर्शन हुए और मुझसे रहा न गया, मैं झुक कर उनके दोनों नितम्बों पे प्यार से ढेर से चुम्बन लिए और फिर अपने लंड को पीछे से उनकी चूत पे सेट करके एक ही झटके में पूरा लंड चूत में उतार दिया।
‘आआईई… ईईईईईयाह… उफ्फ… समीर… ऐसे लग रहा है… जरा धीरे पेलो…!’ अचानक हुए हमले से रेणुका को थोड़ा दर्द महसूस हुआ और उसने हल्के से चीखते हुए कहा।
‘घबराओ मत मेरी रेणुका रानी… बस थोड़ी ही देर में आप जन्नत में पहुँच जाओगी… बस आप आराम से अपनी चुदाई का मज़ा लो।’ मैंने उसे हिम्मत देते हुए कहा और अपने लंड को जड़ तक खींच खींच कर पेलने लगा।
आठ दस झटकों में ही रेणुका जी की चूत ने अपना मुँह खोल दिया और गपागप लंड निगलने लगी।
‘हाँ… ऐसे ही… चोदो समीर… और चोदो… और चोदो… बस चोदते ही रहो… उम्म्म!’ रेणुका ने अब मस्ती में आकर चुदाई की भाषा का इस्तेमाल करना शुरू किया और मस्त होकर अपनी गाण्ड पीछे ठेलते हुए लंड लेना शुरू किया।
‘लो रेणुका जी… जितनी मर्ज़ी उतना लंड खाओ… बस अपनी चूत खोलकर रखो और लंड लेती जाओ।’ मैंने भी जोश में भरकर उन्हें उत्तेजित करके चोदना जारी रखा।
‘और… और… और… जोर से मारो समीर… ठेल दो पूरा लंड को मेरी चूत में… हाँन्न्न्न… ‘ रेणुका अब और भी मस्ती में आ गई और पूरा हिल हिल कर मज़े लेने लगी।
‘यह लो… और लंड लो… चुदती जाओ… अब तो रोज़ तुम्हारी चूत में जायेगा ये लंड… और खा लो।’ मैंने भी उसकी मस्ती का जवाब उतने ही जोश में भरकर पेलते हुए दिया और दनादन चोदने लगा।
लगभग आधे घंटे की चुदाई ने हमें पसीने से भिगो दिया था और अब हम अपनी अपनी मंजिल के करीब पहुँच गए थे।
‘हाँ समीर… और तेज़… और तेज़… और तेज़… अब मैं आ रही हूँ… आ रही हूँ मैं… उम्म्मम्म… और तेज़ करो…’ रेणुका अचानक से थरथराने लगी और अपने बदन को कड़ा करने लगी।
मैं समझ गया कि अब वो अपने चरम पर है और दो तीन धक्कों में ही उसने एक जोरदार चीख मारी।
‘आआह्ह्ह्ह… उम्म्मम्म्ह… समीईईर… उम्म्मम्म… मैं… मैं… गईईईई…ईईई!’ और रेणुका ने अपना बदन बिल्कुल ढीला छोड़ दिया… 
‘उफफ्फ्फ… ओह्ह्ह्ह… मैं भी आया… मैं भी आया…’ और मैंने भी उसके साथ ही एक जोरदार झटका देकर पूरे लंड को जड़ तक उसकी चूत में घोंप दिया और उसकी लटकती चूचियों को पीछे से कस कर दबा दिया और उसकी पीठ पे निढाल हो गया।
उफ्फ्फ… ऐसा लगा मानो कई दिनों से अपने अन्दर कोई दहकता लावा जमा कर रखा था और आज सारा लावा उड़ेल कर पूरा खाली हो गया।
उस छोटी सी रसोई में बस हमारी तेज़ तेज़ साँसें ही सुनाई दे रही थीं।
हम अगले कुछ मिनट तक बिना किसी से कुछ बात किए वैसे ही पड़े रहे और मैं उनकी चूचियों को सहलाता रहा।
थोड़ी देर में मेरा लंड खुद ब खुद उनकी चूत से बाहर निकल आया और उसके बाहर निकलते ही मैंने रेणुका जी को अपनी तरफ घुमाकर अपनी बाँहों में समेट लिया।
थोड़ी देर के बाद हम एक दूसरे के शरीर से अलग हुए और एक दूसरे की आँखों में झाँका। 
रेणुका जी मुझसे नज़रें नहीं मिला पा रही थीं और उन्होंने अपने गाउन को ठीक करना शुरू किया और अपने बदन को ढकने लगीं।
मैंने अपना हाथ आगे बढ़ा कर उनके हाथों को रोका और उनके गाउन को दोनों तरफ से अलग कर दिया।
-  - 
Reply
09-20-2017, 11:38 AM,
#16
RE: XXX CHUDAI नौकरी के रंग माँ बेटी के संग
‘अब क्यूँ छिपा रही हैं आप… अब तो ये मेरे हो चुके हैं… ‘ ऐसा कह कर मैंने उनकी दोनों चूचियों को झुक कर चूम लिया और थोड़ा और झुक कर उनकी चूत जो मेरे लंड और उनके खुद के रस से सराबोर हो चुकी थी उसे चूम लिया और अपनी नज़रें उठा कर उनकी आँखों में देखते हुए अपनी एक आँख मार दी।
‘धत… बदमाश कहीं के !’ रेणुका जी ने ऐसे अंदाज़ में कहा कि मैं घायल ही हो गया।
मैंने उन्हें फिर से गले से लगा लिया।
थोड़ी देर वैसे रहने के बाद हम अलग हुए और मैं उसी हालत में उन्हें लेकर बाथरूम में घुस पड़ा।
हम दोनों के चेहरे पर असीम तृप्ति झलक रही थी।
तो इस तरह मेरा तीन महीनों का उपवास टूटा और एक शुद्ध देसी औरत का स्वाद चखने का मज़ा मिला।
पिछले बीस दिनों में हम दोनों ने मौका निकल कर अब तक सात बार चुदाई का खेल खेला है। जिसमें से पांच बार मेरे घर में और दो बार उनके खुद के घर में उनकी रसोई और उनके स्टोर रूम में।
कुल मिलकर हम बड़े ही मज़े से अपनी अपनी प्यास मिटा रहे हैं और आशा करते हैं कि जब तक यहाँ रहूँगा तब तक ये सब ऐसे ही चलता रहेगा…
रेणुका जी… हम्म्म्म… क्या कहूँ उनके बारे में… थोड़े ही दिनों में उनकी कंचन काया और उनकी कातिल अदाओं ने मुझे उनका दीवाना बना दिया था।
यूँ तो मैं एक खेला खाया मर्द हूँ और कई चूतों का रस पिया है मैंने लेकिन पता नहीं क्यूँ उनकी बात ही कुछ और थी, उनके साथ मस्ती करने करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ता था मैं… जब भी उनके घर जाता तो सबकी नज़रें बचा कर उनकी चूचियों को मसल देता या उनकी चूत को साड़ी के ऊपर से सहला देता और कभी कभी उनकी साड़ी धीरे से उठा कर उनकी मखमली चूत की एक प्यारी सी पप्पी ले लेता!
घर में अरविन्द जी और वंदना के होते हुए भी छुप छुप कर इन हरकतों में हम दोनों को इतना मज़ा आता कि बस पूछो मत… पकड़े जाने का डर हमारी उत्तेजना को और भी बढ़ा देता और हम इस उत्तेजना का पूरा पूरा मज़ा लेते थे।
ऐसे ही बड़े मज़े से हमारी रासलीला चल रही थी और हम दो प्रेमी प्रेम की अविरल धारा में बहते चले जा रहे थे।
एक शाम मैं अपने ऑफिस से लौटा और हमेशा की तरह अपने कपड़े बदल कर कॉफी का मग हाथ में लिए अपने कमरे में बैठा टी.वी। पर कुछ देख रहा था., तभी किसी के आने की आहट सुनाई दी।
इससे पहले कि मैं उठ कर देखता, आने वाले के क़दमों की आहट और भी साफ़ सुनाई देने लगी और एक साया मेरे बेडरूम के दरवाज़े पर आकर रुक गया, एक भीनी सी खुशबू ने मेरा ध्यान उसकी तरफ खींचा और मैंने नज़रें उठाई तो बस देखता ही रह गया… 
सामने वंदना बहुत ही खूबसूरत से लिबास में बिल्कुल सजी संवरी सी मुस्कुराती हुई खड़ी थी। शायद उसने कोई बहुत ही बढ़िया सा परफ्यूम इस्तेमाल किया था जिसकी भीनी भीनी सी खुशबू मेरे पूरे कमरे में फ़ैल गई थी। उसे देख कर ऐसा लग रहा था जैसे वो किसी पार्टी में जाने के लिए तैयार हुई हो… 
मैं एकटक उसे देखता ही रहा, मेरी नज़रें उसे ऊपर से नीचे तक निहारने लगीं, यूँ तो मैंने उसे कई बार देखा था लेकिन आज कुछ और बात थी… उसके गोर गोरे गाल और सुर्ख गुलाबी होठों को देखकर मेरे होंठ सूखने लगे… ज़रा सा नज़रें नीचे हुई तो सहसा ही मेरा मुँह खुला का खुला रह गया… 
उफ्फ्फ्फ़… आज तो उसके सीने के उभार यूँ लग रहे थे मानो हिमालय और कंचनजंगा दोनों पर्वत एक साथ मुझे अपनी ओर खींच रहे हों… उसकी मस्त चूचियों को कभी छुआ तो नहीं था लेकिन इतना अनुभव हो चुका है कि किसी की चूचियाँ देखकर उनका सही आकार और सही नाप बता सकूँ… वंदना की चूचियाँ 32 की थीं न एक इंच ज्यादा न एक इंच कम, लेकिन 32 की होकर भी उन चूचियों में आज इतना उभार था मानो अपनी माँ की चूचियों से मुकाबला कर रही हों!
मेरी नज़रें उसकी चूचियों पे यूँ टिक गई थीं जैसे किसी ने फेविकोल लगा दिया हो।
‘क्यूँ जनाब, क्या हो रहा है?’ वन्दना की प्रश्नवाचक आवाज़ ने मुझे डरा दिया।
‘क… क.। कुछ भी तो नहीं !’ मानो मेरी चोरी पकड़ी गई हो और उसने सीधे सीधे मुझसे उसकी चूचियों को घूरने के बारे में पूछ लिया हो।
नज़रें ऊपर उठाईं तो देखा कि वो शरारत भरे अंदाज़ में मुस्कुरा रही थी।
-  - 
Reply
09-20-2017, 11:38 AM,
#17
RE: XXX CHUDAI नौकरी के रंग माँ बेटी के संग
‘अरे इतना घबरा क्यूँ रहे हैं आप, मैंने तो यह पूछा कि आजकल आप नज़र ही नहीं आते हैं, आखिर कहाँ व्यस्त हैं आजकल?’ अपने हाथों को अपने सीने के इर्द गिर्द बांधते हुए उसने ऐसे पूछा जैसे कोई शिक्षक अपने छात्र से सवाल कर रहा हो।
हाय उसकी ये अदा… अब उसे कैसे समझाता कि आजकल मैं उसकी माँ की गुलामी कर रहा हूँ और उसके हुस्न के समुन्दर में डुबकियाँ लगा रहा हूँ।
‘अरे ऐसी कोई बात नहीं है… बस आजकल ऑफिस के काम से थोड़ा ज्यादा व्यस्त रहने लगा हूँ।’ मैंने अपने मन को नियंत्रित करते हुए जवाब दिया।
‘ह्म्म्म… तभी तो आजकल आपके पास हमारे लिए समय ही नहीं होता वरना यूँ इतने दिनों के बाद घूर घूर कर देखने की जरूरत नहीं पड़ती, मानो कभी देखा ही ना हो!’ अपने हाथों को खोलते हुए अपनी चूचियों को एक बार और उभारते हुए उसने एक लम्बी सांस के साथ मेरी नज़रों में झाँका।
हे भगवान्… इस लड़की को तो मैं बहुत सीधी-साधी समझता था… लेकिन यह तो मुझे कुछ और ही रूप दिखा रही थी, एक तरफ उसकी माँ थी जो मुझसे इतना चुदवाने के बाद भी शर्माती थी और एक यह है जो सामने से मुझ पर डोरे डाल रही थी।
हुस्न भी कैसे कैसे रूप दिखता है… 
खैर जो भी हो, मैंने स्थिति को सँभालते हुए पूछा- चलो मैंने अपनी गलती स्वीकार की… मुझे माफ़ कर दो और यह बताओ कि आज आपको हमारी याद कैसे आ गई?
‘अजी हम तो आपको हमेशा ही याद करते रहते हैं, फिलहाल आपको हमारे पिता जी ने याद किया है।’ उसने मेरी तरफ एकटक देखते हुए कहा, उसकी नज़रों में एक शरारत भरी थी।
अचानक से यह सुनकर मैं थोड़ा चौंक गया कि आखिर ऐसी क्या जरूरत हो गई जो अरविन्द भैया ने मुझे याद किया है.. कहीं उन्हें कोई शक तो नहीं हो गया… कहीं रेणुका और मेरी चोरी पकड़ी तो नहीं गई?
वंदना के हाव-भाव से ऐसा कुछ लग तो नहीं रहा था लेकिन क्या करें… मन में चोर हो तो हर चीज़ मन में शक पैदा करती है।
‘जाना जरूरी है क्या… अरविन्द भैया की तबियत ठीक तो है… बात क्या है कुछ बताओ तो सही?’ एक सांस में ही कई सवाल पूछ लिए मैंने।
‘उफ्फ्फ… कितने सवाल करते हैं आप… आप खुद चलिए और पूछ लीजिये।’ मुँह बनाते हुए वंदना ने कहा और मुझे अपने साथ चलने का इशारा किया।
उस वक़्त मैं बस एक छोटे से शॉर्ट्स और टी-शर्ट में था इसलिए मैं उठा और वंदना से कहा कि वो जाए, मैं अभी कपड़े बदल कर आता हूँ।
‘अरे आप ऐसे ही सेक्सी लग रहे हो…’ वंदना ने एक आँख मरते हुए शरारती अंदाज़ में कहा और खिलखिलाकर हंस पड़ी।
‘बदमाश… बिगड़ गई हैं आप… लगता है आपकी शिकायत करनी पड़ेगी आपके पापा से..’ मैंने उसके कान पकड़ कर धीरे से मरोड़ दिया।
‘पापा बचाओ… ‘ वंदना अपना कान छुड़ा कर हंसती हुई अपने घर की ओर भाग गई।
मैं उसकी शरारत पर मुस्कुराता हुआ अपने घर से बाहर निकला और उनके यहाँ पहुँच गया।
अन्दर अरविन्द जी और रेणुका जी सोफे पे बैठे चाय की चुस्कियाँ ले रहे थे, वंदना अपने कमरे में थी शायद!
‘नमस्ते भैया… नमस्ते भाभी..’ मैंने दोनों का अभिवादन किया और मुस्कुराता हुआ उनके बगल में पहुँच गया।
‘अरे आइये समीर जी… बैठिये… आजकल तो आपसे मुलाकात ही नहीं होती…’ अरविन्द भैया ने मुस्कुराते हुए मुझे बैठने का इशारा किया।
मैंने एक नज़र उठा कर रेणुका की तरफ देखा जो मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी। उसकी मुस्कराहट ने मुझे यकीन दिला दिया कि मैं जिस बात से डर रहा था वैसा कुछ भी नहीं है और मुझे डरने की कोई जरूरत नहीं है।
मेरे बैठते ही रेणुका भाभी सोफे से उठी और सीधे किचन में मेरे लिए चाय लेने चली गईं… आज वो मेरी फेवरेट मैरून रंग की सिल्क की नाइटी में थीं। शाम के वक़्त वो अमूमन अपने घर पे इसी तरह की ड्रेस पहना करती थीं। उनके जाते वक़्त सिल्क में लिपटी उनकी जानलेवा काया और उनके मस्त गोल पिछवाड़े को देखे बिना रह नहीं सकता था तो बरबस मेरी आँखें उनके मटकते हुए पिछवाड़े पे चली गईं…
-  - 
Reply
09-20-2017, 11:38 AM,
#18
RE: XXX CHUDAI नौकरी के रंग माँ बेटी के संग
उफ्फ्फ्फ़… यह विशाल पिछवाडा मेरी कमजोरी बनती जा रही थीं… दीवाना हो गया था मैं उनका!
तभी मुझे ख्याल आया कि मैं एक औरत के मादक शरीर को वासना भरी नज़रों से घूर रहा हूँ जिसका पति मेरे सामने मेरे साथ बैठा है। 
‘हे भगवन… वासना भी इंसान को बिल्कुल अँधा बना देता है…’ मेरे मन में यह विचार आया और मैंने झट से अपनी नज़रें हटा ली और अरविन्द भैया की तरफ देखने लगा।
तभी वंदना अपने कमरे से बाहर आई और मेरे साथ में सोफे पर बैठ गई।
रेणुका भाभी भी सामने से हाथ में चाय का कप लेकर आईं और मुझे देते हुए वापस अपनी जगह पे बैठ गईं।
‘आपने मुझे याद किया भैया… कहिये क्या कर सकता हूँ मै आपके लिए?’ मैंने चाय कि चुस्की लेते हुए अरविन्द भैया से पूछा..
‘भाई समीर, आपको एक कष्ट दे रहा हूँ…’ अरविन्द भैया मेरी तरफ देखते हुए बोले।
‘अरे नहीं भैया, इसमें कष्ट की क्या बात है.. आप आदेश करें!’ मैंने शालीनता से एक अच्छे पड़ोसी की तरह उनसे कहा।
‘दरअसल बात यह है समीर जी कि वंदना की एक सहेली का आज जन्मदिन है और उसे उसके यहाँ जाना है… और आपको तो पता ही है कि वो कितनी जिद्दी है… बिना जाए मानेगी नहीं। मेरी तबियत कुछ ठीक नहीं है और मैं उसके साथ जा नहीं सकता। इसलिए हम सबने ये विचार किया कि वंदना को आपके साथ भेज दें। आपका भी मन बहल जायेगा और आपके वंदन के साथ होने से हमारी चिंता भी ख़त्म हो जाएगी।’ अरविन्द भैया ने बड़े ही अपनेपन और आत्मीयता के साथ मुझसे आग्रह किया।
मैंने उनकी बातें सुनकर एक बार रेणुका की तरफ देखा और फिर एक बार वंदन की तरफ देखा… दोनों यूँ मुस्कुरा रही थीं मानो इस बात से दोनों बहुत खुश थीं।
वंदना की ख़ुशी मैं समझ सकता था लेकिन रेणुका की आँखों में एक अजीब सी चमक थी जिसे देख कर मैं थोड़ा परेशान हुआ।
अरविन्द भैया को देख कर ऐसा लग नहीं रहा था कि उनकी तबीयत ख़राब है बल्कि ऐसा लग रहा था जैसे वो आज कुछ ज्यादा ही खुश थे।
मेरे शैतानी दिमाग में तुरन्त यह बात आई कि हो सकता है आज अरविन्द भैया की जवानी जाग गई हो और आज वंदना को बाहर भेज कर रेणुका के साथ जबरदस्त चुदाई का खेल खेलने की योजना बनाई हो!
खैर मुझे क्या… रेणुका बीवी थी उनकी, वो नहीं चोदेगा तो और कौन चोदेगा… पर पता नहीं क्यूँ ये विचार आते ही मेरे मन में एक अजीब सा दर्द उभर आया था… रेणुका के साथ इतने दिनों से चोदा-चोदी का खेल खेलते-खेलते शायद मैं उसे अपनी संपत्ति समझने लगा था और यह सोच कर दुखी हो रहा था कि मेरी रेणुका के मखमली और रसीले चूत में कोई और अपना लंड पेलेगा…
हे भगवन, यह मुझे क्या हो रहा था… मेरे साथ ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था… न जाने कितनी ही औरतों और लड़कियों के साथ मैं चुदाई का खेल खेला था लेकिन कभी भी किसी के साथ यों मानसिक तौर पे जुड़ा नहीं था…
इसी उधेड़बुन में मैं खो सा गया था कि तभी अरविन्द भैया की आवाज़ ने मेरी तन्द्रा तोड़ी।
‘क्या हुआ समीर जी… कोई परेशानी है क्या?’ अरविन्द भैया ने मेरी तरफ देखते हुए प्रश्नवाचक शब्दों में पूछा।
‘अरे नहीं भैया जी… ऐसी कोई बात नहीं है… वो बस ज़रा सा ऑफिस का काम था उसे पूरा करना था इसलिए कुछ सोच रहा था।’ मैंने थोड़ा सा परेशान होते हुए कहा।
मेरी बात सुनकर वहाँ बैठे हर इंसान का चेहरा बन गया… सबसे ज्यादा वंदना का.. मानो अभी रो पड़ेगी।
-  - 
Reply
09-20-2017, 11:38 AM,
#19
RE: XXX CHUDAI नौकरी के रंग माँ बेटी के संग
उन सबकी शक्लें देखकर मुझे खुद बुरा लगने लगा… हालाँकि मुझे कोई भी काम नहीं था और मैं बस वंदना को टालने के लिए ऐसा कह रहा था… और कहीं न कहीं मेरे दिमाग में रेणुका का अपने पति के साथ अकेले होने का एहसास मुझे बुरा लग रहा था।
मैंने अपने आपको समझाया और सोचा कि मैं बेकार में ही दुखी हो रहा हूँ और अपनी वजह से सबको दुखी कर रहा हूँ। मुझे वंदना के साथ जाना चाहिए और शायद वहाँ जाकर मस्ती के माहौल में मेरा भी दिल बहल जायेगा और जितने भी बुरे विचार मन में आ रहे थे उनसे मुक्ति मिल जाएगी।
मैंने माहौल को बेहतर करने के लिए जोर का ठहाका लगाया- …हा हा हा… अरे भाई इतने सीरियस मत होइए आप सब… मैं तो बस मजाक कर रहा था और वंदना को चिढ़ा रहा था।
मैंने अपने चेहरे के भावों को बदलते हुए कहा।
‘हा हा हा… हा हा हा… … आप भी न समीर जी… आपने तो डरा ही दिया था।’ अरविन्द भैया ने भी जोर का ठहाका लगाया।
सब लोग वंदना की तरफ देख कर जोर जोर से हंसने लगे।
लेकिन रेणुका की आँखों ने मेरी हंसी के पीछे छिपी चिंता और परेशानी को भांप लिया था जिसका एहसास मुझे उसकी आँखों में झांक कर हुआ लेकिन उसने भी उस ठहाकों में पूरा साथ दिया।
वंदना तो थी ही चंचल और शोख़… मेरे मजाक करने और सबके हसने की वजह से उसने मेरी जांघ में जोर से चिकोटी काट ली।
उसकी इस हरकत से मेरे हाथों से चाय का कप मेरे जांघों के ऊपर गिर पड़ा।
‘ओह… वंदना यह क्या किया… तुम्हें ज़रा भी अक्ल नहीं है?’ अचानक से अरविन्द भैया ने वंदना को डांटते हुए कहा।
‘ओफ्फो… यह लड़की कब बड़ी होगी… हमेशा बच्चों की तरह हरकतें करती रहती है।’ अब रेणुका ने भी अरविन्द भैया का साथ दिया।
चाय इतनी भी गर्म नहीं थी और शुक्र था कि चाय मेरे शॉर्ट्स पे गिरी थी… लेकिन शॉर्ट्स भी छोटी थी इसलिए मेरी जाँघों का कुछ भाग भी थोड़ा सा जल गया था।
मैं सोफे से उठ खड़ा हुआ- अरे आप लोग इसे क्यूँ डांट रहे हैं… ये तो बस ऐसे ही गिर गया… और हमने इसका मजाक भी उड़ा दिया इसलिए सजा तो मिलनी ही थी… आप घबराएँ नहीं… चाय गर्म नहीं थी…
मैंने हंसते हुए सबसे कहा।
‘समीर जी आप जल्दी से बाथरूम में जाइये और पानी से धो लीजिये… वरना शायद फफोले उठ जाएँ…’ इस बार रेणुका ने चिंता भरे लफ़्ज़ों में मेरी तरफ देखते हुए कहा।
उसकी आँखों में सचमुच परेशानी साफ़ साफ़ दिख रही थी।
‘हाँ हाँ समीर, जाइये और इसे धो लीजिये…’ अरविन्द भैया ने भी जोर देते हुए कहा।
‘अरे कोई बात नहीं भैया… मैं अपने कमरे पे जा ही रहा हूँ वहीँ साफ़ कर लूँगा और तैयार भी हो जाऊंगा.. अब अगर वंदना के साथ नहीं गया तो पता नहीं और क्या क्या सजाएँ भुगतनी पड़ेंगी।’ मैंने वंदना की तरफ देख कर झूठ मूठ का डरने का नाटक करते हुए कहा।
मेरी बात सुनकर फिर से सब हंसने लगे।
‘ह्म्म्म… बिल्कुल सही कहा आपने.. अब जल्दी से तैयार हो जाइये.. हम पहले ही बहुत लेट हो चुके हैं।’ इस बार वंदना ने शरारत भरे अंदाज़ में मुस्कुराते हुए कहा और हम सबने एक बार फिर से ठहाके लगाये और मैं अपने घर की तरफ निकल पड़ा।
-  - 
Reply
09-20-2017, 11:38 AM,
#20
RE: XXX CHUDAI नौकरी के रंग माँ बेटी के संग
वैसे तो चाय ठण्डी थी लेकिन इतनी भी ठण्डी नहीं थी, मेरी जाँघों में जलन हो रही थी।
मैं भागकर सीधा अपने बाथरूम में घुसा और पानी का नलका खोलकर अपने जांघों को धोने लगा।
यह अच्छा था कि मैंने शॉर्ट्स के अन्दर जॉकी पहन रखी थी जिसकी वजह से मेरे पप्पू तक चाय की गर्माहट नहीं पहुँची थी वरना पता नहीं क्या होता.. यूँ तो गरमागरम चूतों का दीवान होता है लण्ड, लेकिन अगर शांत अवस्था में कोई गरम चीज़ गिर जाए तो लौड़े की माँ बहन हो जाती है…
खैर, अब मैंने अपना शॉर्ट्स उतार दिया और सिर्फ जॉकी में अपने पैरों और जांघों को धोने लगा।
जब मैं अपने घर में घुसा था तो हड़बड़ाहट की वजह से न तो बाहर का दरवाज़ा बंद किया था न ही बाथरूम का… जिसका अंजाम यह हुआ कि जैसे ही मैं अपनी जाँघों को धोकर मुड़ा, मैं चौंक गया…
सामने वंदना बाथरूम के दरवाज़े पे खड़ी अपनी लाल लाल आँखें लिए हुए मुझे घूर रही थी।
‘अरे तुम कब आईं?’ मैंने उसे देखते ही अपने हाथों से बाथरूम में पड़ा तौलिया खींचा और अपने कमर पे लपेटते हुए उसकी तरफ बढ़ा।
‘बस अभी अभी आई… वो मम्मी ने यह जेल भेजा है…!’ वंदना ने अपनी आँखें चुराते हुए कहा और मुड़ कर बाथरूम के दरवाज़े से सरकती हुई दूसरे कमरे की तरफ बढ़ गई।
‘अरे इसकी कोई जरूरत नहीं है… बस थोड़ी सी जलन है ठीक हो जायेगा।’ मैं भी उसके पीछे पीछे तौलिया लपेटे बढ़ गया।
बाथरूम के ठीक बगल में मेरा सोने का कमरा था, वंदना सर झुकाए बिस्तर के बगल में रखे कुर्सी पर बैठ गई। ऐसा लग रहा था मानो वो अपराध-बोध से शर्मिंदा हुए जा रही थी।
इतनी चंचल और शरारती लड़की को यूँ सर झुकाए देखना मुझे अच्छा नहीं लगा और मैं उसके पास जाकर खड़ा हो गया।
‘अरे वंदना जी… अब इतना भी उदास होने की जरूरत नहीं है। तुमने कोई जान बुझ कर तो चाय नहीं गिराई न.. वो बस ऐसे ही गिर गई, इसमें उदास होने वाली क्या बात है?’ मैंने उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा।
मेरी बात सुनकर उसने अपना सर उठाया और जब मेरी नज़र उसकी नज़र से मिली तो मेरा दिल बैठ सा गया। उसकी आँखों में आंसू थे। उसकी हिरनी जैसी बड़ी बड़ी खूबसूरत आँखें आँसुओं से डबडबा गई थीं।
एक पल को मैं हैरान सा हो गया… उसकी आँखों के पानी ने मेरी जलन से मेरा ध्यान हटा दिया था.. अब मुझे बुरा लगने लगा।
‘ओफ्फो… अब इसमें रोने की क्या बात है?’ मैंने उसका चेहरा अपनी दोनों हथेलियों में भरा और उसकी आँखों में आँखें डालकर उसे चुप कराने की कोशिश की।
लेकिन जैसे ही मैंने उसका चेहरा पकड़ कर अपनी तरफ किया, वैसे ही उसकी आँखों ने आँसुओं के दो मोती छलका दिए जो सीधे मेरे हाथों में गिरे।
मैंने जल्दी से अपने हाथों से उसके आँसू पौंछे और उसके माथे पर एक प्यार भरा चुम्बन दे दिया।
‘बेवक़ूफ़… ऐसे छोटी छोटी बात पर कोई रोता है क्या?’ मैंने उसे चुप कराते हुए कहा।
‘मुझे माफ़ कर दीजिये समीर जी… मैंने गुस्से में आपको तकलीफ दे दी।’ वंदना ने रुंधे हुए गले से कहा और एक बार फिर उसकी आँखों से आंसू छलक पड़े।
उफ़… उसकी इस बात पे इतना प्यार आया कि दिल किया उसे गले से लगा कर सारा दर्द अपने अन्दर समेट लूँ… आज वंदना की इस हालत ने मुझे उसकी तरफ खींच लिया था।
‘अब चुप हो जाओ और चलने की तैयारी करो, मैं बस थोड़ी देर में आया!’ इतना कह कर मैंने उसे उठाया और अपने घर जाने के लिए कहा।
‘नहीं, पहले आप कहो कि आपने मुझे माफ़ कर दिया… तभी जाऊँगी मैं वरना मुझे कहीं नहीं जाना…’ अपने आँसू पोंछते हुए उसने अधिकारपूर्ण शब्दों में कहा और मेरे दोनों हाथ पकड़ लिए।
‘अरे बाबा, तुमने कोई गलती की ही नहीं तो फिर माफ़ी किस बात की? ये सब तो होता रहता है।’ मैंने उसे फिर से समझाते हुए कहा।
‘नहीं, मैं कुछ नहीं जानती.. अगर आपने मुझे माफ़ नहीं किया तो मैं फिर आपसे कभी बात नहीं करूँगी।’ उसने इतनी अदा से कहा कि बस मेरा दिल प्यार से भर गया..
-  - 
Reply


Possibly Related Threads...
Thread Author Replies Views Last Post
  Free Sex Kahani काला इश्क़! kw8890 76 86,249 Yesterday, 08:18 PM
Last Post: kw8890
  Dost Ne Kiya Meri Behan ki Chudai ki desiaks 3 17,811 Yesterday, 05:59 PM
Last Post: Didi ka chodu
  XXX Kahani एक भाई ऐसा भी sexstories 69 508,090 Yesterday, 05:49 PM
Last Post: Didi ka chodu
Star Incest Porn Kahani दीवानगी (इन्सेस्ट) sexstories 41 111,756 Yesterday, 03:46 PM
Last Post: Didi ka chodu
Thumbs Up Gandi kahani कविता भार्गव की अजीब दास्ताँ sexstories 19 12,557 11-13-2019, 12:08 PM
Last Post: sexstories
Star Maa Sex Kahani माँ-बेटा:-एक सच्ची घटना sexstories 102 249,964 11-10-2019, 06:55 PM
Last Post: lovelylover
Star Adult kahani पाप पुण्य sexstories 205 444,292 11-10-2019, 04:59 PM
Last Post: Didi ka chodu
Shocked Antarvasna चुदने को बेताब पड़ोसन sexstories 24 26,097 11-09-2019, 11:56 AM
Last Post: sexstories
Thumbs Up bahan sex kahani बहन की कुँवारी चूत का उद्घाटन sexstories 45 183,354 11-07-2019, 09:08 PM
Last Post: Didi ka chodu
Star Antarvasna तूने मेरे जाना,कभी नही जाना sexstories 31 79,909 11-07-2019, 09:27 AM
Last Post: raj_jsr99

Forum Jump:


Users browsing this thread: 1 Guest(s)
This forum uses MyBB addons.

Online porn video at mobile phone


मद मस्त सुहागरात गन्दी गालियों की वीडियो फ्री Xxx Indian bhabhi Kapda chanjegकपङा खोल के पेले वाला Bfsexy film janvaron ke sath sexy sexy badhiya badhiya sexy mote mote chalne layak chalegidard horaha hai xnxxx mujhr choro bfपिठ XXX PUNJABI PHOTOmai apani uncle se raat me chudbai jaan bujhkar suhagraat baccha chutad matka choothttps://xbombo.com/video/नौकरानी-को-पसंद-आया-मालिक-2/धत बेशरम , बहनों से ऐसे थोड़े ही कहते है hot storyaunte ke sex kamnatarak mehta ka ulta chashma sex story sex baba.netपुची मोठी करायची xxx vedeosSexbabanetcombete ke dost se sex karnaparaक्सक्सक्स स्टोरी दीदी बेहोस हो गई ब्लड आ आ आ गया ट्रक ड्राइवर ने ऐसा छोड़ाGenelia ki nangi photo bhejolAWDA BDBA SICWYचुडक्कड़ परिवार मैंने देख लिया सेक्सी स्टोरीxxx pandit ji forcesexyChaki malavika sexpotosbachho ne khelte khelte ek ladki ko camare me choda video.xnxx comdase nidhi bhanushali sax baba comagar aurat muhme lund lenese inkar kare to usse muhme lund lene k liye kaise samjaye?सेक्सी लुगाइयों को गुस्सा करता है उसके सेक्सी भेजोबहुत ज्यादा चुदवाती भोसड़ी की तेरी चोली फाड़ दूंगा आज हिंदी आवाज के साथ सेक्सी वीडियोसननद की चुत की ट्रेनिंग 5bahansexkahanixxxबुला भाभीअसल चाळे चाचीmut pilaya tatthi khilai jawan banane ke banane bahan ko choda hindi sex storykamapisachi bolywod heroin photo sexbaba.com page 37didi ne apana pisab pilaya aur tatty khilae kahaniNangi sek kahani ek anokha bandhan part 8अधखिली चूत का भोगXxx didi ne nipal ka khir khilaya story opan pusi emez.comAR Sex baba xossip nudeKAMVASNA HINDI NEW KAHANI PHOTO IMAGING PYASI JAWANI TADAPTI BADAN K AAG KO THANDA KARNAI KEsabiya ki mast chudai kahaniGorichut kala land sexbabs.netfudakte boor sex hindi kahaniन्यू गे सेक्स कहान रेल गाडी मै केसे गाड मारीGf k bur m anguli dalalna kahanimaadak aurat sex baba kahaniodia all jangalme chudaei www.x nxxxjangali kabila adiwasi ke sex chudai ki parampara khani hindi meमाँ बच चे को दुध पिला रही तभी ससुर ने दुध पीना सुरू करा साकसी कहानीयाsexbabasexstoriesपापा के बडे लंड से गरभ ठहराmajdkoru ke majboori ke sexy kahaneyaBahi bahn xxx kahniya teranmenangi nude disha sex babaलाडू सेक्सबाबासुबह करते थे सत्संग व रात को करते थे ये काम Sex xxxtelgu actar krte sures sex imegIndian desi girls park ke pichesexy videosरजनीकीबलूपचरेsexi dehati rep karane chikhanasonakshi sinha real sexbaba new blowjobmeri chodasi behanain incestनंनद Sex कानियाHirwain ne chodawaya comdam lagawa ke xxx video 2min kehostel sex video hindi dhaga gle me pahni huyi girlkarina kapoor fucking stori hindhi mainpadosi ldke ko apni matkti gand dikha kr ready kiyaरैप पेल दिया पेट मे बचा सेकसी कहानी पढने के लिए आडियोमेरी लुल्लीbarathaxxxMalaika Arora Khan ki chudai video meinxxx.commeri bivi bani pron satr chay chodai ger mard seharami लाला साहूकार की चुदाई की हिंदी कहानी rajsharma की हिंदी कहानी लंबाtaet.gand.marwaneki.sex.videoxxx up petiko .comराशि खन्ना चुत इमेज संग्ग्स हदshriya saran ki chudai photos saphNurshat brusha sex photo xxx sexbabanet.बुआ की चुदाई हाय मार डालाsindur maga me bhara sexy Kahani sexbaba netbachapanme mamine dudh apana pilake chodana shikhaya